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  • 34 साल की मेहनत के बाद रवि किशन को मिली पहचान, बोले- ‘मैं खत्म हो गया था’

    34 साल की मेहनत के बाद रवि किशन को मिली पहचान, बोले- ‘मैं खत्म हो गया था’


    नई दिल्ली । रवि किशन की जिंदगी की कहानी एक लंबी जर्नी हैजिसमें संघर्षनिराशा और फिर सफलता का उजाला शामिल है। 34 साल तक धैर्य से इंतजार करने के बाद उन्हें आखिरकार वह मुकाम मिलाजिसकी हर कलाकार को चाह होती है। लापता लेडीज़ और वेब सीरीज मामला लीगल है में उनके बेहतरीन अभिनय ने दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों का दिल जीत लिया। इस समय वे फिल्म भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन में भी नजर आ रहे हैंजिसे बिनैफर और संजय कोहली ने प्रोड्यूस किया है।

    रवि किशन ने इस फिल्म के बारे में कहा कि वे हमेशा से इस शो के फैन रहे हैं। कहानीडायरेक्टर और उनके किरदार तीनों ही कारण थे जिनकी वजह से उन्होंने यह प्रोजेक्ट चुना। उनका किरदार एकतरफा प्यार में डूबा हुआ हैजिसे बिना ज्यादा एक्सप्रेशन के भी लोगों को हंसाना पड़ता है। रवि ने बताया कि बिहार और यूपी में उन्हें ऐसे लोगों से रोज मिलना होता हैइसलिए यह रोल उन्हें बेहद पसंद आया।

    हालांकि रवि किशन दशकों से फिल्मों में काम कर रहे हैंलेकिन उन्हें बड़ी पहचान हाल ही में मिली। उन्होंने कहा कि उन्होंने 34 साल तक धैर्य से इंतजार किया और एक समय ऐसा भी आया जब लोगों को लगता था कि वे सिर्फ भोजपुरी फिल्मों तक सीमित रह गए हैंराजनीति में चले गए हैंउम्र बढ़ गई है और अब धीरे-धीरे गायब हो जाएंगे। लेकिन भगवान की कृपा सेजब सब कुछ खत्म होता दिखातभी किरण राव जैसी निर्देशक लापता लेडीज़ जैसी स्क्रिप्ट लेकर आईं और उसके बाद मामला लीगल है जैसी वेब सीरीज ने उन्हें नई पहचान दी।

    रवि ने कहा कि पिछले साल ने साबित कर दिया कि जब फिल्ममेकर उन पर भरोसा करते हैं और अच्छा कंटेंट देते हैंतो वे क्या कर सकते हैं। उनकी जर्नी संघर्ष कर रहे कलाकारों के लिए एक मिसाल है।

    उन्होंने तेरे नाम के बाद अपने करियर के उस दौर को याद किया जब काम के मौके बहुत कम मिल रहे थे। सलमान खान के साथ तेरे नाम के बाद उन्हें लगा कि यहां बहुत भीड़ हैवह इस रेस का हिस्सा नहीं बन पाएंगे और लोग उनका रिस्पॉन्स नहीं देंगे। गुस्सा और निराशा जरूर थीलेकिन उन्होंने उसी गुस्से को भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने में लगाया। रवि ने साफ कहा कि उन्होंने कभी बॉलीवुड को दोष नहीं दियाक्योंकि हिंदी सिनेमा ने उन्हें पहचान दी और वही सब सिखायाजिसे बाद में भोजपुरी फिल्मों ने अपनाया।

    अब जब उन्हें प्यार और पहचान मिल रही हैतो वे बेहद आभारी हैं। रवि किशन का कहना है कि यह उगते सूरज का खेल है और यह बात हर पेशे में सच है। उन्होंने कहा कि अब जो प्यार मिल रहा हैउसके लिए वह दिल से धन्यवाद करते हैं।

  • नवादा में मॉब लिंचिंग की दर्दनाक घटना: अतहर हुसैन की पत्नी ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी

    नवादा में मॉब लिंचिंग की दर्दनाक घटना: अतहर हुसैन की पत्नी ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी

    नवादा । बिहार के नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र में 5 दिसंबर की रात को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी जब 35 वर्षीय मोहम्मद अतहर हुसैन को धर्म के नाम पर बेरहमी से मार डाला गया। यह घटना उस वक्त हुई जब अतहर डुमरी गांव से लौट रहे थे और भट्टा गांव के पास छह-सात नशे में धुत युवकों ने उन्हें रोक लिया। बाद में नाम और धर्म का पता चलने के बाद अतहर पर हमला किया गया। उनकी हत्या के बाद परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए इसे सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि एक सांप्रदायिक हत्या करार दिया है।

    घटना का विवरण

    अतहर हुसैन जब घर लौट रहे थे तब कुछ युवकों ने उन्हें घेर लिया। उन्हें साइकिल से उतारकर हाथ-पैर बांधकर एक कमरे में घसीटा गया। वहां पर अतहर के साथ बर्बरता की सारी सीमाएं पार की गईं। पैंट खोलकर उनके धर्म की पहचान की गई फिर करंट लगाया गया उंगलियां तोड़ी गईं कान काटे गए और शरीर पर गर्म लोहे की रॉड से चोटें दी गईं। इस पूरी घटना को सहते हुए भी अतहर ने पुलिस को अपनी जान बचाने के लिए मदद मांगी।

    इलाज के दौरान अतहर की मौत

    अतहर हुसैन को गंभीर अवस्था में नवादा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 7 दिसंबर को उन्होंने कांपती आवाज में इस दिल दहला देने वाली घटना की पूरी कहानी सुनाई थी। हालांकि उनके शरीर पर लगी गहरी चोटों ने उनका साथ नहीं दिया और 12 दिसंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस दौरान उन्होंने एबीपी संवाददाता को अस्पताल में अपनी आपबीती सुनाई और पूरी घटना के बारे में जानकारी दी।

    पोस्टमॉर्टम और पुलिस कार्रवाई

    अतहर की मौत के बाद उनका पोस्टमॉर्टम नालंदा सदर अस्पताल में फॉरेंसिक टीम और मजिस्ट्रेट की निगरानी में किया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों—सोनू कुमार रंजन कुमार सचिन कुमार और श्री कुमार को गिरफ्तार किया है। हालांकि अन्य आरोपी अभी फरार हैं।

    रोह थाना प्रभारी रंजन कुमार ने इस मामले में गिरफ्तारी की पुष्टि की है लेकिन परिजनों का कहना है कि उन्हें सिर्फ गिरफ्तारी से संतुष्टि नहीं है। वे चाहते हैं कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई हो और अतहर हुसैन के हत्यारों को सजा मिले। उनके बेटे इस्तेखार हुसैन ने प्रशासन से सिर्फ एक बात कही हमारे पिता के हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए।”

    मॉब लिंचिंग पर बढ़ते सवाल

    इस दर्दनाक घटना ने बिहार और खासकर नवादा जिले में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धर्म के नाम पर हिंसा और इस तरह के अपराधों का बढ़ता चलन समाज के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं है बल्कि यह हमारे समाज के उन गंभीर मुद्दों को उजागर करती है जिनमें धार्मिक सहिष्णुता की कमी और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियां दिखाई देती हैं।

    अतहर के परिजनों का दर्द इस बात को साफ तौर पर दर्शाता है कि समाज और प्रशासन को सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार करने से अधिक कुछ करना होगा। समाज में धार्मिक सहिष्णुता और समानता की आवश्यकता को बल देने के साथ साथ हमें ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई और अतहर हुसैन जैसे व्यक्ति की हत्या न हो।

    मॉब लिंचिंग की घटनाएं एक बहुत बड़ा सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुकी हैं। अतहर हुसैन की दर्दनाक मौत ने यह सवाल खड़ा किया है कि हमें समाज में आपसी सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता की आवश्यकता को समझना होगा। केवल गिरफ्तारी से इन घटनाओं का समाधान नहीं होगा बल्कि इसके लिए समाज के सभी हिस्सों को एकजुट होकर काम करना होगा।