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  • सावन सोमवार व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी

    सावन सोमवार व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली । सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय माना जाता है और इस दौरान पड़ने वाले सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने तथा व्रत रखने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने सुख समृद्धि पारिवारिक शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से सावन सोमवार का व्रत रखते हैं। अविवाहित लोग अच्छे जीवनसाथी की कामना से भी यह व्रत करते हैं। हालांकि व्रत का पूरा लाभ पाने के लिए केवल उपवास करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि पूजा पाठ के साथ कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है।

    सावन सोमवार के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में या शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करना शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करने के बाद दूध दही शहद और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा और पुष्प अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वह साफ और साबुत हो। पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।

    सावन सोमवार व्रत में खानपान का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जल व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का तरीका चुनना उचित होता है। फल दूध दही मखाना कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन और सेंधा नमक का सेवन व्रत के दौरान किया जा सकता है। सामान्य नमक अनाज और तामसिक भोजन से बचने की परंपरा है। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है तो लंबे समय तक भूखे या निर्जल रहने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन से जुड़े नियमों का ही नहीं बल्कि व्यवहार से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार के दिन क्रोध झूठ निंदा और किसी को अपशब्द कहने से बचना चाहिए। मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का स्मरण करना और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना शुभ माना जाता है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तु का दान भी किया जा सकता है।

    सावन सोमवार की शाम भगवान शिव की दोबारा पूजा और आरती करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान शिव को भोग अर्पित करें और फिर प्रसाद ग्रहण करें। पूजा के दौरान परिवार की सुख शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जा सकती है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत की परंपराएं अलग हो सकती हैं इसलिए अपने परिवार की धार्मिक परंपरा का भी ध्यान रखना चाहिए। सावन सोमवार व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम श्रद्धा संयम और सात्विक विचारों के साथ भगवान शिव की आराधना करना माना जाता है।

  • पश्चिमी यूपी में ‘बम भोले’ की गूंज, डाक कांवड़ और पैदल जत्थों में दिखा जोश

    पश्चिमी यूपी में ‘बम भोले’ की गूंज, डाक कांवड़ और पैदल जत्थों में दिखा जोश

    मेरठ। सावन के साथ कांवड़ यात्रा 2026 ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया है। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे से लेकर मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बागपत तक हर तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम भोले’ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। कंधों पर गंगाजल लेकर शिवभक्त अपने गंतव्य और शिवालयों की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। दिन हो या रात, हाईवे पर कांवड़ियों की भीड़ कम नहीं हो रही। पैदल जत्थों के साथ डाक कांवड़िए भी तेज रफ्तार में आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं।

    शिव भजनों पर झूमते कांवड़िए, डीजे-ढोल बना आकर्षण
    कांवड़ यात्रा के दौरान कई जत्थों में भक्ति का उत्साह देखते ही बन रहा है। शिवभक्त रास्ते में शिव भजनों पर नाचते-गाते आगे बढ़ रहे हैं। कई जत्थों के साथ डीजे, ढोल और भजन मंडलियां भी चल रही हैं। शाम ढलते ही कांवड़ मार्गों की रौनक और बढ़ जाती है। रोशनी से सजी कांवड़ें, डीजे की धुन और भगवा वस्त्रों में नजर आते शिवभक्त पूरे माहौल को मेले जैसा बना देते हैं।

    हाईवे पर डाक कांवड़िए तेजी से अपने गंतव्य की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं सामान्य कांवड़ लेकर पैदल चल रहे शिवभक्त भजनों और जयकारों के बीच अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। कांवड़ियों का जोश राह से गुजरने वाले लोगों का भी ध्यान खींच रहा है। शहरों के लोग बड़ी संख्या में कांवड़ मार्गों तक पहुंचकर यात्रा का नजारा देख रहे हैं और कई जगह सेवा शिविरों में शिवभक्तों की मदद भी कर रहे हैं।

    सेवा शिविरों में भंडारे, जगह-जगह फूलों से स्वागत
    कांवड़ मार्गों पर शिवभक्तों के लिए जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, पानी, शरबत और आराम करने की व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में युवा और स्वयंसेवक दिन-रात कांवड़ियों की सेवा में जुटे हुए हैं। कई जगह शिवभक्तों का पुष्प वर्षा कर स्वागत भी किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर में सीओ ऋषिका सिंह भी महिला कांवड़ियों की सेवा करती नजर आईं। महिला कांवड़ियों के पैर दबाते हुए उनका वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।

    11 अगस्त को महाशिवरात्रि, और बढ़ेगी कांवड़ियों की भीड़
    कांवड़ यात्रा के दौरान शाम और रात में हाईवे और कांवड़ मार्गों पर मेले जैसा दृश्य दिखाई दे रहा है। शिवभक्तों के साथ स्थानीय लोग भी इन रास्तों पर पहुंच रहे हैं। कुछ लोग कांवड़ यात्रा का भक्तिमय नजारा देखने आ रहे हैं तो कई सेवा शिविरों में पहुंचकर कांवड़ियों की सेवा कर रहे हैं। 11 अगस्त को महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवालयों में कांवड़िए गंगाजल चढ़ाएंगे। इस वजह से कांवड़ मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही और बढ़ने की संभावना है।

  • Sawan 2026: भोलेनाथ के 3 चमत्कारी मंत्र, सावन में जाप से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की मान्यता

    Sawan 2026: भोलेनाथ के 3 चमत्कारी मंत्र, सावन में जाप से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की मान्यता


    नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। हिंदू धर्म में सावन को भगवान भोलेनाथ का प्रिय महीना बताया गया है और इस दौरान शिवलिंग पर जल चढ़ाने से लेकर मंत्र जाप तक विशेष पूजा का महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की विधि विधान से पूजा करने और नियमित रूप से शिव मंत्रों का जाप करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे लोग भी इस दौरान कुछ विशेष शिव मंत्रों का जाप श्रद्धा और नियम के साथ कर सकते हैं। हालांकि इन मंत्रों से आर्थिक लाभ होने की बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं।
    सावन में सबसे पहले रुद्र गायत्री मंत्र का जाप किया जा सकता है। यह भगवान शिव को समर्पित महत्वपूर्ण मंत्रों में माना जाता है। मंत्र है ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्। धार्मिक मान्यता के अनुसार नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करने से मन को एकाग्र करने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने में सहायता मिल सकती है। इसे आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप परिवार में सकारात्मक वातावरण बनाने और जीवन में स्थिरता लाने में सहायक हो सकता है।

    दूसरा महत्वपूर्ण मंत्र महामृत्युंजय मंत्र है। भगवान शिव के इस मंत्र को अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। मंत्र है ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्। धार्मिक परंपरा में महामृत्युंजय मंत्र का जाप भय से मुक्ति और मानसिक दृढ़ता के लिए किया जाता है। सावन में सुबह के समय स्नान करने के बाद स्वच्छ स्थान पर दीपक जलाकर श्रद्धा के साथ मंत्र जाप करने की परंपरा है। नियमित जाप के दौरान मन को शांत रखकर भगवान शिव का ध्यान करने पर पूजा का आध्यात्मिक अनुभव और गहरा हो सकता है।

    तीसरा मंत्र ऋण मुक्तेश्वर मंत्र है जिसे विशेष रूप से आर्थिक परेशानियों और कर्ज से मुक्ति की धार्मिक मान्यता से जोड़ा जाता है। इसका मंत्र है ॐ ऋण मुक्तेश्वराय नमः शिवाय। मान्यता है कि सावन के दौरान इस मंत्र का नियमित जाप श्रद्धा और सकारात्मक भाव से करने पर व्यक्ति को आर्थिक संकट से निकलने का मानसिक संबल मिलता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार भगवान शिव की कृपा से कर्ज से राहत और आर्थिक स्थिति में सुधार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

    सावन में शिव मंत्रों का जाप करते समय नियमितता और श्रद्धा को महत्वपूर्ण माना गया है। सुबह का समय मंत्र जाप के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान शिव का ध्यान करते हुए जल अर्पित किया जा सकता है और अपनी क्षमता के अनुसार पूजा सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। मंत्र जाप को किसी चमत्कारी आर्थिक उपाय के बजाय आध्यात्मिक साधना के रूप में लेना बेहतर है। सावन में शिव आराधना व्यक्ति को अनुशासन मानसिक शांति और सकारात्मक सोच से जोड़ने का माध्यम बन सकती है।

  • सावन में एटा के स्कूलों में हर शनिवार-सोमवार रहेगा अवकाश, कांवड़ यात्रा के चलते ट्रैफिक डायवर्जन लागू

    सावन में एटा के स्कूलों में हर शनिवार-सोमवार रहेगा अवकाश, कांवड़ यात्रा के चलते ट्रैफिक डायवर्जन लागू


    एटा। सावन माह में कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़ने वाली भीड़ और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए एटा प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। इसी के तहत जिले में 12वीं तक के विद्यालयों को प्रत्येक शनिवार और सोमवार बंद रखने का फैसला किया गया है। साथ ही शुक्रवार रात से शहर में व्यापक रूट डायवर्जन लागू कर दिया गया है।

    सोरों और कछला घाट से गंगाजल लेने आने वाले कांवड़ियों की भारी संख्या को देखते हुए शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। रोडवेज बसों का संचालन भी वैकल्पिक मार्गों से कराया जाएगा। यह व्यवस्था सोमवार शाम 6 बजे तक प्रभावी रहेगी।

    प्रशासन के अनुसार, यही ट्रैफिक व्यवस्था 7 से 11 अगस्त, 14 से 17 अगस्त और 21 से 24 अगस्त तक भी प्रत्येक शुक्रवार से सोमवार शाम तक लागू रहेगी। इस दौरान अलीगढ़, पिलुआ, मैनपुरी, फिरोजाबाद, कासगंज, बदायूं, बरेली, शिकोहाबाद और टूंडला की ओर से आने वाले भारी वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं मिलेगा और उन्हें निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा। इसके अलावा एटा-कासगंज मार्ग को कांवड़ यात्रा के दौरान वन-वे घोषित किया गया है।

    स्कूलों ने भी घोषित किया अवकाश
    कांवड़ यात्रा के दौरान संभावित भीड़ और ट्रैफिक दबाव को देखते हुए शहर के कई प्रमुख विद्यालयों ने भी छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर शनिवार और सोमवार को अवकाश घोषित किया है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि भीड़भाड़ और जाम की स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

    इन मार्गों से संचालित होंगे वाहन
    – अलीगढ़ और पिलुआ से मैनपुरी जाने वाले भारी वाहन एटा बाईपास से डायवर्ट किए जाएंगे।
    – अलीगढ़-पिलुआ से फिरोजाबाद जाने वाले वाहन मलावन, कुरावली, घिरोर और शिकोहाबाद होकर गुजरेंगे।
    – एटा से बदायूं और बरेली जाने वाले भारी वाहनों को ओन घाट चौकी, सिढ़पुरा, गंजडुंडवारा और कादरगंज मार्ग से भेजा जाएगा।
    – मैनपुरी से आने वाले भारी वाहन एटा बाईपास होते हुए अलीगढ़ की ओर जाएंगे।
    – कासगंज से फिरोजाबाद जाने वाले वाहन अमांपुर, एटा बाईपास, मलावन, कुरावली, घिरोर और शिकोहाबाद मार्ग से संचालित होंगे।
    – शिकोहाबाद से एटा आने वाले सभी भारी, हल्के और आवश्यक वस्तुओं के वाहन घिरोर-मैनपुरी मार्ग से भेजे जाएंगे।
    – टूंडला से आने वाले वाहन फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, घिरोर, कुरावली, मलावन, एटा बाईपास, सिढ़पुरा और गंजडुंडवारा होकर बदायूं-बरेली की ओर जाएंगे।
    – एटा-कासगंज मार्ग कांवड़ यात्रा के दौरान वन-वे रहेगा।

  • मेरठ में आस्था संग सेवा की मिसाल, नानी को कांवड़ में बैठाकर पदयात्रा कर रहा शिवभक्त

    मेरठ में आस्था संग सेवा की मिसाल, नानी को कांवड़ में बैठाकर पदयात्रा कर रहा शिवभक्त


    मेरठ। कांवड़ यात्रा सिर्फ भगवान शिव के प्रति आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि रिश्तों में समर्पण, सेवा और जिम्मेदारी का भी संदेश देती है। मेरठ में इस बार दो शिवभक्त अपनी अनोखी कांवड़ यात्रा के कारण श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। एक युवक अपनी 75 वर्षीय नानी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहा है, जबकि दूसरा बैग में गंगाजल सुरक्षित रखकर पैदल अपने गांव की ओर बढ़ रहा है।

    बैग में गंगाजल लेकर पैदल यात्रा
    मथुरा के बलदेव थाना क्षेत्र के रहने वाले धीरेंद्र (27) वर्तमान में दिल्ली के राजनगर में अपने इंजीनियर भाई के साथ रहते हैं। वह 10 जुलाई को ट्रेन से हरिद्वार पहुंचे और 11 जुलाई से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा शुरू की।

    धीरेंद्र ने गंगाजल को बैग में सुरक्षित रखा है और चरणबद्ध तरीके से यात्रा पूरी कर रहे हैं। पहले दिन उन्होंने 4 किलोमीटर, दूसरे दिन 18 किलोमीटर और तीसरे दिन 15 किलोमीटर की दूरी तय की। इसके बाद वह प्रतिदिन 10 से 12 किलोमीटर चलते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। यह उनकी हरिद्वार से गंगाजल लाने की लगातार तीसरी कांवड़ यात्रा है।

    कांवड़ में नानी को बैठाकर निभा रहे सेवा का धर्म
    नोएडा के सेक्टर-5 स्थित हरौला गांव निवासी हिमांशु चौहान अपनी 75 वर्षीय नानी रूपरानी को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहे हैं। उनके साथ मौसेरे भाई प्रिंस राघव, बहन लक्ष्मी और परिवार के अन्य सदस्य भी यात्रा में शामिल हैं।

    हिमांशु ने 19 जुलाई को हरिद्वार से यात्रा शुरू की। कांवड़ के एक हिस्से में करीब 45 किलोग्राम वजन की उनकी नानी बैठी हैं, जबकि दूसरे हिस्से में 55 लीटर गंगाजल से भरे कलश रखे गए हैं। लगभग एक क्विंटल वजन वाली इस कांवड़ को हिमांशु और प्रिंस राघव बारी-बारी से अपने कंधों पर उठाकर यात्रा पूरी कर रहे हैं।

    श्रद्धालुओं ने किया जोरदार स्वागत
    यात्रा के दौरान हिमांशु की बहन लक्ष्मी लगातार पंखे से दोनों भाइयों और अपनी नानी को हवा करती रहती हैं। मेरठ के पल्लवपुरम पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने इन शिवभक्तों का भव्य स्वागत किया। सेवा, समर्पण और शिवभक्ति का यह अनोखा संगम कांवड़ यात्रा में लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बना हुआ है।

  • 30 जुलाई को इन वास्तु दोषों से रहें सावधान वरना घर में बढ़ सकती हैं आर्थिक परेशानी और पारिवारिक कलह

    30 जुलाई को इन वास्तु दोषों से रहें सावधान वरना घर में बढ़ सकती हैं आर्थिक परेशानी और पारिवारिक कलह


    नई दिल्ली । सनातन परंपरा में सावन का महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है। 30 जुलाई का गुरुवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि इस दिन घर में मौजूद वास्तु दोषों को दूर करने का प्रयास किया जाए तो सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख समृद्धि के मार्ग खुलते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दिशा स्वच्छता और ऊर्जा का सीधा संबंध परिवार के स्वास्थ्य आर्थिक स्थिति और मानसिक शांति से माना गया है।

    वास्तु शास्त्र कहता है कि घर का मुख्य द्वार हमेशा साफ सुथरा और व्यवस्थित होना चाहिए। मुख्य द्वार पर टूटी हुई नेम प्लेट खराब दरवाजा या गंदगी नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देती है। गुरुवार के दिन मुख्य द्वार की सफाई करके हल्दी मिले जल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। इससे सकारात्मक वातावरण बनता है और घर में शुभता का प्रवेश होता है।

    ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व दिशा को सबसे पवित्र माना गया है। इस दिशा में भारी सामान कबाड़ या गंदगी रखने से वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। यदि पूजा घर इसी दिशा में हो और वहां नियमित रूप से दीपक जलाया जाए तो वातावरण सकारात्मक बना रहता है। इस स्थान को हमेशा स्वच्छ और शांत रखना शुभ माना जाता है।

    रसोई घर में भी कई ऐसी छोटी गलतियां होती हैं जो वास्तु दोष का कारण बन सकती हैं। गैस चूल्हे के आसपास गंदगी रखना टूटे बर्तन जमा करना या रसोई में अनावश्यक सामान रखना शुभ नहीं माना जाता। गुरुवार के दिन रसोई की विशेष सफाई करें और भगवान विष्णु को पीले रंग के प्रसाद का भोग लगाएं। इससे घर में अन्न धन और समृद्धि बनी रहने की मान्यता है।

    घर में यदि लंबे समय से टूटे हुए फर्नीचर बंद घड़ी खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान या बेकार वस्तुएं पड़ी हों तो उन्हें हटाना बेहतर माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसी वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती हैं और कार्यों में बार बार बाधा उत्पन्न कर सकती हैं। गुरुवार का दिन ऐसे अनुपयोगी सामान को हटाने के लिए शुभ माना जाता है।

    तुलसी का पौधा घर की सकारात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। यदि घर में तुलसी का पौधा सूख गया हो तो उसे सम्मानपूर्वक हटाकर नया पौधा लगाना चाहिए। शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाने से घर का वातावरण पवित्र और शांत बना रहता है। साथ ही भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता भी है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन घर में झगड़ा कटु वचन और नकारात्मक विचारों से भी बचना चाहिए। परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। जरूरतमंद लोगों को पीली दाल हल्दी या पीले वस्त्र का दान करना भी शुभ माना जाता है।

    ध्यान रहे कि वास्तु शास्त्र आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य घर में स्वच्छता संतुलन और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना है। यदि इन बातों का पालन श्रद्धा और सद्भाव के साथ किया जाए तो घर का माहौल सुखद और ऊर्जावान बना रह सकता है।

  • Aaj Ka Rashifal 30 July 2026: सावन के पहले दिन बने आयुष्मान और गजकेसरी योग, जानें किस राशि की चमकेगी किस्मत

    Aaj Ka Rashifal 30 July 2026: सावन के पहले दिन बने आयुष्मान और गजकेसरी योग, जानें किस राशि की चमकेगी किस्मत


    नई दिल्ली । 30 जुलाई 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस दिन से भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन मास की शुरुआत हो रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा और द्वितीया तिथि का संयोग रहेगा। चंद्रमा पूरे दिन मकर राशि में गोचर करेंगे। साथ ही आयुष्मान योग, गजकेसरी योग, वाशि योग, सुनफा योग और आनंदादि योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इन योगों का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा। कई जातकों को करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी, जबकि कुछ लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मेष राशि के लिए नौकरी और करियर में उन्नति के योग बन रहे हैं। व्यापार विस्तार की योजनाएं सफल हो सकती हैं। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है। यात्रा लाभदायक रहेगी और वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी।

    वृषभ राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलेगा। पारिवारिक व्यापार में नए अवसर प्राप्त होंगे। समाज में सम्मान बढ़ेगा और लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। हालांकि कार्यस्थल पर किसी पर आंख बंद करके भरोसा करने से बचें।

    मिथुन राशि के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। व्यापार में उतार-चढ़ाव रहेगा और निवेश सोच-समझकर करना होगा। सरकारी कार्यों में विशेष सतर्कता रखें तथा पारिवारिक मामलों में धैर्य बनाए रखें।

    कर्क राशि वालों के लिए यह दिन बेहद शुभ रहने वाला है। व्यापार में नए ऑर्डर मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और पुराने कर्ज से राहत मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

    सिंह राशि के लिए आय में वृद्धि और करियर में सकारात्मक बदलाव के संकेत हैं। सरकारी मामलों में राहत मिल सकती है। बैंक लोन से जुड़े कार्य पूरे होंगे और व्यापार में लाभ के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे।

    कन्या राशि वालों को नई योजनाओं में सफलता मिलेगी। व्यापार में नई तकनीक अपनाने से लाभ होगा। नौकरी में आत्मविश्वास के साथ किए गए कार्य सफल रहेंगे, हालांकि स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा।

    तुला राशि के जातकों को संपत्ति और पारिवारिक मामलों में विवाद से बचने की सलाह है। व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। कार्यस्थल पर दस्तावेजों और महत्वपूर्ण निर्णयों में सावधानी बरतें।

    वृश्चिक राशि वालों के लिए रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। व्यापारिक बैठकों में सफलता मिलेगी और नौकरी बदलने की इच्छा रखने वालों को नए अवसर मिल सकते हैं।

    धनु राशि के लिए आर्थिक दृष्टि से दिन बेहद लाभकारी रहेगा। व्यापार में बड़ा लाभ मिलने के योग हैं। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों का समाधान निकल सकता है। परिवार का सहयोग भी मिलेगा।

    मकर राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। नए व्यापारिक अवसर प्राप्त होंगे और लाभ में वृद्धि होगी। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी तथा नौकरी में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा।

    कुंभ राशि के जातकों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है। कार्यस्थल पर वाणी पर संयम रखें। अनावश्यक विवाद और आर्थिक जोखिम से बचना बेहतर रहेगा।

    मीन राशि वालों के लिए आय बढ़ाने के प्रयास सफल होंगे। नौकरी बदलने की योजना सफल हो सकती है। व्यापारिक यात्राएं लाभदायक रहेंगी और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

    30 जुलाई 2026 का शुभ मुहूर्त
    शुभ चौघड़िया (प्रातः): सुबह 7:00 बजे से 8:00 बजे तक
    शुभ चौघड़िया (सायं): शाम 5:00 बजे से 6:00 बजे तक
    राहुकाल: दोपहर 1:30 बजे से 3:00 बजे तक
    यात्रा के लिए शुभ दिशा: दक्षिण

    सावन के पहले दिन भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

  • भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां सही नियमों से करें आराधना और पाएं सुख समृद्धि व मनचाहा आशीर्वाद

    भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां सही नियमों से करें आराधना और पाएं सुख समृद्धि व मनचाहा आशीर्वाद


    नई दिल्ली । भगवान शिव को देवों के देव महादेव कहा जाता है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और सरल भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। विशेष रूप से श्रावण मास सोमवार प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के अवसर पर शिव पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि भगवान शिव की पूजा विधि विधान और नियमों के साथ की जाए तो जीवन की अनेक परेशानियां दूर हो सकती हैं तथा सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    शिव पूजा की शुरुआत प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। पूजा स्थल को साफ और पवित्र रखें तथा भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। शिवलिंग पर सबसे पहले शुद्ध जल और फिर गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद दूध दही शहद घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है। अंत में पुनः स्वच्छ जल से अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

    भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय हैं। पूजा के दौरान तीन पत्तियों वाले ताजे और साफ बेलपत्र अर्पित करें। बेलपत्र पर किसी प्रकार का कीड़ा या कटाव नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही धतूरा भांग आक के फूल सफेद चंदन सफेद पुष्प अक्षत और मौसमी फल भी अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। शिव चालीसा रुद्राष्टक और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी विशेष पुण्य प्रदान करता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भगवान शिव को तुलसी के पत्ते केतकी का फूल और हल्दी अर्पित नहीं करनी चाहिए। शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल को पैरों से स्पर्श नहीं करना चाहिए और पूजा के समय मन में किसी प्रकार का क्रोध अहंकार या नकारात्मक विचार नहीं रखना चाहिए। पूजा पूरी श्रद्धा और शांत मन से करनी चाहिए क्योंकि भगवान शिव भाव के भूखे माने जाते हैं।

    यदि संभव हो तो सोमवार का व्रत रखें और जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें। दान और सेवा को भी शिव भक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। शाम के समय शिव मंदिर में दीपक जलाकर आरती करने से घर में सुख शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। परिवार के साथ सामूहिक रूप से भगवान शिव का स्मरण करने से आपसी प्रेम और विश्वास भी मजबूत होता है।

    ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा करने से ग्रह दोषों का प्रभाव कम हो सकता है। विशेष रूप से चंद्रमा राहु केतु और शनि से जुड़ी समस्याओं में भगवान शिव की आराधना लाभकारी मानी जाती है। साथ ही मानसिक तनाव भय रोग और जीवन की बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए भी शिव उपासना को अत्यंत प्रभावी बताया गया है।

    भगवान शिव की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण नियम सच्ची श्रद्धा और निष्कपट भक्ति है। यदि भक्त पूरी आस्था और विश्वास के साथ महादेव का स्मरण करता है तो वे उसकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में सुख समृद्धि सफलता तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

  • सावन 2026 में इन चार पवित्र पौधों की पूजा से प्रसन्न होंगे भोलेनाथ दूर होंगी जीवन की बाधाएं

    सावन 2026 में इन चार पवित्र पौधों की पूजा से प्रसन्न होंगे भोलेनाथ दूर होंगी जीवन की बाधाएं


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सावन माह को भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त भोलेनाथ की पूजा अर्चना जलाभिषेक व्रत और विभिन्न धार्मिक उपायों के माध्यम से उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि सावन में की गई सच्ची श्रद्धा से पूजा भगवान शिव को शीघ्र प्रसन्न करती है और भक्तों के जीवन में चल रही अनेक परेशानियों का अंत होता है। इसी क्रम में कुछ विशेष पौधों की पूजा का भी उल्लेख मिलता है जिन्हें शिव प्रिय माना गया है।

    मान्यता है कि सावन में इन पौधों की पूजा करने से घर में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही जीवन में आ रही बाधाएं धीरे धीरे दूर होने लगती हैं। आइए जानते हैं वे चार पवित्र पौधे कौन से हैं जिनकी पूजा सावन में विशेष फलदायी मानी जाती है।

    बेलपत्र का पौधा

    बेलपत्र भगवान शिव को सबसे प्रिय अर्पणों में से एक माना जाता है। सावन माह में शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने के साथ यदि बेलपत्र के पौधे की भी पूजा की जाए तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार बेलपत्र में ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों देवताओं का प्रतीकात्मक वास माना गया है। इसकी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में आध्यात्मिक वातावरण मजबूत होता है।

    शमी का पौधा

    शमी का पौधा भी सावन में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इसकी पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और घर का वास्तु दोष कम होता है। कई लोग इसे घर के मुख्य द्वार की बाईं ओर लगाने की सलाह देते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार शमी की पूजा से शनि से जुड़े कष्टों में भी राहत मिल सकती है और परिवार पर शिव कृपा बनी रहती है।

    आक यानी मदार का पौधा

    आक या मदार का पौधा भगवान शिव से विशेष रूप से जुड़ा माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है कि इस पौधे में शिव तत्व का वास होता है। सावन में इसकी पूजा करने से घर में सुख समृद्धि और शांति बनी रहती है। विशेष रूप से यदि यह पौधा घर के पूर्व या उत्तर दिशा में लगा हो तो उसकी पूजा को अधिक शुभ माना जाता है।

    तुलसी का पौधा

    तुलसी को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पूजनीय पौधा माना गया है। यह देवी लक्ष्मी का प्रतीक मानी जाती है। सावन में तुलसी की पूजा करने से घर में धन सुख और समृद्धि का आगमन होता है। धार्मिक विश्वास है कि जहां तुलसी का वास होता है वहां सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार में शांति का वातावरण बना रहता है।

    सावन में पौधों की पूजा का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में इन पौधों की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में आ रही बाधाएं कम होने लगती हैं। हालांकि यह सभी बातें धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं और इन्हें आस्था के रूप में ही ग्रहण किया जाना चाहिए।

  • रक्षाबंधन और हरियाली अमावस्या पर ग्रहण का साया? जानिए भारत में सूतक काल रहेगा या नहीं

    रक्षाबंधन और हरियाली अमावस्या पर ग्रहण का साया? जानिए भारत में सूतक काल रहेगा या नहीं


    नई दिल्ली। वर्ष 2026 में कुल चार ग्रहण लगने हैं, जिनमें से दो पहले ही हो चुके हैं। अब साल के बाकी दो ग्रहण अगस्त महीने में पड़ेंगे। खास बात यह है कि दोनों ग्रहण सावन मास की दो अत्यंत महत्वपूर्ण तिथियों हरियाली अमावस्या और रक्षाबंधन (श्रावण पूर्णिमा) पर लग रहे हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या इन ग्रहणों का असर पूजा-पाठ और त्योहारों पर पड़ेगा? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का प्रभाव तभी माना जाता है, जब वह संबंधित स्थान पर दिखाई देता हो। इस बार दोनों ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देंगे, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा और धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।

    12 अगस्त 2026 को लगेगा वलयाकार सूर्य ग्रहण

    साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन श्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या) होगी, जिसे भगवान शिव की पूजा और पितरों के तर्पण के लिए विशेष माना जाता है। भारतीय समयानुसार यह सूर्य ग्रहण रात 9:04 बजे शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल लागू नहीं होगा। श्रद्धालु हरियाली अमावस्या के सभी धार्मिक कार्य और शिव पूजा सामान्य रूप से कर सकेंगे।

    28 अगस्त को रक्षाबंधन पर लगेगा चंद्र ग्रहण

    साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त 2026 को लगेगा। यह एक आंशिक चंद्र ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की छाया से ढक जाएगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण सुबह 6:53 बजे शुरू होकर दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगा। लेकिन दिन के समय होने और भारत में दिखाई न देने के कारण इसका भी सूतक काल मान्य नहीं होगा।

    रक्षाबंधन पर नहीं पड़ेगा कोई असर
    28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा होने के कारण इसी दिन देशभर में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। चूंकि चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए राखी बांधने, पूजा करने और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा। श्रद्धालु शुभ मुहूर्त में सामान्य रूप से रक्षाबंधन का पर्व मना सकेंगे।

    ग्रहण के दौरान क्या रहेगा नियम?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई नहीं देता, तो वहां उसका सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाता। ऐसे में भारत में रहने वाले लोगों को इन दोनों ग्रहणों के कारण पूजा-पाठ, व्रत, दान या त्योहारों को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। हरियाली अमावस्या और रक्षाबंधन दोनों पर्व पूरे विधि-विधान के साथ मनाए जा सकेंगे।