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  • ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के बाद अमेरिका का बड़ा वार, ईरान की मदद करने पर चीनी कंपनियों पर लगाए सख्त प्रतिबंध

    ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के बाद अमेरिका का बड़ा वार, ईरान की मदद करने पर चीनी कंपनियों पर लगाए सख्त प्रतिबंध



    नई दिल्ली। ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के बाद अमेरिका ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ा दिया है, जिसके तहत ईरान को तकनीकी और सैन्य सहायता देने के आरोप में तीन चीनी कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। वॉशिंगटन का कहना है कि इन कंपनियों ने सैटेलाइट इमेजरी और डेटा उपलब्ध कराकर मध्य पूर्व में अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को खतरे में डाला।

    अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार प्रतिबंधित कंपनियों में चीन की हैंगझोउ स्थित “मीएन्ट्रॉपी टेक्नोलॉजी (जिसे मिजारविजन भी कहा जाता है)”, बीजिंग की “द अर्थ आई” और “चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी” शामिल हैं। अमेरिका का दावा है कि इन कंपनियों ने या तो ओपन-सोर्स सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं या सीधे ईरान को संवेदनशील सैन्य लोकेशन की इमेजरी उपलब्ध कराई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल कथित तौर पर मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना और उसके सहयोगी ठिकानों की गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित हमलों की योजना बनाने में किया गया। हालांकि चीन और संबंधित कंपनियों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

    अमेरिका ने यह भी दावा किया है कि इनमें से एक कंपनी पर पहले भी प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, क्योंकि उस पर यमन में हूती विद्रोहियों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जानकारी देने का आरोप था।

    इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान, चीन, बेलारूस और यूएई से जुड़े 10 व्यक्तियों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई की है, जिन पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए तकनीक और कच्चा माल उपलब्ध कराने का आरोप है।

    वॉशिंगटन ने साफ किया है कि वह ईरान के सैन्य और परमाणु नेटवर्क को फिर से मजबूत होने से रोकने के लिए ऐसे प्रतिबंधों को आगे भी जारी रखेगा और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी संस्था पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • नूर खान एयरबेस पर ईरानी C-130 विमान विवाद: सैटेलाइट तस्वीरों ने पाकिस्तान की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल

    नूर खान एयरबेस पर ईरानी C-130 विमान विवाद: सैटेलाइट तस्वीरों ने पाकिस्तान की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल



    नई दिल्ली। पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें ईरानी C-130 विमान की मौजूदगी और सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर लगाए गए दावों ने नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और सैटेलाइट इमेजरी के बाद पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठे हैं, जबकि इस्लामाबाद ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक सीबीएस न्यूज ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया था कि अमेरिका-ईरान तनाव और संघर्ष विराम के बाद कुछ ईरानी विमान पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर देखे गए। इनमें C-130 जैसे सैन्य परिवहन विमान का भी जिक्र किया गया, जिन्हें खुफिया और लॉजिस्टिक ऑपरेशन में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, इन दावों की किसी स्वतंत्र एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    इसी बीच कुछ सैटेलाइट इमेजरी रिपोर्ट्स में एयरबेस पर एक C-130 जैसे विमान की तस्वीर सामने आने का दावा किया गया, जिसके बाद मामला और संवेदनशील हो गया। विशेषज्ञों के अनुसार केवल तस्वीरों के आधार पर किसी विमान की राष्ट्रीयता या उद्देश्य तय करना संभव नहीं होता, इसलिए यह दावा अभी भी विवादित है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन सभी रिपोर्टों को “भ्रामक और तथ्यों से परे” बताते हुए कहा है कि नूर खान एयरबेस पर किसी भी विदेशी सैन्य विमान को छिपाकर रखने का कोई सवाल ही नहीं उठता। पाकिस्तान का कहना है कि जिन विमानों का उल्लेख किया जा रहा है, वे केवल कूटनीतिक और अस्थायी यात्राओं से जुड़े थे।

    इस पूरे विवाद के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ गई है और पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं, हालांकि अभी तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है जो इन आरोपों की पुष्टि करता हो।