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  • ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद भक्ति फिल्मों का बढ़ा सिलसिला, खाटु श्याम से तुलसीदास और साई बाबा तक कई घोषणाएं

    ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद भक्ति फिल्मों का बढ़ा सिलसिला, खाटु श्याम से तुलसीदास और साई बाबा तक कई घोषणाएं

    नई दिल्ली ।‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस सफलता के बाद भक्ति और धार्मिक कथाओं पर आधारित फिल्मों को लेकर फिल्म जगत में गतिविधियां बढ़ी हैं। हाल के दिनों में कई नए प्रोजेक्ट की घोषणा हुई है। इन फिल्मों में अलग-अलग धार्मिक व्यक्तित्वों और कथाओं को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने की तैयारी है। खाटु श्याम बाबा, महाकवि तुलसीदास, साई बाबा और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कहानियों पर आधारित प्रोजेक्ट इनमें प्रमुख हैं।

    सबसे पहले ‘हारे के सहारे खाटु श्याम हमारे’ नाम की फिल्म की घोषणा हुई है। यह फिल्म खाटु श्याम बाबा की जिंदगी पर आधारित होगी। फिल्म में उनकी महिमा और उनके प्रति लोगों की आस्था को कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा। खाटु श्याम बाबा की भक्ति से जुड़े पहलुओं को बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी इस प्रोजेक्ट में की जा रही है।

    इसके बाद ‘राबोला’ नाम की फिल्म की घोषणा हुई। इस फिल्म का निर्माण डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी करेंगे। वह इससे पहले अक्षय कुमार की फिल्म ‘पृथ्वीराज चौहान’ बना चुके हैं। ‘राबोला’ में महाकवि तुलसीदास की कहानी को दिखाया जाएगा। तुलसीदास भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा से जुड़े प्रमुख नामों में शामिल हैं और उनके जीवन पर आधारित यह प्रोजेक्ट इसी पृष्ठभूमि को पर्दे पर पेश करेगा।

    महाकवि तुलसीदास पर एक अन्य फिल्म की भी घोषणा हुई है। यह प्रोजेक्ट ‘हनुमान अंश’ बनाने वाले विशाल चतुर्वेदी का नया प्रोजेक्ट बताया गया है। इस फिल्म को लेकर भी दर्शकों की रुचि बनी हुई है। एक ही विषय पर अलग-अलग फिल्म परियोजनाओं की घोषणा होने से तुलसीदास के जीवन और उनकी भक्ति परंपरा को लेकर फिल्म जगत में नया ध्यान देखने को मिल रहा है।

    अगले साल ‘तेरा साई’ नाम से भी एक फिल्म आने की तैयारी है। इसमें संजय मिश्रा और पलाश मुच्छल जुड़े हैं। फिल्म में साई बाबा की जिंदगी को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत किया जाएगा। साई बाबा के जीवन पर पहले भी फिल्में और धारावाहिक बन चुके हैं, लेकिन इस नए प्रोजेक्ट में उनकी कहानी को नए सिनेमा के माध्यम से दिखाने की तैयारी है।

    इसके अलावा ‘श्रीमद्भागवतम्’ नाम से भी एक बड़े फिल्म प्रोजेक्ट की घोषणा हुई है। इसे सात हिस्सों में बनाए जाने की योजना है। फिल्म के ‘श्रीमद्भागवतम् पार्ट I: विष्णुरत’ का पहला टीजर पोस्टर भी जारी किया गया है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण के हाथ की झलक दिखाई गई है। सात भागों में बनने वाली यह फिल्म धार्मिक ग्रंथ से जुड़ी कथा को बड़े स्तर पर प्रस्तुत करने की योजना का हिस्सा है।

    इन सभी घोषणाओं को ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद सामने आए नए प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इन फिल्मों की रिलीज और बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन अलग-अलग समय पर सामने आएगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि धार्मिक और भक्ति कथाओं पर आधारित कई नए प्रोजेक्ट एक साथ चर्चा में आ गए हैं। आने वाले समय में इन फिल्मों की कहानी, कलाकारों और निर्माण से जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।

  • साईं बाबा के प्रेरक उपदेश जीवन में शांति और संतुलन लाने का मार्ग

    साईं बाबा के प्रेरक उपदेश जीवन में शांति और संतुलन लाने का मार्ग

    नई दिल्ली: भारत के महान संत साईं बाबा की शिक्षाएं आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं उनके विचार केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही नहीं बल्कि एक संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन जीने का रास्ता भी दिखाते हैं उनके अनुसार जीवन का असली सार प्रेम करुणा सत्य और सेवा में छिपा है और यही गुण इंसान को एक बेहतर व्यक्ति बनाते हैं

    साईं बाबा का सबसे प्रसिद्ध संदेश है श्रद्धा और सबुरी जीवन में ये दो गुण व्यक्ति को हर परिस्थिति में मजबूत बनाए रखते हैं श्रद्धा का अर्थ है ईश्वर और स्वयं पर विश्वास रखना जबकि सबुरी का मतलब है धैर्य रखना और हर स्थिति का शांतिपूर्वक सामना करना बाबा कहते थे कि जो व्यक्ति इन दोनों को अपने जीवन में अपनाता है वह कभी निराश नहीं होता

    उनकी एक और महत्वपूर्ण सीख थी कि सबका मालिक एक है चाहे हम किसी भी धर्म या पंथ से जुड़े हों ईश्वर एक ही है और हर जगह उपस्थित है इस विचार के माध्यम से उन्होंने समाज में एकता और भाईचारे का संदेश दिया उनका मानना था कि सच्ची भक्ति वही है जो बिना किसी स्वार्थ के की जाए और जो व्यक्ति सच्चे मन से ईश्वर को पुकारता है उसकी हर प्रार्थना अवश्य सुनी जाती है

    साईं बाबा ने दान और सेवा को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया उन्होंने कहा कि दान करने से कभी धन कम नहीं होता बल्कि यह और बढ़ता है यह विचार आज भी लोगों को जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रेरित करता है इसके साथ ही उन्होंने सत्य बोलने और दूसरों का सम्मान करने पर जोर दिया उनका मानना था कि हर व्यक्ति में ईश्वर का वास है इसलिए सभी के साथ समान और आदरपूर्ण व्यवहार करना चाहिए

    उनकी शिक्षाओं में प्रेम को सबसे बड़ा धर्म माना गया है साईं बाबा कहते थे कि प्रेम से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है और यही भावना समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ाती है उन्होंने कर्म के सिद्धांत पर भी जोर दिया उनके अनुसार जैसा कर्म करेंगे वैसा ही फल मिलेगा इसलिए हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए

    साईं बाबा ने ध्यान और भक्ति के माध्यम से आंतरिक शांति प्राप्त करने की शिक्षा दी उनका कहना था कि सच्ची शांति बाहर नहीं बल्कि हमारे अंदर होती है यदि मन शांत और स्थिर है तो जीवन की हर चुनौती को आसानी से पार किया जा सकता है

     साईं बाबा की शिक्षाएं आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी पहले थीं उनके विचार हमें सिखाते हैं कि यदि हम अपने जीवन में श्रद्धा सबुरी प्रेम और सेवा को अपनाएं तो न केवल हमारा जीवन बेहतर बन सकता है बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है