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  • राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    राम भक्तों पर गोली चलाने वाले आज आस्था की बात कर रहे, जनता ने बदली राजनीति की दिशा: रामपुर में बोले योगी आदित्यनाथ

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामपुर में 690 करोड़ रुपये की लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और राम भक्तों के खिलाफ कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात करते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे जनता की लोकतांत्रिक शक्ति का परिणाम बताते हुए कहा कि जनसमर्थन ने राजनीतिक दलों को अपना रुख बदलने के लिए मजबूर किया है।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या आज अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के नए स्वरूप में दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ऐसे हालात थे जब “जय श्रीराम” के उद्घोष पर कार्रवाई होती थी और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। उनका कहना था कि समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदली हैं और अब वही दल भगवान राम और आस्था की बात करते नजर आते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के मतदान और विश्वास ने प्रदेश की राजनीति की दिशा बदली है। उन्होंने दावा किया कि पहले जिन राजनीतिक दलों ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया, आज वे भी सार्वजनिक रूप से धार्मिक आस्था की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का निर्णय ही सबसे बड़ी शक्ति होता है और उसी के कारण राजनीतिक दलों को अपनी सोच बदलनी पड़ी है।

    योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश में विकास की नई पहचान बनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले गरीबों और कमजोर वर्गों की जमीनों पर अवैध कब्जे होते थे तथा प्रशासनिक व्यवस्था निष्पक्ष नहीं थी। उनका कहना था कि वर्तमान सरकार ने कानून का शासन स्थापित करने और विकास को प्राथमिकता देने का प्रयास किया है।

    उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि डबल इंजन सरकार के सहयोग से कई ऐसी परियोजनाएं पूरी हुई हैं जिन्हें पहले असंभव माना जाता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास की नई गति हासिल की है और राज्य आर्थिक प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश अब तेज़ी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है।

    सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का अभाव था और न्यायालयों को हस्तक्षेप करना पड़ता था। उनके अनुसार वर्तमान सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में काम किया है, जिससे युवाओं का भरोसा बढ़ा है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे आयोजन बिना किसी बाधा के पूरे उत्साह और भव्यता के साथ आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक आयोजनों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने रामपुर के लिए स्वीकृत विभिन्न विकास परियोजनाओं को क्षेत्र की प्रगति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, जनसुविधाओं और विकास कार्यों के विस्तार से क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा प्रदेश के समग्र विकास को नई गति प्राप्त होगी।

  • यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस का बड़ा दावा, सपा से बराबर सीटों की हिस्सेदारी की मांग, विपक्षी एकता पर भी दिया जोर

    यूपी चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस का बड़ा दावा, सपा से बराबर सीटों की हिस्सेदारी की मांग, विपक्षी एकता पर भी दिया जोर

    नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच विपक्षी राजनीति में सीट बंटवारे को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कांग्रेस के नव नियुक्त प्रदेश प्रभारी राजेंद्र गौतम ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि राज्य में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन होता है, तो कांग्रेस बराबरी की भागीदारी की अपेक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और उत्तर प्रदेश में उसे सम्मानजनक तथा समान हिस्सेदारी मिलनी चाहिए।

    राजेंद्र गौतम ने कहा कि कांग्रेस का देश के राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की मजबूत पहचान है। उनके अनुसार भारतीय जनता पार्टी का प्रभावी मुकाबला केवल एक मजबूत राष्ट्रीय दल ही कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय दलों की अपनी भूमिका है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति अलग है। इसी आधार पर उन्होंने संभावित गठबंधन में बराबरी की भागीदारी की बात कही।

    उन्होंने विपक्षी दलों के बीच व्यापक एकजुटता की भी वकालत की। उनका कहना था कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाली सभी राजनीतिक शक्तियों को एक मंच पर आने की आवश्यकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी सहित उन सभी दलों के साथ सहयोग की संभावना जताई जो भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति बनाने के पक्षधर हैं।

    कांग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राज्यभर में अपने संगठन को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देगी। उन्होंने घोषणा की कि जुलाई से प्रदेशव्यापी दौरा शुरू किया जाएगा, जिसके दौरान कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने के साथ संगठन विस्तार पर भी काम किया जाएगा। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत बनाना प्राथमिकता होगी, ताकि चुनावी तैयारी प्रभावी ढंग से की जा सके।

    राजेंद्र गौतम ने राज्य सरकार पर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यशैली और विभिन्न सरकारी निर्णयों को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी और जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्षी गठबंधन का स्वरूप तय होता है, तो सभी सहयोगी दलों से चर्चा के बाद साझा घोषणापत्र तैयार किया जाएगा। उनके अनुसार गठबंधन की राजनीति में सभी दलों की राय और प्राथमिकताओं को शामिल किया जाएगा, ताकि जनता के सामने एक साझा और स्पष्ट एजेंडा रखा जा सके।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के इस रुख को आगामी चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। सीट बंटवारे को लेकर दिए गए इस बयान के बाद विपक्षी दलों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिक गई हैं। आने वाले महीनों में गठबंधन की संभावनाएं, सीटों का फार्मूला और साझा चुनावी रणनीति प्रदेश की राजनीति का प्रमुख विषय बनने की संभावना है।

  • सपा में टूट के दावे पर गरमाई यूपी सियासत, अखिलेश यादव का ओम प्रकाश राजभर को कड़ा जवाब

    सपा में टूट के दावे पर गरमाई यूपी सियासत, अखिलेश यादव का ओम प्रकाश राजभर को कड़ा जवाब


    नई दिल्ली
    । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर समाजवादी पार्टी को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख Om Prakash Rajbhar द्वारा समाजवादी पार्टी में संभावित टूट के दावे के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस बयान के बाद Akhilesh Yadav ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया है।

    लखनऊ में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि Samajwadi Party पूरी तरह मजबूत और संगठित है तथा किसी भी तरह के विभाजन या टूट की बात केवल राजनीतिक अफवाह है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी लगातार दूसरी पार्टियों को कमजोर करने और उनके नेताओं को तोड़ने की रणनीति पर काम करती रही है। उनके अनुसार, यह कोई नई राजनीति नहीं है बल्कि लंबे समय से अपनाई जा रही एक पैटर्न आधारित रणनीति है।

    अखिलेश यादव ने अपने बयान में यह भी स्वीकार किया कि अतीत में सपा के कुछ विधायक, एमएलसी और सांसद अलग-अलग परिस्थितियों में पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टियों में शामिल हुए थे। हालांकि उन्होंने इसे किसी दबाव, लालच या राजनीतिक मजबूरी का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति में जो लोग विचारधारा के बजाय दबाव में निर्णय लेते हैं, वे ही अक्सर पार्टी बदलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत राजनीतिक संगठन वही होता है जो चुनौतियों के बावजूद स्थिर बना रहे।

    ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में दावा किया था कि समाजवादी पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और कई नेता जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि कुछ बड़े नामों से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम जल्द सामने आ सकते हैं। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस दस्तावेज या आधिकारिक पुष्टि प्रस्तुत नहीं की। इसी बीच राम गोपाल यादव से जुड़े एक कथित पत्र का भी उल्लेख किया गया, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया।

    इन सभी आरोपों के बीच अखिलेश यादव ने साफ कहा कि सपा न केवल एकजुट है बल्कि पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा पर निशाना साधते हुए दावा किया कि असली चुनौती विपक्षी दलों को नहीं बल्कि सत्ताधारी दल को अपने भीतर देखनी चाहिए। उनके अनुसार, समय आने पर कई राजनीतिक सच्चाइयां सामने आएंगी, जो वर्तमान दावों की वास्तविकता स्पष्ट कर देंगी।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए इस तरह के बयानबाजी का दौर और तेज हो सकता है। फिलहाल सपा नेतृत्व अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि विरोधी दल भीतरखाने असंतोष के दावों को हवा दे रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।

  • हार्ड हिंदुत्व से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में योगी, सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे जवाबी मोर्चा संभाल रहे अखिलेश

    हार्ड हिंदुत्व से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में योगी, सॉफ्ट हिंदुत्व के सहारे जवाबी मोर्चा संभाल रहे अखिलेश

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय शेष है, लेकिन राज्य की राजनीति में चुनावी माहौल धीरे-धीरे आकार लेने लगा है। प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने वोट बैंक को मजबूत करने और नई रणनीतियों के जरिए जनसमर्थन जुटाने में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की राजनीतिक शैली और चुनावी संदेशों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

    हाल के दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भाषणों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिंदुत्व, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों को प्रमुखता मिलती दिखाई दी है। गौ संरक्षण, राम मंदिर, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दे उनके राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा आगामी चुनाव में विकास और सुशासन के साथ-साथ अपने पारंपरिक वैचारिक आधार को भी मजबूती से सामने रख सकती है।

    योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न जनसभाओं में राम मंदिर निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार की उपलब्धियों को जनता के सामने रखा है। उनके हालिया बयानों को पार्टी के कोर समर्थक वर्ग को एकजुट रखने और चुनावी संदेश को स्पष्ट करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा नेतृत्व यह भी मानता है कि वैचारिक मुद्दों और विकास कार्यों का संयुक्त प्रस्तुतीकरण चुनावी दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकता है।

    दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी बदले हुए राजनीतिक माहौल के अनुरूप अपनी रणनीति में बदलाव करती नजर आ रही है। अखिलेश यादव ने पिछले कुछ समय में धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी बढ़ाई है। मंदिरों के दर्शन, धार्मिक स्थलों के विकास संबंधी घोषणाएं और सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर सकारात्मक रुख को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे भाजपा के हिंदुत्व एजेंडे के मुकाबले सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    साथ ही समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक सामाजिक गठबंधन को मजबूत बनाए रखने के प्रयास में भी जुटी हुई है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि धार्मिक मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाते हुए व्यापक सामाजिक समूहों को साथ रखा जाए। यही कारण है कि हाल के महीनों में पार्टी के कई नेताओं को विवादित धार्मिक या जातीय टिप्पणियों से बचने की सलाह दी गई है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव केवल वैचारिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा। रोजगार, कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचा, किसानों की समस्याएं और युवाओं की आकांक्षाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। हालांकि हिंदुत्व और सांस्कृतिक पहचान जैसे विषय चुनावी विमर्श का प्रमुख हिस्सा बने रह सकते हैं।

    भाजपा जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपने मजबूत संगठन और सरकार की उपलब्धियों के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी सामाजिक समीकरणों, क्षेत्रीय मुद्दों और संतुलित राजनीतिक संदेश के जरिए मुकाबला करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    आने वाले महीनों में दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियां और अधिक तेज होने की संभावना है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई केवल विकास बनाम विकास की नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश, वैचारिक पहचान और सामाजिक संतुलन की भी होगी। ऐसे में 2027 का चुनाव राज्य की राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा साबित हो सकता है।

  • यूपी की सियासत में बयानबाज़ी का तुफान: राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना, सांसद के बयान से मचा बवाल

    यूपी की सियासत में बयानबाज़ी का तुफान: राजभर ने अखिलेश पर साधा निशाना, सांसद के बयान से मचा बवाल



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली है, जहां सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। इस बयान को लेकर एनडीए सहयोगी और यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी और इसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कड़ा हमला बोला है।

    ओमप्रकाश राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सांसद का बयान व्यक्तिगत नहीं बल्कि पार्टी नेतृत्व की सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अपने समर्थकों और नेताओं पर गहरा प्रभाव रखते हैं और उनके अनुसार ही पार्टी का राजनीतिक व्यवहार तय होता है। राजभर ने अपने बयान में यह भी कहा कि विपक्षी दलों में अक्सर नेताओं के बीच बयानबाज़ी और कटु भाषा देखने को मिलती है, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

    राजभर ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए सपा नेतृत्व की आलोचना की और मांग की कि इस तरह के बयानों के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे सार्वजनिक मंचों पर मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करें, ताकि राजनीतिक संवाद की गरिमा बनी रहे।

    यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ तीखी टिप्पणी की और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने बिजली व्यवस्था, स्मार्ट मीटर, कृषि नीतियों और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार की आलोचना की और विपक्षी रुख अपनाया।

    हालांकि, इस पूरे मामले पर समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच यह जुबानी जंग एक बार फिर यह दिखाती है कि चुनावी माहौल नजदीक आते ही बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप तेज हो जाते हैं, जिससे राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।

  • योगी का सपा पर तंज: मंत्री को नहीं पता था बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां का अंतर, अधिकारी भी नहीं पहचानते थे अपना चेहरा!

    योगी का सपा पर तंज: मंत्री को नहीं पता था बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां का अंतर, अधिकारी भी नहीं पहचानते थे अपना चेहरा!


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पुराने ‘तेवर’ में नजर आए। विपक्ष पर प्रहार करते हुए सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान शिक्षा विभाग की प्रशासनिक अव्यवस्था और मंत्रियों की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े किए। मुख्यमंत्री ने एक बेहद चौंकाने वाला किस्सा साझा किया जिसमें सपा सरकार के एक पूर्व माध्यमिक शिक्षा मंत्री की ऐतिहासिक और सामान्य ज्ञान की कमी उजागर हुई।

    बिस्मिल और बिस्मिल्लाह खां में भ्रम

    मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि स्वतंत्रता सेनानी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल के शहादत दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में सपा सरकार के शिक्षा मंत्री को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था। जब उन्हें बताया गया कि आज पंडित राम प्रसाद बिस्मिल का शहीदी दिवस है तो मंत्री जी बुरी तरह भ्रमित हो गए। उन्होंने क्रांतिकारी बिस्मिल को भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां समझ लिया।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा मंत्री जी कहने लगे कि बिस्मिल्लाह खां को तो हाल ही में अवॉर्ड मिला है उन्हें फांसी कैसे दी जा सकती है? जब वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने उन्हें टोकते हुए बताया कि बात पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की हो रही है तो मंत्री जी ने अपनी गलती सुधारने के बजाय उस व्यक्ति को ही ‘भारतीय जनता पार्टी का समर्थक’ करार दे दिया। सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार के शिक्षा मंत्री को इन दो महान विभूतियों का अंतर न पता हो वहां अंधेर नगरी चौपट राजा वाली स्थिति थी। ऐसे में अगर बच्चे नकल नहीं करते तो क्या करते?

    मंत्री को नहीं पहचानते थे अधिकारी

    मुख्यमंत्री ने एक और संस्मरण सुनाया जब वह गोरखपुर के सांसद थे। उन्होंने बताया कि एक बार रेलवे स्टेशन पर कुछ अधिकारियों के बीच सपा सरकार के शिक्षा मंत्री भी मौजूद थे लेकिन कोई अधिकारी उनके सम्मान में खड़ा तक नहीं हुआ। जब योगी ने एक अधिकारी से पूछा कि क्या वे मंत्री के साथ आए हैं तो अधिकारी ने उल्टा सवाल किया- कौन से मंत्री? बाद में खुद मंत्री ने स्वीकार किया कि वे पिछले छह महीने से दफ्तर ही नहीं गए इसलिए अधिकारी उन्हें पहचानते ही नहीं।

    कानून से ऊपर कोई नहीं

    कानून-व्यवस्था और धार्मिक मर्यादा पर बात करते हुए सीएम योगी ने प्रयागराज कुंभ का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता। आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों और वेदों की एक गरिमा है जिसका पालन करना अनिवार्य है। उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और नियमों का उल्लंघन किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
  • अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात

    अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं के घोषणाएं और वादे चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये देने का वादा किया है। उन्होंने इसे बीजेपी के बिहार चुनाव में दिए गए 10,000 रुपये के वादे का जवाब बताया। इस घोषणा पर अयोध्या की महिलाओं की क्या राय है, यह जानने के लिए यूपी Tak की टीम ने गांव में जाकर उनकी प्रतिक्रिया ली।

    महिलाओं ने की उम्मीदें जाहिर

    अयोध्या के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने इस योजना पर अपनी राय दी और अपनी उम्मीदों का इज़हार किया। एक स्थानीय महिला सुंदर कली ने कहा, अखिलेश यादव का यह प्रस्ताव अच्छा है, हम लोग मजदूरी करते हैं, इससे अच्छा होगा कि हमें पैसा मिले। अभी सरकार की तरफ से हमें कुछ नहीं मिलता, केवल मजदूरी करते हैं। अगर अखिलेश यादव देंगे तो ठीक है, नहीं तो हम अपना काम करते रहेंगे।

    विकास की उम्मीदें भी बनीं मुद्दा

    वहीं कश्मीरा देवी ने कहा, हम लोग मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं। अगर सरकार कुछ मदद करेगी तो अच्छा रहेगा, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। सरकार बढ़िया नहीं काम कर रही है, जो विकास करेगा हम उसके साथ रहेंगे। विमला देवी ने भी कहा, समाजवादी सरकार के समय पेंशन मिलती थी और सड़कें बनती थीं। अब कुछ नहीं मिल रहा है। हमें विकास और रोजगार दोनों चाहिए।

    महिलाओं की मांग-पैसा नहीं, विकास और रोजगार भी चाहिए

    ममता नाम की महिला ने कहा, यह अच्छा है कि पैसा मिलेगा, इससे हमारी रोज़ी-रोटी में मदद होगी। गरीब बच्चों को भी फायदा होगा, लेकिन सिर्फ पैसा नहीं, हमें काम भी चाहिए। अगर पैसा मिलेगा तो वोट देंगे, नहीं मिला तो कोई बात नहीं। वहीं अन्य महिलाओं ने भी इस योजना का स्वागत किया, लेकिन साफ किया कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो वे वोट नहीं देंगी।

    योगी सरकार से तुलना

    महिलाओं ने योगी सरकार की योजनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें विधवा पेंशन के रूप में 2,000 रुपये मिलते हैं, लेकिन इसके बावजूद गांव में विकास की कमी महसूस हो रही है। रोज़मर्रा की सुविधाओं और रोजगार के मामले में उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    समाजवादी पार्टी और बीजेपी का मुकाबला

    अखिलेश यादव का यह वादा महिलाओं के बीच उम्मीद और नाखुशी का मिश्रित असर छोड़ रहा है। हालांकि, उनका कहना है कि वे सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि स्थिरता, रोजगार और विकास के लिए भी वोट देंगे। यह साफ है कि महिलाएं अपनी जिंदगी में सुधार और अपने गांव के विकास को भी उतना ही महत्व देती हैं जितना कि चुनावी वादों को।