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  • MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी

    MP: भाजपा विधायक संजय पाठक की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रपये की साइबर ठगी


    कटनी।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. राज्य के सबसे अमीर विधायकों में गिने जाने वाले और कटनी जिले (Katni district) के विजयराघवगढ़ (Vijayraghavgarh) से विधायक संजय पाठक (MLA Sanjay Pathak) की कंपनी के साथ डेढ़ करोड़ रुपये की भारी-भरकम साइबर ठगी का मामला सामने आया है. शातिर साइबर ठगों ने कंपनी के सीनियर डायरेक्टर के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को चकमा दिया और बड़ी आसानी से पैसे ट्रांसफर करवा लिया।

    पूरी घटना बुधवार 12 अगस्त दोपहर करीब 2 बजे की है. विधायक संजय पाठक की कंपनी के सीनियर अकाउंटेंट शैलेश तिवारी के पास एक मैसेज आया. यह मैसेज कंपनी के ही एक सीनियर डायरेक्टर के मोबाइल नंबर से आया था, जिस पर उनकी फोटो भी लगी हुई थी. मैसेज में अकाउंटेंट को तुरंत किसी दूसरे बैंक खाते में डेढ़ करोड़ रुपये ट्रांसफर करने को कहा गया।

    चूंकि मैसेज सीधे सीनियर डायरेक्टर के नंबर और उनकी प्रोफाइल फोटो के साथ आया था, इसलिए अकाउंटेंट को किसी भी तरह का कोई शक नहीं हुआ. बिना देर किए अकाउंटेंट ने कंपनी के खाते से पैसे ट्रांसफर कर दिए. दो बार में ट्रांजेक्शन किए गए, जिसमें एक बार 1 करोड़ 16 लाख और दूसरी बार करीब 33 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. इस तरह कुल मिलाकर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये ठगों के खाते में चले गए।


    फ्लाइट से उतरते ही विधायक को मिली जानकारी

    दिलचस्प बात यह है कि जिस समय यह फ्रॉड हो रहा था, विधायक संजय पाठक फ्लाइट से यात्रा कर रहे थे. जैसे ही वह प्लेन से उतरे, उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिली। मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक संजय पाठक ने तुरंत कटनी के पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा को पूरी घटना की जानकारी दी. पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की. पुलिस ने कुछ राशि को होल्ड कराने के निर्देश दिए. कंपनी के अकाउंटेंट की शिकायत पर रंगनाथ नगर थाने में साइबर ठगी का मामला दर्ज कर लिया गया है।


    ‘बॉस स्कैम’ का शिकार हुई कंपनी

    कटनी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कमल मौर्य ने इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि यह एक टिपिकल साइबर फ्रॉड है, जिसे ‘बॉस स्कैम’ कहा जाता है. इसमें ठग बड़े अधिकारियों की नकली प्रोफाइल बनाकर कर्मचारियों को झांसे में लेते हैं।

    एएसपी ने बताया कि साइबर ठगों ने मात्र दो-तीन घंटे के अंदर ही पूरी रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर साफ कर दिया. ठगी गई रकम को करीब 200 अलग-अलग जगहों पर डिस्ट्रीब्यूट किया गया, जिसे एटीएम और चेक के माध्यम से निकाला जा रहा है।

    पुलिस और साइबर सेल की टीम ने तुरंत ऐक्शन लेते हुए ठगों के खातों से अब तक करीब 23 लाख रुपये की राशि को होल्ड (फ्रीज) करवा लिया है. फिलहाल, साइबर सेल की टीम तकनीकी जांच में जुटी हुई है और ठगों के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

  • 1000 करोड़ की धोखाधड़ी केस में बड़ा खुलासा: हवाला से भोपाल पहुंचता था करोड़ों का कैश, कोडवर्ड था '100 दाने'

    1000 करोड़ की धोखाधड़ी केस में बड़ा खुलासा: हवाला से भोपाल पहुंचता था करोड़ों का कैश, कोडवर्ड था '100 दाने'


    कटनी  कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों से जुड़े लगभग 1000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार रायपुर के खनन कारोबारी महेंद्र गोयनका को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि गोयनका का एक संगठित हवाला नेटवर्क भोपाल तक फैला हुआ था, जिसके जरिए करोड़ों रुपये की नकदी रियल एस्टेट कारोबार में खपाई जाती थी। इस मामले में कोलकाता पुलिस पहले ही महेंद्र गोयनका को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां अब उसके आर्थिक नेटवर्क की परतें खोल रही हैं।

    जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि भोपाल के रियल एस्टेट कारोबारी राजेश शर्मा और महेंद्र गोयनका के बीच लंबे समय से कारोबारी संबंध थे। दिसंबर 2024 में हुई छापेमारी के दौरान जब्त रिकॉर्ड, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और वित्तीय दस्तावेजों से यह संकेत मिले कि भोपाल के नीलबड़, रातीबड़, चंदनपुरा, फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी क्षेत्र में जमीन खरीदने के लिए हवाला के जरिए बड़ी मात्रा में नकदी पहुंचाई गई।

    जांच एजेंसियों के अनुसार जमीन खरीदने का पूरा मॉडल दो हिस्सों में बांटा गया था। पहला भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया जाता था, जिसे रजिस्ट्री में दर्ज किया जाता था। दूसरा बड़ा हिस्सा नकद के रूप में हवाला चैनल के जरिए जमीन विक्रेताओं तक पहुंचाया जाता था। इसी प्रक्रिया के जरिए टैक्स चोरी के साथ-साथ करोड़ों रुपये का काला धन भी रियल एस्टेट में लगाया गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि रायपुर से भोपाल तक नकदी पहुंचाने की जिम्मेदारी महेंद्र गोयनका के कर्मचारी अशोक रैकवार के पास थी, जबकि भोपाल में रकम प्राप्त करने और आगे जमीन मालिकों तक पहुंचाने का काम राजेश शर्मा के कर्मचारी राजेश तिवारी संभालते थे। पूरे लेनदेन का रिकॉर्ड एक अन्य कर्मचारी दीपक तुलसानी रखता था। अधिकारियों के मुताबिक एक बार में करीब 8 करोड़ रुपये तक की नकदी हवाला के जरिए भेजी गई।

    सबसे चौंकाने वाला खुलासा लेनदेन के तरीके को लेकर हुआ है। जांच में पता चला कि हवाला नेटवर्क में पहचान सुनिश्चित करने के लिए व्हाट्सएप पर 10 और 20 रुपये के नोट की तस्वीरें भेजी जाती थीं। जब दोनों पक्षों के पास एक जैसी तस्वीर होती थी, तभी नकदी की डिलीवरी की जाती थी। इसके अलावा बातचीत में “दाने” शब्द का इस्तेमाल कोडवर्ड के रूप में किया जाता था। “100 दाने” का मतलब एक करोड़ रुपये माना जाता था। राजेश शर्मा ने अपने मोबाइल में महेंद्र गोयनका का नंबर “एमजी भाई वन” नाम से सेव कर रखा था और लेनदेन का पूरा हिसाब भी इसी नाम से दर्ज मिलता है।

    जांच में यह भी सामने आया कि चंदनपुरा क्षेत्र में गोयनका की कंपनियों निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, यूरो प्रतीक और यूरा पेलेट्स के नाम पर करीब 54 एकड़ जमीन खरीदी गई। इस सौदे की वास्तविक कीमत करीब 110 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि रजिस्ट्री में केवल 65.10 करोड़ रुपये का भुगतान दर्ज किया गया। बाकी लगभग 45 करोड़ रुपये हवाला के जरिए नकद पहुंचाए गए। इसी तरह फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी गांव में भी कई जमीनों की खरीद में बैंकिंग और नकद भुगतान का मिश्रित मॉडल अपनाने के आरोप सामने आए हैं।

    अब 10 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद महेंद्र गोयनका को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां उसकी जमानत याचिका पर भी सुनवाई हो सकती है। वहीं इस कथित 1000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में गोयनका की पत्नी, भाई सहित छह आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां पूरे हवाला नेटवर्क, काले धन के प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

    Tags: भोपाल, महेंद्र गोयनका, हवाला नेटवर्क, संजय पाठक, रियल एस्टेट, काला धन, मध्य प्रदेशजिले के विजयराघवगढ़ से विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों से जुड़े लगभग 1000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार रायपुर के खनन कारोबारी महेंद्र गोयनका को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि गोयनका का एक संगठित हवाला नेटवर्क भोपाल तक फैला हुआ था, जिसके जरिए करोड़ों रुपये की नकदी रियल एस्टेट कारोबार में खपाई जाती थी। इस मामले में कोलकाता पुलिस पहले ही महेंद्र गोयनका को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां अब उसके आर्थिक नेटवर्क की परतें खोल रही हैं।

    जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि भोपाल के रियल एस्टेट कारोबारी राजेश शर्मा और महेंद्र गोयनका के बीच लंबे समय से कारोबारी संबंध थे। दिसंबर 2024 में हुई छापेमारी के दौरान जब्त रिकॉर्ड, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और वित्तीय दस्तावेजों से यह संकेत मिले कि भोपाल के नीलबड़, रातीबड़, चंदनपुरा, फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी क्षेत्र में जमीन खरीदने के लिए हवाला के जरिए बड़ी मात्रा में नकदी पहुंचाई गई।

    जांच एजेंसियों के अनुसार जमीन खरीदने का पूरा मॉडल दो हिस्सों में बांटा गया था। पहला भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया जाता था, जिसे रजिस्ट्री में दर्ज किया जाता था। दूसरा बड़ा हिस्सा नकद के रूप में हवाला चैनल के जरिए जमीन विक्रेताओं तक पहुंचाया जाता था। इसी प्रक्रिया के जरिए टैक्स चोरी के साथ-साथ करोड़ों रुपये का काला धन भी रियल एस्टेट में लगाया गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि रायपुर से भोपाल तक नकदी पहुंचाने की जिम्मेदारी महेंद्र गोयनका के कर्मचारी अशोक रैकवार के पास थी, जबकि भोपाल में रकम प्राप्त करने और आगे जमीन मालिकों तक पहुंचाने का काम राजेश शर्मा के कर्मचारी राजेश तिवारी संभालते थे। पूरे लेनदेन का रिकॉर्ड एक अन्य कर्मचारी दीपक तुलसानी रखता था। अधिकारियों के मुताबिक एक बार में करीब 8 करोड़ रुपये तक की नकदी हवाला के जरिए भेजी गई।

    सबसे चौंकाने वाला खुलासा लेनदेन के तरीके को लेकर हुआ है। जांच में पता चला कि हवाला नेटवर्क में पहचान सुनिश्चित करने के लिए व्हाट्सएप पर 10 और 20 रुपये के नोट की तस्वीरें भेजी जाती थीं। जब दोनों पक्षों के पास एक जैसी तस्वीर होती थी, तभी नकदी की डिलीवरी की जाती थी। इसके अलावा बातचीत में “दाने” शब्द का इस्तेमाल कोडवर्ड के रूप में किया जाता था। “100 दाने” का मतलब एक करोड़ रुपये माना जाता था। राजेश शर्मा ने अपने मोबाइल में महेंद्र गोयनका का नंबर “एमजी भाई वन” नाम से सेव कर रखा था और लेनदेन का पूरा हिसाब भी इसी नाम से दर्ज मिलता है।

    जांच में यह भी सामने आया कि चंदनपुरा क्षेत्र में गोयनका की कंपनियों निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, यूरो प्रतीक और यूरा पेलेट्स के नाम पर करीब 54 एकड़ जमीन खरीदी गई। इस सौदे की वास्तविक कीमत करीब 110 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि रजिस्ट्री में केवल 65.10 करोड़ रुपये का भुगतान दर्ज किया गया। बाकी लगभग 45 करोड़ रुपये हवाला के जरिए नकद पहुंचाए गए। इसी तरह फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी गांव में भी कई जमीनों की खरीद में बैंकिंग और नकद भुगतान का मिश्रित मॉडल अपनाने के आरोप सामने आए हैं।

    अब 10 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद महेंद्र गोयनका को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां उसकी जमानत याचिका पर भी सुनवाई हो सकती है। वहीं इस कथित 1000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में गोयनका की पत्नी, भाई सहित छह आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां पूरे हवाला नेटवर्क, काले धन के प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।