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  • 18 महीने बाद जेल से बाहर आए RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, कोर्ट ने 10 लाख के मुचलके पर दी जमानत

    18 महीने बाद जेल से बाहर आए RTO के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा, कोर्ट ने 10 लाख के मुचलके पर दी जमानत


    भोपाल। आरटीओ के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा को आखिरकार करीब 18 महीने बाद जेल से राहत मिल गई। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद बुधवार रात करीब 10:20 बजे उन्हें भोपाल सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। फरवरी 2025 से न्यायिक हिरासत में बंद सौरभ शर्मा की रिहाई की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जेल के बाहर परिजन और समर्थकों ने उनका स्वागत किया। लंबे समय से चर्चाओं में रहे इस बहुचर्चित मामले में हाईकोर्ट का यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सौरभ शर्मा की नियमित जमानत याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें 10 लाख रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। कोर्ट ने सौरभ शर्मा को ट्रायल कोर्ट की प्रत्येक सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। इसके अलावा बिना न्यायालय की अनुमति के देश छोड़ने पर रोक लगाई गई है। साथ ही उन्हें किसी भी गवाह को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या जांच को प्रभावित करने जैसी किसी भी गतिविधि से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और संबंधित एजेंसियां चार्जशीट दाखिल कर चुकी हैं। ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन गवाहों और दस्तावेजों की संख्या काफी अधिक होने के कारण मुकदमे के जल्द समाप्त होने की संभावना कम है। ऐसे में किसी आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्यायोचित नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें नियमित जमानत देने का निर्णय लिया।

    सौरभ शर्मा का नाम दिसंबर 2024 में उस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बना था, जब लोकायुक्त, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आयकर विभाग ने उनके ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई की थी। जांच के दौरान भोपाल के मेंडोरी क्षेत्र में खड़ी एक इनोवा कार से करीब 11 करोड़ रुपए नकद और 52 किलोग्राम सोना बरामद किया गया था। जांच एजेंसियों ने इस कार और बरामद संपत्ति का संबंध सौरभ शर्मा से जोड़ा था। इसके बाद उनकी और उनके सहयोगियों की कथित अघोषित संपत्तियों को लेकर कई बड़े खुलासे सामने आए थे।

    हालांकि जांच के दौरान सौरभ शर्मा लगातार इस बात से इनकार करते रहे कि मेंडोरी से बरामद नकदी और सोना उनका है। उन्होंने पूछताछ में इन संपत्तियों पर अपना स्वामित्व स्वीकार नहीं किया। यही कारण है कि आयकर विभाग और अन्य जांच एजेंसियों के सामने अब भी यह चुनौती बनी हुई है कि बरामद कैश और सोने के वास्तविक मालिक की पहचान कर अपनी जांच को अंतिम रूप दिया जाए।

    फिलहाल हाईकोर्ट से मिली जमानत के बाद सौरभ शर्मा को अस्थायी राहत जरूर मिल गई है, लेकिन उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। अब इस बहुचर्चित मामले की निगाहें ट्रायल कोर्ट की आगामी सुनवाई और जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी रहेंगी।

  • भोपाल में ‘सोना–कैश’ मामले की बड़ी अपडेट: आयकर विभाग ने पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के स्कूल को किया अटैच, मां-आदि को नोटिस

    भोपाल में ‘सोना–कैश’ मामले की बड़ी अपडेट: आयकर विभाग ने पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा के स्कूल को किया अटैच, मां-आदि को नोटिस


    भोपाल । भोपाल के मेंडोरी इलाके में दिसंबर 2024 में 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए नकद से भरी इनोवा कार के कांड में नया मोड़ आया है। आयकर विभाग की बेनामी निषेध इकाई (BPU) ने अब इस मामले से जुड़े पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा की एक बड़ी संपत्ति पर कार्रवाई की है। बीपीयू ने शाहपुरा, भोपाल में बने एक स्कूल भवन को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है।

    आयकर विभाग के अनुसार यह स्कूल भवन “राजमाता (भारतमाता) शिक्षा एवं समाज कल्याण समिति” नामक ट्रस्ट के नाम पर पंजीकृत है, जिसकी लागत लगभग 7.5 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस ट्रस्ट में सौरभ शर्मा की मां उमा शर्मा, उनके सहयोगी चेतन सिंह गौर और शरद जायसवाल ट्रस्टी के रूप में दर्ज हैं। जांच में यह सामने आया कि ट्रस्ट केवल बेनामी (नाममात्र) है और वास्तविक मालिक सौरभ शर्मा ही है।

    बेनामी घोषित, नोटिस जारी
    बीपीयू की जांच में यह स्कूल भवन बेनामी संपत्ति पाया गया और इसे बेनामी लेन-देन निषेध अधिनियम (PBPT Act), 1988 के तहत धारा 24(3) के अंतर्गत अटैच किया गया। साथ ही बेनामीदारों और वास्तविक स्वामी को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया है।

    सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट ने इस स्कूल के संचालन के लिए किसी प्रमुख स्कूल श्रृंखला से फ्रेंचाइजी भी ली थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह संपत्ति केवल “नाम का स्कूल” नहीं, बल्कि व्यावसायिक तौर पर भी चलाया जा रहा था। आयकर विभाग अब स्कूल निर्माण में लगाए गए धन के स्रोत और ट्रस्ट की अन्य गतिविधियों की भी जांच कर रहा है।

    आयकर विभाग ने यह भी बताया है कि यह कार्रवाई सोना–कैश इनोवा मामले से जुड़ी अन्य संपत्तियों पर चल रहे सिलसिले की अगली कड़ी है।

    इससे पहले भी सौरभ शर्मा और उनके सहयोगियों से जुड़े कई अचल संपत्ति और बेनामी कारोबार PBPT अधिनियम के तहत जब्त किए जा चुके हैं।

    52 किलो सोना और 11 करोड़ नकद वाली इनोवा
    याद दिला दें कि 18-19 दिसंबर 2024 की मध्यरात्रि में भोपाल के मेंडोरी गांव में ग्वालियर आरटीओ से रजिस्टर्ड इनोवा कार लावारिस हालत में मिली थी। कार चेतन सिंह गौर के नाम पर रजिस्टर्ड थी। जांच में वाहन से 52 किलो सोना और 11 करोड़ रुपए नकद बरामद हुए थे।

    बाद में आयकर विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यह संपत्ति असल में पूर्व आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा की थी, जिसे रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर छिपाकर रखा गया था।

    ED भी कर रहा जांच
    इसी मामले में ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने सौरभ शर्मा के ठिकानों से मिले ट्रांसफर-पोस्टिंग के दस्तावेज की जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि ईडी इस मामले में कुछ नेताओं और अफसरों से भी पूछताछ कर सकती है और इसके लिए दिल्ली मुख्यालय से मशविरा मांगा गया है।