Tag: Sanatan

  • नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग फिर तेज, पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने का दिया प्रस्ताव

    नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग फिर तेज, पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने का दिया प्रस्ताव

    नई दिल्ली । नेपाल में एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के गुट के राष्ट्रीय सम्मेलन में देश की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आया। सम्मेलन में सनातन धर्म को नेपाल की राष्ट्रीय पहचान से जोड़ने की बात कही गई, जिसके बाद वहां के राजनीतिक माहौल में नई बहस शुरू हो गई है।

    नेपाल लंबे समय तक हिंदू राष्ट्र के रूप में पहचाना जाता था, लेकिन वर्ष 2008 में राजशाही के अंत और राजनीतिक परिवर्तन के बाद देश को धर्मनिरपेक्ष गणराज्य घोषित किया गया। इसके बाद से हिंदू राष्ट्र की मांग अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों की ओर से समय-समय पर उठती रही है। हाल के दिनों में मधेश और तराई क्षेत्रों में सामने आए सांप्रदायिक तनाव तथा सामाजिक असंतोष के बीच इस मांग ने फिर जोर पकड़ा है।

    देउबा गुट के सम्मेलन में पारित प्रस्ताव में नेपाल की पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाओं को राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। प्रस्ताव में सनातन धर्म की पहचान को आगे बढ़ाने के साथ हिंदू, बौद्ध, किरात और प्रकृति आधारित धार्मिक परंपराओं के संरक्षण की बात भी कही गई। इसके साथ ही सभी धार्मिक समुदायों की स्वतंत्रता, सहिष्णुता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने पर जोर दिया गया।

    सम्मेलन के समापन समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा ने अपने धार्मिक विश्वास को लेकर खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह हिंदू हैं और उन्हें यह कहने का अधिकार होना चाहिए कि वह हिंदू हैं। देउबा ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनका रुख किसी समुदाय के विरोध में नहीं है। उनके इस बयान को नेपाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सम्मेलन में नेपाल के मौजूदा संविधान को लेकर भी चर्चा हुई। प्रस्ताव में कहा गया कि संविधान में जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए। हालांकि, ऐसे किसी भी बदलाव के लिए सभी संबंधित समूहों के साथ बातचीत और सहमति की प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया गया। इससे संकेत मिलता है कि संविधान में धार्मिक पहचान से जुड़े किसी बदलाव को लेकर व्यापक राजनीतिक संवाद की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

    नेपाल में हिंदू राष्ट्र की बहाली का मुद्दा केवल धार्मिक पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध देश की राजनीति, संविधान और सामाजिक संरचना से भी है। नेपाल में हिंदू और बौद्ध परंपराओं का ऐतिहासिक प्रभाव रहा है, जबकि देश में अन्य धार्मिक समुदाय भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। ऐसे में हिंदू राष्ट्र की मांग के साथ धार्मिक स्वतंत्रता और समान अधिकारों को लेकर भी बहस तेज होने की संभावना है।

    देउबा गुट की ओर से सामने आया प्रस्ताव नेपाली कांग्रेस के भीतर भी राजनीतिक चर्चा को प्रभावित कर सकता है। नेपाल की मुख्यधारा की राजनीति में धर्मनिरपेक्षता, संवैधानिक व्यवस्था और पारंपरिक धार्मिक पहचान के बीच संतुलन को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। अब सम्मेलन में हिंदू राष्ट्र की पहचान को लेकर उठी आवाज ने इस बहस को फिर राष्ट्रीय स्तर पर ला दिया है। हालांकि, नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने के लिए संवैधानिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक प्रक्रिया से गुजरना होगा।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का पलटवार, बोले- दोषी साधु-संत नहीं, विपक्ष का रवैया सनातन विरोधी

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का पलटवार, बोले- दोषी साधु-संत नहीं, विपक्ष का रवैया सनातन विरोधी


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की पड़ताल में अब तक कोई साधु-संत दोषी नहीं पाया गया है। ऐसे में पूरे संत समाज और मंदिर से जुड़े कर्मचारियों पर आरोप लगाना अनुचित है।

    मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान न्यायालय के निर्देश पर एसआईटी का पुनर्गठन भी किया गया, लेकिन अब तक की जांच में किसी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई।

    ‘सनातन और रामजन्मभूमि का हमेशा विरोध किया’
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा और कांग्रेस लगातार रामजन्मभूमि, भगवान राम और सनातन परंपरा के प्रति विरोध का रुख अपनाती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद और सदन के भीतर विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप सनातन आस्था का अपमान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों पर कार्रवाई हो रही है, उनका भाजपा या संत समाज से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिलने के बावजूद विपक्ष के कई नेताओं ने उसमें भाग नहीं लिया, जबकि अब वही लोग आस्था की बात कर रहे हैं।

    ‘यूपी की छवि खराब करने की कोशिश’
    मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष उत्तर प्रदेश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य अब बीमारू प्रदेश की छवि से बाहर निकलकर देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है, लेकिन विपक्ष इसे स्वीकार नहीं कर पा रहा है। उन्होंने सदन में हुए हंगामे और मार्शलों के साथ धक्कामुक्की की भी निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। उनके अनुसार, इस तरह का व्यवहार प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और विकास की गति को प्रभावित करने का प्रयास है।

    विधानसभा में हंगामे पर भी जताई नाराजगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा का एजेंडा पहले से तय था, लेकिन विपक्ष ने बजट पर चर्चा करने के बजाय दूसरे मुद्दों को लेकर व्यवधान उत्पन्न किया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए विपक्ष के आचरण को “शर्मनाक” करार दिया।

  • 542 करोड़ की परियोजनाओं के लोकार्पण के बीच सीएम योगी का बड़ा राजनीतिक संदेश, सनातन और विकास को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना

    542 करोड़ की परियोजनाओं के लोकार्पण के बीच सीएम योगी का बड़ा राजनीतिक संदेश, सनातन और विकास को लेकर विपक्ष पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में सोमवार को आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास परियोजनाओं के उद्घाटन के साथ-साथ विपक्ष पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला। 542 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 82 विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के बाद आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सनातन, विकास और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अपनी सरकार की नीतियों का उल्लेख किया और समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि सनातन परंपरा देश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का आधार है। उन्होंने कहा कि जब तक सनातन सुरक्षित रहेगा, तब तक समाज और राष्ट्र भी सुरक्षित रहेंगे। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि यदि सनातन पर किसी प्रकार का खतरा उत्पन्न होता है तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा। अपने भाषण में उन्होंने विपक्षी दलों पर सनातन विरोधी राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

    मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पहले धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के विकास की उपेक्षा की जाती थी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने आस्था स्थलों के विकास, पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने महादेवा स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर और अयोध्या सहित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर कराए जा रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख किया।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश का माहौल बेहतर हुआ है और उद्योगों को बढ़ावा मिलने से रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में महिलाओं, व्यापारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि कानून व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा और उपद्रव करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

    विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश किया जा रहा है। उन्होंने रक्षा उत्पादन, औद्योगिक विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश को निवेश और रोजगार का प्रमुख केंद्र बनाने के लिए कई योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने देश के प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी बाबू केडी सिंह की विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनकी ऐतिहासिक हवेली के संरक्षण के लिए सरकार आवश्यक कदम उठाएगी ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से प्रेरणा ले सकें। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि इस धरोहर को संरक्षित रखते हुए खेल और सांस्कृतिक विरासत दोनों को सम्मान देने का प्रयास किया जाएगा।

    बाराबंकी में आयोजित इस कार्यक्रम ने विकास और राजनीति दोनों को एक साथ केंद्र में ला दिया। एक ओर सरकार ने विभिन्न विकास परियोजनाओं को जनता को समर्पित किया, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान भी चर्चा का विषय बने। आगामी समय में इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

  • राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    राम मंदिर और सनातन मुद्दे पर आम आदमी पार्टी का भाजपा पर तीखा प्रहार, केजरीवाल बोले— भगवान राम के नाम पर राजनीति नहीं, आस्था जरूरी

    नई दिल्ली । आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को भाजपा पर भगवान राम और राम मंदिर के मुद्दे को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी सनातन मूल्यों के प्रति वास्तविक प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती है, जबकि भाजपा भगवान राम के नाम का उपयोग केवल चुनावी राजनीति के लिए करती है। उनके बयान के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है।

    प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने कहा कि भाजपा चुनावी सभाओं और राजनीतिक अभियानों में भगवान राम तथा राम मंदिर का उल्लेख प्रमुखता से करती है, लेकिन आस्था के अनुरूप व्यवहार नहीं करती। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी धार्मिक भावनाओं को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है। उनके अनुसार, आस्था केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका व्यवहार में भी प्रतिबिंब दिखाई देना चाहिए।

    उन्होंने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से देशभर के श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है, ताकि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास बना रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित मामलों में जिम्मेदारी तय करने के बजाय वास्तविक तथ्यों को सामने लाने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई।

    केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों का अध्ययन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की ओर से राम मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना को लेकर अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं दी। उन्होंने कहा कि यह विषय केवल राजनीतिक बहस का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है और इसी कारण लोग इस पर जवाब चाहते हैं।

    आम आदमी पार्टी के प्रमुख ने अपनी पार्टी की धार्मिक और सामाजिक पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में धार्मिक आयोजनों, भजन संध्याओं, मंदिरों के विकास और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कई कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी गई है। उनका कहना था कि इन प्रयासों का उद्देश्य किसी राजनीतिक लाभ के बजाय समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं का सम्मान करना है।

    उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी ने शासन के दौरान धार्मिक यात्राओं को सुविधाजनक बनाने और विभिन्न आस्था स्थलों से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठाए। उनके अनुसार, सनातन परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक मूल्यों के सम्मान को उनकी पार्टी सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखती है।

    केजरीवाल के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर आम आदमी पार्टी इसे आस्था और जवाबदेही का विषय बता रही है, वहीं दूसरी ओर यह बयान आगामी राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मुद्दों पर राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी के बीच यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में राम मंदिर और सनातन से जुड़े विषय सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बने रह सकते हैं।