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  • रक्षाबंधन और हरियाली अमावस्या पर ग्रहण का साया? जानिए भारत में सूतक काल रहेगा या नहीं

    रक्षाबंधन और हरियाली अमावस्या पर ग्रहण का साया? जानिए भारत में सूतक काल रहेगा या नहीं


    नई दिल्ली। वर्ष 2026 में कुल चार ग्रहण लगने हैं, जिनमें से दो पहले ही हो चुके हैं। अब साल के बाकी दो ग्रहण अगस्त महीने में पड़ेंगे। खास बात यह है कि दोनों ग्रहण सावन मास की दो अत्यंत महत्वपूर्ण तिथियों हरियाली अमावस्या और रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा) पर लग रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या इन ग्रहणों का असर पूजा-पाठ और त्योहारों पर पड़ेगा? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का प्रभाव तभी माना जाता है, जब वह संबंधित स्थान पर दिखाई देता हो। इस बार दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा और धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।

    12 अगस्त 2026 को लगेगा वलयाकार सूर्य ग्रहण

    साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन श्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या) होगी, जिसे भगवान शिव की पूजा और पितरों के तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। भारतीय समयानुसार यह सूर्य ग्रहण रात 9:04 बजे शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल लागू नहीं होगा। श्रद्धालु हरियाली अमावस्या के सभी धार्मिक कार्य और शिव पूजा सामान्य रूप से कर सकेंगे।

    28 अगस्त को रक्षाबंधन पर लगेगा चंद्र ग्रहण

    साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा। यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण सुबह 6:53 बजे शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगा। लेकिन दिन के समय होने और भारत में दिखाई न देने के कारण इसका भी सूतक काल मान्य नहीं होगा।

    रक्षाबंधन पर नहीं पड़ेगा कोई असर
    28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा होने के कारण इसी दिन देशभर में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। चूंकि चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए राखी बांधने, पूजा करने और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में सामान्य रूप से रक्षाबंधन का पर्व मना सकेंगे।

    ग्रहण के दौरान क्या रहेगा नियम?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता, तो वहां उसका सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाता। ऐसे में भारत में रहने वाले लोगों को इन दोनों ग्रहणों के कारण पूजा-पाठ, व्रत, दान या त्योहारों को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। हरियाली अमावस्या और रक्षाबंधन दोनों पर्व पूरे विधि-विधान के साथ मनाए जा सकेंगे।
  • Sawan 2026: इस बार कब-कब पड़ेंगे सावन सोमवार, नोट कर लें पूरी लिस्ट

    Sawan 2026: इस बार कब-कब पड़ेंगे सावन सोमवार, नोट कर लें पूरी लिस्ट


    नई दिल्ली। भगवान शिव की भक्ति का सबसे पावन और महत्वपूर्ण महीना Shravan Month हर साल श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दौरान शिवभक्त उपवास रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के जरिए भोलेनाथ की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में भी सावन का यह पवित्र महीना भक्तों के लिए विशेष महत्व लेकर आ रहा है।

    पंचांग गणना के अनुसार सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी, जब सावन कृष्ण प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा। वहीं यह पावन महीना 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त हो जाएगा। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस धार्मिक काल में वातावरण पूरी तरह शिवमय हो जाता है और हर तरफ “ॐ नमः शिवाय” के जयकारे गूंजने लगते हैं।

    इस बार सावन के दौरान कुल 4 सावन सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें शिवभक्त अत्यंत शुभ मानते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। खासकर कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए और श्रद्धालु अपने कष्टों के निवारण के लिए व्रत रखते हैं।

    सावन 2026 के सावन सोमवार इस प्रकार रहेंगे-
    पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
    दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
    तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
    चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026

    इन सभी सोमवारों पर देशभर के शिव मंदिरों में विशेष भीड़ देखने को मिलेगी। भक्त सुबह से ही शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल अर्पित कर पूजा-अर्चना करेंगे। कई स्थानों पर रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस समय भगवान शिव पृथ्वी पर अपने भक्तों के अधिक करीब माने जाते हैं। इसी कारण इस महीने को शिव कृपा प्राप्ति का सबसे उत्तम समय माना गया है।

    पूजा विधि की बात करें तो श्रद्धालु शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करने के बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल और चंदन चढ़ाते हैं। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है। अंत में शिव चालीसा और आरती के साथ पूजा संपन्न की जाती है।

    कुल मिलाकर सावन 2026 शिवभक्तों के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक विशेष संगम लेकर आ रहा है, जिसका इंतजार हर श्रद्धालु पूरे वर्ष करता है।