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  • Aaj Ka Panchang: आज अंगारकी एकदंत चतुर्थी, जानें चंद्रोदय समय और शुभ-अशुभ मुहूर्त

    Aaj Ka Panchang: आज अंगारकी एकदंत चतुर्थी, जानें चंद्रोदय समय और शुभ-अशुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली। 5 मई 2026, मंगलवार का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जिसे एकदंत संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। खास बात यह है कि मंगलवार के दिन पड़ने वाली चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है, जो अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस दिन भगवान गणेश और हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व होता है।

    तिथि, वार और ग्रह स्थिति
    आज चतुर्थी तिथि सुबह 05:24 बजे से शुरू होकर पूरे दिन रहेगी। मंगलवार होने से यह दिन और अधिक पुण्यदायी बन गया है। चंद्रमा आज धनु राशि में गोचर कर रहा है, जिससे कई राशियों पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। साथ ही मंगल और गुरु के बीच केंद्र दृष्टि योग बन रहा है, जो विशेष फलदायी माना जाता है।

    नक्षत्र और योग का प्रभाव
    आज दोपहर 12:54 बजे तक ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा, इसके बाद मूल नक्षत्र शुरू हो जाएगा। पूरे दिन शिव योग का निर्माण हो रहा है, जो शुभ कार्यों और पूजा-पाठ के लिए उत्तम माना जाता है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्य विशेष फल देते हैं।

    सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र दर्शन का समय
    सूर्योदय सुबह 05:55 बजे और सूर्यास्त शाम 06:52 बजे होगा। चंद्रोदय रात 10:20 बजे होगा, जबकि चंद्रास्त अगले दिन सुबह 08:57 बजे रहेगा। संकष्टी चतुर्थी व्रत रखने वाले श्रद्धालु चंद्रमा को अर्घ्य देकर रात 10:35 बजे तक व्रत का पारण कर सकते हैं।

    आज के शुभ मुहूर्त
    ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:18 बजे से 05:06 बजे तक रहेगा, जो साधना और पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा। आज अमृत काल नहीं है, लेकिन शिवयोग पूरे दिन शुभता प्रदान करेगा।

    आज के अशुभ काल (राहुकाल समेत)
    राहुकाल दोपहर 03:37 बजे से शाम 05:14 बजे तक रहेगा, इस दौरान कोई भी शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। यमगंड सुबह 09:09 बजे से 10:46 बजे तक और कुलिक काल दोपहर 12:23 बजे से 02:00 बजे तक रहेगा। दुर्मुहूर्त सुबह 08:30 बजे से 09:22 बजे तक और देर रात 11:17 बजे से 12:01 बजे तक रहेगा। इसके अलावा वर्ज्यम् काल रात 09:54 बजे से 11:42 बजे तक रहेगा।

    क्या करें आज के दिन?
    आज के दिन व्रत रखकर भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक और लड्डू अर्पित करें। साथ ही हनुमान जी की पूजा कर हनुमान चालीसा का पाठ करें। रात में चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें। ऐसा करने से सभी विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

  • संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा

    संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा और उपवास से जुड़ा हुआ है जिसे विघ्न विनाशक और सुख-समृद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    सकट चौथ का महत्व

    सकट चौथ को खासतौर पर माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए रखती हैं। यह दिन गणेश जी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में खुशहाली लाने का प्रमुख अवसर होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन उपवास करने से न केवल घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है बल्कि हर प्रकार के संकटों से मुक्ति भी मिलती है।

    तिथि और समय
    दृक पंचांग के अनुसार इस साल संकष्टी चतुर्थी 6 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 6 जनवरी को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगा जो व्रत के पूर्ण होने का संकेत है।

    व्रत का तरीका

    सकट चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जला उपवास रखते हैं जबकि कुछ हल्का सात्विक भोजन करते हैं। व्रत के लिए सबसे पहले प्रात काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर भगवान गणेश का स्मरण करते हुए उनका पूजन करें।

    पूजन विधि

    शाम के समय चंद्रमा के दर्शन से पहले भगवान गणेश की पूजा विधिपूर्वक करें। सबसे पहले गणेश जी का पंचामृत से स्नान कराएं फिर घी और सिंदूर का लेप लगाएं। इसके बाद जनेऊ रोली इत्र दूर्वा फूल चंदन अबीर लौंग चढ़ाकर भगवान गणेश को धूप-दीप दिखाएं।गणेश जी को तिल-गुड़ के लड्डू मोदक और तिलकुट का भोग अर्पित करें। यह भगवान गणेश को अत्यधिक प्रिय है। पूजा के बाद गणेश जी के सामने गं गण गणपतये नमः मंत्र का जाप करें और गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

    चंद्रोदय पर अर्घ्य देना

    चंद्रमा के दर्शन के बाद चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें। इस समय दिए गए अर्घ्य से व्रत पूरा होता है और भक्तों को संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके बाद व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें।

    पूजन से लाभ
    सकट चौथ का व्रत विशेष रूप से संतान सुख और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। साथ ही इस दिन किए गए पूजा से भगवान गणेश की कृपा से घर में शांति और सुख-समृद्धि आती है। भक्तों का मानना है कि इस दिन किए गए व्रत से हर प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सफलता और खुशी का वास होता है।

    व्रत कथा

    सकट चौथ पर पूजा के साथ-साथ व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी बेहद महत्वपूर्ण है। कथा में भगवान गणेश के अनेक भक्तों की श्रद्धा और उनकी आस्था के किस्से बताए जाते हैं जो संकटों से उबरकर भगवान गणेश की कृपा से जीवन में सुख-शांति लाए सकट चौथ जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है भगवान गणेश की पूजा करने और उपवास रखने का एक विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा करने से न केवल जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है बल्कि परिवार में खुशहाली और सुख-समृद्धि भी आती है। यह पर्व विशेष रूप से माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो अपने पुत्रों की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना करती हैं।