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  • सात्विक-चिराग की जोड़ी ने दुनिया में बजाया भारत का डंका, कॉमनवेल्थ से एशियन गेम्स तक जीते बड़े खिताब

    सात्विक-चिराग की जोड़ी ने दुनिया में बजाया भारत का डंका, कॉमनवेल्थ से एशियन गेम्स तक जीते बड़े खिताब


    नई दिल्ली। भारतीय बैडमिंटन को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाने वाली जोड़ियों में सात्विकसाईंराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी का नाम सबसे आगे लिया जाता है। अपनी आक्रामक शैली और शानदार तालमेल के दम पर इस जोड़ी ने पुरुष डबल्स में भारत का दबदबा कायम किया है। सात्विकसाईंराज रंकीरेड्डी 13 अगस्त को 26 साल के होने जा रहे हैं और उनके जन्मदिन से पहले उनके शानदार करियर पर एक नजर डालें तो यह सफर संघर्ष, मेहनत और बड़ी उपलब्धियों से भरा नजर आता है।

    सात्विकसाईंराज रंकीरेड्डी का जन्म 13 अगस्त 2000 को आंध्र प्रदेश के अमलापुरम में हुआ था। उन्हें बैडमिंटन का जुनून परिवार से मिला। उनके पिता राज्य स्तर के बैडमिंटन खिलाड़ी रहे हैं और सात्विक ने उन्हें तथा अपने बड़े भाई को खेलते देखकर इस खेल की ओर कदम बढ़ाया। कम उम्र में ही उन्होंने बैडमिंटन को गंभीरता से अपनाया और वर्ष 2014 में हैदराबाद की गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी से जुड़ गए। यहीं से उनके पेशेवर सफर को नई दिशा मिली।

    सात्विक ने डबल्स में करियर बनाने का फैसला किया और आगे चलकर उनकी जोड़ी चिराग शेट्टी के साथ बनी। दोनों ने वर्ष 2015 में साथ खेलना शुरू किया। शुरुआती दौर में ही दोनों के बीच तालमेल नजर आने लगा था। लगातार मेहनत और अंतरराष्ट्रीय अनुभव के साथ यह जोड़ी भारतीय बैडमिंटन की सबसे मजबूत जोड़ियों में शामिल होती चली गई।

    इस जोड़ी की बड़ी उपलब्धियों का सिलसिला 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स से तेज हुआ। गोल्ड कोस्ट में आयोजित प्रतियोगिता में सात्विक और चिराग ने मिश्रित टीम इवेंट में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद दोनों ने पुरुष डबल्स में भी लगातार शानदार प्रदर्शन किया और दुनिया की शीर्ष जोड़ियों को कड़ी चुनौती दी।

    2022 में बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स सात्विक और चिराग के करियर का बेहद खास पड़ाव साबित हुआ। दोनों ने पुरुष डबल्स में स्वर्ण पदक जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स के बैडमिंटन इतिहास में पुरुष डबल्स में यह भारत का पहला स्वर्ण पदक था। इस उपलब्धि ने दोनों को भारतीय खेल जगत में नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

    एशियन गेम्स में भी सात्विक और चिराग की जोड़ी ने भारत का गौरव बढ़ाया। 2022 एशियन गेम्स में दोनों ने पुरुष डबल्स का स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा भारतीय पुरुष टीम के साथ रजत पदक भी उनके खाते में आया। 2023 एशियन चैंपियनशिप में भी दोनों ने पुरुष डबल्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    विश्व चैंपियनशिप में सात्विक और चिराग ने 2022 और 2025 में पुरुष डबल्स में कांस्य पदक जीते। थॉमस कप में भी सात्विक भारतीय टीम का हिस्सा रहे। 2022 में पुरुष टीम ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि 2026 थॉमस कप में टीम ने कांस्य पदक हासिल किया।

    सात्विकसाईंराज रंकीरेड्डी की उपलब्धियों को भारत सरकार ने भी सम्मान दिया है। उन्हें 2020 में अर्जुन पुरस्कार और 2023 में देश के सर्वोच्च खेल सम्मानों में शामिल खेल रत्न से सम्मानित किया गया। उनकी कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत और मजबूत साझेदारी किस तरह किसी खिलाड़ी को विश्व स्तर तक पहुंचा सकती है। अब सात्विक और चिराग से भारतीय खेल प्रेमियों को आने वाले वर्षों में और भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलताओं की उम्मीद है।

  • इंडोनेशिया ओपन से सात्विक-चिराग का सफर खत्म, कंधे की चोट से पहले राउंड में ही हुए बाहर

    इंडोनेशिया ओपन से सात्विक-चिराग का सफर खत्म, कंधे की चोट से पहले राउंड में ही हुए बाहर


    नई दिल्ली । भारत की स्टार पुरुष बैडमिंटन जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी का इंडोनेशिया ओपन 2026 में सफर बेहद निराशाजनक तरीके से समाप्त हो गया। पहले ही राउंड में कंधे की चोट के कारण सात्विक को मुकाबले से हटना पड़ा, जिसके बाद भारतीय जोड़ी को टूर्नामेंट से नाम वापस लेना पड़ा।

    यह मुकाबला मलेशिया की जोड़ी कांग खाई जिंग और एरॉन ताई के खिलाफ खेला जा रहा था, जहां भारतीय जोड़ी पहले गेम में 6-11 से पीछे चल रही थी। इसी दौरान सात्विक ने अपने दाहिने कंधे में दर्द की शिकायत की और खेल जारी नहीं रख सके। स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें वॉकओवर देना पड़ा।

    चोट ने रोकी लय, लगातार संघर्ष के बाद बड़ा झटका
    सात्विक के कंधे की समस्या कोई नई नहीं है। इससे पहले भी इसी तरह की परेशानी के चलते इस जोड़ी ने बैडमिंटन एशिया चैंपियनशिप से नाम वापस लिया था। लगातार चोट की वजह से उनकी लय प्रभावित हो रही है, जो भारत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने बयान जारी करते हुए कहा कि सात्विक की रिकवरी और रिहैबिलिटेशन पर पूरा ध्यान दिया जाएगा, ताकि वह जल्द कोर्ट पर वापसी कर सकें।

    हालिया जीत के बाद मिला था आत्मविश्वास
    गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही इस भारतीय जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इंडोनेशिया की मजबूत जोड़ी फजर अल्फियन और मुहम्मद शोहिबुल फिकरी को हराया था। तीन गेम तक चले इस मुकाबले में उन्होंने 18-21, 21-17, 21-16 से जीत दर्ज की थी। यह जीत उनकी हालिया फॉर्म और मजबूती का संकेत थी। इतना ही नहीं, यह जोड़ी सिंगापुर ओपन जीतने वाली पहली भारतीय पुरुष डबल्स टीम भी बनी थी, जिसने देश के बैडमिंटन इतिहास में नया अध्याय जोड़ा था।

    अन्य भारतीय खिलाड़ियों का मिला-जुला प्रदर्शन
    इंडोनेशिया ओपन में भारत के अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी मिश्रित रहा। रोहन कपूर और रुथविका गड्डे ने शानदार शुरुआत करते हुए शीर्ष 20 ताइवान जोड़ी को हराकर अगले दौर में जगह बनाई। वहीं लक्ष्य सेन को पहले ही राउंड में हार का सामना करना पड़ा और वे टूर्नामेंट से बाहर हो गए। पुरुष युगल में हरिहरन अम्साकारुनन और एम.आर. अर्जुन की जोड़ी ने मलेशिया की अनुभवी जोड़ी को हराकर भारत को राहत दी।

    भारतीय बैडमिंटन के लिए बड़ा झटका
    सात्विक-चिराग की जोड़ी भारत की सबसे भरोसेमंद डबल्स टीम मानी जाती है। उनकी अचानक चोट से बाहर होना भारत के अभियान के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अब सभी की नजरें उनकी फिटनेस और आगामी टूर्नामेंट में वापसी पर टिकी हैं।