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  • एआई से नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं पर बदला नजरिया, सैम ऑल्टमैन बोले- इंसानों की जगह लेना मशीनों के लिए आसान नहीं

    एआई से नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं पर बदला नजरिया, सैम ऑल्टमैन बोले- इंसानों की जगह लेना मशीनों के लिए आसान नहीं

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर पिछले कुछ वर्षों से दुनिया भर में यह बहस तेज रही है कि क्या भविष्य में मशीनें इंसानों की नौकरियों की जगह ले लेंगी। विशेष रूप से दफ्तरों और पेशेवर क्षेत्रों से जुड़ी व्हाइट कॉलर नौकरियों को लेकर व्यापक स्तर पर चिंता जताई जाती रही है। तकनीक के तेजी से विस्तार के साथ यह आशंका भी सामने आई थी कि एआई के कारण बड़ी संख्या में रोजगार समाप्त हो सकते हैं। हालांकि अब इस विषय पर एक महत्वपूर्ण और संतुलित दृष्टिकोण सामने आया है, जिसमें माना गया है कि शुरुआती अनुमान वास्तविक परिस्थितियों से काफी अलग साबित हुए हैं।

    एआई क्षेत्र के प्रमुख चेहरों में शामिल सैम ऑल्टमैन ने रोजगार पर तकनीक के प्रभाव को लेकर अपनी पहले की सोच में बदलाव की बात कही है। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें यह उम्मीद थी कि आधुनिक एआई तकनीक के आने के बाद प्रवेश स्तर की व्हाइट कॉलर नौकरियां तेजी से प्रभावित होंगी और कई भूमिकाएं समाप्त हो सकती हैं। उस समय ऐसा माना जा रहा था कि मशीनें कई नियमित और कार्यालयी कार्यों को पूरी तरह अपने नियंत्रण में ले लेंगी। लेकिन समय के साथ जो तस्वीर सामने आई, वह अपेक्षाओं से काफी अलग दिखाई दी।

    उन्होंने कहा कि एआई के प्रभाव को लेकर उनका शुरुआती अनुमान वास्तविकता से अधिक गंभीर था। उनके अनुसार, तकनीकी विकास की गति और एआई क्षमताओं को लेकर जो आकलन किया गया था, वह काफी हद तक सही साबित हुआ, लेकिन सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर समझ पूरी तरह सटीक नहीं रही। रोजगार के क्षेत्र में बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन वे उतने व्यापक और तीव्र नहीं रहे जितनी पहले संभावना जताई जा रही थी।

    उन्होंने यह भी माना कि शुरुआती दौर में नौकरी खत्म होने की आशंकाएं वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए स्वाभाविक थीं। तकनीकी बदलावों के दौरान अक्सर यह डर पैदा होता है कि मशीनें मनुष्यों की भूमिका को कम कर देंगी, लेकिन व्यावहारिक स्तर पर कई ऐसे पहलू सामने आते हैं जिन्हें तकनीक पूरी तरह प्रतिस्थापित नहीं कर पाती। यही कारण है कि अब रोजगार बाजार की तस्वीर पहले से अधिक संतुलित दिखाई दे रही है।

    दुनिया की कई बड़ी कंपनियां पहले ही यह संकेत दे चुकी हैं कि एआई आधारित उपकरणों और स्वचालन ने कुछ कार्यप्रणालियों को बदलना शुरू कर दिया है। कुछ पदों की प्रकृति बदली है और कई जिम्मेदारियों का स्वरूप भी नया हुआ है। इसके बावजूद विशेषज्ञ मानते हैं कि हर तकनीकी बदलाव के साथ नए अवसर भी पैदा होते हैं और कार्यक्षेत्र नई आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित होता है।

    सैम ऑल्टमैन ने मानवीय संपर्क को रोजगार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बताया। उनका कहना है कि कई पेशे केवल तकनीकी दक्षता पर आधारित नहीं होते, बल्कि उनमें संवेदनशीलता, समझ, संवाद क्षमता और मानवीय व्यवहार की भी बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कुछ कार्यों में एआई आधारित प्रतिक्रियाओं का उपयोग करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि इंसान द्वारा दी गई प्रतिक्रिया अधिक प्रभावी और स्वाभाविक होती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि तकनीक सहायक भूमिका निभा सकती है, लेकिन हर परिस्थिति में इंसानी स्थान लेना उसके लिए आसान नहीं होगा।

  • कौन हैं 8 वर्षीय टेक्नोलॉजिस्ट रणवीर सचदेवा? AI समिट में छाए नन्हे स्पीकर के मुरीद हुए दिग्गज

    कौन हैं 8 वर्षीय टेक्नोलॉजिस्ट रणवीर सचदेवा? AI समिट में छाए नन्हे स्पीकर के मुरीद हुए दिग्गज


    नई दिल्ली ।नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में उस वक्त सभी की नजरें एक आठ वर्षीय बच्चे पर टिक गईं जब उसने मंच संभालते हुए खुद को टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में परिचित कराया। यह बच्चा है रणवीर सचदेवा जो अपनी कम उम्र में ही कोडिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पब्लिक स्पीकिंग के लिए चर्चा में हैं। देश-दुनिया के बड़े टेक लीडर्स और सीईओ के बीच रणवीर ने जिस आत्मविश्वास से अपनी बात रखी उसने सभी को प्रभावित किया।

    समिट के दौरान रणवीर ने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने का अपना विजन साझा किया। वे इस कार्यक्रम में संबोधित करने वाले सबसे कम उम्र के स्पीकर रहे। खास बात यह रही कि रणवीर केवल कीनोट स्पीकर ही नहीं बल्कि एक ग्लोबल ऑथर के रूप में भी पहचान बना चुके हैं।

    कार्यक्रम में उनकी मुलाकात सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन से हुई। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में रणवीर सैम ऑल्टमैन के साथ बातचीत करते नजर आए। बताया जा रहा है कि दोनों टेक लीडर्स रणवीर के आत्मविश्वास और समझ से काफी प्रभावित हुए और उनसे संपर्क भी साझा किया।

    रणवीर का सफर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। वे पिछले वर्ष जेनेवा में आयोजित AI अच्छे वैश्विक शिखर सम्मेलन के लिए में भी शामिल हो चुके हैं। वहां उनकी मुलाकात मार्क बेनिओफ़ और इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन की महासचिव डोरेन बोगदान-मार्टिन से हुई थी। इतना ही नहीं वर्ष 2024 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की थी।

    रणवीर इससे पहले भी कई बड़े मंचों पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। वर्ष 2023 में दिल्ली में एप्पल स्टोर के उद्घाटन के दौरान उन्होंने एप्पल के सीईओ Tim Cook से मुलाकात की थी और मात्र पांच साल की उम्र में अपने कोडिंग अनुभव साझा किए थे। साल 2022 में वे ग्लोबल रीडिंग चैलेंज में सुपर प्रेजेंटर के रूप में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।

    छह वर्ष की आयु में वे टेडएक्स  स्पीकर भी बन गए थे। कम उम्र में वैश्विक मंचों पर अपनी पहचान बना रहे रणवीर सचदेवा आज कई बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा बनते जा रहे हैं। तकनीक की दुनिया में उनका आत्मविश्वास और विजन यह दिखाता है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।