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  • संगीत जगत को अपूरणीय क्षति नहीं रहीं महान पार्श्व गायिका एस जानकी छह दशक तक सुरों से सजाया भारतीय सिनेमा

    संगीत जगत को अपूरणीय क्षति नहीं रहीं महान पार्श्व गायिका एस जानकी छह दशक तक सुरों से सजाया भारतीय सिनेमा


    नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत की सबसे सशक्त और मधुर आवाजों में शुमार महान पार्श्व गायिका एस जानकी अब हमारे बीच नहीं रहीं। 88 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली और अपने पीछे ऐसा संगीत खजाना छोड़ गईं जो आने वाली कई पीढ़ियों तक श्रोताओं के दिलों में गूंजता रहेगा। उनके निधन से फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर है। दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर पूरे देश के संगीत प्रेमी इस खबर से भावुक हैं क्योंकि एक ऐसा युग समाप्त हो गया जिसने अपनी आवाज से लाखों लोगों की भावनाओं को शब्द और सुर दिए।

    जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई जिसके बाद मैसुरु के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण शनिवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की पुष्टि परिवार की ओर से की गई। उनकी पोती अप्सरा व्यद्युला ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा करते हुए बताया कि उनकी प्रिय दादी और महान गायिका अब इस दुनिया में नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि परिवार के बीच शांतिपूर्वक विदा लेने वाली जानकी ने अपने गीतों के जरिए करोड़ों लोगों के जीवन में खुशियां और यादें छोड़ी हैं। उन्होंने लोगों से परिवार की निजता का सम्मान करने की भी अपील की।

    एस जानकी का नाम भारतीय फिल्म संगीत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने अपने छह दशक लंबे करियर में लगभग 48 हजार गीत गाए और यह उपलब्धि उन्हें देश की सबसे अधिक गीत रिकॉर्ड करने वाली गायिकाओं में शामिल करती है। उनकी आवाज केवल तमिल कन्नड़ तेलुगु और मलयालम फिल्मों तक सीमित नहीं रही बल्कि उन्होंने हिंदी उड़िया बंगाली पंजाबी उर्दू सहित करीब 20 भारतीय भाषाओं में भी अपनी गायकी का जादू बिखेरा। फिल्मों के अलावा उन्होंने एल्बम टेलीविजन और रेडियो के लिए भी अनेक यादगार गीत गाए जिनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है।

    23 अप्रैल 1938 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के गुंटूर जिले में जन्मी एस जानकी का संगीत से जुड़ाव बचपन से ही हो गया था। महज नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी थी। उनके पिता आयुर्वेदिक चिकित्सक और शिक्षक थे जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने नादस्वरम वादक पेडीस्वामी से संगीत की शुरुआती शिक्षा ली लेकिन विशेष बात यह रही कि उन्होंने कभी शास्त्रीय संगीत की औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की। अपनी स्वाभाविक प्रतिभा और अथक अभ्यास के दम पर उन्होंने भारतीय संगीत जगत में वह मुकाम हासिल किया जिसकी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है।

    एस जानकी की आवाज की सबसे बड़ी विशेषता उसकी भावनात्मक गहराई और विविधता थी। रोमांटिक गीतों से लेकर भक्ति संगीत लोकधुनों और संवेदनशील रचनाओं तक उन्होंने हर शैली को पूरी आत्मा के साथ निभाया। उनकी गायकी ने अनगिनत फिल्मों को यादगार बनाया और कई पीढ़ियों के संगीत प्रेमियों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बनी रही।

    उनका निधन केवल एक कलाकार का जाना नहीं बल्कि भारतीय संगीत की एक अमूल्य विरासत का युगांत है। हालांकि वह अब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी आवाज उनके गीत और उनकी कला हमेशा जीवित रहेंगे। भारतीय संगीत जगत उन्हें हमेशा श्रद्धा सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करेगा।