Tag: Russia-Ukraine war

  • कीव पर रूस का बड़ा हमला: ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, 4 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

    कीव पर रूस का बड़ा हमला: ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, 4 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

    नई दिल्ली(New Delhi)।
    यूक्रेन की राजधानी कीव एक बार फिर रूस के भीषण मिसाइल और ड्रोन हमलों से दहल उठी। शनिवार और रविवार की दरमियानी रात हुए इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 80 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। लगातार सायरन बजते रहे और पूरे शहर में धुएं का गुबार देखा गया, जिससे हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस ने इस हमले में ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया है। यह वही मिसाइल है जो परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम मानी जाती है। जेलेंस्की के अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा जिले में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

    यह तीसरी बार है जब रूस ने इस अत्याधुनिक ओरेशनिक मिसाइल का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया है। इससे पहले नवंबर 2024 में निप्रो शहर और जनवरी में लवीव क्षेत्र पर इसी तरह के हमले किए जा चुके हैं।

    रूसी हमले के जवाब में यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार की गई, जिससे कीव के कई सरकारी दफ्तर, आवासीय इमारतें, स्कूल और गोदाम क्षतिग्रस्त हो गए। कीव के सैन्य प्रशासन प्रमुख के अनुसार, शहर के कम से कम नौ जिलों में नुकसान दर्ज किया गया है।

    मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शेवचेंको जिले में एक स्कूल भवन पर भी हमला हुआ, जहां लोग शरण लिए हुए थे। वहीं कई सुपरमार्केट और औद्योगिक गोदाम भी इस हमले की चपेट में आ गए।

    विशेषज्ञों के अनुसार, ओरेशनिक मिसाइल रूस की सबसे खतरनाक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से लक्ष्य पर हमला कर सकती है। इसकी क्षमता इतनी अधिक है कि यह जमीन के नीचे कई मंजिल गहराई में बने बंकरों को भी नष्ट करने में सक्षम मानी जाती है। इसकी मारक क्षमता करीब 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह परमाणु हमले के लिहाज से भी बेहद खतरनाक हथियार बन जाती है।

    कीव पर हुए इस हमले के बाद एक बार फिर रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव चरम पर पहुंच गया है और आगे और बड़े हमलों की आशंका जताई जा रही है।

  • कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत

    कीव पर पुतिन का ‘ब्रह्मास्त्र’ हमला: रूस की ओरेशनिक हाइपरसोनिक मिसाइल से दहला यूक्रेन, दर्जनों हताहत




    नई दिल्ली(New Delhi)।
    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर भारी तनाव देखने को मिला है, जब शनिवार और रविवार की दरमियानी रात रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से बड़ा हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत और 80 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई है। पूरे शहर में रातभर हवाई हमले के सायरन गूंजते रहे और कई इलाकों में धुएं का गुबार देखा गया।

    यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि इस हमले में रूस ने ओरेशनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, यह हमला कीव क्षेत्र के बिला त्सेर्कवा इलाके में किया गया, हालांकि लक्ष्य को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। यह इस मिसाइल का युद्ध में तीसरा उपयोग बताया जा रहा है।

    स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कीव के कम से कम नौ जिलों में आवासीय भवनों, स्कूलों, सुपरमार्केट और गोदामों को नुकसान पहुंचा है। मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि एक स्कूल इमारत भी प्रभावित हुई, जहां लोग शरण लिए हुए थे। कई जगहों पर रिहायशी इलाकों में भारी तबाही की खबर है।

    रूस ने यह हमला यूक्रेन के ड्रोन हमलों के जवाब में किया है। हमले के दौरान राजधानी कीव के मध्य इलाकों सहित कई हिस्सों में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रहे, जिससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ।

    ओरेशनिक मिसाइल रूस की अत्याधुनिक हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है, जो मैक 10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज गति से उड़ान भरने में सक्षम है। यह मिसाइल परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है और इसे गहरे बंकरों और मजबूत सैन्य ढांचों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया बताया जाता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 5500 किलोमीटर तक बताई जाती है।

    जानकारों के मुताबिक, इस तरह की मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की दिशा और तीव्रता दोनों को और ज्यादा खतरनाक बना देता है। इससे रूस-यूक्रेन युद्ध में तनाव एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।

  • यूरोप में हड़कंप, यूक्रेन के ड्रोन रूस की तकनीक से भटककर NATO सीमा तक पहुंचे

    यूरोप में हड़कंप, यूक्रेन के ड्रोन रूस की तकनीक से भटककर NATO सीमा तक पहुंचे

    नई दिल्ली । रूस-यूक्रेन युद्ध में अब तकनीक का नया और खतरनाक अध्याय जुड़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार रूस ने एक ऐसी रणनीति अपनाई है जिसमें यूक्रेन के ड्रोन को हवा में ही नियंत्रित या भटकाने की कोशिश की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में GPS जैमिंग और स्पूफिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया जा रहा है, जिससे युद्ध का स्वरूप और अधिक जटिल और तकनीक-आधारित होता जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक रूस द्वारा यूक्रेनी ड्रोन के नेविगेशन सिस्टम को बाधित किया जाता है, जिससे वे अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। इसके बाद नकली GPS सिग्नल भेजकर उन्हें गलत दिशा में मोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में कई बार ड्रोन अपने तय लक्ष्य की बजाय दूसरी दिशा में उड़ते हुए NATO देशों की सीमा तक पहुंच जाते हैं या फिर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।

    हाल ही में लिथुआनिया की राजधानी विल्नियस में अचानक हवाई सुरक्षा अलर्ट जारी होने के बाद स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई। वहां राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया, उड़ान सेवाएं रोक दी गईं और कई क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया। बाद में यह सामने आया कि आसमान में देखे गए ड्रोन यूक्रेन के थे, लेकिन उनके मार्ग में बदलाव होने के कारण वे नाटो सीमा के पास पहुंच गए थे।

    इस घटना के बाद यूरोप में सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं। लातविया, एस्टोनिया और फिनलैंड जैसे नाटो देशों में भी पहले ड्रोन से जुड़े ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। कुछ घटनाओं में ड्रोन महत्वपूर्ण ठिकानों के पास पाए गए, जिससे सुरक्षा एजेंसियां लगातार अलर्ट मोड में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बल्कि पूरे यूरोप की सामरिक स्थिरता के लिए चुनौती बनती जा रही है।

    रिपोर्टों के अनुसार रूस की इस रणनीति का उद्देश्य सीधे हमले के बजाय तकनीकी दबाव बनाना और दुश्मन की ड्रोन आधारित युद्ध क्षमता को कमजोर करना माना जा रहा है। यूक्रेन की ओर से जिन ड्रोन का इस्तेमाल रूस के खिलाफ किया जा रहा था, अब वही तकनीक रूस द्वारा बाधित किए जाने से यूक्रेन की रणनीति पर भी असर पड़ रहा है।

    यूक्रेन के लिए ड्रोन युद्ध एक महत्वपूर्ण हथियार बन चुका है, जो कम लागत में गहरे और सटीक हमले करने में सक्षम है। लेकिन अब GPS आधारित सिस्टम पर बढ़ते खतरे के चलते यूक्रेन नई तकनीकों की ओर बढ़ रहा है। इसमें फाइबर ऑप्टिक ड्रोन और AI आधारित नेविगेशन सिस्टम शामिल हैं, जो GPS पर निर्भर नहीं रहते।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तकनीकी प्रभुत्व ही सबसे बड़ा हथियार बन जाएगा। ड्रोन युद्ध, साइबर हमले और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग जैसी तकनीकें वैश्विक सुरक्षा समीकरणों को पूरी तरह बदल रही हैं।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने NATO देशों की चिंता बढ़ा दी है और यूरोप में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए गए हैं।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध पर पुतिन का बड़ा संकेत, बोले- जंग अंत के करीब; जेलेंस्की से बातचीत के लिए भी छोड़े दरवाजे खुले

    रूस-यूक्रेन युद्ध पर पुतिन का बड़ा संकेत, बोले- जंग अंत के करीब; जेलेंस्की से बातचीत के लिए भी छोड़े दरवाजे खुले



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध  को लेकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन  ने बड़ा बयान दिया है। पुतिन ने संकेत दिए हैं कि तीन साल से ज्यादा समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि यदि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बातचीत करना चाहते हैं तो मॉस्को आने का रास्ता खुला है।

    मीडिया से बातचीत में पुतिन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने जेलेंस्की के साथ किसी औपचारिक बैठक का प्रस्ताव नहीं दिया है, लेकिन वह ऐसी मुलाकात से इनकार भी नहीं कर रहे हैं। उनके इस बयान को युद्ध खत्म करने की संभावित कूटनीतिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

    रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प  और उनकी टीम की भी तारीफ की। पुतिन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन यूक्रेन संकट को समाप्त कराने और शांति समझौते की दिशा में ईमानदारी से प्रयास कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि रूस ने युद्धविराम बढ़ाने और युद्धबंदियों की अदला-बदली जैसे प्रस्तावों को तुरंत स्वीकार किया था।

    पुतिन ने यूक्रेन पर आरोप लगाते हुए कहा कि विक्ट्री डे से पहले कीव प्रशासन कैदियों की अदला-बदली के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि रूस किसी देश के साथ रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, लेकिन उकसावे वाली घटनाओं के कारण हालात और तनावपूर्ण हो सकते थे।

    युद्ध की शुरुआत पर बोलते हुए पुतिन ने कहा कि यूक्रेन के यूरोपीय संघ की ओर बढ़ते कदम, राजनीतिक उथल-पुथल और क्रीमिया विवाद के बाद हालात बिगड़ते गए, जिसके बाद रूस ने सैन्य अभियान शुरू किया।

    गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी यह युद्ध अब चौथे साल में पहुंच चुका है। इस संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। दुनिया के कई देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार युद्ध समाप्त कराने और शांति बहाल करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।

  • यूक्रेन-रूस युद्ध: यूक्रेन की ‘रोबोट फोर्स’ से बदलेगा युद्ध का तरीका, 25,000 UGV तैनाती की तैयारी

    यूक्रेन-रूस युद्ध: यूक्रेन की ‘रोबोट फोर्स’ से बदलेगा युद्ध का तरीका, 25,000 UGV तैनाती की तैयारी



    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन अब युद्ध के मैदान में एक नई तकनीकी रणनीति अपना रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन 2026 तक लगभग 25,000 अनमैन्ड ग्राउंड व्हीकल (UGV) यानी बिना चालक वाले जमीनी रोबोट तैनात करने की योजना पर काम कर रहा है। यह कदम आधुनिक युद्ध में मानव सैनिकों की सुरक्षा और तकनीकी बढ़त को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, इन रोबोटिक वाहनों का इस्तेमाल सप्लाई पहुंचाने, घायल सैनिकों को निकालने, बारूदी सुरंगें लगाने और कुछ मामलों में सीमित हमले करने के लिए किया जा रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि युद्ध में मानव नुकसान को कम करने के लिए ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम पर निर्भरता तेजी से बढ़ाई जा रही है।

    रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि यूक्रेन की कुछ विशेष सैन्य इकाइयाँ, जैसे K-2 ब्रिगेड, पहले से ही इन UGV सिस्टम का इस्तेमाल कर रही हैं। युद्ध के दौरान रूसी ड्रोन और भारी गोलाबारी के कारण कई इलाकों को ‘नो-गो ज़ोन’ माना जा रहा है, जहां रोबोटिक सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

    सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इतनी बड़ी संख्या में UGV मैदान में उतारे जाते हैं, तो यह युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है। हालांकि, यह तकनीक अभी भी विकास और परीक्षण के चरण में है और इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।

  • रूस-यूक्रेन युद्ध: शांति वार्ता की नई पहल, पुतिन बोले-तीसरे देश में जेलेंस्की से मिलने को तैयार

    रूस-यूक्रेन युद्ध: शांति वार्ता की नई पहल, पुतिन बोले-तीसरे देश में जेलेंस्की से मिलने को तैयार



    नई दिल्ली। Russia-Ukraine War को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक संकेत देते हुए रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने कहा है कि वह यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy से किसी तीसरे देश में मुलाकात करने के लिए तैयार हैं, लेकिन यह बैठक केवल अंतिम शांति समझौते पर हस्ताक्षर के लिए होगी।

    पुतिन ने स्पष्ट किया कि इस तरह की मुलाकात तभी संभव है जब दोनों देशों के बीच विशेषज्ञ स्तर पर पूरा और ठोस शांति समझौता पहले से तैयार हो जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत की बजाय यह बैठक सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया का अंतिम चरण होनी चाहिए।

    रूसी राष्ट्रपति ने पुराने Minsk agreements का हवाला देते हुए कहा कि पिछली शांति प्रक्रियाओं की तरह लंबी और असफल चर्चाओं से बचना जरूरी है। उनका कहना है कि इस बार पहले तकनीकी और विशेषज्ञ स्तर पर सभी मुद्दों को पूरी तरह सुलझाया जाना चाहिए, ताकि बाद में नेताओं की मुलाकात सिर्फ हस्ताक्षर तक सीमित रहे।

    यह युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और अब अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। पुतिन के इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की दिशा में एक संभावित नई पहल के रूप में देखा जा रहा है।

  • रेड स्क्वायर से पुतिन का शक्ति प्रदर्शन, NATO को ललकारा; यूक्रेन युद्ध पर बोले- यह रूस की न्याय की लड़ाई

    रेड स्क्वायर से पुतिन का शक्ति प्रदर्शन, NATO को ललकारा; यूक्रेन युद्ध पर बोले- यह रूस की न्याय की लड़ाई


    नई दिल्ली। मॉस्को के ऐतिहासिक रेड स्क्वायर पर शनिवार को रूस ने पूरे सैन्य शक्ति प्रदर्शन के साथ विक्ट्री डे मनाया। इस मौके पर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर पश्चिमी देशों और NATO पर तीखा हमला बोला। अपने संबोधन में पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को रूस की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए जरूरी बताते हुए इसे “न्यायसंगत लड़ाई” करार दिया।

    दरअसल, रूस हर साल 9 मई को द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की याद में विक्ट्री डे परेड आयोजित करता है। इस बार भी रेड स्क्वायर पर हजारों सैनिकों ने मार्च किया, हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में परेड में भारी हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों की मौजूदगी काफी कम रही। कई वर्षों में पहली बार परेड में बड़े पैमाने पर टैंक और मिसाइल सिस्टम नजर नहीं आए।

    अपने भाषण में पुतिन ने कहा कि रूस आज ऐसे आक्रामक गठबंधन का सामना कर रहा है, जिसे NATO का पूरा समर्थन हासिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी देश लगातार यूक्रेन को हथियार और सैन्य सहायता देकर संघर्ष को बढ़ावा दे रहे हैं। पुतिन ने कहा कि रूस अपने सैनिकों और नागरिकों की ताकत के दम पर हर चुनौती का सामना करेगा।

    रूसी राष्ट्रपति ने दूसरे विश्व युद्ध में सोवियत सैनिकों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि वही जज्बा आज यूक्रेन में लड़ रहे रूसी सैनिकों को प्रेरित कर रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए रूस हर मोर्चे पर मजबूती से खड़ा रहेगा।

    इस बार की परेड इसलिए भी खास रही क्योंकि रूस और यूक्रेन के बीच तीन दिन के अस्थायी सीजफायर की घोषणा की गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि 9 से 11 मई तक दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम रहेगा और इस दौरान कैदियों की अदला-बदली भी की जाएगी। हालांकि युद्ध को लेकर तनाव अब भी बरकरार है।

    विक्ट्री डे समारोह में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको समेत कई देशों के नेता मौजूद रहे। सैन्य बैंड, तोपों की सलामी और सैनिकों की परेड के जरिए रूस ने दुनिया को साफ संदेश देने की कोशिश की कि यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी दबाव के बावजूद उसकी सैन्य शक्ति और रणनीतिक आक्रामकता कमजोर नहीं हुई है

  • ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील

    ट्रम्प का दावा- 9 संघर्ष रुकवाए, अब रूस-यूक्रेन युद्ध पर फोकस 3 दिन के सीजफायर की अपील



    नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रुकवाने में भूमिका निभा चुके हैं और अब उनका अगला लक्ष्य रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करना है। ट्रम्प ने इसे अपनी “10वीं शांति पहल” बताया है।

    व्हाइट हाउस से वर्जीनिया रवाना होने से पहले ट्रम्प ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे विनाशकारी संघर्ष बन चुका है, जिसमें हर महीने बड़ी संख्या में सैनिकों की मौत हो रही है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध को रोकना अब उनकी प्राथमिकता है।

    इसी बीच ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर रूस और यूक्रेन के बीच 9 से 11 मई तक 3 दिन के अस्थायी सीजफायर का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने और लगभग 1000-1000 कैदियों की अदला-बदली पर सहमति बनी है।

    हालांकि रूस और यूक्रेन की सरकारों की ओर से इस सीजफायर पर कोई आधिकारिक संयुक्त घोषणा नहीं की गई है, लेकिन ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि हालात सकारात्मक रहे तो इस अस्थायी युद्धविराम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

    ट्रम्प ने दावा किया है कि वे अब तक 9 अंतरराष्ट्रीय संघर्ष रुकवा चुके हैं और अब रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।
    उन्होंने 3 दिन के सीजफायर और कैदियों की अदला-बदली का प्रस्ताव रखकर इसे अपनी बड़ी शांति पहल बताया है।

  • अदृश्य खतरा, अचूक वार! फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन से हिज्बुल्लाह का नया हमला, इजरायल की सुरक्षा चुनौती में इजाफा

    अदृश्य खतरा, अचूक वार! फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन से हिज्बुल्लाह का नया हमला, इजरायल की सुरक्षा चुनौती में इजाफा


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब तकनीकी युद्ध के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। Hezbollah ने ऐसे फाइबर-ऑप्टिक गाइडेड ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है, जो पारंपरिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से लगभग अछूते रहते हैं। इस नई तकनीक ने Israel की सुरक्षा प्रणाली के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।

    इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब युद्ध का नया चेहरा सामने आया है—फाइबर-ऑप्टिक नियंत्रित ड्रोन। ये ड्रोन आकार में छोटे, हल्के और बेहद तेज होते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये पतली फाइबर-ऑप्टिक केबल के जरिए सीधे ऑपरेटर से जुड़े रहते हैं, जिससे इन पर रेडियो सिग्नल आधारित जैमिंग का कोई असर नहीं पड़ता।

    रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ये ड्रोन बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हैं और लक्ष्य के बेहद करीब पहुंचकर हमला करने में सक्षम होते हैं। लंदन स्थित Royal United Services Institute के विशेषज्ञ Robert Tolst का कहना है कि यदि ऑपरेटर को सही प्रशिक्षण मिला हो, तो यह तकनीक अत्यंत घातक साबित हो सकती है।

    इजरायली अधिकारियों का मानना है कि हिज्बुल्लाह ने यह रणनीति इसलिए अपनाई है क्योंकि इजरायल का एयर डिफेंस सिस्टम पारंपरिक रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खिलाफ प्रभावी है। ऐसे में फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन उस सुरक्षा कवच को भेदने की नई कोशिश हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन ड्रोन को स्थानीय स्तर पर भी तैयार किया जा सकता है—साधारण कमर्शियल ड्रोन, सीमित विस्फोटक सामग्री और पारदर्शी फाइबर-ऑप्टिक तार के जरिए।

    पूर्व इजरायली वायु रक्षा प्रमुख Ran Kochav ने चेतावनी दी है कि इन ड्रोन को पहचानना और मार गिराना बेहद कठिन है। उनका कहना है कि ये छोटे आकार, तेज गति और कम ऊंचाई पर उड़ान के कारण पारंपरिक डिफेंस सिस्टम को चुनौती देते हैं।

    बचाव की सीमित संभावनाएं
    विशेषज्ञों के अनुसार, इन ड्रोन से निपटने के केवल दो प्रमुख तरीके हैं—या तो इन्हें उड़ान के दौरान ही मार गिराया जाए या फिर इन्हें नियंत्रित करने वाली फाइबर-ऑप्टिक केबल को काट दिया जाए। हालांकि, दोनों ही विकल्प व्यावहारिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि केबल पतली और लगभग अदृश्य होती है।

    इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए इजरायली सेना ने अपने सैन्य वाहनों पर सुरक्षात्मक जाल और विशेष कवच लगाने शुरू कर दिए हैं। साथ ही, उन्नत सेंसर, ध्वनि पहचान प्रणाली और अन्य तकनीकों के विकास पर भी काम तेज किया गया है।

    यूक्रेन युद्ध से मिली तकनीक:
    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक का तेजी से विकास Russia-Ukraine War के दौरान हुआ है, जहां रूस और यूक्रेन दोनों ही ड्रोन तकनीक में लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं। कुछ मामलों में 50 किलोमीटर तक लंबी फाइबर-ऑप्टिक केबल वाले ड्रोन भी देखे गए हैं, जो इनकी क्षमता को और बढ़ाते हैं।

    हिज्बुल्लाह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ये फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन आधुनिक युद्ध की बदलती रणनीति का प्रतीक हैं, जहां तकनीक के साथ खतरा और अधिक जटिल और अदृश्य होता जा रहा है।अब बड़ा सवाल यही है—क्या इजरायल इस नई चुनौती का समय रहते प्रभावी समाधान खोज पाएगा, या यह तकनीक आने वाले समय में युद्ध का नया मानक बन जाएगी?

  • महाजंग के अंत की उम्मीद: 100% तैयार हुआ अमेरिकी सुरक्षा गारंटी दस्तावेज, जेलेंस्की बोले- अब बस हस्ताक्षर का इंतजार

    महाजंग के अंत की उम्मीद: 100% तैयार हुआ अमेरिकी सुरक्षा गारंटी दस्तावेज, जेलेंस्की बोले- अब बस हस्ताक्षर का इंतजार


    नई दिल्ली । चार साल से जारी भीषण रक्तपात के बीच रूस और यूक्रेन के बीच समझौते की सुगबुगाहट तेज हो गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने रविवार को लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में दो दिनों तक चली सघन त्रिपक्षीय वार्ता के बाद अमेरिकी सुरक्षा गारंटी से जुड़ा ऐतिहासिक दस्तावेज अब 100 प्रतिशत तैयार’ है।

    जेलेंस्की ने इस वार्ता को ऐतिहासिक बताया क्योंकि इसमें पहली बार यूक्रेन, रूस और अमेरिका के न केवल राजनयिक, बल्कि सैन्य अधिकारी भी आमने-सामने बैठे थे। उन्होंने कहा यह दस्तावेज हमारे देश के सुरक्षित भविष्य की नींव है। अब हमें बस अपने साझेदारों अमेरिका द्वारा हस्ताक्षर की तारीख और स्थान तय किए जाने का इंतजार है। हस्ताक्षर के बाद इस प्रस्ताव को कानूनी अमलीजामा पहनाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस और यूक्रेनी संसद वेरखोव्ना राडा की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

    20-सूत्रीय शांति योजना और चुनौतियां रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने इस शांति प्रक्रिया के लिए 20-सूत्रीय एक विस्तृत योजना पेश की है। जेलेंस्की ने माना कि पहले कई विवादित मुद्दे थे, लेकिन हालिया बातचीत के बाद उनकी संख्या कम हुई है। हालांकि, सबसे बड़ा पेंच अब भी क्षेत्रीय अखंडता को लेकर फंसा हुआ है। जहाँ रूस पूर्वी डोनबास क्षेत्र से यूक्रेनी सेना की पूरी वापसी की मांग कर रहा है, वहीं जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं करेगा।

    आर्थिक सुरक्षा और भविष्य का विजन सुरक्षा गारंटी के साथ-साथ जेलेंस्की ने यूक्रेन की आर्थिक स्थिरता पर भी जोर दिया। उन्होंने दोहराया कि उनका लक्ष्य 2027 तक यूरोपीय संघ की पूर्ण सदस्यता हासिल करना है। उन्होंने इसे ‘आर्थिक सुरक्षा की गारंटी’ करार दिया। अबू धाबी में अगली दौर की बातचीत आगामी रविवार 1 फरवरी को होने की संभावना है, जिसमें अमेरिकी मध्यस्थ और दोनों देशों के सैन्य प्रतिनिधि शेष तकनीकी और राजनीतिक मतभेदों को सुलझाने का प्रयास करेंगे।