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  • सागर के इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल में छात्र का शव फंदे पर मिला, GATE परीक्षा की कर रहा था तैयारी

    सागर के इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल में छात्र का शव फंदे पर मिला, GATE परीक्षा की कर रहा था तैयारी

    मध्य प्रदेश: के सागर जिले में बहेरिया स्थित इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग कॉलेज (IGEC) के हॉस्टल में एक इंजीनियरिंग छात्र की मौत का मामला सामने आया है। कॉलेज के फाइनल ईयर में पढ़ने वाले छात्र विक्रमादित्य सिंह बघेल का शव हॉस्टल के स्टोर रूम में फंदे से लटका मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद कॉलेज और हॉस्टल परिसर में हलचल मच गई। मृतक मूल रूप से रीवा का निवासी था और इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। वह ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) परीक्षा की तैयारी भी कर रहा था।

    जानकारी के मुताबिक, छात्र का शव हॉस्टल परिसर में बने स्टोर रूम में मिला। घटना सामने आने के बाद वहां मौजूद छात्रों और कॉलेज परिसर में चर्चा शुरू हो गई। छात्र की मौत से उसके साथी और परिचित स्तब्ध हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में घटना के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि छात्र किन परिस्थितियों से गुजर रहा था और उसकी मौत के पीछे क्या वजह रही।

    विक्रमादित्य के रूममेट आकाश खरोले ने उसके पिछले कुछ दिनों के व्यवहार के बारे में जानकारी दी। आकाश के अनुसार, विक्रमादित्य पहले की तुलना में काफी शांत और गुमसुम रहने लगा था। वह कमरे में भी कम समय बिताता था। उसके व्यवहार में आए इस बदलाव को उसके साथी महसूस कर रहे थे। रूममेट ने बताया कि वह अपने करियर और भविष्य को लेकर तनाव में रहता था।

    आकाश के मुताबिक, विक्रमादित्य पढ़ाई में अच्छा था और GATE परीक्षा की तैयारी के लिए लगातार मेहनत कर रहा था। वह इस परीक्षा को लेकर गंभीर था और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहा था। इंजीनियरिंग की अंतिम वर्ष की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी उसके समय का महत्वपूर्ण हिस्सा थी। हालांकि, उसके रूममेट की ओर से बताई गई मानसिक स्थिति के आधार पर मौत का कारण तय नहीं किया जा सकता।

    छात्र की मौत की खबर सामने आने के बाद हॉस्टल में रहने वाले अन्य विद्यार्थियों के बीच भी चिंता का माहौल है। कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी अपने साथी की मौत से दुखी हैं। विक्रमादित्य रीवा का रहने वाला था, इसलिए उसके परिवार और परिचितों के लिए भी यह घटना गहरा झटका है।

    इस घटना ने छात्र जीवन में पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य को लेकर बनने वाले दबाव के मुद्दे को भी सामने रखा है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में विद्यार्थी अक्सर आगे की पढ़ाई, नौकरी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर कई तरह की चुनौतियों का सामना करते हैं। हालांकि, इस मामले में विक्रमादित्य की व्यक्तिगत परिस्थितियों के बारे में सीमित जानकारी ही सामने आई है। उसके रूममेट ने केवल इतना बताया है कि वह कुछ दिनों से शांत रहता था और करियर को लेकर तनाव में था।

    फिलहाल घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी सामने आना बाकी है। छात्र की मौत के वास्तविक कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। हॉस्टल के स्टोर रूम में शव मिलने की घटना के बाद अब यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि उस दिन क्या परिस्थितियां बनी थीं और छात्र की मौत से जुड़े अन्य तथ्य क्या हैं।

  • MP: सागर जहरीली शराब कांड के एक और आरोपी मनीष लोधी का शार्ट एनकाउंटर, पुलिस ने किया गिरफ्तार…

    MP: सागर जहरीली शराब कांड के एक और आरोपी मनीष लोधी का शार्ट एनकाउंटर, पुलिस ने किया गिरफ्तार…


    सागर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) के बंडा में हुए जहरीली शराब कांड (Spurious liquor) में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है. इस मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल मनीष लोधी (Manish Lodhi) उर्फ यशवंत ठाकुर को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है. मनीष लोधी पर 30 हजार रुपये का इनाम रखा गया था. उसके साथ आशीष साहू नाम के एक अन्य आरोपी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है. यह पूरी घटना मालथौन थाना क्षेत्र के नोनिया सेसई रोड घाटी पर हुई, जहां पुलिस और आरोपियों के बीच सीधी मुठभेड़ हुई।

    पुलिस के मुताबिक जब टीम आरोपियों को पकड़ने पहुंची तो दोनों तरफ से गोलीबारी की नौबत आ गई. इस दौरान मनीष लोधी के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया. वहीं पुलिस से बचकर भागने की कोशिश में उसका साथी आशीष साहू भी घायल हो गया. मुठभेड़ के बाद पुलिस ने मौके की तलाशी ली, जिसमें दो देशी कट्टे, पांच खाली राउंड और एक बेसबॉल डंडा बरामद किया गया है. दोनों घायल आरोपियों को इलाज के लिए तुरंत अस्पताल ले जाया गया है।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बंडा जहरीली शराब मामले में यह पुलिस की तीसरी मुठभेड़ है. इससे पहले भी इस मामले से जुड़े आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस कई बार मुठभेड़ कर चुकी है. मनीष लोधी को इस पूरे कांड का मुख्य किरदार माना जा रहा है, इसी वजह से पुलिस उसे पकड़ने के लिए लगातार कोशिश कर रही थी. अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे पूछताछ करेगी ताकि पूरे मामले की तह तक पहुंचा जा सके।

    पुलिस अभी भी अवैध शराब के इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और हर आरोपी की क्या भूमिका रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं. लोगों में इस मामले को लेकर काफी गुस्सा और चर्चा बनी हुई है, क्योंकि जहरीली शराब से कई लोगों की जान को खतरा हुआ था।

  • सागर जहरीली शराब कांड में मुख्य आरोपी रवि लखेरा गिरफ्तार, बरायठा जंगल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में लगी गोली

    सागर जहरीली शराब कांड में मुख्य आरोपी रवि लखेरा गिरफ्तार, बरायठा जंगल में पुलिस मुठभेड़ के दौरान पैर में लगी गोली

    मध्य प्रदेश: के सागर जिले में जहरीली शराब कांड के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी रवि लखेरा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी कई दिनों से फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। कार्रवाई के दौरान बरायठा के जंगल में पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें रवि लखेरा के पैर में गोली लगी।

    रवि लखेरा को बंडा जहरीली शराब कांड का मुख्य आरोपी बताया गया है। वह गढ़ी मलहरा शराब दुकान का ठेकेदार भी है। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर 20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी और उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही थी।

    बताया गया है कि जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद पुलिस ने मामले की जांच को आगे बढ़ाते हुए अवैध शराब से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल शुरू की थी। जांच के दौरान रवि लखेरा के साथ मनीष लोधी उर्फ यशवंत ठाकुर और शिवान्जय ठाकुर के नाम भी मुख्य आरोपियों के तौर पर सामने आए थे।

    पुलिस ने रवि लखेरा और मनीष लोधी की गिरफ्तारी पर 20-20 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इस कार्रवाई के बाद से पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। रवि लखेरा कई दिनों तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा और अलग-अलग ठिकानों पर छिपता रहा।

    पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को रवि लखेरा के बरायठा के जंगल में मौजूद होने की जानकारी मिलने के बाद उसे घेरने की कार्रवाई की गई। पुलिस ने जब उसे पकड़ने की कोशिश की तो उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।

    जवाबी कार्रवाई के दौरान रवि लखेरा के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। घायल आरोपी को इलाज के लिए सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उसका उपचार जारी है।

    पुलिस के मुताबिक, रवि लखेरा पहले भी नकली शराब से जुड़े मामलों में पुलिस के रडार पर रहा है। मई 2026 में उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में पकड़ी गई नकली शराब फैक्ट्री के मामले में भी उसका नाम सामने आया था। पुलिस की जांच में उसके अवैध शराब नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

    सागर में जहरीली शराब कांड के बाद पुलिस ने अवैध शराब के पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की थी। इसी जांच में रवि लखेरा समेत अन्य आरोपियों के नाम सामने आए थे। अब मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    मुठभेड़ के दौरान आरोपी के घायल होने के बाद उसे पुलिस निगरानी में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उसका इलाज जारी है। पुलिस की कार्रवाई से इस मामले में फरार चल रहे आरोपियों की तलाश और अवैध शराब नेटवर्क की जांच को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्रवाई हुई है।

  • सागर शराब कांड में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग, गोविंद सिंह राजपूत बोले दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाए

    सागर शराब कांड में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग, गोविंद सिंह राजपूत बोले दोषी कोई भी हो बख्शा नहीं जाए

    सागर जिले के बंडा विधानसभा क्षेत्र में जहरीली शराब से जुड़ी दुखद घटना के बाद मध्यप्रदेश के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने उनके परिवार से एक व्यक्ति को कथित तौर पर जोड़कर किए जा रहे दावों पर सफाई दी है। मंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में जिस व्यक्ति को उनके परिवार या रिश्तेदार से संबंधित बताया जा रहा है, उसका उनसे कोई संबंध नहीं है।

    गोविंद सिंह राजपूत ने बंडा क्षेत्र की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह हृदयविदारक घटना है और वह इससे बेहद दुखी हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा शोकाकुल परिवारों को इस कठिन समय का सामना करने की शक्ति मिलने की प्रार्थना की।

    मंत्री ने कहा कि घटना के बीच कुछ लोगों द्वारा एक गांव के व्यक्ति को उनके परिवार से जोड़ने का प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया। उनका कहना है कि संबंधित व्यक्ति उनका कोई रिश्तेदार नहीं है और उनके नाम को मामले से जोड़कर जानकारी प्रसारित करना गलत है।

    गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि उन्होंने स्वयं सागर पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना में शामिल व्यक्ति की पहचान या उसका किसी से संबंध कानून के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए।

    मंत्री ने कहा कि आरोपी किसी का रिश्तेदार या नातेदार हो अथवा किसी राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव से जुड़ा हो, कानून के सामने किसी को भी नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति इस घटना में दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि सागर जिला उनके परिवार को अच्छी तरह जानता है। मंत्री के अनुसार उनका पूरा परिवार शराब, सट्टा और जुआ जैसी गतिविधियों से हमेशा दूर रहा है। उन्होंने कहा कि वह किसी भी कार्यकर्ता को इस प्रकार की गतिविधियों में सहयोग या संरक्षण देने के पक्ष में नहीं हैं।

    मंत्री ने गंभीर घटना के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय सच्चाई सामने लाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनशील स्थिति में बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी व्यक्ति या परिवार को बदनाम करने वाली जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित नहीं की जानी चाहिए।

    गोविंद सिंह राजपूत ने दोहराया कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति को बदनाम करने के लिए भ्रामक जानकारी फैलाई जाती है, तो ऐसी गतिविधियों के खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

    बंडा क्षेत्र की घटना को लेकर मंत्री की सफाई का मुख्य केंद्र उनके परिवार से संबंधित बताए जा रहे व्यक्ति के आरोपों को खारिज करना और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग है। उन्होंने जांच में किसी भी तरह के प्रभाव या संबंध को आड़े नहीं आने देने की बात कही है।

    मंत्री ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि घटना में वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और अफवाहों के आधार पर किसी निर्दोष व्यक्ति को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके बयान में घटना की गंभीरता के बीच तथ्य सामने लाने और कानून के अनुसार कार्रवाई किए जाने पर जोर दिया गया।

  • सागर जहरीली शराब कांड पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, पूछा- 20 साल से BJP की सत्ता, जवाबदेही कब तय होगी?

    सागर जहरीली शराब कांड पर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, पूछा- 20 साल से BJP की सत्ता, जवाबदेही कब तय होगी?


    सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की मांग की। राहुल गांधी ने कहा कि मध्य प्रदेश में जहरीली दवा, शराब और दूषित पानी से लोगों की जान जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन 20 साल से अधिक समय से सत्ता में रहने वाली भाजपा सरकार इनसे सबक लेने और रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाने में नाकाम रही है।
    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में शासन व्यवस्था कमजोर हो गई है। उन्होंने सागर की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि जहरीली शराब ने कई परिवारों को उजाड़ दिया, लेकिन ऐसी घटनाओं के बाद एक जैसी कार्रवाई दोहराई जाती है—कुछ गिरफ्तारियां, कुछ अधिकारियों का निलंबन और जांच के आदेश। उनके मुताबिक, यह पहली बार नहीं हुआ है।

    इंदौर के दूषित पानी और जहरीली कफ सिरप का भी किया जिक्र

    राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में हाल की अन्य घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले इंदौर में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा पिछले साल जहरीली कफ सिरप से कई छोटे बच्चों की जान जाने का भी उन्होंने जिक्र किया।

    उन्होंने सवाल उठाया कि जहरीली दवा, शराब और पानी से जुड़ी घटनाओं के बाद नए कानून और नियम बनाए जाते हैं, लेकिन उनका प्रभावी पालन नहीं होता। राहुल गांधी ने कहा कि व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है, ताकि अगली घटना होने का इंतजार न करना पड़े।

    ‘छोटे कर्मचारियों तक सीमित न रहे कार्रवाई’

    राहुल गांधी ने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार को 20 साल से ज्यादा समय हो चुका है। उन्होंने सवाल किया कि हादसों की रोकथाम के लिए ठोस व्यवस्था क्यों नहीं बन पाई और हर घटना के बाद होने वाली कार्रवाई में जवाबदेही किस स्तर तक तय की जाती है।

    उन्होंने सागर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मौतों की पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। उनका कहना है कि कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि जांच में जिस किसी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आए, उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

    अब तक 15 मौतें, 14 आरोपी गिरफ्तार

    पुलिस के मुताबिक सागर जिले में जहरीली शराब त्रासदी में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। इलाज के दौरान दो और पीड़ितों की मौत होने के बाद यह आंकड़ा बढ़ा। पुलिस ने बताया कि मामले में कुल 30 आरोपियों में से अब तक 14 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

    इससे पहले मध्य प्रदेश कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सागर जिले के बांदा क्षेत्र में जहरीली शराब से कई परिवार तबाह हो गए हैं और वे न्याय की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर अपनी जिम्मेदारी से बचने का आरोप लगाया। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी प्रभावित परिवारों में से कुछ से मुलाकात की थी।

  • MP: सागर के बंड़ा में जहरीली शराब से 11 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, 5 अधिकारी निलंबित

    MP: सागर के बंड़ा में जहरीली शराब से 11 मौतों के बाद बड़ा एक्शन, 5 अधिकारी निलंबित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सागर जिले (Sagar district) की बंडा तहसील में जहरीली शराब (Spurious liquor) पीने से हुई मौतों के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सख्त रुख अपनाया है. रविवार सुबह ही मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि घटना के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा. इसके बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 आबकारी और दो पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया, जबकि एक सीनियर अफसर को जिले से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।

    घटना बंडा तहसील के गोगरा खुर्द, नौरोज और पाटन गांवों में सामने आई है. शुरुआती प्रशासनिक जानकारी के अनुसार जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है, जबकि स्थानीय बीजेपी विधायक ने मृतकों की संख्या 11 बताई है. कई अन्य लोगों के बीमार होने की भी जानकारी सामने आई है।


    3 अधिकारी सस्पेंड, 1 मुख्यालय अटैच

    मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माने जाने पर सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा वृत्त की आबकारी उप-निरीक्षक प्रोशनी उरेती को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं, मामले में समान रूप से जिम्मेदार माने जाने पर उपायुक्त और संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को जिले से हटाकर ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है. यानी जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में कुल 4 अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है।

    पुलिस विभाग ने भी इस प्रकरण में बंडा थाना प्रभारी श्री राजेंद्र सिंह कुशवाहा और गुगरा चौकी प्रभारी एसआई श्री पूरन लाल लड़िया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रविवार, 6 सितंबर की सुबह ही स्पष्ट रूप से कह दिया था कि इस घटना के लिए दोषी किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा।


    CM मोहन यादव ने कहा- दोषी किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना को बेहद संवेदनशील बताते हुए अधिकारियों को तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नई दिल्ली प्रवास के दौरान जैसे ही उन्हें सागर की घटना की जानकारी मिली, उन्होंने सागर जिले के प्रभारी मंत्री और संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्र में तत्काल जांच के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को राहत और बीमार लोगों के लिए समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।


    मौके पर पहुंचा सीनियर अफसरों का दल

    मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सागर संभाग के कमिश्नर, आईजी, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक समेत वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित इलाकों में पहुंचे. अधिकारी दल ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली. इसके साथ ही अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज और चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्क्रीनिंग भी कराई जा रही है, ताकि शराब पीने के बाद बीमार हुए लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।


    10 मौतों की प्रशासनिक पुष्टि, विधायक ने बताया आंकड़ा 11

    सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर बंडा तहसील के प्रभावित गांवों में अवैध जहरीली शराब पीने से 10 लोगों की मौत हुई है. हालांकि, स्थानीय बीजेपी विधायक वीरेंद्र लोधी ने मृतकों की संख्या 11 बताई है. उन्होंने बताया कि बंडा सिविल अस्पताल से करीब 25 लोगों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों में भेजा गया है।

    कलेक्टर ने बताया कि बुखार और सिरदर्द जैसी शिकायत वाले लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है. ऐसे तीन लोगों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (BMCH) भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है. उनके मुताबिक, इन मरीजों की हालत गंभीर नहीं है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका को लेकर कलेक्टर ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है. शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार किया जा रहा है।


    ललितपुर से जहरीली शराब की सप्लाई का शक

    घटना की जांच में शराब के संभावित स्रोत को लेकर भी बड़ा खुलासा सामने आया है. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि संदिग्ध शराब की सप्लाई उत्तर प्रदेश के ललितपुर से हुई थी।

    कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, शुरुआती जांच में ललितपुर से इस तरह की जहरीली शराब की सप्लाई करने वाले एक गिरोह की जानकारी सामने आई है. चूंकि सागर का यह इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा के नजदीक है, इसलिए इस एंगल की भी जांच की जा रही है. हालांकि, शराब की वास्तविक सप्लाई चेन और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है।


    प्रभावित इलाके की 7 शराब दुकानें सील

    घटना के बाद जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं. प्रभावित क्षेत्र में सात शराब दुकानों को सील कर दिया गया है और शराब के सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं. प्रशासन ने अधिकारियों को अवैध शराब के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।


    शराब पीने वालों से प्रशासन की अपील

    प्रशासन ने उन लोगों से तत्काल स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की है, जिन्होंने हाल के दिनों में शराब का सेवन किया था और अब उन्हें उल्टी, सिरदर्द, बुखार या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी महसूस हो रही है. अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर मेडिकल जांच कराएं।


    कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग की

    घटना को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी राज्य सरकार पर हमला बोला है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। ग्वालियर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य में शराब माफिया बेखौफ होकर लोगों की जान ले रहे हैं।

    वहीं, बंडा के पूर्व कांग्रेस विधायक तरवर लोधी ने दावा किया कि बंडा विकासखंड के कई गांवों में शनिवार रात लोगों ने शराब पी थी, जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. उन्होंने बताया कि कई लोगों को बंडा के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां कुछ लोगों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि अन्य को सागर रेफर किया गया।


    गुजरात की घटना के बाद MP में जहरीली शराब से मौतों ने बढ़ाई चिंता

    मध्य प्रदेश में यह घटना ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले गुजरात के भावनगर जिले में जहरीली शराब पीने से 13 लोगों की मौत की घटना सामने आई थी। सागर की घटना के बाद अब प्रशासन की नजर अवैध शराब के नेटवर्क और इसके संभावित सप्लाई स्रोत पर है. फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट, शराब के सैंपल और जांच के आधार पर यह स्पष्ट होने का इंतजार है कि मौतों की वास्तविक वजह क्या थी और जहरीली शराब की सप्लाई में कौन-कौन लोग शामिल थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही साफ कर दिया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • मध्यप्रदेश के सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों पर सरकार सख्त, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

    मध्यप्रदेश के सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से मौतों पर सरकार सख्त, कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

    मध्यप्रदेश। के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 11 तक पहुंच गई है। हालांकि, इस बढ़े हुए आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। घटना के बाद प्रशासन और सरकार की सक्रियता बढ़ गई है।

    बताया जा रहा है कि संदिग्ध शराब के सेवन के बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ी थी। इसके बाद प्रभावित लोगों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना में कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि संदिग्ध शराब कहां से आई तथा इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहरीली या अवैध शराब के कारोबार से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन को मामले की तह तक जाकर जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    उपमुख्यमंत्री एवं आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा ने घटना को लेकर अधिकारियों से जानकारी ली। उन्होंने सागर के कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी हासिल की। स्थिति का जायजा लेने और जांच की निगरानी के लिए आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को मौके पर भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।

    घटना के बाद क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज किए जाने की बात कही गई है। प्रशासन की ओर से संदिग्ध ठिकानों पर जांच और छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य अवैध शराब की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस बीच घटना को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण अवैध शराब का कारोबार बढ़ रहा है। उन्होंने सरकार के सुशासन के दावों पर भी सवाल उठाए।

    कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश में पहले भी शराब से जुड़े गंभीर हादसे सामने आ चुके हैं और इसके बावजूद अवैध शराब के नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पाया है। पार्टी ने सरकार से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा पूरे नेटवर्क की जांच कराने की मांग की है।

    हालांकि, कांग्रेस के इन राजनीतिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस घटना की वास्तविक वजह पता लगाने, संदिग्ध शराब की जांच कराने, प्रभावित लोगों को उपचार उपलब्ध कराने और जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने पर है। मौतों के अंतिम आंकड़े और हादसे की पूरी तस्वीर आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • सागर में जहरीली शराब का कहर: 12 लोगों की मौत, 20 से ज्यादा बीमार, 8 की हालत गंभीर

    सागर में जहरीली शराब का कहर: 12 लोगों की मौत, 20 से ज्यादा बीमार, 8 की हालत गंभीर


    सागर।
    मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बंडा तहसील के घूघर, नौराज, गूगरा खुर्द, बराज और आसपास के गांवों में शराब पीने के बाद अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 24 मरीजों का इलाज चल रहा है, जिनमें आठ की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर मरीजों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी), सागर रेफर किया गया है। घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

    शराब पीने के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत

    जानकारी के मुताबिक शनिवार रात कई गांवों में कुछ लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके कुछ ही समय बाद लोगों की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। परिजन मरीजों को बंडा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां कुछ लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद सागर भेजा गया।

    अस्पताल पहुंचे कुछ मरीजों के शरीर नीले पड़ने और अकड़न जैसी शिकायतें भी सामने आईं। डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर शराब पीने वाले लोगों की स्क्रीनिंग कर रही हैं।

    प्रशासन ने छह शराब दुकानें कराईं सील

    घटना की सूचना मिलते ही कलेक्टर प्रतिभा पाल, एसपी अनुराग सुजानिया समेत वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी प्रभावित इलाकों में पहुंचे। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और अस्पताल में भर्ती मरीजों के इलाज की स्थिति की जानकारी ली।

    एहतियात के तौर पर क्षेत्र की छह शराब दुकानों को सील कर दिया गया है। शराब के नमूने लेने और उनकी जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। बंडा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया है। प्रशासन ने अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

    24 से 48 घंटे में शराब पीने वालों की स्क्रीनिंग

    कलेक्टर प्रतिभा पाल ने लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि जिन लोगों ने पिछले 24 से 48 घंटे में किसी भी तरह की शराब का सेवन किया है, वे किसी तरह के लक्षण नहीं होने पर भी स्क्रीनिंग जरूर कराएं।

    उल्टी, सिरदर्द, बुखार या तबीयत बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या सिविल अस्पताल पहुंचने की सलाह दी गई है। प्रशासन को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ सकती है।

    ग्रामीण ने सुनाई खौफनाक कहानी

    बमुराबेड़ा गांव के रामकुमार दांगी के मुताबिक उनके गांव में भी चार लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने साथ बैठकर शराब पी थी, जिसके बाद उनकी हालत तेजी से खराब होने लगी। शरीर ठंडा पड़ने और तबीयत बिगड़ने के बाद कुछ लोगों की जल्द ही मौत हो गई।

    आबकारी विभाग पर भी उठे सवाल

    घटना के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय सूत्रों और कुछ शराब ठेकेदारों का दावा है कि इलाके में नकली और अवैध शराब की बिक्री को लेकर पहले भी शिकायतें की गई थीं। हालिया बैठक में लाइसेंसी ठेकेदारों की ओर से भी अवैध शराब के कारोबार का मुद्दा उठाए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    मृतकों में 45 वर्षीय गोलू उर्फ चमन भी शामिल

    पुलिस के मुताबिक मृतकों में गोलू उर्फ चमन लोधी (45), दिग्विजय लोधी (28), करतार सिंह लोधी (30), उजियार सिंह लोधी (56), रोशन लोधी (30), राजेंद्र लोधी (32), हरनाम राय (42), उत्तम नत्थू नायक (42), सुमेर सिंह दांगी (47), राजकुमार लोधी (47) और सुरेंद्र अहिरवार (35) समेत अन्य लोग शामिल हैं। गोलू उर्फ चमन के पहले से कैंसर से पीड़ित होने की जानकारी भी सामने आई है।

    गंभीर मरीजों का बीएमसी में इलाज

    गंभीर हालत वाले मरीजों में हरनाम राय, उत्तम नत्थू नायक, मंगल रजक, परम आदिवासी, धनसिंह आदिवासी, चंद्रभान लोधी, अजय लोधी, विनोद और राघवेंद्र लोधी समेत अन्य शामिल हैं। इन्हें बेहतर इलाज के लिए बीएमसी सागर रेफर किया गया है।

    फिलहाल प्रशासन शराब के स्रोत और उसमें किसी जहरीले पदार्थ की मौजूदगी की जांच में जुटा है। मौतों की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और शराब के सैंपल की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • सागर में हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस को अलमारी में मिले नोटों से भरे 4 बैग, 3 करोड़ से ज्यादा नकदी बरामद

    सागर में हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस को अलमारी में मिले नोटों से भरे 4 बैग, 3 करोड़ से ज्यादा नकदी बरामद

    सागर। सागर शहर के तिली क्षेत्र में रविवार को हथियार की तलाश में पहुंची पुलिस उस समय हैरान रह गई, जब तलाशी के दौरान एक अलमारी से नकदी से भरे चार बैग बरामद हुए। बैगों में 500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी थीं। पुलिस के अनुसार, बरामद नकदी की रकम 3 करोड़ रुपये से अधिक है। देर रात तक इलेक्ट्रॉनिक मशीन से नोटों की गिनती की जाती रही।

    मामला गोपालगंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस को शिकायत मिली थी कि स्थानीय निवासी सौरभ अहिरवार ने सोशल मीडिया पर पिस्टल के साथ तस्वीर पोस्ट की है। इसके बाद घर में अवैध हथियार होने की आशंका पर पुलिस की विशेष टीम ने तिली स्थित उसके मकान पर तलाशी की।

    बंद अलमारी खोलते ही मिले नकदी से भरे बैग

    पुलिस के मुताबिक, तलाशी के दौरान कमरे में रखी एक बंद अलमारी को पंचनामा तैयार कर खुलवाया गया। अलमारी के भीतर चार भारी बैग रखे मिले। जब बैग खोले गए तो उनमें 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां देखकर पुलिस अधिकारी भी चौंक गए।

    मामले की सूचना मिलते ही एसपी अनुराग सुजानिया और एएसपी नरेंद्र सोलंकी समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। बरामद रकम इतनी अधिक थी कि नोटों की गिनती के लिए इलेक्ट्रॉनिक करेंसी काउंटर मशीन मंगानी पड़ी।


    देर रात तक होती रही नोटों की गिनती

    पुलिस के अनुसार, नोटों की गिनती दोपहर बाद शुरू हुई और रात करीब 12 बजे तक चलती रही। शुरुआती गिनती में अकेले एक बैग से करीब 1.33 करोड़ रुपये मिलने की बात सामने आई है। चारों बैगों की कुल रकम 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

    पूरी कार्रवाई में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पुलिस ने नोटों की बरामदगी और गिनती की वीडियोग्राफी भी कराई।

    रिश्तेदार के पैसे होने का दावा

    पूछताछ में परिवार के सदस्यों ने पुलिस को बताया कि बरामद रकम भोपाल निवासी उनके रिश्तेदार रमेश अहिरवार की है। परिजनों का दावा है कि करीब आठ महीने पहले रमेश ने यह रकम अमानत के तौर पर यहां रखी थी।

    हालांकि पुलिस इस दावे की पुष्टि के लिए दस्तावेज और रकम के स्रोत की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि मामले में हवाला कारोबार या बेनामी और अघोषित संपत्ति का कोण भी हो सकता है।

    40 लाख के प्लॉट की भी जानकारी जुटा रही पुलिस

    स्थानीय स्तर पर यह भी जानकारी सामने आई है कि परिवार के रहन-सहन में हाल के दिनों में अचानक बदलाव आया था। पुलिस को सौरभ द्वारा हाल में करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट खरीदे जाने की जानकारी भी मिली है। अब पुलिस इस संपत्ति की खरीद और बरामद नकदी के बीच किसी संबंध की भी जांच कर रही है।

    मामले की सूचना आयकर और राजस्व विभाग को दे दी गई है। पुलिस और संबंधित विभाग अब बरामद रकम के वैध स्रोत, उसके मालिकाना हक और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। हथियार की तलाश में शुरू हुई कार्रवाई अब करोड़ों रुपये की नकदी के स्रोत की जांच तक पहुंच गई है।

  • गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    गोपाल भार्गव बोले बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘भौंकने वालों’ वाले बयान से मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल

    मध्य प्रदेश:  के पूर्व मंत्री और रहली विधानसभा क्षेत्र से लगातार नौ बार विधायक रहे गोपाल भार्गव का एक बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। रहली में वीर दुर्गादास राठौर जयंती समारोह के दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। इसी दौरान उन्होंने अपने आलोचकों पर भी तीखा तंज कसा।

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि बीजेपी में प्रत्येक कार्यकर्ता का अपना महत्व है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पुराने प्रसंग का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, पार्टी में किसी कार्यकर्ता की अहमियत किसी पद या बाहरी प्रमाण से तय नहीं होती, बल्कि संगठन के प्रति उसकी भूमिका और योगदान महत्वपूर्ण होता है।

    इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि बीजेपी का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री जैसा है। उनके इस बयान की चर्चा इसलिए भी तेज हुई क्योंकि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर उनके नाम से जुड़ा एक स्थानीय विवाद सामने आया था। इसी विवाद को उनके ताजा बयान से जोड़कर देखा जा रहा है।

    दरअसल, कुछ दिन पहले एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति गोपाल भार्गव के गढ़ाकोटा स्थित निवास के बाहर लगे बोर्ड पर एक पर्चा चिपकाता दिखाई दिया था। इस पर्चे में भार्गव को ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ कहकर निशाना बनाया गया था। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी।

    रहली के कार्यक्रम में भार्गव ने इसी तरह की आलोचनाओं का जवाब देते हुए हाथी और कुत्ते का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हाथी अपनी चाल से आगे बढ़ता रहता है और उसके पीछे कुत्ते भौंकते रहते हैं। उनके बयान का आशय यह था कि आलोचना के बावजूद व्यक्ति को अपने रास्ते और काम से विचलित नहीं होना चाहिए।

    भार्गव ने अपने संबोधन में चींटियों और गन्ने का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने की कोशिश की कि सार्वजनिक जीवन में आलोचनाएं होती रहती हैं, लेकिन उन्हें अपनी जिम्मेदारी और लक्ष्य से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बीजेपी कार्यकर्ताओं को मुख्यमंत्री के समान बताने वाला उनका बयान पार्टी के भीतर कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर उनकी सोच को भी सामने रखता है। उन्होंने कहा कि संगठन में कोई सेवक की भूमिका निभाता है तो कोई जनप्रतिनिधि के तौर पर जिम्मेदारी संभालता है। उनके अनुसार, पार्टी में हर स्तर के कार्यकर्ता का अपना महत्व है।

    गोपाल भार्गव का मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वह रहली विधानसभा सीट से लगातार नौ बार निर्वाचित हो चुके हैं और राज्य सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। लंबे राजनीतिक अनुभव और क्षेत्र में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण उनके सार्वजनिक बयानों पर राजनीतिक नजर बनी रहती है।

    इस बार भी उनके बयान के दो हिस्से सबसे अधिक चर्चा में हैं। पहला, बीजेपी के हर कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री जैसा बताना और दूसरा, आलोचकों के लिए ‘भौंकने वालों’ वाली टिप्पणी करना। उनके समर्थक इसे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

    फिलहाल बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, भार्गव ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं के महत्व और आलोचनाओं से प्रभावित न होने का संदेश दिया। स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ विवाद अब उनके बयान के कारण व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।