Tag: Sawan Somwar 2026

  • हर-हर महादेव से गूंजा मध्य प्रदेश, महाकाल से ओंकारेश्वर तक विशेष पूजा; 6 क्विंटल फूलों से सजे भोजेश्वर के होंगे भव्य दर्शन

    हर-हर महादेव से गूंजा मध्य प्रदेश, महाकाल से ओंकारेश्वर तक विशेष पूजा; 6 क्विंटल फूलों से सजे भोजेश्वर के होंगे भव्य दर्शन


    उज्जैन सावन के चौथे और आखिरी सोमवार पर मध्य प्रदेश के शिवालयों में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। सुबह से ही उज्जैन से लेकर ओंकारेश्वर भोजपुर टीकमगढ़ इंदौर मंदसौर और ग्वालियर तक शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। हर तरफ हर हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंज रहे हैं। भगवान शिव के प्रिय सावन महीने के अंतिम सोमवार को लेकर मंदिरों में विशेष पूजा अभिषेक और आकर्षक श्रृंगार किया गया है।

    उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में सोमवार तड़के भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट 2:30 बजे खोल दिए गए। परंपरा के अनुसार सभा मंडप में भगवान शिव के गण वीरभद्र के कान में स्वस्ति वाचन कर बाबा की आज्ञा ली गई। इसके बाद चांदी का पट खोलकर कर्पूर आरती की गई। नंदी हॉल में नंदी का स्नान ध्यान और पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष पूजन हुआ।

    भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का बेहद आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत चंद्र त्रिशूल मुकुट और अन्य आभूषण धारण कराए गए। भांग चंदन और ड्रायफ्रूट से श्रृंगार करने के बाद भस्म अर्पित की गई। बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। फूलों की माला से भी भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। फल और मिठाई का भोग लगाया गया। बाबा के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    महाकाल मंदिर में आज शाम 4 बजे बाबा की राजसी सवारी भी निकलेगी। पूजा अर्चना के बाद भगवान महाकाल को पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया जाएगा। सवारी में भगवान के अलग अलग स्वरूपों के दर्शन होंगे। चंद्रमौलेश्वर पालकी में मनमहेश गजराज पर शिव तांडव गरुड़ रथ पर और उमा महेश नंदी रथ पर विराजमान होंगे। घुड़सवार पुलिस दल सशस्त्र बल होमगार्ड भजन मंडलियां और पुलिस बैंड सवारी का हिस्सा होंगे। रामघाट पर शिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन किया जाएगा।

    ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यहां बाबा का रुद्राभिषेक और विशेष पूजन किया जा रहा है। शाम को भगवान ओंकारेश्वर का नौका विहार होगा। पारंपरिक सवारी के दौरान हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की जाएगी। सवारी में पुलिस बैंड सात ढोल बैंड और धार्मिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

    भोजपुर के ऐतिहासिक भोजेश्वर महादेव मंदिर में भी सावन के अंतिम सोमवार को विशेष आयोजन हुआ। यहां भगवान भोजेश्वर महादेव को महाकालेश्वर स्वरूप में सजाया गया है। भोलेनाथ का करीब 6 क्विंटल फूलों से भव्य श्रृंगार किया गया। टीकमगढ़ के शिवधाम कुंडेश्वर में रिमझिम बारिश के बीच श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। इंदौर के गेंदेश्वर महादेव मंदिर में प्रतीकात्मक रूप से 12 ज्योतिर्लिंग बनाए गए हैं जहां सुबह से भक्त दर्शन कर रहे हैं।

    मंदसौर के अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर में मंगला आरती के बाद अभिषेक और पूजन शुरू हुआ। वहीं इंदौर के पंचकुइयां स्थित प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में बेलपत्र और फूलों से बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया। रतलाम से सांवरिया मित्र मंडल की पैदल कांवड़ यात्रा केदारेश्वर के लिए रवाना हुई है जिसमें ढोल ताशे डीजे और धार्मिक झांकियां शामिल हैं। श्योपुर में भी कांवड़िए भूतेश्वर महादेव का जलाभिषेक करेंगे।

    सावन के अंतिम सोमवार पर मध्य प्रदेश का माहौल पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। मंदिरों में विशेष श्रृंगार से लेकर अभिषेक कांवड़ यात्राओं और भव्य सवारियों तक हर जगह श्रद्धा और उत्साह का संगम दिखाई दे रहा है। शाम को महाकाल की राजसी सवारी और ओंकारेश्वर की पारंपरिक यात्रा के साथ शिवभक्ति का यह पर्व और भव्य रूप लेगा।

  • सावन का चौथा सोमवार आज: शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या न करें, जानें पूजा विधि और व्रत के खास नियम

    सावन का चौथा सोमवार आज: शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या न करें, जानें पूजा विधि और व्रत के खास नियम


    नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पवित्र महीने में आने वाले सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन के चौथे सोमवार पर शिव भक्त सुबह से ही भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना और अभिषेक में जुट जाते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक करने और व्रत रखने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन मंदिर में जाकर शिवलिंग का अभिषेक करना और शिव मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। यदि आप भी सावन के चौथे सोमवार का व्रत रख रहे हैं तो पूजा के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    सावन सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। संभव हो तो घर के मंदिर में शिवलिंग स्थापित करके पूजा करें या किसी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का दर्शन करें। शिवलिंग पर सबसे पहले स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दूध से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद दोबारा जल अर्पित करें।

    भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। शिवलिंग पर साफ और साबुत बेलपत्र अर्पित करें। इसके साथ धतूरा और आक के फूल चढ़ाने की भी परंपरा है। भगवान शिव को सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान चंदन लगाएं और धूप दीप जलाकर महादेव की आरती करें। इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। ॐ नमः शिवाय का जाप सावन सोमवार के दिन विशेष रूप से किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव चालीसा और शिव स्तुति का पाठ भी कर सकते हैं।

    सावन सोमवार के व्रत में खानपान का विशेष ध्यान रखा जाता है। कुछ भक्त पूरे दिन निराहार रहकर व्रत करते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। फल दूध दही मखाना और व्रत में स्वीकार्य खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। व्रत हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक भूखा रहने में परेशानी होती है तो वह अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन सोमवार के दिन केवल पूजा करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि मन और व्यवहार को भी सात्विक रखना चाहिए। इस दिन क्रोध विवाद और नकारात्मक विचारों से बचने की कोशिश करनी चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान शिव से परिवार की सुख शांति और समृद्धि की कामना करें।

    सावन के चौथे सोमवार पर भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और विश्वास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होते हैं। इसलिए पूजा में दिखावे के बजाय मन की शुद्धता और भक्ति भावना को महत्व दें। ध्यान रखें कि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा और व्रत की परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए अपने कुलाचार और स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित रहेगा।

  • सावन सोमवार 2026: 24 अगस्त को बन रहा है शिव भक्ति का विशेष अवसर, ये 5 उपाय दूर कर सकते हैं जीवन की परेशानियां

    सावन सोमवार 2026: 24 अगस्त को बन रहा है शिव भक्ति का विशेष अवसर, ये 5 उपाय दूर कर सकते हैं जीवन की परेशानियां



    नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है और 24 अगस्त 2026 को चौथा और अंतिम सावन सोमवार मनाया जाएगा। भगवान शिव को समर्पित इस दिन का धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है। सावन सोमवार पर शिव भक्त व्रत रखते हैं और विधि विधान से भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सावन के सोमवार को सच्चे मन से महादेव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख शांति तथा सकारात्मकता का संचार होता है। इस साल का आखिरी सावन सोमवार होने के कारण भक्तों के लिए यह दिन और भी खास माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

    अंतिम सावन सोमवार पर भगवान शिव की पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक बताया गया है। इस दौरान शिवलिंग की विशेष पूजा की जा सकती है। इसके अलावा प्रदोष काल में भी भगवान शिव की आराधना करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान श्रद्धा और नियमों का ध्यान रखना जरूरी है।

    इस दिन सबसे पहले शिवलिंग पर पंचामृत से अभिषेक करने की परंपरा है। पंचामृत में दूध दही घी शहद और शक्कर का प्रयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पंचामृत अभिषेक से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में सुख शांति का वातावरण बनता है। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करना भी बेहद शुभ माना जाता है। बेलपत्र पर चंदन से ॐ नमः शिवाय लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाने की मान्यता है। कहा जाता है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और रुके हुए कार्यों में गति आने की कामना की जाती है।

    सावन सोमवार के दिन जरूरतमंद लोगों को सफेद वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। दूध चावल सफेद वस्त्र या अन्य उपयोगी सफेद सामग्री का दान अपनी क्षमता के अनुसार किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दान करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता आती है। इसके साथ ही शिवलिंग पर गेहूं अर्पित करने और गन्ने के रस से अभिषेक करने की भी परंपरा बताई गई है। मान्यता है कि इस उपाय से जीवन में सफलता और समृद्धि की कामना की जा सकती है।

    अंतिम सावन सोमवार पर भगवान शिव को खीर का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। पूजा के बाद खीर को प्रसाद के रूप में परिवार और अन्य श्रद्धालुओं में बांट सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को श्रद्धा से भोग अर्पित करने से घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है।

    हालांकि इन सभी उपायों का आधार धार्मिक मान्यताएं हैं और इन्हें आस्था के रूप में ही देखा जाना चाहिए। सावन सोमवार पर सबसे महत्वपूर्ण भगवान शिव की श्रद्धा पूर्वक पूजा और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना है। अंतिम सावन सोमवार पर भक्त यदि अपनी क्षमता के अनुसार पूजा दान और सेवा करते हैं तो यह दिन उनके लिए आध्यात्मिक रूप से विशेष बन सकता है।

  • सावन के तीसरे सोमवार पर शिव भक्तों के लिए बड़ा अवसर, नाग पंचमी के साथ खास संयोग; ऐसे करें भोलेनाथ का जलाभिषेक

    सावन के तीसरे सोमवार पर शिव भक्तों के लिए बड़ा अवसर, नाग पंचमी के साथ खास संयोग; ऐसे करें भोलेनाथ का जलाभिषेक


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव भक्त व्रत रखते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करके सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस बार 17 अगस्त 2026 को सावन का तीसरा सोमवार मनाया जाएगा और इसी दिन नाग पंचमी भी पड़ रही है। पंचांग के अनुसार पंचमी तिथि 16 अगस्त की शाम से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम तक रहेगी और उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी 17 अगस्त को मनाई जाएगी। इस वजह से सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है।

    इस दिन भगवान शिव के साथ नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग भगवान शिव से जुड़े हुए हैं और शिवजी के गले में नाग के विराजमान होने के कारण नाग पंचमी की पूजा का संबंध शिव आराधना से भी माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित कर सकते हैं और बेलपत्र पुष्प अक्षत तथा अपनी श्रद्धा के अनुसार अन्य पूजन सामग्री चढ़ा सकते हैं। नाग देवता की प्रतिमा या शिवलिंग के साथ स्थापित नाग प्रतिमा की भी पूजा की जा सकती है।

    17 अगस्त को शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए अलग अलग पंचांगों में समय में थोड़ा अंतर मिल सकता है। आपके दिए गए पंचांग के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 24 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सुबह 5 बजकर 51 मिनट से 7 बजकर 30 मिनट तक अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त बताया गया है। सुबह 9 बजकर 8 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक शुभ उत्तम मुहूर्त रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक बताया गया है। स्थानीय सूर्योदय और शहर के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर संभव है इसलिए पूजा के लिए अपने क्षेत्र के पंचांग को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा। नाग पंचमी के लिए भी अलग पंचांगों में सुबह के मुहूर्त में कुछ मिनट का अंतर दिया गया है।

    सावन सोमवार की पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। श्रद्धा के अनुसार दूध और पंचामृत से अभिषेक भी किया जा सकता है। भगवान शिव को बेलपत्र पुष्प और फल अर्पित करें तथा धूप और दीप जलाकर पूजा करें। इसके बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना और शिव आरती करना धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

    व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार या जलाहार कर सकते हैं। कई परंपराओं में सावन सोमवार के व्रत में अनाज और सामान्य नमक से परहेज किया जाता है। हालांकि व्रत के नियम परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोगों को कठिन या निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    इस दिन नाग पंचमी होने के कारण नाग देवता की प्रतिमा पर भी जल पुष्प और पूजा सामग्री अर्पित की जा सकती है। जीवित सांपों को पकड़कर पूजा करने या उन्हें जबरन दूध पिलाने से बचना चाहिए। धार्मिक आस्था का पालन करते हुए नाग देवता की प्रतिमा का पूजन करना अधिक सुरक्षित तरीका है।

    इस तरह 17 अगस्त का दिन शिव भक्तों के लिए धार्मिक रूप से विशेष माना जा रहा है। सावन सोमवार और नाग पंचमी का यह मेल श्रद्धालुओं को एक ही दिन भगवान शिव और नाग देवता की आराधना का अवसर देगा। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा संयम और सकारात्मक भाव माना जाता है। ज्योतिष से जुड़े शुभ प्रभावों को धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए क्योंकि इनके प्रभावों का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • नाग पंचमी 2026 की तारीख को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, 17 अगस्त को करें पूजा; जानें तिथि से लेकर जरूरी नियम तक

    नाग पंचमी 2026 की तारीख को लेकर दूर करें कन्फ्यूजन, 17 अगस्त को करें पूजा; जानें तिथि से लेकर जरूरी नियम तक


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में नाग पंचमी का पर्व भगवान शिव और नाग देवता की आराधना से जुड़ा महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है। इस बार पंचमी तिथि 16 अगस्त 2026 की शाम करीब 4 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 17 अगस्त की शाम करीब 5 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त 2026 सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन सावन सोमवार भी पड़ रहा है जिसके कारण भगवान शिव और नाग देवता की पूजा का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। 17 अगस्त की तारीख की पुष्टि कई पंचांग आधारित स्रोतों ने भी की है।

    नाग पंचमी की पूजा के लिए 17 अगस्त को सुबह 5 बजकर 51 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। यह मुहूर्त नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार है और दूसरे शहरों में सूर्योदय तथा स्थानीय पंचांग के आधार पर समय में अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी दूसरे शहर में रहते हैं तो स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना बेहतर रहेगा।

    नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान शिव तथा नाग देवता का ध्यान करके पूजा का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें। नाग देवता की प्रतिमा पर भी जल अर्पित करके चंदन अक्षत और पुष्प चढ़ाए जा सकते हैं। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें और दीपक जलाकर आरती करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव और नाग देवता से सुख शांति और परिवार की मंगलकामना की जाती है।

    कई स्थानों पर नाग पंचमी के दिन नाग देवता की प्रतिमा पर दूध अर्पित करने की परंपरा भी है। हालांकि जीवित सांपों को पकड़कर उन्हें दूध पिलाना या उनके मुंह को दूध में डुबोना उचित नहीं है। सांप सामान्य रूप से दूध पीने वाले जीव नहीं होते और जबरदस्ती दूध पिलाने से उन्हें नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए नाग देवता की प्रतिमा का पूजन करना अधिक सुरक्षित और उचित तरीका है। नाग पंचमी की परंपराएं भी सांपों और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देती हैं।

    नाग पंचमी को लेकर धार्मिक मान्यताओं में कहा जाता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से भय दूर होता है और परिवार में सुख समृद्धि आती है। कुछ ज्योतिषीय परंपराओं में नाग पूजा को राहु केतु और कालसर्प दोष से जुड़े उपायों के साथ भी जोड़ा जाता है। हालांकि कालसर्प दोष और उससे जुड़े उपाय ज्योतिषीय मान्यताओं का विषय हैं और इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अलग अलग ज्योतिषीय परंपराओं में इसके प्रभाव और उपायों को लेकर मतभेद भी पाए जाते हैं।

    नाग पंचमी से जुड़ी धार्मिक कथाओं में राजा जनमेजय और आस्तिक मुनि का प्रसंग भी प्रमुख माना जाता है। मान्यता है कि राजा जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की मृत्यु के बाद नागों के विनाश के लिए नाग यज्ञ कराया था। इसी दौरान आस्तिक मुनि ने यज्ञ को रोककर नागों की रक्षा की। इस कथा को नाग पंचमी की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है और इसके माध्यम से जीवों के प्रति दया तथा संरक्षण का संदेश भी मिलता है।

    इस तरह 17 अगस्त को नाग पंचमी के अवसर पर भगवान शिव और नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा की जा सकती है। इस बार सावन सोमवार और नाग पंचमी का एक ही दिन पड़ना भक्तों के लिए धार्मिक दृष्टि से विशेष अवसर माना जा रहा है। पूजा में आस्था के साथ स्वच्छता और जीवों के प्रति संवेदनशीलता का ध्यान रखना भी जरूरी है।