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  • QUAD Summit: मार्को रुबियो का बड़ा बयान,अब सिर्फ चर्चा नहीं, एक्शन होगा, चीन की चिंता बढ़ी

    QUAD Summit: मार्को रुबियो का बड़ा बयान,अब सिर्फ चर्चा नहीं, एक्शन होगा, चीन की चिंता बढ़ी



    नई दिल्ली। नई दिल्ली में हुई QUAD विदेश मंत्रियों की बैठक में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा कि QUAD अब केवल बातचीत का मंच नहीं रहा, बल्कि यह एक “एक्शन-ओरिएंटेड” (कार्रवाई करने वाला) गठबंधन बनता जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि चारों देश अब वैश्विक मुद्दों पर सिर्फ चर्चा नहीं करेंगे, बल्कि ठोस कदम भी उठाएंगे।

    बैठक की शुरुआत में रुबियो ने भारत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर सहित सभी सदस्य देशों का धन्यवाद किया और कहा कि QUAD की पहली बैठक में ही शामिल होना अमेरिका की मजबूत प्रतिबद्धता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह मंच अब तेजी से परिणाम देने वाली दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    रुबियो ने कहा कि QUAD का उद्देश्य अब सिर्फ समस्याओं पर विचार करना नहीं, बल्कि उन्हें मिलकर हल करना है। उन्होंने बताया कि यह समूह मानवीय सहायता, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे क्षेत्रों में ठोस सहयोग कर रहा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि चारों देश अपनी-अपनी ताकतों को जोड़कर वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सक्षम हैं और अब इस सहयोग को और ज्यादा व्यावहारिक बनाया जाएगा। उनके इस बयान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन के खिलाफ एक रणनीतिक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

    QUAD में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं और इसका फोकस इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देना है।

  • अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बोले- नस्लीय टिप्पणियां अमेरिका की पहचान नहीं, भारतीय समुदाय की जमकर की तारीफ

    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो बोले- नस्लीय टिप्पणियां अमेरिका की पहचान नहीं, भारतीय समुदाय की जमकर की तारीफ


    नई दिल्ली। नई दिल्ली दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हो रही नस्लीय टिप्पणियों और भेदभाव की घटनाओं पर निराशा जताई है। विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूबियो ने साफ कहा कि कुछ लोगों की आपत्तिजनक टिप्पणियों को पूरे अमेरिका की सोच नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि “हर देश में कुछ बेवकूफ लोग होते हैं, जो ऑनलाइन या सार्वजनिक तौर पर गलत बातें करते हैं, लेकिन वे पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते।”

    रूबियो ने अमेरिका को दुनिया के सबसे स्वागत करने वाले देशों में से एक बताते हुए कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिका की तरक्की में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने भारतीय समुदाय की जमकर सराहना करते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर, बिजनेस और पब्लिक सर्विस जैसे कई अहम क्षेत्रों में भारतीय-अमेरिकियों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा है। उनके मुताबिक भारतीय समुदाय ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 20 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान दिया है और अमेरिका चाहता है कि यह साझेदारी आगे और मजबूत हो।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब रूबियो से अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद को लेकर सवाल पूछा गया, तब विदेश मंत्री एस जयशंकर हल्की मुस्कान के साथ नजर आए। हालांकि भारतीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से इस मुद्दे पर अलग से कोई बयान नहीं दिया गया।

    रूबियो ने भारत-अमेरिका रिश्तों को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारियों में से एक बताते हुए कहा कि दोनों देश सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मजबूत साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र हैं और दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, रणनीतिक तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहरा सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

    वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी करार दिया। उन्होंने कहा कि कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर दोनों देशों के हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं और भविष्य में यह संबंध और मजबूत होंगे।

    मार्को रूबियो इस समय भारत के बहु-दिवसीय दौरे पर हैं। अपने दौरे के दौरान वह क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लेंगे। इस समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा, चीन की गतिविधियों और वैश्विक रणनीतिक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

  • भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश

    भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार: दिल्ली में रूबियो-जयशंकर वार्ता, क्वाड बैठक से पहले बड़ा कूटनीतिक संदेश



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इन दिनों चार दिवसीय भारत दौरे पर हैं, जहां उनकी यात्रा को भारत-अमेरिका संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान उन्होंने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसके बाद रविवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की गई।

    बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, वैश्विक सहयोग और आपसी हितों पर विस्तार से चर्चा हुई। मार्को रूबियो ने भारत को अमेरिका का एक अत्यंत महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं, जिनके हित कई वैश्विक मुद्दों पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    रूबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका केवल पारंपरिक साझेदार नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक सहयोग में जुड़े हुए देश हैं, जो वैश्विक चुनौतियों का मिलकर समाधान करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच नियमित संवाद इस साझेदारी को और मजबूत बनाता है।

    वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लगातार संपर्क और संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत किया है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और वैश्विक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है।

    रूबियो ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह उनका भारत का पहला आधिकारिक दौरा है और वे इस संबंध को और गहराई से समझना चाहते हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका साझेदारी को वैश्विक स्तर पर सहयोग का एक मजबूत उदाहरण बताया, जो किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी दुनिया में प्रभाव डालता है।

    इसके बाद दोनों देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता शुरू हुई, जिसमें विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा जारी रही। रूबियो सोमवार को आगरा और जयपुर का दौरा करेंगे, जबकि मंगलवार को वे नई दिल्ली में होने वाली क्वाड देशों की विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान भाग लेंगे।

    यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देने और वैश्विक कूटनीति में दोनों देशों की भूमिका को और प्रभावशाली बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, 1,000 श्रद्धालुओं का चयन पूरा

    कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर बड़ा अपडेट, 1,000 श्रद्धालुओं का चयन पूरा


    नई दिल्ली विदेश मंत्रालय ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का आयोजन जून से अगस्त के बीच किया जाएगा। चयनित यात्रियों को 20 अलग-अलग बैचों में भेजा जाएगा और हर बैच में 50 श्रद्धालु शामिल होंगे। यात्रा दो प्रमुख मार्गों  Lipulekh Pass और Nathu La Pass  से कराई जाएगी। दोनों रास्तों को अब पूरी तरह मोटरेबल बना दिया गया है, जिससे यात्रियों को पहले की तुलना में काफी कम ट्रैकिंग करनी पड़ेगी।

    विदेश मंत्रालय के अनुसार चयनित यात्रियों को एसएमएस और ईमेल के जरिए सूचना भेज दी गई है। यात्री आधिकारिक पोर्टल पर लॉगिन करके अपना चयन स्टेटस देख सकते हैं। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 011-23088214 भी जारी किया गया है, जहां यात्रा से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

    गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच 2020 में हुए Galwan Valley clash के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को रोक दिया गया था। लगभग पांच साल तक बंद रहने के बाद 2025 में दोनों देशों के बीच रिश्तों में नरमी आने पर यात्रा दोबारा शुरू की गई थी। पिछले वर्ष सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी गई थी, जिसमें उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथू ला मार्ग से यात्राएं कराई गई थीं।

    इस बीच यात्रा मार्ग को लेकर नेपाल ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। नेपाल सरकार का कहना है कि भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए इस्तेमाल किया जा रहा लिपुलेख क्षेत्र विवादित है और इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए अपना रुख साफ कर दिया है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने हाल ही में कहा था कि लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक मार्ग रहा है और दशकों से इसी रास्ते से यात्रा होती आ रही है। उन्होंने कहा कि भारत ऐतिहासिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर अपने दावे पर कायम है और एकतरफा तरीके से विवाद बढ़ाना उचित नहीं है।

    धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक महत्व के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा को हिंदू, बौद्ध और जैन समुदायों के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु इस कठिन लेकिन दिव्य यात्रा में शामिल होने की इच्छा जताते हैं। 2026 में यात्रा का दायरा बढ़ाकर 1000 यात्रियों तक करना भारत-चीन संबंधों में सुधार और यात्रा सुविधाओं के विस्तार का संकेत माना जा रहा है।

  • दिल्ली BRICS समिट में ईरान पर फूटा मतभेद, बिना संयुक्त बयान खत्म हुई विदेश मंत्रियों की बैठक

    दिल्ली BRICS समिट में ईरान पर फूटा मतभेद, बिना संयुक्त बयान खत्म हुई विदेश मंत्रियों की बैठक

    नई दिल्ली। BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की दिल्ली में हुई अहम बैठक ईरान मुद्दे पर गहरे मतभेदों के बीच बिना संयुक्त बयान के खत्म हो गई। समिट में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव, पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही जैसे मुद्दों पर तीखी चर्चा हुई, लेकिन सदस्य देशों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी।

    सूत्रों के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने BRICS देशों से मांग की कि संयुक्त बयान में ईरान पर हुए हमलों की स्पष्ट निंदा की जाए। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का आरोप लगाया और BRICS से खुला समर्थन मांगा। हालांकि भारत समेत कई सदस्य देशों ने इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाने की जरूरत बताई।

    बैठक में मौजूद देशों का मानना था कि पश्चिम एशिया के हालात बेहद संवेदनशील हैं और किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन करने से कूटनीतिक संतुलन बिगड़ सकता है। इसी कारण साझा बयान पर सहमति नहीं बन पाई और अंत में केवल एक “Outcome Statement” जारी किया गया।

    हालांकि ईरान के मुद्दे पर मतभेद सामने आए, लेकिन करीब 60 अहम एजेंडों पर सभी देशों ने एक जैसी राय रखी। इनमें ऊर्जा सहयोग, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, क्लाइमेट एक्शन, वित्तीय कनेक्टिविटी और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे विषय शामिल रहे।

    समिट के दौरान S. Jaishankar ने अपने संबोधन में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों को हर हाल में खुला रखा जाना चाहिए, क्योंकि इन मार्गों पर रुकावट का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

    समिट से इतर जयशंकर और अराघची के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक भी हुई। दोनों नेताओं ने ईरान-इजरायल तनाव, क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की। भारत ने साफ किया कि वह बातचीत और कूटनीति के जरिए तनाव कम करने के पक्ष में है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS मंच पर ईरान मुद्दे पर खुलकर मतभेद सामने आना इस बात का संकेत है कि संगठन के भीतर भी भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। इसके बावजूद आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के कई मुद्दों पर सदस्य देशों की एकजुटता कायम दिखाई दी।

  • ब्रिक्स सम्मेलन में जयशंकर का सख्त संदेश, सुधार अब पसंद नहीं बल्कि जरूरत : विदेश मंत्री

    ब्रिक्स सम्मेलन में जयशंकर का सख्त संदेश, सुधार अब पसंद नहीं बल्कि जरूरत : विदेश मंत्री

    नई दिल्ली । वैश्विक मंच पर बदलते शक्ति संतुलन और बढ़ती जटिलताओं के बीच ब्रिक्स सम्मेलन 2026 का दूसरा दिन एक महत्वपूर्ण संदेश के साथ सामने आया, जहां भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता को स्पष्ट और मजबूत तरीके से रखा। सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया जिस दौर से गुजर रही है, उसमें बदलाव अब किसी विकल्प या पसंद का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।

    उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियां उस समय से काफी अलग हैं, जब मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की नींव रखी गई थी। समय के साथ दुनिया अधिक आपस में जुड़ी हुई, जटिल और बहु-ध्रुवीय हो गई है, लेकिन वैश्विक शासन की मौजूदा संरचना इस परिवर्तन के साथ कदम नहीं मिला पाई है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर निर्णय प्रक्रिया और उसकी प्रभावशीलता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

    जयशंकर ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा प्रणाली में सुधार केवल एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक संतुलन और न्याय से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व ही पर्याप्त रूप से नहीं हो पाता, तो निर्णयों की वैधता और स्वीकार्यता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। इसी कारण वैश्विक संस्थाओं को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाने की आवश्यकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना जरूरी है। आज कई देशों को विकास, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन मौजूदा ढांचे इन चुनौतियों का समाधान करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। इसलिए सुधार की प्रक्रिया को तेज करना समय की मांग है।

    विदेश मंत्री ने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक सदस्यता बढ़ने के बावजूद कई निर्णय लेने वाली संरचनाएं अब भी पुरानी दुनिया की तस्वीर दिखाती हैं, जिससे उभरते देशों और विकासशील क्षेत्रों को उचित स्थान नहीं मिल पाता। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों की भागीदारी को बढ़ाना आवश्यक है ताकि वैश्विक व्यवस्था अधिक संतुलित हो सके।

    इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक वित्तीय प्रणाली की चुनौतियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में सप्लाई चेन की अस्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव और संसाधनों तक असमान पहुंच जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों को और अधिक सक्षम और लचीला बनाना जरूरी है ताकि विकासशील देशों को समय पर और पर्याप्त सहायता मिल सके।

    व्यापार व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार को निष्पक्ष और नियम-आधारित बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने संकेत दिया कि कुछ गैर-न्यायसंगत प्रथाएं और आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता वैश्विक अर्थव्यवस्था को जोखिम में डाल रही हैं। इसलिए एक मजबूत और संतुलित व्यापार प्रणाली की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

    अपने संबोधन के अंत में विदेश मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान समय का सबसे बड़ा संदेश सहयोग और सुधार है। उन्होंने कहा कि दुनिया को एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय ढांचे की आवश्यकता है जो अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक और न्यायपूर्ण हो, ताकि सभी देशों को समान अवसर मिल सके और वैश्विक चुनौतियों का समाधान सामूहिक रूप से किया जा सके।

  • त्रिनिदाद संसद में जयशंकर का गर्मजोशी भरा स्वागत, स्पीकर की ‘फिसली जुबान’ से सदन में ठहाके

    त्रिनिदाद संसद में जयशंकर का गर्मजोशी भरा स्वागत, स्पीकर की ‘फिसली जुबान’ से सदन में ठहाके


    नई दिल्ली। पोर्ट ऑफ स्पेन, त्रिनिदाद एंड टोबैगो में आयोजित विशेष संसदीय सत्र के दौरान उस समय माहौल हल्का और दिलचस्प हो गया जब संसद के स्पीकर ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर का स्वागत करते हुए उन्हें गलती से “त्रिनिदाद के विदेश मंत्री” कह दिया। अपनी भूल का एहसास होते ही उन्होंने तुरंत सुधार किया और “भारत के विदेश मंत्री” कहा, जिस पर सदन में मौजूद सांसदों और प्रतिनिधिमंडल में मुस्कुराहट फैल गई।

    सूत्रों के अनुसार, यह पल पूरी तरह औपचारिक कार्यक्रम के बीच अचानक सामने आया, जिससे माहौल कुछ समय के लिए बेहद सहज और अनौपचारिक हो गया।

    पीएम कमला प्रसाद बिसेसर ने भी लिया हल्के अंदाज में
    इस मौके पर त्रिनिदाद एंड टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर ने भी मुस्कुराते हुए टिप्पणी की और कहा कि स्पीकर से यह एक छोटी-सी चूक हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. जयशंकर को त्रिनिदाद से जुड़ा मानना अपने आप में स्वाभाविक है, क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते ऐतिहासिक और गहरे हैं। उनकी यह प्रतिक्रिया सदन में मौजूद लोगों के बीच और भी मुस्कुराहट का कारण बनी।

    ‘मिनी इंडिया’ से गहरे जुड़े हैं रिश्ते
    त्रिनिदाद एंड टोबैगो को अक्सर “मिनी इंडिया” कहा जाता है, क्योंकि यहां की आबादी में बड़ी संख्या भारतीय मूल के लोगों की है।

    देश की कुल आबादी का लगभग 40% से अधिक हिस्सा भारतीय मूल का है

    करीब 5.5 लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोग यहां रहते हैं

    दोनों देशों के संबंध 19वीं सदी के प्रवासी इतिहास से जुड़े हैं

    औपनिवेशिक काल में बड़ी संख्या में भारतीय मजदूर यहां लाए गए थे, जिन्होंने बाद में देश के सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे को गहराई से प्रभावित किया।

    भारत-त्रिनिदाद सहयोग को नई दिशा
    अपने दौरे के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी विस्तार की बात कही—

    प्रमुख क्षेत्र

    डिजिटल पेमेंट (UPI): भारत की UPI प्रणाली अपनाने की दिशा में त्रिनिदाद अग्रणी कैरेबियन देश बन रहा है

    फार्मा सेक्टर: भारत की जेनेरिक दवाओं के आयात और सहयोग को बढ़ावा

    ऊर्जा क्षेत्र: रिफाइनिंग और निवेश में नए अवसर

    तकनीक व इंफ्रास्ट्रक्चर: द्विपक्षीय साझेदारी को विस्तार देने पर जोर



    क्यों अहम है यह दौरा
    विशेषज्ञों के अनुसार यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है—

    कैरेबियन क्षेत्र में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी

    प्रवासी भारतीय समुदाय के संबंध और प्रगाढ़ होंगे

    डिजिटल और ऊर्जा सहयोग को नई गति मिलेगी

    त्रिनिदाद संसद में हुआ यह हल्का-फुल्का वाकया भले ही एक जुबानी चूक था, लेकिन इसने भारत और त्रिनिदाद एंड टोबैगो के बीच गहरे, आत्मीय और ऐतिहासिक संबंधों को और अधिक जीवंत बना दिया। जयशंकर की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

  • तेहरान में फंसे बुजुर्ग सिख दंपति, भारत वापसी पर संकट: बीजेपी प्रवक्ता ने की अपील

    तेहरान में फंसे बुजुर्ग सिख दंपति, भारत वापसी पर संकट: बीजेपी प्रवक्ता ने की अपील


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान में फंसे भारतीयों की वापसी को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है उन्होंने खास तौर पर तेहरान में फंसे बुजुर्ग सिख दंपतियों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है जो इस समय वहां के गुरुद्वारा साहिब में फंसे हुए हैं

    शेरगिल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए अपनी अपील में कहा कि ये सिख दंपति लंबे समय से भारत लौटने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन जरूरी अनुमति नहीं मिलने के कारण उनकी वापसी संभव नहीं हो पा रही है उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है ताकि इन परिवारों को सुरक्षित भारत लाया जा सके

    बताया जा रहा है कि ईरान से भारत के लिए महान एयरवेज की एक फ्लाइट 5 मई को संचालित होने वाली है लेकिन एयरलाइन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना भारत सरकार की अनुमति के इन यात्रियों को साथ लाना संभव नहीं होगा यही कारण है कि यह मामला अब और गंभीर हो गया है और तत्काल समाधान की जरूरत महसूस की जा रही है

    दरअसल ईरान में हालिया हालात के चलते वहां का एयरस्पेस काफी समय तक बंद रहा था जिसकी वजह से कई लोग वहीं फंस गए थे हालांकि अब धीरे-धीरे उड़ानों का संचालन शुरू किया जा रहा है और अलग-अलग देशों के नागरिकों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया भी जारी है लेकिन कई मामलों में प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण देरी हो रही है

    इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत भी हुई है इस बातचीत में दोनों नेताओं ने मौजूदा हालात के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की और संपर्क में बने रहने पर सहमति जताई इससे उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में फंसे भारतीयों की वापसी को लेकर कुछ सकारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं

    ईरानी दूतावास की ओर से भी इस बातचीत की पुष्टि की गई है जिसमें बताया गया कि दोनों देशों के बीच सीजफायर क्षेत्रीय हालात और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई है ऐसे में यह कूटनीतिक संवाद भी इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा सकता है

    गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है बल्कि आम नागरिकों की जिंदगी पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है खासकर वे लोग जो विदेश में फंसे हुए हैं उनके लिए हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं ऐसे में सरकारों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करें फिलहाल सभी की निगाहें भारत सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही कोई ठोस निर्णय लेकर इन फंसे हुए सिख परिवारों को राहत दी जाएगी

  • भारत-इक्वाडोर रिश्तों में नई ऊर्जा ,जयशंकर-सोमरफेल्ड मुलाकात से सहयोग के कई दरवाजे खुले

    भारत-इक्वाडोर रिश्तों में नई ऊर्जा ,जयशंकर-सोमरफेल्ड मुलाकात से सहयोग के कई दरवाजे खुले


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में भारत और इक्वाडोर के बीच कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम तब देखने को मिला जब विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इक्वाडोर की विदेश मंत्री गैब्रिएला सोमरफेल्ड से मुलाकात की। इस मुलाकात ने दोनों देशों के बीच सहयोग के नए आयाम खोल दिए हैं और संकेत दिया है कि आने वाले समय में यह साझेदारी और अधिक व्यापक और प्रभावी रूप ले सकती है।

    बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार कृषि स्वास्थ्य डिजिटल तकनीक और कैपेसिटी बिल्डिंग जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर गहन चर्चा की। यह केवल पारंपरिक कूटनीतिक बातचीत नहीं थी बल्कि एक ऐसी रणनीतिक पहल थी जो दोनों देशों को आर्थिक और तकनीकी रूप से करीब लाने का मार्ग प्रशस्त करती है। भारत जहां तेजी से उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है वहीं इक्वाडोर जैसे दक्षिण अमेरिकी देश के साथ सहयोग उसके वैश्विक प्रभाव को और विस्तार देगा।

    इस मुलाकात की एक खास बात यह भी रही कि इक्वाडोर ने भारत की अगुवाई वाले अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में शामिल होने की इच्छा जताई है। विशेष रूप से इंटरनेशनल सोलर अलायंस और इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस में शामिल होने की प्रक्रिया शुरू करना यह दर्शाता है कि इक्वाडोर भारत के नेतृत्व और उसकी पहलों पर भरोसा जता रहा है। इसके अलावा इक्वाडोर पहले से ही कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर का सदस्य है जो दोनों देशों के बीच आपदा प्रबंधन और सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करता है।

    इस दौरान एक और महत्वपूर्ण घोषणा क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग समझौते को लेकर की गई। यह समझौता विकास सहयोग को जमीनी स्तर तक ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा और छोटे लेकिन प्रभावी प्रोजेक्ट्स के जरिए आम जनता तक इसका सीधा लाभ पहुंचेगा। यह पहल दोनों देशों के रिश्तों को केवल कागजी समझौतों तक सीमित नहीं रखेगी बल्कि इसे व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाएगी।

    इक्वाडोर की विदेश मंत्री ने अपने दौरे के दौरान राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की जो भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है। यह प्रतीकात्मक कदम दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत करता है।

    पिछले कुछ समय से भारत और इक्वाडोर के बीच संबंधों में लगातार प्रगति देखने को मिल रही है। हाल ही में दोनों देशों के बीच कृषि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साइबर सिक्योरिटी शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई थी। साथ ही क्विटो में भारत की रेजिडेंट एम्बेसी का उद्घाटन इस बात का प्रमाण है कि भारत दक्षिण अमेरिका में अपनी कूटनीतिक मौजूदगी को और सशक्त बना रहा है।

    यह पूरी पहल केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को भी दर्शाती है। जिस तरह से दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर मिलकर काम करने की बात कर रहे हैं उससे यह साफ है कि आने वाले समय में भारत और इक्वाडोर की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अहम भूमिका निभा सकती है।

  • अफ्रीका के बिना विकास अधूरा जयशंकर का बड़ा बयान, इंडिया-अफ्रीका समिट की तैयारी तेज

    अफ्रीका के बिना विकास अधूरा जयशंकर का बड़ा बयान, इंडिया-अफ्रीका समिट की तैयारी तेज


    नई दिल्ली । नई दिल्ली में भारत और अफ्रीकी देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है जहां विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने 23 अप्रैल 2026 को चौथे इंडिया अफ्रीका फोरम समिट का लोगो थीम और आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की यह समिट 31 मई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी जिसमें पूरे अफ्रीकी महाद्वीप के नेता अफ्रीकन यूनियन कमीशन और विभिन्न क्षेत्रीय संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे

    इस आयोजन का उद्देश्य भारत और अफ्रीका के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग को और गहरा करना और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करना है विदेश मंत्रालय के अनुसार यह समिट आईए स्पिरिट इंडिया अफ्रीका स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फॉर इनोवेशन रेजिलिएंस एंड इनक्लूसिव ट्रांसफॉर्मेशन थीम पर आधारित होगी जो दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है

    समिट की तैयारी के तहत कई महत्वपूर्ण बैठकें भी आयोजित की जाएंगी जिसमें 28 मई 2026 को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक होगी जबकि 29 मई को भारत और अफ्रीकी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी इन बैठकों में आपसी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी

    भारत अफ्रीका फोरम समिट को दोनों क्षेत्रों के बीच संवाद और साझेदारी का एक महत्वपूर्ण मंच माना जाता है जो समानता आपसी सम्मान और साझा विकास के सिद्धांतों पर आधारित है पिछले संस्करणों में इस मंच के माध्यम से अफ्रीकी देशों के लिए भारत की विकास सहायता और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है जिससे कई देशों को लाभ मिला है

    इस अवसर पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि अफ्रीका की स्वतंत्रता के बिना भारत की स्वतंत्रता अधूरी मानी जा सकती है और अफ्रीका के विकास के बिना भारत का विकास भी पूर्ण नहीं हो सकता उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्रों की प्रगति एक दूसरे से जुड़ी हुई है और वास्तविक विकास तभी संभव है जब अफ्रीका की तरक्की भी सुनिश्चित हो

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विकास साझेदारी अफ्रीकी देशों की प्राथमिकताओं और स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित है और डिजिटल फिनटेक तथा नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है जिससे अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं को नया आकार मिल रहा है

    जयशंकर ने सस्टेनेबल भविष्य के लिए भारत की वैश्विक पहलों का उल्लेख करते हुए इंटरनेशनल सोलर अलायंस ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर और बिग कैट अलायंस जैसे मंचों में सक्रिय भागीदारी को रेखांकित किया उन्होंने कहा कि जी20 में अफ्रीकन यूनियन को शामिल किए जाने का भारत का समर्थन वैश्विक शासन में अफ्रीका की उचित भूमिका सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अफ्रीका का संबंध केवल विकास तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक बेहतर और अधिक संतुलित वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की साझा जिम्मेदारी भी है जो भविष्य में दोनों क्षेत्रों को और करीब लाएगी