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  • सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों के लिए मजबूत संकेत, दीर्घकाल में रिकॉर्ड स्तर पर बनी रह सकती है चमक

    सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों के लिए मजबूत संकेत, दीर्घकाल में रिकॉर्ड स्तर पर बनी रह सकती है चमक

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितताओं और बदलते निवेश माहौल के बीच सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हालांकि अल्पकालिक अस्थिरता निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से सोने का भविष्य अब भी मजबूत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सोने की मांग उच्च स्तर पर बनी रह सकती है और इसकी कीमतों में मजबूती देखने को मिल सकती है।

    दुनियाभर में जारी युद्ध जैसे हालात, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता और विभिन्न देशों की आर्थिक नीतियों में बदलाव का सीधा असर सोने के बाजार पर पड़ रहा है। ऐसे समय में निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसके कारण सोना एक बार फिर भरोसेमंद निवेश साधन के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। यही वजह है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार में इसकी अहमियत लगातार बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे देशों में सोने की मांग केवल निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक परंपराओं से भी गहराई से जुड़ी हुई है। शादी-विवाह, त्योहारों और पारंपरिक अवसरों पर सोने की खरीदारी का चलन वर्षों से कायम है। इसके अलावा युवा आबादी में बढ़ती आय, संगठित ज्वैलरी बाजार का विस्तार और ब्रांडेड आभूषणों की बढ़ती स्वीकार्यता भी इस क्षेत्र की दीर्घकालिक संभावनाओं को मजबूत बना रही है।

    हालांकि बढ़ती कीमतों का असर उपभोक्ताओं की खरीदारी पर भी दिखाई दिया है। जब सोने के दाम तेजी से बढ़ते हैं तो कई ग्राहक खरीदारी को कुछ समय के लिए टाल देते हैं। वहीं कीमतों में स्थिरता आने या सीमित गिरावट होने पर बाजार में मांग फिर से बढ़ने लगती है। इससे स्पष्ट है कि उपभोक्ता पूरी तरह बाजार से दूर नहीं हो रहे हैं, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार अपने खरीद निर्णय में बदलाव कर रहे हैं।

    बीते वित्तीय वर्ष के दौरान सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। इसका प्रभाव शुरुआती महीनों में मांग पर पड़ा और बाजार में खरीदारी अपेक्षाकृत धीमी रही। हालांकि वर्ष के दूसरे हिस्से में स्थिति में सुधार देखने को मिला और आभूषणों के साथ-साथ सोने के सिक्कों की मांग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि ऊंची कीमतों के बावजूद सोने के प्रति उपभोक्ताओं का भरोसा बरकरार है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। कई देशों द्वारा व्यापारिक नीतियों में बदलाव, आयात शुल्क में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों ने कारोबारी रणनीतियों को प्रभावित किया है। इसके बावजूद कंपनियां बदलते वैश्विक माहौल के अनुरूप अपनी योजनाओं में संशोधन कर अवसरों का लाभ उठाने की दिशा में काम कर रही हैं। मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए कारोबारी सतर्कता भी बढ़ाई गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अब भी एक महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बना रहेगा। आर्थिक अस्थिरता, महंगाई और वैश्विक जोखिमों के दौर में सोना निवेश पोर्टफोलियो को संतुलित रखने का प्रभावी माध्यम माना जाता है। यही कारण है कि बाजार में अस्थायी उतार-चढ़ाव के बावजूद दीर्घकाल में सोने की चमक बरकरार रहने और इसकी मांग मजबूत बने रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

  • भू-राजनीतिक तनाव घटते ही सोना-चांदी में भारी गिरावट, लगातार तीसरे सत्र की बिकवाली ने निवेशकों की बढ़ाई चिंता

    भू-राजनीतिक तनाव घटते ही सोना-चांदी में भारी गिरावट, लगातार तीसरे सत्र की बिकवाली ने निवेशकों की बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने और निवेशकों का जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर झुकाव बढ़ने के कारण शुक्रवार को कीमती धातुओं के बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में सोना और चांदी दोनों दबाव में रहे, जिससे बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हुई तेज बिकवाली ने सोना-चांदी की कीमतों को महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे पहुंचा दिया है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने की कीमतों में कारोबार की शुरुआत से ही कमजोरी का रुख दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में सोना दो प्रतिशत से अधिक टूट गया और दिन के दौरान इसमें और गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में मध्य पूर्व समेत कई क्षेत्रों में तनाव कम होने से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने से दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसका सीधा असर कीमतों पर देखने को मिला है।

    चांदी के बाजार में भी भारी दबाव बना रहा। कारोबार के दौरान चांदी में तीन प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह दिन के निचले स्तरों तक पहुंच गई। विश्लेषकों का मानना है कि चांदी पर दोहरी मार पड़ी है। एक ओर सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर हुई है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक बाजारों में बिकवाली का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ा है।

    अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में भी इसी तरह का रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजार में सोना और चांदी दोनों कमजोर कारोबार करते नजर आए। निवेशकों का ध्यान अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और महंगाई से जुड़े जोखिमों पर अधिक केंद्रित हो गया है। इससे कीमती धातुओं में निवेश का आकर्षण फिलहाल कुछ कम हुआ है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में सोना और चांदी दोनों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को काफी हद तक मुनाफावसूली का परिणाम भी माना जा रहा है। उनका कहना है कि ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव, महंगाई को लेकर आशंकाएं, ब्याज दरों से जुड़े संकेत और डॉलर की मजबूती जैसे कारकों ने निवेशकों की रणनीतियों को प्रभावित किया है। इसके अलावा, लीवरेज्ड ट्रेडिंग पोजीशन के कम होने से भी बाजार में बिकवाली बढ़ी है।

    हालांकि विशेषज्ञ इस गिरावट को दीर्घकालिक दृष्टि से पूरी तरह नकारात्मक नहीं मानते। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ता सरकारी कर्ज, केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितताएं अभी भी सोने के पक्ष में मजबूत आधार प्रदान करती हैं। यही कारण है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमती धातुएं अब भी आकर्षक निवेश विकल्प बनी हुई हैं।

    बाजार जानकारों का मानना है कि फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कीमतें अपने निचले स्तर पर पहुंच चुकी हैं या गिरावट का दौर कुछ और समय तक जारी रहेगा। अल्पकालिक निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, जबकि लंबी अवधि का नजरिया रखने वाले निवेशकों के लिए यह अपने पोर्टफोलियो में कीमती धातुओं की हिस्सेदारी पर विचार करने का उपयुक्त समय हो सकता है।

    सोना और चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम का इन धातुओं पर सीधा प्रभाव पड़ता है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों, केंद्रीय बैंकों के फैसलों और आर्थिक संकेतकों के आधार पर बाजार की दिशा तय होगी, जिस पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

  • डॉलर में कमजोरी और पश्चिम एशिया तनाव से चमकी कीमती धातुएं, सोना रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा, चांदी में भी उछाल हेडलाइन विकल्प 2:

    डॉलर में कमजोरी और पश्चिम एशिया तनाव से चमकी कीमती धातुएं, सोना रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा, चांदी में भी उछाल हेडलाइन विकल्प 2:

    नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच गुरुवार को घरेलू कमोडिटी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। डॉलर में आई कमजोरी और सुरक्षित निवेश विकल्पों की बढ़ती मांग ने कीमती धातुओं को समर्थन प्रदान किया। निवेशकों ने जोखिम वाले परिसंपत्तियों से दूरी बनाते हुए सोने और चांदी की ओर रुख किया, जिसके चलते दोनों धातुओं के वायदा भाव में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के अगस्त वायदा अनुबंध में कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखी गई। शुरुआती सत्र से ही पीली धातु मजबूत रुख के साथ कारोबार करती रही और दिन के दौरान ऊंचे स्तर तक पहुंच गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और डॉलर की कमजोरी ने सोने को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जब भी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशक आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में प्राथमिकता देते हैं।

    चांदी की कीमतों में भी दिनभर उतार-चढ़ाव के बीच मजबूती बनी रही। कारोबार के शुरुआती चरण में चांदी ने ऊंचे स्तर को छुआ, हालांकि बाद में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली। इसके बावजूद कुल मिलाकर चांदी के भाव सकारात्मक दायरे में बने रहे। बाजार विश्लेषकों के अनुसार औद्योगिक मांग और सुरक्षित निवेश दोनों कारणों से चांदी को भी समर्थन मिल रहा है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। हालिया सैन्य गतिविधियों और अमेरिका तथा ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी संभावित संघर्ष या अस्थिरता का सीधा प्रभाव कमोडिटी बाजारों पर पड़ता है, विशेषकर सोने जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों पर। यही कारण है कि हाल के दिनों में कीमती धातुओं में निवेश बढ़ा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक समाधान से जुड़ी खबरों पर भी नजर बनाए हुए है। यदि तनाव कम करने की दिशा में कोई सकारात्मक प्रगति होती है तो सोने और चांदी की कीमतों में कुछ दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं यदि अनिश्चितता बनी रहती है तो सुरक्षित निवेश की मांग और बढ़ सकती है।

    इस बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। तेल बाजार में नरमी से वैश्विक मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी निवेशकों की प्राथमिक चिंता बने हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में डॉलर की चाल, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और पश्चिम एशिया की स्थिति सोने-चांदी की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    विश्लेषकों के अनुसार, तकनीकी दृष्टि से भी सोना और चांदी महत्वपूर्ण स्तरों के आसपास कारोबार कर रहे हैं। यदि ये धातुएं अपने प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार कर स्थिर होती हैं तो आगे और तेजी की संभावना बन सकती है। हालांकि निवेशकों को वर्तमान अस्थिर माहौल में सावधानी बरतने और वैश्विक घटनाक्रमों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • सोने-चांदी के दामों में जोरदार उछाल, निवेशकों की मांग बढ़ी.

    सोने-चांदी के दामों में जोरदार उछाल, निवेशकों की मांग बढ़ी.


    नई दिल्ली। शुक्रवार सुबह घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। Multi Commodity Exchange यानी MCX पर सोने के भाव 500 रुपये से अधिक बढ़ गए और चांदी के भाव में 9,000 रुपये से भी अधिक की उछाल दर्ज की गई। सुबह के शुरुआती कारोबार में अप्रैल डिलीवरी वाला सोना 525 रुपये बढ़कर 1,60,234 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इसी तरह मई डिलीवरी वाली चांदी में 9,547 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी के बाद भाव 2,77,500 रुपये तक जा पहुंचा। हालांकि दिन के मध्य में थोड़ी मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में तेजी की लहर मजबूत बनी रही।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी की इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक तनाव मुख्य कारण हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता, अमेरिकी टैरिफ को लेकर निवेशकों की चिंताएं और वैश्विक बाजार में सॉलिडिटी की तलाश ने कीमती धातुओं में मांग बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हुए सोने-चांदी को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    विशेष रूप से चांदी की कीमत में इतनी तेज बढ़ोतरी देखी गई है कि यह फिर से 2.75 लाख रुपये प्रति किलो के पार चली गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और बढ़ता रहा तो यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है। सोने में निवेशकों की मजबूत रुचि के कारण एमसीएक्स पर सोने के कारोबार में भी जोरदार तेजी बनी रही।

    इस तेजी का असर सिर्फ निवेशकों तक सीमित नहीं रहा बल्कि ज्वेलरी मार्केट और स्थानीय सोने-चांदी व्यापारियों के भाव में भी असर दिखा। व्यापारियों ने कहा कि खरीदारी में तेजी के चलते कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषकर त्योहार और शादी के सीजन में सोने-चांदी की कीमतों में इतनी तेज बढ़ोतरी आम लोगों के बजट को प्रभावित कर सकती है।

    विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि निवेशक भावों में अचानक उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर निवेश करें। हालांकि सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में सोना और चांदी हमेशा आकर्षक रहे हैं, लेकिन मौजूदा समय में वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के कारण उतार-चढ़ाव अधिक देखने को मिल रहा है।

    इस बीच, घरेलू वायदा बाजार में एमसीएक्स के आंकड़े बताते हैं कि सोना और चांदी में तेजी की शुरुआत सुबह के शुरुआती कारोबार से ही हुई थी और निवेशकों ने इसी लहर का फायदा उठाया। अप्रैल डिलीवरी वाले सोने का भाव लगातार बढ़कर 1,60,234 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी ने 2,77,500 रुपये प्रति किलो का स्तर छू लिया।

    वैश्विक निवेशकों की नजरों में बढ़ते तनाव और टैरिफ अस्थिरता ने सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश का प्रमुख साधन बना दिया है। इसलिए घरेलू बाजार में भी तेजी की यह लहर मजबूत बनी हुई है। निवेशक और व्यापारी इस उछाल का लाभ उठाने की रणनीति बना रहे हैं।

  • भारत में गोल्ड ETF में 98% उछाल, दुनिया भर के निवेशक सोने की ओर खिंचे

    भारत में गोल्ड ETF में 98% उछाल, दुनिया भर के निवेशक सोने की ओर खिंचे


    नई दिल्ली। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत के गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में 2.49 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश आया। यह दिसंबर 2025 के 1.25 अरब डॉलर से 98 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी है। यह लगातार आठवां महीना है जब गोल्ड ETF में निवेश बढ़ रहा है।

    2025 का निवेश सिलसिला जारी

    साल 2025 में मार्च और मई को छोड़कर हर महीने गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा। पूरे साल 2025 में कुल 4.68 अरब डॉलर का निवेश आया, जो 2024 के 1.29 अरब डॉलर से 262 प्रतिशत अधिक है। तुलना करें तो 2023 में यह केवल 310 मिलियन डॉलर और 2022 में महज 33 मिलियन डॉलर था।

    वैश्विक स्तर पर भी रिकॉर्ड

    दुनियाभर में भी निवेशकों ने सोना ETF में पैसा लगाना जारी रखा। जनवरी में वैश्विक सोना ETF में 19 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो अब तक का सबसे मजबूत मासिक फंड फ्लो है। सोने की कीमतों में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ, वैश्विक सोना ETF में प्रबंधित संपत्ति 669 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछले महीने से 20 प्रतिशत अधिक है। वैश्विक होल्डिंग भी 120 टन बढ़कर 4,145 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

    एशिया ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

    एशियाई गोल्ड ETF में जनवरी में 10 अरब डॉलर का निवेश आया, जो 2025 के मासिक औसत से काफी अधिक है। यह क्षेत्र लगातार पांचवें महीने निवेश में वृद्धि दिखा रहा है और अब तक का सबसे मजबूत मासिक प्रवाह दर्ज किया है।

    सभी क्षेत्रों में बढ़त
    जनवरी में उत्तरी अमेरिका और एशिया ने वैश्विक मांग को बढ़ावा दिया। उत्तरी अमेरिका में दूसरा सबसे बड़ा मासिक फ्लो दर्ज किया गया, जबकि एशिया ने अपना सर्वाधिक मासिक प्रवाह देखा। यूरोप में भी भू-राजनीतिक और व्यापारिक तनावों के बावजूद निवेश उल्लेखनीय रहा।

    गिरावट के बावजूद निवेश जारी

    सोने की कीमतों में कुछ गिरावट के बावजूद, यूरोप को छोड़कर सभी क्षेत्रों में 30 जनवरी और 2 फरवरी को शुद्ध निवेश जारी रहा। निवेशकों ने कीमतों में गिरावट का फायदा उठाते हुए खरीदारी जारी रखी।

    निवेश को सहारा देने वाले कारक
    जनवरी में निवेश को शुरुआती कीमतों में तेजी, अमेरिका और ईरान, ग्रीनलैंड और यूरोप में भू-राजनीतिक तनावों ने सहारा दिया। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर अपरिवर्तित रखने के बावजूद, केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और नए फेड चेयर केविन वॉर्श की नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी रही। इसके साथ ही ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों ने गोल्ड ETF की मांग बनाए रखी।