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  • USS अब्राहम लिंकन पर 8 नौसैनिकों ने की आत्महत्या की कोशिश, 286 दिन समुद्र में रही तैनाती

    USS अब्राहम लिंकन पर 8 नौसैनिकों ने की आत्महत्या की कोशिश, 286 दिन समुद्र में रही तैनाती


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन पर लंबे समय तक समुद्र में तैनाती के दौरान आठ नौसैनिकों द्वारा आत्महत्या की कोशिश किए जाने की जानकारी सामने आई है। अमेरिकी कार्यवाहक नेवी सेक्रेटरी हंग काओ ने सीएनएन को दिए एक पत्र में यह जानकारी दी है। यह पत्र उन्होंने सीनेटर किर्स्टन गिलीब्रांड के सवालों के जवाब में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की ओर से लिखा था।

    हंग काओ के मुताबिक, लिंकन की तैनाती शुरू होने के बाद से पूरे स्ट्राइक ग्रुप में आत्महत्या के कुल आठ प्रयास दर्ज किए गए। इनमें USS अब्राहम लिंकन के क्रू के साथ एयरविंग, डिस्ट्रॉयर स्क्वाड्रन और स्ट्राइक ग्रुप के साथ तैनात अन्य जहाजों के सैन्यकर्मी भी शामिल हैं। यह पोत ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के तहत लंबे समय तक समुद्र में तैनात रहा था।

    USS अब्राहम लिंकन करीब 286 दिन समुद्र में रहने के बाद एक सितंबर को थाईलैंड के एक पर्यटन शहर पहुंचा। उसकी तैनाती पहले मई में समाप्त होनी थी, लेकिन ईरान के साथ तनाव जारी रहने के कारण इसे आगे बढ़ा दिया गया था।

    समुद्र में कूदने की कोशिश की घटनाएं भी सामने आईं

    अगस्त में दो सैन्य समाचार पत्रों ने नौसैनिकों की मानसिक स्थिति और पोत पर काम करने की परिस्थितियों को लेकर रिपोर्ट प्रकाशित की थीं। इनमें कुछ सैन्यकर्मियों द्वारा समुद्र में कूदने की कोशिश किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इसके बाद डेमोक्रेटिक सांसदों ने मामले की जांच की मांग की थी।

    काओ के अनुसार, मार्च में एक नौसैनिक को उसके साथियों ने समुद्र में कूदने से रोक लिया था। वहीं, अगस्त में एक सैन्यकर्मी वास्तव में समुद्र में कूद गया था। उसे बचा लिया गया और इलाज के लिए जहाज से बाहर भेजा गया।

    खाने और जरूरी सामान की कमी की शिकायतें

    पोत पर तैनात सैन्यकर्मियों की परिस्थितियों को लेकर अन्य शिकायतें भी सामने आई थीं। इनमें फफूंद की समस्या के अलावा भोजन और साबुन जैसी जरूरी वस्तुओं की कमी की खबरें शामिल थीं।

    काओ ने स्वीकार किया कि जहाज पर खाने के विकल्पों में अस्थायी रूप से कटौती की गई थी। हालांकि, उनके मुताबिक नौसैनिकों को रोजाना चार बार संतुलित भोजन उपलब्ध कराया जाता रहा। इससे पहले रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पोत पर खराब परिस्थितियों से जुड़ी खबरों को गलत बताया था।

    ताजा जानकारी सामने आने के बाद सीनेटर किर्स्टन गिलीब्रांड ने सरकार पर सैन्यकर्मियों की परिस्थितियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। लंबे समय तक समुद्र में तैनाती, मानसिक स्वास्थ्य और जहाज पर उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सामने आई जानकारी ने अमेरिकी नौसेना में सैनिकों की स्थिति पर बहस को फिर तेज कर दिया है।

  • समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच भारत की तैयारी तेज, नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता

    समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच भारत की तैयारी तेज, नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता

    नई दिल्ली । खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते समुद्री सुरक्षा जोखिमों के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों और भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय मिशन लगातार स्थानीय अधिकारियों, समुद्री संस्थानों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नाविकों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके लिए कई देशों में स्थित भारतीय मिशनों ने 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन भी सक्रिय कर रखी है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार निगरानी बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि भारतीय मिशन शिपिंग मंत्रालय, स्थानीय समुद्री प्राधिकरणों और अन्य संबंधित विभागों के साथ नियमित संपर्क में हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्री मार्गों पर किसी भी चुनौती की स्थिति में भारतीय नागरिकों और जहाजों को समय पर सहायता मिल सके।

    सरकार की ओर से शुरू की गई 24 घंटे हेल्पलाइन व्यवस्था केवल नाविकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य भारतीय नागरिक भी जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था पिछले कई महीनों से लगातार काम कर रही है और भविष्य में भी जारी रहेगी। इससे संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों को सीधे सहायता प्राप्त करने का माध्यम उपलब्ध हो रहा है।

    विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही का समर्थन करता है। सरकार का कहना है कि समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों, वाणिज्यिक जहाजों और उनमें काम करने वाले नाविकों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे।

    खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने समुद्री निगरानी और आपात प्रबंधन को मजबूत किया है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से अब तक 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इसके अलावा 3 अगस्त तक भारत आने वाले 62 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं। इनमें 23 भारतीय ध्वज वाले और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं।

    समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय लगातार अपनी सलाह और दिशानिर्देशों को अपडेट कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय नाविकों को बदलती परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा उपायों की जानकारी देना और किसी भी संभावित खतरे से बचाव करना है।

    सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए कई विशेष कदम उठाए हैं। इनमें 24 घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष, जहाजों और चालक दल की जानकारी वाला लाइव डेटाबेस और नियमित स्थिति रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। इसके माध्यम से जहाजों की आवाजाही, नाविकों की स्थिति, किसी भी घटना और संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    भारत का कहना है कि समुद्री सुरक्षा केवल व्यापार से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों भारतीय परिवारों की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। इसी कारण सरकार ने नाविकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई की जा सके।