Tag: Saurav

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान विमान में महिला यात्री और सौरव दास के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल

    दिल्ली एयरपोर्ट पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान विमान में महिला यात्री और सौरव दास के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल

    नई दिल्ली । दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को विमान के भीतर से हिरासत में लिए जाने के दौरान विवाद सामने आया। इस कार्रवाई के समय पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और एक महिला यात्री के बीच तीखी बहस हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सीजेपी के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के विरोध में जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।

    विमान के एयरपोर्ट पर उतरने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम उसके भीतर पहुंची। पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया। इसी दौरान विमान में मौजूद यात्रियों और पार्टी नेताओं के बीच बहस की स्थिति बनी। सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मियों को सौरव दास को विमान से बाहर ले जाते हुए देखा जा सकता है। उसी समय एक महिला यात्री उनसे कुछ कहती दिखाई देती है, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो जाती है।

    वीडियो में महिला यात्री सौरव दास से नाराजगी जताते हुए उन्हें “शर्म करो” कहती सुनाई देती है। इससे पहले दास भी तल्ख लहजे में प्रतिक्रिया देते नजर आते हैं। इसके बाद महिला यात्री की नाराजगी और बढ़ जाती है। फुटेज के एक हिस्से में पुलिस अधिकारियों के विमान में दाखिल होने के दौरान महिला यात्री को हंसते हुए भी देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध वीडियो से यह स्पष्ट नहीं होता कि महिला और सौरव दास के बीच बहस किस बात को लेकर शुरू हुई थी। इस विवाद के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है।

    इस घटनाक्रम के दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके भी पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते दिखाई देते हैं। उनके इंस्टाग्राम लाइव से सामने आए वीडियो में महिला पुलिसकर्मियों समेत पुलिस टीम को विमान के भीतर उनकी ओर बढ़ते देखा जा सकता है। दीपके कहते सुनाई देते हैं कि दिल्ली पुलिस विमान में आ गई है और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। इसके बाद वह कहते हैं कि वे गिरफ्तार होने के लिए ही आए हैं और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर लेना चाहिए।

    वीडियो में अभिजीत दीपके पुलिसकर्मियों के सामने “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाते भी सुनाई देते हैं। उनका यह बयान और विमान के भीतर पुलिस की कार्रवाई से जुड़े दृश्य घटना के प्रमुख हिस्से के रूप में सामने आए हैं। इस दौरान पार्टी के अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। पूरी कार्रवाई उस समय हुई, जब सीजेपी के नेता चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए राजधानी पहुंचे थे।

    प्रदर्शन को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने बिना पूर्व अनुमति प्रदर्शन या अनधिकृत सभा आयोजित करने पर रोक से संबंधित सुरक्षा कारणों का हवाला दिया। इसी के तहत नेताओं को एयरपोर्ट पर ही रोककर हिरासत में लिया गया। हालांकि, इस मामले में पुलिस कार्रवाई से संबंधित विस्तृत कानूनी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए हिरासत के आधार और आगे की प्रक्रिया को लेकर इससे अधिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    विमान के भीतर हुई बहस और सीजेपी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। सीजेपी समर्थक पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ प्रतिक्रियाओं में विमान के भीतर हुए विवाद और सह-यात्रियों को हुई संभावित असुविधा पर चर्चा की जा रही है। महिला यात्री और सौरव दास के बीच बहस की वजह स्पष्ट नहीं होने के कारण विवाद के मूल कारण को लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं है।

  • कॉपीराइट कारणों से पोस्ट ब्लॉक होने पर सौरव दास ने Meta से मांगा जवाब, सोशल मीडिया दबाव को लेकर सरकार पर निशाना

    कॉपीराइट कारणों से पोस्ट ब्लॉक होने पर सौरव दास ने Meta से मांगा जवाब, सोशल मीडिया दबाव को लेकर सरकार पर निशाना

    नई दिल्ली ।सौरव दास ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट की कुछ पोस्ट लगातार ब्लॉक किए जाने को लेकर Meta की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पोस्ट हटाए जाने या ब्लॉक होने से उनके अकाउंट की रीच भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने इस पूरे मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की शिकायतों की जांच करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

    सौरव दास के मुताबिक, उनके इंस्टाग्राम अकाउंट की कई पोस्ट लगातार ब्लॉक की जा रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या Meta किसी शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने से पहले उसकी उचित तरीके से जांच करता है या नहीं। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का सीधा असर उनके अकाउंट की पहुंच पर पड़ रहा है।

    सौरव ने इस मामले से जुड़ा एक स्क्रीनशॉट भी एक्स पर साझा किया। स्क्रीनशॉट में बताया गया कि 10 सितंबर को इंस्टाग्राम पर प्रकाशित उनकी एक पोस्ट को कॉपीराइट से जुड़े कारणों के चलते ब्लॉक किया गया। इसी कार्रवाई को लेकर उन्होंने Meta की व्यवस्था और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। सौरव का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स की शिकायतों और रिपोर्ट पर खुद उचित जांच करनी चाहिए। उनके अनुसार, कंपनियों को किसी सरकारी दबाव में काम नहीं करना चाहिए और प्लेटफॉर्म से जुड़ी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।

    इस मामले में सौरव दास ने मोदी सरकार पर भी निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अकाउंट को लगातार टारगेट किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में सरकार की ओर से किसी खास दबाव का कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया है। इसलिए सरकार की ओर से कथित दबाव का आरोप फिलहाल उनके दावे के स्तर पर ही है।

    सौरव दास की ओर से उठाए गए सवालों का एक प्रमुख हिस्सा अकाउंट की रीच से भी जुड़ा है। उनका कहना है कि पोस्ट के ब्लॉक होने और हटाए जाने की घटनाओं से उनके अकाउंट की पहुंच में कमी आई है। इसी वजह से उन्होंने Meta की कार्रवाई के तरीके और शिकायतों की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं।

    सौरव दास के LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, वह दिल्ली में रहते हैं और खोजी पत्रकार के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। उन्होंने 2017 में RTI के जरिए जानकारी जुटाना शुरू किया था। उस समय उनकी उम्र 18 साल थी।

    बाद में सौरव दास ने पत्रकारिता में काम शुरू किया और वर्ष 2020 से पेशेवर तौर पर लिखना शुरू किया। उनके लेख कानून, सरकार, अदालत, अपराध और व्यवस्था से जुड़े विषयों पर रहे हैं। उनके लेख विभिन्न मीडिया संस्थानों में भी प्रकाशित हुए हैं। इनमें द कारवां, अल जजीरा, द वायर और द हिंदू शामिल हैं।

    फिलहाल विवाद का मुख्य केंद्र 10 सितंबर की वह इंस्टाग्राम पोस्ट है, जिसे कॉपीराइट से जुड़े कारणों के चलते ब्लॉक किए जाने की जानकारी स्क्रीनशॉट में सामने आई। सौरव दास ने इस कार्रवाई के साथ अपने अकाउंट की घटती रीच और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

  • अभिजीत दीपके ने सौरव दास का किया समर्थन, बोले उनके वीडियो से लॉ छात्रों का भविष्य बचा और सवाल उठाना जरूरी है

    अभिजीत दीपके ने सौरव दास का किया समर्थन, बोले उनके वीडियो से लॉ छात्रों का भविष्य बचा और सवाल उठाना जरूरी है


    नई दिल्ली । 
    अभिजीत दीपके ने सौरव दास के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि वह देश और विशेष रूप से कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों के हित में काम कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सौरव दास के एक वीडियो के सामने आने के बाद बार काउंसिल के चेयरमैन ने अपना नोटिफिकेशन वापस ले लिया था। दीपके के मुताबिक इससे बड़ी संख्या में लॉ छात्रों का भविष्य प्रभावित होने से बच गया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि सौरव दास का प्रयास देश के लिए सकारात्मक है और कानून के छात्रों के लिए भी इसका महत्व है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक हित से जुड़े मुद्दे पर अपनी बात रख रहा है तो उसे जानबूझकर परेशान करने की कोशिश क्यों की जानी चाहिए।

    उन्होंने सौरव दास और उनके परिवार से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम का भी उल्लेख किया। दीपके के अनुसार दिल्ली में एक यूट्यूबर सौरव दास के घर में प्रवेश कर गया था। उन्होंने इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि सौरव और उनके परिवार को इस तरह परेशान करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए थी।

    दीपके ने यह भी सवाल उठाया कि परिवार के सदस्यों से उनकी निजी गतिविधियों और कामकाज से जुड़े सवाल क्यों किए गए। उन्होंने विशेष रूप से सौरव की मां को इस पूरे मामले में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान करने की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

    सौरव दास ने इससे पहले पुडुचेरी में अपने परिवार को पुलिस की ओर से डराए और धमकाए जाने का आरोप लगाया था। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया था। पुलिस की ओर से बताया गया कि अधिकारी सौरव दास के रिश्तेदारों के घर जरूर गए थे, लेकिन यह कार्रवाई नियमित सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा थी।

    पुलिस के अनुसार स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसरों से पहले संवेदनशील स्थानों और प्रमुख मार्गों के आसपास रहने वाले लोगों के घर जाकर सुरक्षा संबंधी जानकारी जुटाई जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत सौरव दास के रिश्तेदारों के घर भी पुलिस पहुंची थी। पुलिस ने किसी तरह की धमकी या परेशान किए जाने के आरोपों से इनकार किया था।

    इस पूरे मामले के बीच अभिजीत दीपके ने सौरव दास के काम को लेकर अपना समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि देश में कानून के छात्रों के भविष्य और शिक्षा से जुड़े विषयों पर आवाज उठाना जरूरी है। उनके अनुसार यदि किसी मुद्दे पर बदलाव की जरूरत है तो उसके बारे में सवाल पूछे जाने चाहिए और संबंधित व्यवस्था से जवाब मांगा जाना चाहिए।

    स्कूलों की स्थिति को लेकर भी अभिजीत दीपके ने अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी देश के कई बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में मूलभूत सुविधाओं की कमी दूर किए बिना देश की वास्तविक प्रगति संभव नहीं है।

    उन्होंने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार का सीधा संबंध देश के भविष्य से है और इस दिशा में लगातार काम करने की जरूरत है।

    सौरव दास से जुड़े विवाद में फिलहाल उनके आरोपों और पुलिस के स्पष्टीकरण के अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। वहीं अभिजीत दीपके ने स्पष्ट रूप से सौरव के प्रयासों का समर्थन किया है और उनके खिलाफ होने वाली किसी भी अनावश्यक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर आगे होने वाले घटनाक्रम पर अब नजर रहेगी।