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  • मिग-21 की आखिरी उड़ान की कहानी दिखाएगा Netflix, ‘द लास्ट सैल्यूट’ 26 अगस्त को होगी रिलीज

    मिग-21 की आखिरी उड़ान की कहानी दिखाएगा Netflix, ‘द लास्ट सैल्यूट’ 26 अगस्त को होगी रिलीज


    नई दिल्ली।
    कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के अभियानों और ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को दर्शकों की मिल रही शानदार प्रतिक्रिया के बीच नेटफ्लिक्स ने अब भारतीय वायुसेना के सबसे चर्चित लड़ाकू विमानों में शामिल मिग-21 पर नई डॉक्यूमेंट्री का ऐलान किया है। इसका नाम ‘द लास्ट सैल्यूट: ए लव लेटर टू मिग-21’ रखा गया है। डॉक्यूमेंट्री में मिग-21 के साथ भारतीय वायुसेना के छह दशकों से ज्यादा लंबे सफर और इसे उड़ाने वाले पायलटों की अनकही कहानियां दिखाई जाएंगी।

    26 अगस्त को Netflix पर आएगी डॉक्यूमेंट्री

    नेटफ्लिक्स इंडिया ने डॉक्यूमेंट्री का पहला टीजर जारी करते हुए इसकी रिलीज डेट का ऐलान किया है। ‘द लास्ट सैल्यूट’ 26 अगस्त 2026 से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी। टीजर के साथ प्लेटफॉर्म ने मिग-21 की छह दशक लंबी यात्रा को इसकी कहानी का केंद्र बताया है।

    62 साल तक भारतीय वायुसेना का हिस्सा रहा मिग-21

    यह डॉक्यूमेंट्री भारतीय वायुसेना के साथ मिग-21 के करीब 62 वर्षों के जुड़ाव पर केंद्रित है। इसमें उन पायलटों के अनुभव और यादें भी शामिल होंगी, जिन्होंने अलग-अलग दौर में इस लड़ाकू विमान को उड़ाया।

    डॉक्यूमेंट्री में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के अलावा मिग-21 उड़ाने वाले कई पूर्व और वर्तमान पायलटों की बातचीत देखने को मिलेगी। उनके अनुभवों के जरिए विमान की तकनीकी क्षमता के साथ-साथ उससे जुड़ी भावनात्मक यादों और चुनौतियों को सामने लाने की कोशिश की गई है।

    ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की टीम ने बनाई

    ‘द लास्ट सैल्यूट’ का निर्माण मैचबॉक्स शॉट्स ने किया है, जबकि इसका निर्देशन कुशल श्रीवास्तव ने किया है। यही प्रोडक्शन टीम ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ से भी जुड़ी रही है।

    मिग-21 का भारतीय वायुसेना के इतिहास में खास स्थान रहा है। यह विमान दशकों तक भारतीय लड़ाकू बेड़े की अहम ताकत रहा और कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में इसका इस्तेमाल हुआ।

    ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ को मिल रही सफलता

    नेटफ्लिक्स की ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ इस समय लगातार दर्शकों का ध्यान खींच रही है। छह एपिसोड वाली यह सीरीज वैश्विक टॉप-10 नॉन-इंग्लिश टीवी लिस्ट में लगातार बनी हुई है और मौजूदा सप्ताह में दूसरे स्थान पर है।

    सीरीज में कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के गोल्डन एरो स्क्वाड्रन की भूमिका और उसके अभियानों को कहानी के केंद्र में रखा गया है। सीरीज में सिद्धार्थ, जिमी शेरगिल, अभय वर्मा, दीया मिर्जा, प्राजक्ता कोली, आदिल हुसैन और अन्य कलाकार नजर आते हैं।

    मिग-21 की विरासत को समेटेगी ‘द लास्ट सैल्यूट’

    नई डॉक्यूमेंट्री सिर्फ एक लड़ाकू विमान की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना की कई पीढ़ियों के अनुभवों को दर्ज करने की कोशिश है। मिग-21 ने भारतीय सैन्य इतिहास में लंबा सफर तय किया है और अब ‘द लास्ट सैल्यूट’ के जरिए इसके साथ जुड़े पायलटों की यादों और इसकी विरासत को दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा।

    ‘द लास्ट सैल्यूट: ए लव लेटर टू मिग-21’ 26 अगस्त 2026 को सिर्फ नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी।

  • अटारी-वाघा बॉर्डर पर पाकिस्तानी रेंजर की सलामी बनी चर्चा, भारतीय अधिकारी के जवाब ने क्यों खींचा सबका ध्यान

    अटारी-वाघा बॉर्डर पर पाकिस्तानी रेंजर की सलामी बनी चर्चा, भारतीय अधिकारी के जवाब ने क्यों खींचा सबका ध्यान

    नई दिल्ली । अटारी-वाघा सीमा पर आयोजित समारोह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक पाकिस्तानी रेंजर भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी को सलामी देता दिखाई देता है। इसके जवाब में भारतीय अधिकारी सलामी लौटाने के बजाय सिर हिलाकर अभिवादन करते नजर आते हैं। इसी दृश्य को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और सैन्य परंपराओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    वीडियो सामने आने के बाद कुछ पाकिस्तानी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने सवाल उठाया कि भारतीय अधिकारी ने औपचारिक रूप से सलामी का जवाब क्यों नहीं दिया। उनका कहना था कि सैन्य परंपराओं के अनुसार सलामी का जवाब सलामी से ही दिया जाना चाहिए। हालांकि, इस बहस के बीच कई लोगों ने सैन्य प्रोटोकॉल और वरिष्ठ अधिकारियों की परंपराओं का हवाला देते हुए अलग दृष्टिकोण भी रखा।

    एक पाकिस्तानी सोशल मीडिया उपयोगकर्ता ने इस विषय पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हर परिस्थिति में सलामी लौटाने के लिए बाध्य नहीं होते। कई अवसरों पर वे सिर हिलाकर, मुस्कुराकर या मौखिक अभिवादन के माध्यम से भी सम्मान व्यक्त करते हैं। उनके अनुसार यह तरीका भी सैन्य शिष्टाचार का हिस्सा माना जाता है और इससे अधीनस्थ जवानों के प्रति सम्मान तथा सौहार्द का संदेश जाता है।

    सैन्य मामलों के जानकारों का भी मानना है कि विभिन्न देशों की सेनाओं में सलामी देने और उसका जवाब देने से जुड़े नियम परिस्थितियों, पद और आयोजन की प्रकृति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। हर औपचारिक कार्यक्रम में दोनों पक्षों के अधिकारियों द्वारा एक जैसी प्रतिक्रिया देना अनिवार्य नहीं होता। कई बार निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत केवल सम्मान प्रकट करना ही पर्याप्त माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत और पाकिस्तान के बीच आयोजित सीमा समारोहों, ध्वज बैठक, कमांडर स्तर की वार्ता या अन्य आधिकारिक आयोजनों में दोनों देशों की सेनाएं तय सैन्य परंपराओं और प्रोटोकॉल का पालन करती हैं। इनका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अनुशासन बनाए रखना और औपचारिक संवाद के दौरान पेशेवर माहौल कायम रखना होता है।

    अटारी-वाघा सीमा पर होने वाला बीटिंग रिट्रीट समारोह वर्षों से दोनों देशों के बीच सैन्य अनुशासन और औपचारिक परंपराओं का प्रतीक माना जाता है। इसमें दोनों देशों के सुरक्षा बल निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी-अपनी भूमिका निभाते हैं। ऐसे आयोजनों में व्यक्तिगत व्यवहार भी सैन्य प्रोटोकॉल और पदानुक्रम के अनुरूप होता है।

    वायरल वीडियो ने भले ही सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दिया हो, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसे किसी असामान्य घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार भारतीय अधिकारी द्वारा सिर हिलाकर अभिवादन करना भी सम्मान प्रकट करने का एक स्वीकृत तरीका माना जाता है और यह सैन्य शिष्टाचार के दायरे में आता है।

    इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि सैन्य परंपराएं केवल सलामी तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उनमें अनुशासन, पदानुक्रम, औपचारिक प्रोटोकॉल और पारस्परिक सम्मान जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं। यही कारण है कि अलग-अलग परिस्थितियों में अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी निर्धारित नियमों और प्रचलित सैन्य परंपराओं के अनुरूप अलग हो सकती है।

  • मध्य प्रदेश में होम गार्ड्स का 79वां स्थापना दिवस, CM मोहन यादव ने किया सम्मानित

    मध्य प्रदेश में होम गार्ड्स का 79वां स्थापना दिवस, CM मोहन यादव ने किया सम्मानित


     मध्य प्रदेश  में आज होम गार्ड्स और नागरिक सुरक्षा संगठन का 79वां स्थापना दिवस राज्य स्तरीय समारोह के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और होम गार्ड कार्यालय पहुँचकर परेड निरीक्षण किया। परेड टीम ने मुख्यमंत्री को सलामी दी जिसके बाद उन्होंने जवानों के साहस, अनुशासन और सेवा भावना की सराहना की।

    उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मान
    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर अदम्य साहसिक कार्य सम्मान पुरस्कार देने की घोषणा की और बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और जवानों को सम्मानित भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा-हर परिस्थिति, हर चुनौती में सबसे आगे रहने वाला अनुशासित समूह-होम गार्ड है। राज्य को गर्व है कियह बल हर जिम्मेदारी को निष्ठा से निभाता है।

    10 रेस्क्यू टीमों को 51 हजार का पुरस्कार
    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बताया कि 2014 में NDRF के गठन के बाद से यह बल लगातार बेहतरीन काम कर रहा है। इंदौर में NDRF और SDRF के जवानों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसका उपयोग आने वाले उज्जैन सिंहस्थ में किया जाएगा। सीएम ने घोषणा की कि 10 रेस्क्यू टीमों को 51-51 हजार रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा।

    होम गार्ड्स के लिए स्थायी आवास के आदेश
    जवानों की आवासीय जरूरतों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने होम गार्ड कर्मियों के लिए स्थायी आवास निर्माण के निर्देश भी जारी किए। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि हर होम गार्ड को सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए।