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  • सनी देओल की बंटवारा 1947 में विभाजन की कहानी, भावनाएं और एक्शन साथ-साथ नजर आते हैं

    सनी देओल की बंटवारा 1947 में विभाजन की कहानी, भावनाएं और एक्शन साथ-साथ नजर आते हैं


    नई दिल्ली। 
    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के विभाजन की त्रासदी और मानवीय संवेदनाओं को उजागर करने वाली नई बॉलीवुड फिल्म बंटवारा 1947 सिनेमाघरों में दर्शकों के सामने आ चुकी है। प्रसिद्ध निर्देशक राजकुमार संतोषी के कुशल निर्देशन में तैयार की गई यह फिल्म भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के दौर पर आधारित एक बेहद संवेदनशील कहानी प्रस्तुत करती है। यह फिल्म प्रसिद्ध नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ए नई’ पर आधारित है और इसमें ऐतिहासिक परिदृश्य के साथ मानवीय रिश्तों की मिसाल पेश की गई है।

    कहानी की शुरुआत 14 अगस्त 1947 के घटनाक्रम से होती है, जब देश की आजादी की घोषणा के समय मेरठ में रहने वाला सिकंदर मिर्जा का परिवार जश्न की तैयारियों में जुटा होता है। हालांकि, अचानक भड़की सांप्रदायिक हिंसा के कारण मिर्जा को अपने परिवार की सुरक्षा के लिए लाहौर पलायन करने का कठिन फैसला लेना पड़ता है। लाहौर पहुंचने पर शहर की राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच उन्हें हबीब अंसारी नामक मित्र का सहयोग मिलता है, जिनकी मदद से मिर्जा परिवार को रहने के लिए एक हवेली मिल जाती है।

    इस हवेली में पहले से ही एक बुजुर्ग हिंदू महिला रह रही होती है। फिल्म का मुख्य ताना-बाना इसी बुजुर्ग महिला, जिन्हें परिवार प्यार से माई कहकर संबोधित करता है, और मुस्लिम मिर्जा परिवार के बीच विकसित होते आत्मीय संबंधों के इर्द-गिर्द बुना गया है। विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक दबाव के बावजूद सिकंदर मिर्जा उस बुजुर्ग महिला की रक्षा का जिम्मा उठाते हैं। यह कहानी दर्शकों को बेहद भावुक करती है और स्क्रीन पर विभाजन का दर्द तथा मानवीय आत्मीयता को बखूबी उकेरा गया है।

    अभिनय के दृष्टिकोण से मुख्य कलाकार सनी देओल अपने चिरपरिचित तेवर और संजीदा अंदाज में नजर आए हैं। उन्होंने अपने किरदार के माध्यम से जहां एक तरफ गुस्सा और दृढ़ता दिखाई है, वहीं माई के प्रति सुरक्षात्मक रवैया भी बखूबी निभाया है। लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहीं अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी अपनी प्रभावी भूमिका से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया है। दोनों ही कलाकारों का अभिनय कहानी को एक मजबूती प्रदान करता है।

    वरिष्ठ अभिनेत्री शबाना आजमी ने फिल्म में माई का केंद्रीय किरदार निभाया है। बंटवारे की हिंसा में अपनों को खोने का दुख और अपना घर न छोड़ने की जिद्द को उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय से जीवित कर दिया है। इसके अलावा, अली फजल ने एक शायर और शांतिप्रिय नागरिक के रूप में प्रभावशाली काम किया है, जो हर विषम परिस्थिति में अमन की बात करता है। वहीं नकारात्मक भूमिका में नजर आए अभिमन्यु सिंह ने अपने सशक्त प्रदर्शन से खलनायक के रूप में गहरी छाप छोड़ी है।

    फिल्म में मुख्य अभिनेता के पुत्र करण देओल भी नजर आते हैं, हालांकि उनका स्क्रीन टाइम अपेक्षाकृत कम रखा गया है। फिल्म का पहला हाफ जहां कहानी की पृष्ठभूमि और भावुक लम्हों को स्थापित करता है, वहीं दूसरे हाफ में सनी देओल का ट्रेडमार्क एक्शन देखने को मिलता है। एक्शन दृश्यों में बग्गी की दौड़ और दुश्मनों से मुकाबले के सीन शामिल हैं, जो एक्शन प्रेमियों को पसंद आ सकते हैं।

    सिनेमाई निर्माण और प्रस्तुतीकरण के लिहाज से फिल्म दर्शकों को बोर नहीं होने देती। संवाद अदायगी और पटकथा लेखन में ऐतिहासिक गंभीरता बनाए रखी गई है। विभाजन के उस भयावह दौर को बड़े पर्दे पर एक भावुक और मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने में निर्माण टीम पूरी तरह सफल नजर आ रही है।

    कुल मिलाकर, बंटवारा 1947 एक ऐसी सिनेमाई कृति है जो केवल अतीत के जख्मों को याद नहीं दिलाती, बल्कि संकट के समय इंसानियत की मिसाल भी पेश करती है। बेहतरीन अभिनय, मजबूत निर्देशन और एक्शन का संतुलन इसे एक बार देखने लायक फिल्म बनाता है।

  • बंटवारा 1947 के भावुक ट्रेलर लॉन्च पर शबाना आजमी ने कठिन सीन के दौरान सनी देओल की संवेदनशीलता को सराहा

    बंटवारा 1947 के भावुक ट्रेलर लॉन्च पर शबाना आजमी ने कठिन सीन के दौरान सनी देओल की संवेदनशीलता को सराहा

    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा के इतिहास में विभाजन की विभीषिका पर कई फिल्में बनी हैं, लेकिन कुछ फिल्में अपनी कहानी के साथ-साथ सेट पर बने मानवीय संबंधों के कारण विशेष चर्चा में आ जाती हैं। निर्देशक राजकुमार संतोषी की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के ट्रेलर रिलीज के दौरान कुछ ऐसा ही भावनात्मक नजारा देखने को मिला, जब फिल्म के मुख्य कलाकारों ने शूटिंग के दौरान के अपने अनुभव साझा किए।

    इस खास मौके पर अनुभवी अभिनेत्री शबाना आजमी और अभिनेता सनी देओल बेहद भावुक नजर आए। फिल्म के एक बेहद कठिन और संवेदनशील दृश्य की शूटिंग को याद करते हुए शबाना आजमी ने बताया कि एक कलाकार के तौर पर उस पल को जीना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण और असहज करने वाला था। दृश्य की मांग के अनुसार जब खलनायक द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा था, तब वे खुद को बेहद असहाय महसूस कर रही थीं।

    शबाना आजमी ने भावुक होकर बताया कि उस कठिन परिस्थिति में सनी देओल ने जिस तरह आगे बढ़कर उन्हें सहारा दिया, उसने अभिनय के दायरे को लांघकर वास्तविक जीवन की संवेदनशीलता को दर्शाया। सीन पूरा होते ही सनी देओल ने उन्हें दुपट्टे से ढका और एक रक्षक की भूमिका निभाई। इस पल ने पर्दे के पीछे के कलात्मक रिश्ते को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया, जिसे अभिनेत्री ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।

    सनी देओल ने भी इस सहयोग पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शबाना आजमी के साथ काम करना एक अद्भुत अनुभव रहा। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान दोनों के बीच किसी पेशेवर अदाकारी से इतर एक वास्तविक और प्रगाढ़ रिश्ता महसूस हुआ। अभिनेता ने इस फिल्म को दुनिया की सभी माताओं को समर्पित करते हुए सिनेमा के माध्यम से रिश्तों की गहराई को उजागर करने की बात कही।

    वहीं, इस महत्वाकांक्षी सिनेमाई परियोजना के पीछे के लंबे संघर्ष पर बात करते हुए निर्देशक राजकुमार संतोषी ने बताया कि इस कहानी को बड़े पर्दे तक लाने में दो दशक से भी अधिक समय लग गया। साल 2009 में एक नाटक से प्रेरित इस विषय पर फिल्म बनाने का प्रयास 2010 से लगातार जारी था, लेकिन वित्तीय और संरचनात्मक सहयोग न मिल पाने के कारण इसमें लगातार विलंब होता रहा।

    फिल्म निर्माण की इस लंबी यात्रा में अंततः आमिर खान के सहयोग से इस परियोजना को गति मिली। कहानी की गहराई और ऐतिहासिक संदर्भ को समझते हुए निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया, जिससे यह वर्षों पुरानी परिकल्पना साकार हो सकी। राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी ने अतीत में भी कई यादगार फिल्में दी हैं और इस नई फिल्म के जरिए उन्होंने एक बार फिर अपनी रचनात्मक साझेदारी को साबित किया है।

    ट्रेलर लॉन्च के इस अवसर पर फिल्म की पूरी स्टारकास्ट उपस्थित रही, जहां ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस थ्रिलर और ड्रामा फिल्म की मेकिंग से जुड़े कई अनदेखे पहलुओं पर चर्चा की गई। दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर उत्सुकता बनी हुई है, क्योंकि इसमें इतिहास के एक दर्दनाक दौर को भावनात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।