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  • सागर में हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस को अलमारी में मिले नोटों से भरे 4 बैग, 3 करोड़ से ज्यादा नकदी बरामद

    सागर में हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस को अलमारी में मिले नोटों से भरे 4 बैग, 3 करोड़ से ज्यादा नकदी बरामद

    सागर। सागर शहर के तिली क्षेत्र में रविवार को हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस उस समय हैरान रह गई, जब तलाशी के दौरान एक अलमारी से नकदी से भरे चार बैग बरामद हुए। बैगों में 500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी थीं। पुलिस के अनुसार, बरामद नकदी की रकम 3 करोड़ रुपये से अधिक है। देर रात तक इलेक्ट्रॉनिक मशीन से नोटों की गिनती की जाती रही।

    मामला गोपालगंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस को शिकायत मिली थी कि स्थानीय निवासी सौरभ अहिरवार ने सोशल मीडिया पर पिस्टल के साथ तस्वीर पोस्ट की है। इसके बाद घर में अवैध हथियार होने की आशंका पर पुलिस की विशेष टीम ने तिली स्थित उसके मकान पर तलाशी की।

    बंद अलमारी खोलते ही मिले नकदी से भरे बैग

    पुलिस के मुताबिक, तलाशी के दौरान कमरे में रखी एक बंद अलमारी को पंचनामा तैयार कर खुलवाया गया। अलमारी के भीतर चार भारी बैग रखे मिले। जब बैग खोले गए तो उनमें 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां देखकर पुलिस अधिकारी भी चौंक गए।

    मामले की सूचना मिलते ही एसपी अनुराग सुजानिया और एएसपी नरेंद्र सोलंकी समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। बरामद रकम इतनी अधिक थी कि नोटों की गिनती के लिए इलेक्ट्रॉनिक करेंसी काउंटर मशीन मंगानी पड़ी।


    देर रात तक होती रही नोटों की गिनती

    पुलिस के अनुसार, नोटों की गिनती दोपहर बाद शुरू हुई और रात करीब 12 बजे तक चलती रही। शुरुआती गिनती में अकेले एक बैग से करीब 1.33 करोड़ रुपये मिलने की बात सामने आई है। चारों बैगों की कुल रकम 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

    पूरी कार्रवाई में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पुलिस ने नोटों की बरामदगी और गिनती की वीडियोग्राफी भी कराई।

    रिश्तेदार के पैसे होने का दावा

    पूछताछ में परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि बरामद रकम भोपाल निवासी उनके रिश्तेदार रमेश अहिरवार की है। परिजनों का दावा है कि करीब आठ महीने पहले रमेश ने यह रकम अमानत के तौर पर यहां रखी थी।

    हालांकि पुलिस इस दावे की पुष्टि के लिए दस्तावेज और रकम के स्रोत की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि मामले में हवाला कारोबार या बेनामी और अघोषित संपत्ति का कोण भी हो सकता है।

    40 लाख के प्लॉट की भी जानकारी जुटा रही पुलिस

    स्थानीय स्तर पर यह भी जानकारी सामने आई है कि परिवार के रहन-सहन में हाल के दिनों में अचानक बदलाव आया था। पुलिस को सौरभ द्वारा हाल में करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट खरीदे जाने की जानकारी भी मिली है। अब पुलिस इस संपत्ति की खरीद और बरामद नकदी के बीच किसी संबंध की भी जांच कर रही है।

    मामले की सूचना आयकर और राजस्व विभाग को दे दी गई है। पुलिस और संबंधित विभाग अब बरामद रकम के वैध स्रोत, उसके मालिकाना हक और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। हथियार की तलाश में शुरू हुई कार्रवाई अब करोड़ों रुपये की नकदी के स्रोत की जांच तक पहुंच गई है।

  • गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    मध्य प्रदेश:  के पूर्व मंत्री और रहली विधानसभा क्षेत्र से लगातार नौ बार विधायक रहे गोपाल भार्गव का एक बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। रहली में वीर दुर्गादास राठौर जयंती समारोह के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। इसी दौरान उन्होंने अपने आलोचकों पर भी तीखा तंज कसा।

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि बीजेपी में प्रत्येक कार्यकर्ता का अपना महत्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने प्रसंग का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, पार्टी में किसी कार्यकर्ता की अहमियत किसी पद या बाहरी प्रमाण से तय नहीं होती, बल्कि संगठन के प्रति उसकी भूमिका और योगदान महत्वपूर्ण होता है।

    इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। उनके इस बयान की चर्चा इसलिए भी तेज हुई क्योंकि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर उनके नाम से जुड़ा एक स्थानीय विवाद सामने आया था। इसी विवाद को उनके ताजा बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दरअसल, कुछ दिन पहले एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति गोपाल भार्गव के गढ़ाकोटा स्थित निवास के बाहर लगे बोर्ड पर एक पर्चा चिपकाता दिखाई दिया था। इस पर्चे में भार्गव को ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ कहकर निशाना बनाया गया था। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी।

    रहली के कार्यक्रम में भार्गव ने इसी तरह की आलोचनाओं का जवाब देते हुए हाथी और कुत्ते का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हाथी अपनी चाल से आगे बढ़ता रहता है और उसके पीछे कुत्ते भौंकते रहते हैं। उनके बयान का आशय यह था कि आलोचना के बावजूद व्यक्ति को अपने रास्ते और काम से विचलित नहीं होना चाहिए।

    भार्गव ने अपने संबोधन में चींटियों और गन्ने का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की कि सार्वजनिक जीवन में आलोचनाएं होती रहती हैं, लेकिन उन्हें अपनी जिम्मेदारी और लक्ष्य से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बीजेपी कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री के समान बताने वाला उनका बयान पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर उनकी सोच को भी सामने रखता है। उन्होंने कहा कि संगठन में कोई सेवक की भूमिका निभाता है तो कोई जनप्रतिनिधि के तौर पर जिम्मेदारी संभालता है। उनके अनुसार, पार्टी में हर स्तर के कार्यकर्ता का अपना महत्व है।

    गोपाल भार्गव का मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वह रहली विधानसभा सीट से लगातार नौ बार निर्वाचित हो चुके हैं और राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उनके सार्वजनिक बयानों पर राजनीतिक नजर बनी रहती है।

    इस बार भी उनके बयान के दो हिस्से सबसे अधिक चर्चा में हैं। पहला, बीजेपी के हर कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री जैसा बताना और दूसरा, आलोचकों के लिए ‘भौंकने वालों’ वाली टिप्पणी करना। उनके समर्थक इसे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

    फिलहाल बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, भार्गव ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के महत्व और आलोचनाओं से प्रभावित न होने का संदेश दिया। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ विवाद अब उनके बयान के कारण व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।

  • सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा

    सागर और सिवनी एयरक्रैश की जांच रिपोर्ट आई सामने, 48 घंटे में हुए दोनों हादसों की वजहों से उठा पर्दा


    भोपाल। पिछले वर्ष दिसंबर में मध्य प्रदेश में महज 48 घंटे के भीतर हुए दो ट्रेनी विमान हादसों की शुरुआती जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार दोनों दुर्घटनाएं अलग-अलग तकनीकी कारणों से हुईं। एक हादसा सिवनी में इंजन की शक्ति कम होने के कारण हुआ, जबकि दूसरा सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर गो-अराउंड प्रक्रिया के दौरान विमान के अनियंत्रित होने से हुआ। राहत की बात यह रही कि दोनों घटनाओं में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और प्रशिक्षु पायलट तथा प्रशिक्षक सुरक्षित बच गए।

    रिपोर्ट के मुताबिक पहला हादसा 8 दिसंबर को सिवनी जिले के सुकतारा एयरफील्ड के पास हुआ था। रेडबर्ड एविएशन अकादमी का टेकनम पी-मेंटर प्रशिक्षण विमान लैंडिंग की तैयारी कर रहा था, तभी अचानक इंजन के आरपीएम में गिरावट दर्ज की गई। प्रशिक्षक के निर्देश पर थ्रॉटल बढ़ाने के बावजूद इंजन से अपेक्षित शक्ति नहीं मिली। स्थिति को देखते हुए प्रशिक्षक ने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर खेत में आपातकालीन लैंडिंग कराने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान विमान बिजली के तारों से टकरा गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

    इसके ठीक दो दिन बाद 10 दिसंबर को सागर के ढाना एयरस्ट्रिप पर चाइम्स एविएशन अकादमी का सेसना-172एस प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार विमान लैंडिंग के दूसरे प्रयास में निर्धारित टचडाउन क्षेत्र से आगे तक हवा में तैरता रहा। जब रनवे समाप्त होने की स्थिति बनी तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने पायलट को गो-अराउंड करने का निर्देश दिया। जैसे ही ट्रेनी पायलट ने थ्रॉटल बढ़ाया, विमान अचानक तेजी से ऊपर उठा और बाईं ओर झुकते हुए नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद वह रनवे से बाहर कच्चे क्षेत्र में गिर गया।

    AAIB की शुरुआती जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि दोनों विमानों के रखरखाव में कोई गंभीर कमी नहीं मिली। उड़ान से पहले दोनों विमानों की नियमित तकनीकी जांच पूरी की गई थी और किसी प्रकार की खराबी दर्ज नहीं थी। दोनों प्रशिक्षु पायलटों और प्रशिक्षकों का ब्रेथ एनालाइजर परीक्षण भी सामान्य पाया गया, जिससे किसी प्रकार के नशे या स्वास्थ्य संबंधी समस्या की आशंका से इनकार किया गया है।

    हालांकि जांच एजेंसी ने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विस्तृत तकनीकी विश्लेषण जारी रखा है। दोनों विमानों के डिजिटल डिस्प्ले से प्राप्त मेमोरी कार्ड, इंजन कंट्रोल यूनिट, सीसीटीवी फुटेज और ईंधन के नमूनों को विशेषज्ञ प्रयोगशालाओं में भेजा गया है। इनकी रिपोर्ट आने के बाद दुर्घटनाओं के अंतिम कारणों की पुष्टि की जाएगी।

    चूंकि दोनों विमान विदेशी निर्माताओं के थे, इसलिए अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) और जर्मनी की बुंडेसस्टेले फ्यूर फ्लुगउनफालउनटर्सुखुंग (BFU) को भी जांच की जानकारी भेजी गई है। जरूरत पड़ने पर इन एजेंसियों से तकनीकी सहयोग भी लिया जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण उड़ानों में छोटी तकनीकी गड़बड़ी या प्रक्रिया संबंधी चूक भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में इन दोनों मामलों की अंतिम जांच रिपोर्ट देश की फ्लाइंग ट्रेनिंग अकादमियों के लिए महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकती है। इससे भविष्य में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने तथा प्रशिक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • सागर में गुरु पूर्णिमा पर मां राजराजेश्वरी का भव्य महाअनुष्ठान, देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की तैयारी

    सागर में गुरु पूर्णिमा पर मां राजराजेश्वरी का भव्य महाअनुष्ठान, देश-विदेश से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की तैयारी

    नई दिल्ली ।  इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पर्व एक भव्य धार्मिक आयोजन के रूप में मनाया जाएगा। शहर के धर्म श्री क्षेत्र स्थित बालाजी मंदिर परिसर में मां राजराजेश्वरी और मां ललिता त्रिपुर सुंदरी के एक करोड़ हरिद्रा (हल्दी) और कुमकुम महाअर्चन का आयोजन प्रस्तावित है। इस आयोजन को लेकर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं और प्रशासन तथा आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
    आयोजकों के अनुसार यह विशेष धार्मिक अनुष्ठान गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है, जिसे भारतीय परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध, साधना और आध्यात्मिक उन्नति का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। आयोजन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सामूहिक पूजा, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करना है। इसके लिए लगभग 20 एकड़ क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    बताया गया है कि आयोजन का शुभारंभ 29 जुलाई की शाम छह बजे होगा। अनुष्ठान में 1100 वैदिक विद्वान और पंडित वैदिक मंत्रों के साथ सामूहिक अर्चन संपन्न कराएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर साधना, जप, तप और पूजा का विशेष महत्व होता है। इसी कारण इस अवसर पर आयोजित होने वाला यह महाअर्चन श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

    आयोजन समिति का दावा है कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए किसी प्रकार का शुल्क निर्धारित नहीं किया गया है। बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए आवागमन, बैठने, पेयजल, प्रसाद वितरण और अन्य मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। अनुमान है कि आयोजन के दौरान करीब एक लाख श्रद्धालु परिसर में पहुंच सकते हैं, जिसके लिए व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

    धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी मात्रा में पूजा सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए हल्दी, कुमकुम, कमल पुष्प, नारियल, फल, प्रसाद और अन्य पूजन सामग्री की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए भी अलग-अलग प्रबंध किए जा रहे हैं। आयोजन की भव्यता को देखते हुए इसे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल माना जा रहा है।

    धार्मिक आयोजकों का कहना है कि गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि समाज में आध्यात्मिक चेतना, सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर भी है। इसी उद्देश्य से इस महाअनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालुओं की भागीदारी अपेक्षित है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।

    गुरु पूर्णिमा के इस विशेष अवसर पर सागर में होने वाला यह महाअर्चन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामूहिक सहभागिता का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव के साथ-साथ सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता का भी संदेश देगा।

  • बस ऑपरेटरों का सरकार को अल्टीमेटम किराया नहीं बढ़ा तो प्रदेशव्यापी हड़ताल पर होगा फैसला

    बस ऑपरेटरों का सरकार को अल्टीमेटम किराया नहीं बढ़ा तो प्रदेशव्यापी हड़ताल पर होगा फैसला


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में बस किराया बढ़ाने की मांग अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। लंबे समय से सरकार से किराया संशोधित करने की मांग कर रहे निजी बस संचालकों ने अब आंदोलन का रुख अपनाने की तैयारी शुरू कर दी है। लगातार आश्वासनों के बावजूद किराया वृद्धि पर कोई ठोस फैसला नहीं होने से नाराज मध्य प्रदेश बस ओनर्स एसोसिएशन ने 26 जुलाई को सागर में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में प्रदेश के सभी 55 जिलों से प्रतिनिधि शामिल होंगे और आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।

    एसोसिएशन के अनुसार सागर के भोपाल रोड स्थित आदर्श गार्डन में दोपहर एक बजे होने वाली बैठक में प्रत्येक जिले से कम से कम पांच प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। बैठक का मुख्य एजेंडा बस किराया बढ़ाने की मांग, 7 जुलाई को जारी राज्य सड़क परिवहन योजना के राजपत्र और बस संचालकों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना होगा। यदि सरकार की ओर से जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं आता है तो प्रदेशव्यापी आंदोलन और हड़ताल की रूपरेखा भी इसी बैठक में तय की जा सकती है।

    बस संचालकों का कहना है कि परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के साथ कई दौर की बातचीत में किराया बढ़ाने का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई आदेश जारी नहीं हुआ। इस बीच डीजल की कीमतों के साथ-साथ स्पेयर पार्ट्स, टायर, बीमा, फिटनेस, कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इससे निजी बसों का संचालन आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो गया है और कई ऑपरेटरों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।

    एसोसिएशन का तर्क है कि पड़ोसी राज्यों ने समय-समय पर बस किराए में संशोधन किया है। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने भी बस किराए में वृद्धि की है। ऐसे में मध्य प्रदेश में वर्षों से किराया नहीं बढ़ने के कारण यहां के बस संचालक प्रतिस्पर्धा और बढ़ती लागत के बीच आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

    बैठक में राज्य सड़क परिवहन योजना के तहत सरकारी बसों के संचालन से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। हाल ही में सरकार ने प्रदेश में सरकारी बसों के संचालन के लिए 40 प्रमुख रूट प्रस्तावित किए हैं और इस संबंध में आपत्तियां व सुझाव भी आमंत्रित किए हैं। निजी बस संचालक इस योजना के संभावित प्रभाव पर भी विचार करेंगे।

    बस संचालकों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। ऐसे में 26 जुलाई को सागर में होने वाली बैठक पर पूरे प्रदेश के परिवहन क्षेत्र की नजरें टिकी हैं। माना जा रहा है कि इसी बैठक में आगे की रणनीति तय होगी और जरूरत पड़ने पर हड़ताल की घोषणा भी की जा सकती है।

  • डेढ़ साल के बच्चे की आंखों की रोशनी पर जांच रिपोर्ट, नोजल ड्रॉप से संक्रमण की आशंका खारिज; एम्स भोपाल में होगा कॉर्निया ट्रांसप्लांट

    डेढ़ साल के बच्चे की आंखों की रोशनी पर जांच रिपोर्ट, नोजल ड्रॉप से संक्रमण की आशंका खारिज; एम्स भोपाल में होगा कॉर्निया ट्रांसप्लांट

    मध्य प्रदेश  सागर जिले के बंडा सिविल अस्पताल में इलाज के बाद डेढ़ साल के बच्चे की आंखों की रोशनी प्रभावित होने के मामले में स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि बच्चे की आंखों की गंभीर समस्या का कारण अस्पताल में डाली गई कथित नोजल ड्रॉप नहीं, बल्कि कुपोषण और विटामिन-ए की कमी से विकसित हुए कॉर्नियल अल्सर हैं। हालांकि, जिस नोजल ड्रॉप का उल्लेख परिजनों ने किया है, वह बच्चे तक कैसे पहुंची, इसकी जांच अभी जारी है।

    स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार बच्चे का उपचार फिलहाल भोपाल स्थित एम्स में चल रहा है, जहां उसकी आंखों की स्थिति को देखते हुए कॉर्निया ट्रांसप्लांट की तैयारी की जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे के उपचार के लिए आवश्यक सभी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी और शासन स्तर पर भी हरसंभव सहायता दी जाएगी।

    जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिस बैच की नोजल ड्रॉप को लेकर आरोप लगाए गए थे, वह अस्पताल के उपलब्ध स्टॉक में मौजूद ही नहीं थी। विशेषज्ञों ने बताया कि सामान्य सलाइन आधारित नोजल ड्रॉप से आंखों की स्थायी रोशनी जाना चिकित्सकीय दृष्टि से संभव नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में अधिकतम अस्थायी जलन या हल्की असुविधा हो सकती है, लेकिन स्थायी दृष्टि हानि का कारण नहीं बनती।

    यह मामला तब सामने आया था जब भूसा कमलपुर निवासी इंद्राज विश्वकर्मा अपने डेढ़ वर्षीय पुत्र विनय को सर्दी और आंखों में लालिमा की शिकायत के चलते बंडा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप था कि चिकित्सकीय पर्चे के आधार पर आई ड्रॉप की जगह उन्हें नोजल ड्रॉप दे दी गई, जिसे आंखों में डालने के बाद बच्चे की आंखों में तेज जलन हुई और बाद में उसकी रोशनी चली गई। हालत बिगड़ने पर बच्चे को पहले सागर और फिर भोपाल एम्स रेफर किया गया।

    परिजनों का यह भी दावा रहा कि भोपाल में चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान उन्हें इलाज में लापरवाही और संक्रमण की आशंका के बारे में बताया गया था। इसके बाद मामले ने गंभीर रूप ले लिया और परिवार ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष जांच तथा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।

    मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की थी। टीम ने दो दिनों तक अस्पताल के रिकॉर्ड, दवा वितरण प्रणाली, चिकित्सकीय दस्तावेज और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की। जांच में विशेषज्ञों ने बच्चे की आंखों की समस्या को विटामिन-ए की कमी से उत्पन्न कॉर्नियल अल्सर से जुड़ा माना है, जो गंभीर कुपोषण की स्थिति में विकसित हो सकता है।

    हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। विशेष रूप से इस पहलू की पड़ताल की जा रही है कि परिजनों के पास कथित नोजल ड्रॉप कैसे पहुंची और उसका स्रोत क्या था। जांच पूरी होने के बाद यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बच्चे के उपचार और दृष्टि बचाने के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में चिकित्सा जारी है।

  • देव-दत्तात्रेय लोक न्यास भूमि विवाद हाईकोर्ट पहुंचा: ट्रस्टियों ने कलेक्टर-एसडीएम पर लगाई अवमानना की याचिका

    देव-दत्तात्रेय लोक न्यास भूमि विवाद हाईकोर्ट पहुंचा: ट्रस्टियों ने कलेक्टर-एसडीएम पर लगाई अवमानना की याचिका


    मध्य प्रदेश । सागर जिले के गौरझामर स्थित देव-दत्तात्रेय लोक न्यास की संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है। ट्रस्ट की भूमि पर कथित अतिक्रमण, अवैध निर्माण और प्रशासनिक निष्क्रियता के आरोपों के बीच चार ट्रस्टियों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ट्रस्टियों का आरोप है कि कई वर्षों से उनकी शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण उन्हें अवमानना याचिका दायर करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    याचिकाकर्ता ट्रस्टियों का कहना है कि न्यास की भूमि पर लंबे समय से भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों का कब्जा बना हुआ है। इस संबंध में उन्होंने कई बार जिला प्रशासन, पुलिस और राजस्व अधिकारियों को लिखित शिकायतें दीं। शिकायतों में भूमि का सीमांकन कराने, अतिक्रमण हटाने और ट्रस्ट की संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई थी। हालांकि उनका आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई।

    मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ट्रस्टियों ने दावा किया है कि संबंधित भूमि पर बिना सक्षम अनुमति के एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया गया। उनका कहना है कि वर्ष 2012 में हाईकोर्ट ने ट्रस्ट की संपत्ति को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा, जो न्यायालय के आदेशों के प्रतिकूल माना जा रहा है। इसी आधार पर ट्रस्टियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की है।

    विवाद का एक अन्य पक्ष ट्रस्ट प्रबंधन से भी जुड़ा हुआ है। ट्रस्टियों का आरोप है कि पूर्व में प्रशासनिक स्तर पर ट्रस्ट रजिस्टर से चार ट्रस्टियों के नाम हटा दिए गए थे। बाद में इस कार्रवाई को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अवैध घोषित कर दिया था। इसके बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा, जहां भी संबंधित निर्णय को बरकरार रखा गया। इसके बावजूद ट्रस्टियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    याचिका में सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल, देवरी एसडीएम मुनब्बर खान और संबंधित तहसीलदार के खिलाफ न्यायालय की अवमानना संबंधी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। ट्रस्टियों का आरोप है कि न्यायालय के आदेशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने में प्रशासन विफल रहा है।

    याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि मंदिर से जुड़े पुजारी और श्रद्धालुओं के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई, जबकि ट्रस्ट की भूमि पर कथित अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों को रोकने के लिए समान गंभीरता नहीं दिखाई गई। इससे प्रशासनिक कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

    इसके अतिरिक्त ट्रस्टियों ने सार्वजनिक न्यास से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड की जानकारी भी मांगी है। उन्होंने वर्ष 2001 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025-26 तक ट्रस्ट की आय-व्यय और अन्य वित्तीय दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि ट्रस्ट की संपत्तियों और संसाधनों के उपयोग की पारदर्शी समीक्षा हो सके।

    फिलहाल मामला हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। आगामी सुनवाई में न्यायालय प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांग सकता है और यह स्पष्ट हो सकेगा कि न्यायालय के पूर्व आदेशों का पालन किस हद तक किया गया। इस मामले पर अब पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका प्रभाव न केवल ट्रस्ट की संपत्ति बल्कि धार्मिक और सार्वजनिक न्यासों के प्रबंधन से जुड़े व्यापक मुद्दों पर भी पड़ सकता है।

  • राजस्थान की गर्म हवाओं का असर: सागर में पारा 43°C पार, लू का अलर्ट

    राजस्थान की गर्म हवाओं का असर: सागर में पारा 43°C पार, लू का अलर्ट


    नई दिल्ली । सागर शहर इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। राजस्थान की ओर से आ रही गर्म हवाओं ने पूरे वातावरण को और अधिक तप्त बना दिया है, जिससे दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म महसूस की जा रही हैं।

    शुक्रवार को सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं का असर देखने को मिला। दोपहर तक हालात ऐसे हो गए कि बाजारों में सन्नाटा पसर गया और लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हो गए।

    मौसम विभाग के अनुसार सागर का अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सक्रिय मौसमीय सिस्टम और ट्रफ लाइन की वजह से हवा भट्टी जैसी गर्म हो रही है।

    राजस्थान से आने वाली गर्म हवाएं स्थिति को और गंभीर बना रही हैं, जिससे लू चलने की संभावना भी बढ़ गई है। अनुमान है कि रात का तापमान भी 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। दोपहर 12 से 3 बजे के बीच विशेष सावधानी बरतने, पर्याप्त पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है।

  • सागर में बिजली संकट: दो ट्रांसफार्मर जलकर खाक, पूरे इलाके में अफरा-तफरी

    सागर में बिजली संकट: दो ट्रांसफार्मर जलकर खाक, पूरे इलाके में अफरा-तफरी


    नई दिल्ली। सागर शहर में गुरुवार देर रात एक के बाद एक दो बिजली ट्रांसफार्मरों में आग लगने से हड़कंप मच गया। सिविल लाइन क्षेत्र में लगे ट्रांसफार्मर में अचानक धमाके के साथ आग भड़क उठी, जिससे आसपास का इलाका दहल गया।

    इसके कुछ ही समय बाद इतवारा बाजार के कचेरन कुआं क्षेत्र में भी एक अन्य ट्रांसफार्मर में आग लगने की घटना सामने आई। दोनों जगहों पर आग लगने से बिजली आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई इलाकों में अंधेरा छा गया।

    स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और बिजली विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची दमकल टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद करीब एक घंटे में आग पर काबू पाया। इस दौरान ट्रांसफार्मरों में लगातार धमाके और चिंगारियां निकलती रहीं, जिससे लोग दहशत में आ गए।

    आग के कारण दर्जनों घरों की बिजली सप्लाई ठप हो गई। गर्मी के मौसम में बिजली गुल होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह करीब 6 बजे तक मरम्मत कार्य के बाद आपूर्ति बहाल की जा सकी।

    बिजली विभाग की टीम फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच कर रही है। प्रारंभिक अनुमान में ओवरलोड या तकनीकी खराबी को वजह माना जा रहा है।

  • दिल दहला देने वाली घटना सागर में दंपती ने एक साथ दी जान कारण बना रहस्य

    दिल दहला देने वाली घटना सागर में दंपती ने एक साथ दी जान कारण बना रहस्य


    सागर । मध्यप्रदेश के सागर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है जहां एक दंपती ने एक साथ आत्महत्या कर ली जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। मामला शाहगढ़ थाना क्षेत्र के वाल्मीकि वार्ड का है जहां पति और पत्नी अपने ही घर में फांसी के फंदे पर लटके हुए मिले।

    जानकारी के अनुसार मृतकों की पहचान उत्तम अहिरवार उम्र करीब 45 वर्ष और उनकी पत्नी हरिबाई उम्र 42 वर्ष के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों पति पत्नी रात तक अपने घर के बाहर पड़ोसियों के साथ सामान्य बातचीत करते हुए बैठे थे और किसी तरह की परेशानी के संकेत भी नहीं मिले थे। लेकिन सुबह जब परिवार और आसपास के लोगों ने दरवाजा खोला तो दोनों को कमरे के अंदर फंदे पर लटका देख सभी के होश उड़ गए।

    घटना की सूचना मिलते ही मध्य प्रदेश पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई करते हुए दोनों शवों को फंदे से उतारा और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। बाद में शवों को परिजनों को सौंप दिया गया।

    प्रारंभिक जांच में आत्महत्या के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है और परिजनों तथा आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस घटना के पीछे की असली वजह सामने आ सके।

    इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। पड़ोसियों और परिचितों का कहना है कि दंपती का व्यवहार सामान्य था और उन्होंने कभी किसी बड़ी परेशानी का जिक्र नहीं किया था। ऐसे में दोनों का एक साथ यह कदम उठाना कई सवाल खड़े कर रहा है। परिवार के लोगों के लिए यह घटना गहरे सदमे से कम नहीं है। वहीं पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर किन परिस्थितियों ने इस दंपती को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर किया।