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  • हॉरर और सस्पेंस का जबरदस्त तड़का, 9 एपिसोड की इस सीरीज ने राइटर्स को भी किया परेशान, जानिए कहां देखें ‘दहन-राकन का रहस्य’

    हॉरर और सस्पेंस का जबरदस्त तड़का, 9 एपिसोड की इस सीरीज ने राइटर्स को भी किया परेशान, जानिए कहां देखें ‘दहन-राकन का रहस्य’


    नई दिल्ली ।
    अगर आपको हॉरर और सस्पेंस से भरपूर कहानियां देखना पसंद है तो ओटीटी पर मौजूद दहन-राकन का रहस्य आपके लिए एक दिलचस्प विकल्प हो सकती है। इस सीरीज में डरावने रहस्य रहस्यमयी घटनाएं और एक ऐसे गांव की कहानी दिखाई गई है जिसे शापित माना जाता है। इसकी कहानी में लोककथाओं और अंधविश्वास के साथ वैज्ञानिक जांच का पहलू भी जुड़ा हुआ है। सीरीज की IMDb रेटिंग 7.1 बताई गई है। खास बात यह है कि इसकी कहानी लिखने वाले लेखकों के बीच राइटिंग के दौरान इतने मतभेद होते थे कि एक समय पर उन्हें थेरेपिस्ट की मदद तक लेनी पड़ी थी। यही वजह है कि इस सीरीज के पीछे की कहानी भी दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ाती है।

    दहन-राकन का रहस्य की कहानी राजस्थान के शिलासपुर नाम के एक गांव के इर्दगिर्द घूमती है। यहां अवनी राउत नाम की आईएएस अधिकारी की पोस्टिंग होती है। इस किरदार को अभिनेत्री टिस्का चोपड़ा ने निभाया है। अवनी अपने पति की मौत से जुड़े सदमे और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अपनी जिंदगी को संभालने की कोशिश कर रही होती हैं। इसी दौरान उन्हें मैंगोन कॉर्पोरेशन की एक अहम दुर्लभ खनिज खनन परियोजना की जिम्मेदारी मिलती है। शुरुआत में यह काम एक प्रशासनिक चुनौती जैसा नजर आता है लेकिन जल्द ही मामला रहस्यमयी घटनाओं और गांव की पुरानी मान्यताओं से जुड़ने लगता है।

    गांव के मुखिया स्वरूप की भूमिका सौरभ शुक्ला ने निभाई है। वह जमीन की खुदाई का विरोध करते हैं और चेतावनी देते हैं कि अगर धरती को छेड़ा गया तो रिधियाकन नाम का राक्षस जाग सकता है। उनके मुताबिक इस रहस्यमयी शक्ति के जागने से गांव पर बड़ी मुसीबत आ सकती है। दूसरी ओर खनन परियोजना से जुड़े काम और प्रशासनिक जिम्मेदारियां अवनी के सामने कई सवाल खड़े करती हैं। गांव में मरे हुए पक्षियों का मिलना और रहस्यमयी हत्याओं जैसी घटनाएं कहानी को और डरावना बना देती हैं। अब यह पता लगाना जरूरी हो जाता है कि इन घटनाओं के पीछे कोई अलौकिक ताकत है या फिर इसके पीछे कोई ऐसा सच छिपा है जिसे सामने आने से रोका जा रहा है।

    सीरीज की खासियत यह है कि इसमें केवल डर पैदा करने पर जोर नहीं दिया गया है बल्कि रहस्य को धीरे-धीरे खोलने की कोशिश भी की गई है। अवनी एक डॉक्टर की मदद से घटनाओं के पीछे वैज्ञानिक कारण तलाशती हैं। इस दौरान गांव की मान्यताओं प्रशासनिक दबाव और खनन परियोजना से जुड़े सवाल कहानी को आगे बढ़ाते हैं। टिस्का चोपड़ा और सौरभ शुक्ला के अलावा इसमें राजेश तैलंग मुकेश तिवारी रोहन जोशी और लहर खान सहित कई कलाकार नजर आते हैं। सीरीज का निर्देशन विक्रांत पंवार और जय शर्मा ने किया है।

    इस सीरीज से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा इसकी लेखन प्रक्रिया का भी है। लेखक निसर्ग मेहता ने एक बातचीत में बताया था कि कहानी लिखते समय तीनों लेखकों के बीच काफी बहस होती थी। कई बार दो लेखक एक राय पर होते थे तो तीसरा उनसे असहमत रहता था। वहीं शिवा बाजपयी ने बताया कि उनके बीच बहस के दौरान रोना-धोना तक हुआ और कभी-कभी वे एक-दूसरे पर पेंसिल भी फेंक देते थे। हालात ऐसे हो गए थे कि एक समय पर उन्हें थेरेपिस्ट को भी हायर करना पड़ा। हालांकि लेखकों के मुताबिक असहमति ने कहानी को बेहतर बनाने में मदद की और निर्देशक ने उन्हें अपनी कल्पना के मुताबिक कहानी विकसित करने की पूरी स्वतंत्रता दी।

    अगर आप डरावनी कहानियों के साथ रहस्य और थ्रिलर का अनुभव लेना चाहते हैं तो दहन-राकन का रहस्य देख सकते हैं। यह सीरीज डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर उपलब्ध बताई गई है। शापित गांव की कहानी खनन से जुड़ा रहस्य और वैज्ञानिक जांच का मेल इसे हॉरर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए एक विकल्प बनाता है।

  • सौरभ शुक्ला का खुलासा: जॉली एलएलबी से पहले खुद को बताते थे राइटर, नहीं एक्टर!

    सौरभ शुक्ला का खुलासा: जॉली एलएलबी से पहले खुद को बताते थे राइटर, नहीं एक्टर!


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दमदार कलाकार सौरभ शुक्ला आज भले ही इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान रखते हों, लेकिन उनका सफर आसान नहीं रहा। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने करियर के उस मुश्किल दौर को याद किया, जब सफलता मिलने के बावजूद उन्हें मनचाहा काम नहीं मिल रहा था। यह वही समय था जब उन्होंने खुद को एक्टर नहीं, बल्कि राइटर बताना शुरू कर दिया था।

    ‘सत्या’ से मिली पहचान, लेकिन नहीं मिला संतोष

    साल 1998 में आई सत्या में सौरभ शुक्ला ने ‘कल्लू मामा’ का किरदार निभाया था, जिसने उन्हें रातों-रात पहचान दिलाई। राम गोपाल वर्मा की इस फिल्म के बाद लोग उनके अभिनय के कायल हो गए थे, लेकिन सौरभ के मुताबिक, करियर में वैसा बदलाव नहीं आया जैसा उन्होंने सोचा था।

    उन्होंने बताया कि उन्हें ज्यादातर छोटे और एक-दो सीन वाले रोल ही ऑफर हो रहे थे, जो उनके टैलेंट के हिसाब से काफी कम थे। यही वजह थी कि वह इन रोल्स से संतुष्ट नहीं थे और बेहतर मौके का इंतजार कर रहे थे।

    डिप्रेशन का दौर और पहचान छिपाने की मजबूरी

    लगातार निराशा और अच्छे रोल्स की कमी के चलते सौरभ शुक्ला डिप्रेशन में चले गए थे। उन्होंने खुलासा किया कि उस समय वह फिल्ममेकर्स से कहने लगे थे—“मैं एक्टर नहीं हूं, मैं राइटर हूं।” यह उनके करियर का सबसे कठिन दौर था, जहां उन्हें अपनी पहचान तक छिपानी पड़ी।

    ‘जॉली एलएलबी’ ने बदली किस्मत

    सौरभ शुक्ला के करियर में असली बदलाव साल 2012-13 में आया। बर्फी! और खासतौर पर जॉली एलएलबी ने उनकी किस्मत पलट दी। ‘जॉली एलएलबी’ में जज त्रिपाठी के किरदार ने उन्हें न सिर्फ दर्शकों का प्यार दिलाया, बल्कि उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिला।

    इस फिल्म के बाद इंडस्ट्री का नजरिया पूरी तरह बदल गया और लोग उन्हें एक बेहतरीन एक्टर के तौर पर पहचानने लगे। उनकी डिमांड और फीस दोनों में इजाफा हुआ।

    बदली पहचान, बढ़ा फैनबेस

    ‘जॉली एलएलबी’ के बाद सौरभ शुक्ला का करियर नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया। लोग उन्हें अपने पसंदीदा कलाकारों में गिनने लगे और उन्हें लगातार बेहतर और दमदार रोल मिलने लगे।

  • सौरभ शुक्ला बोले जिंदगी में परफेक्शन नहीं अपूर्णता में ही छुपी है असली ताकत

    सौरभ शुक्ला बोले जिंदगी में परफेक्शन नहीं अपूर्णता में ही छुपी है असली ताकत


    नई दिल्ली :अभिनेता और फिल्ममेकर सौरभ शुक्ला ने जीवन और रिश्तों को लेकर एक गहरा और विचारोत्तेजक दृष्टिकोण साझा किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस दुनिया में परफेक्शन जैसी कोई चीज नहीं होती और इंसान स्वभाव से अपूर्ण होता है। उनके अनुसार यही अपूर्णता जीवन को आगे बढ़ने का अवसर देती है और इसमें सुधार की हमेशा गुंजाइश बनी रहती है।

    आईएएनएस से बातचीत में सौरभ शुक्ला ने कहा कि अगर कोई चीज पूरी तरह से परफेक्ट हो जाए तो उसमें आगे बढ़ने या कुछ नया सीखने की संभावना समाप्त हो जाती है। उन्होंने कहा कि अपूर्णता ही वह तत्व है जो इंसान को लगातार बेहतर बनने के लिए प्रेरित करता है। उनके मुताबिक परफेक्शन भले ही सुनने में आकर्षक लगे, लेकिन वास्तव में यह एक स्थिर और बोरिंग स्थिति है, जबकि अपूर्णता जीवन को गतिशील बनाए रखती है।

    उन्होंने यह भी कहा कि इंसान अक्सर अपने जीवन में परफेक्ट रिश्तों या परफेक्ट शादी की तलाश करता है, लेकिन यह एक भ्रम है। वास्तविकता यह है कि हर रिश्ता अपूर्ण होता है और उसकी असली खूबसूरती भी इन्हीं खामियों को स्वीकार करने में है। जब हम अपने साथी की कमियों को समझते हैं और उन्हें स्वीकार करते हैं, तभी एक मजबूत और गहरा रिश्ता बनता है।

    सौरभ शुक्ला ने रिश्तों में ईमानदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि किसी भी रिश्ते में पारदर्शिता और सच्चाई का होना बेहद जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति अपने रिश्ते में सच को छुपाता है, तो भले ही वह बात उस समय संभल जाए, लेकिन भविष्य में यह बड़े नुकसान का कारण बन सकती है। उन्होंने कहा कि जब सच्चाई सामने आती है तो सबसे ज्यादा दर्द इस बात का होता है कि आपको पहले ही यह नहीं बताया गया।

    उन्होंने आगे कहा कि रिश्तों में झूठ या छुपाव धीरे धीरे भरोसे को कमजोर करता है। इससे शक पैदा होता है और व्यक्ति हर बात पर संदेह करने लगता है। ऐसे में रिश्ता कमजोर हो जाता है और उसकी नींव हिल जाती है। सौरभ शुक्ला ने कहा कि रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए ईमानदारी और खुलापन सबसे जरूरी तत्व हैं।

    उन्होंने एक दार्शनिक दृष्टिकोण रखते हुए यह भी कहा कि इंसान के नजरिए से इस जीवन में एक ही चीज को पूरी तरह परफेक्ट माना जा सकता है और वह है मृत्यु। उनके अनुसार जीवन के बाद क्या होता है, यह किसी को नहीं पता, लेकिन जीवन में अपूर्णता ही हमें आगे बढ़ने और सीखने का अवसर देती है।

    सौरभ शुक्ला ने अपने फिल्मी करियर का जिक्र करते हुए भी कहा कि उनकी हाल ही में रिलीज फिल्म में भी यही थीम देखने को मिलती है, जहां रिश्तों में छिपे सच और उससे पैदा होने वाले बदलावों को दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि जीवन की तरह फिल्मों में भी असली कहानी तब शुरू होती है जब किरदार अपनी कमजोरियों और सच्चाइयों का सामना करते हैं।

    उनके विचार जीवन के इस सरल लेकिन गहरे सत्य को उजागर करते हैं कि परफेक्शन की तलाश छोड़कर जब हम अपनी अपूर्णताओं को अपनाते हैं, तभी जीवन में असली संतुलन और संतोष संभव होता है।

  • शाहरुख खान के साथ स्क्रीन शेयर करने पर सौरभ शुक्ला ने जताई खुशी, कहा- अद्भुत इंसान हैं

    शाहरुख खान के साथ स्क्रीन शेयर करने पर सौरभ शुक्ला ने जताई खुशी, कहा- अद्भुत इंसान हैं


    नई दिल्ली। सौरभ शुक्ला, जिन्होंने Shah Rukh Khan के साथ ‘बादशाह’ और ‘हे राम’ जैसी फिल्मों में काम किया है, ने कहा, “शाहरुख की जर्नी शानदार है। इतने सालों से वह इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं और जिस तरह से उन्होंने अपना करियर बनाया है, उस पोजीशन पर पहुंचे हैं, वह वाकई प्रेरणा देता है। सौरभ ने यह भी जोड़ा कि शाहरुख ने अपनी मेहनत और लगन से फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग मुकाम हासिल किया है, जो नए कलाकारों और फैंस दोनों के लिए प्रेरणादायक है।

    चार्मिंग और अपनापन- भरा व्यक्तित्व
    शाहरुख के व्यक्तित्व की तारीफ करते हुए सौरभ ने कहा, “एक इंसान के तौर पर वह हमेशा चार्मिंग रहे हैं। उनसे मिलने के बाद बस बातचीत खत्म नहीं करनी होती। वह अपने काम से प्रभावित करते हैं और बातचीत के दौरान आपको बहुत महत्व और खास महसूस कराते हैं।”

    सौरभ ने आगे बताया, “शाहरुख में लोगों से जुड़ने की खास काबिलियत है। आप उनसे बात करते समय महसूस करते हैं कि इस बातचीत में मेरी भी जरूरत है। यही अपनापन उन्हें सच में कमाल का बनाता है। वह बहुत कमाल के हैं।”

    ‘किंग’ में धमाकेदार एक्शन
    फिल्म ‘किंग’ एक्शन-ड्रामा फिल्म है, जिसमें शाहरुख जबरदस्त एक्शन करते नजर आएंगे। फिल्म में सौरभ शुक्ला के साथ Abhishek Bachchan, Deepika Padukone, शाहरुख की बेटी Suhana Khan और Jaideep Ahlawat भी मुख्य भूमिकाओं में हैं।

    मेकर्स ने जनवरी में फिल्म की झलक दिखाते हुए प्रोमो जारी किया था, जिसमें शाहरुख खान के हाई-वोल्टेज एक्शन सीन और खून-खराबे से भरपूर दृश्य दिखाए गए। प्रोमो में शाहरुख का किरदार कहता है, “डर नहीं, दहशत हूं।”

    रिलीज डेट और प्रोडक्शन
    ‘किंग’ की निर्देशकीय जिम्मेदारी Siddharth Anand ने संभाली है। फिल्म Red Chillies Entertainment और Marflix Pictures के बैनर तले बन रही है।

    मेकर्स ने घोषणा की है कि ‘किंग’ इस साल 24 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जिससे फैंस को दिवाली के बाद फिल्म का रोमांच देखने को मिलेगा। सौरभ शुक्ला की उत्सुकता और शाहरुख खान के चार्म और प्रोफेशनलिज्म के मेल से यह फिल्म साल के बड़े एक्शन ड्रामा प्रोजेक्ट्स में शामिल होने वाली है।