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  • सावन में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीर, मुस्लिम युवक ने 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ चढ़ाने का लिया संकल्प

    सावन में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की तस्वीर, मुस्लिम युवक ने 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ चढ़ाने का लिया संकल्प


    नई दिल्ली। श्रावण मास में देशभर में भगवान शिव की भक्ति का उत्साह चरम पर है। कांवड़ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और अन्य तीर्थस्थलों से गंगाजल लाकर शिवालयों में जलाभिषेक कर रहे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जिसने आस्था, मानवता और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश एक साथ दिया है। मेरठ के फलावदा कस्बे के रहने वाले 22 वर्षीय मुस्लिम युवक शाकिर ने हरिद्वार से 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाकर भगवान शिव के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा का परिचय दिया है।

    फलावदा के मोहल्ला होली चौक, मंदवाड़ी रोड निवासी शाकिर एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से हैं। उनके पिता मंजूर मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और स्वयं शाकिर भी मेहनत-मजदूरी कर अपने घर की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनकी भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था लगातार मजबूत होती गई। बताया जाता है कि पिछले तीन वर्षों से वह नियमित रूप से भगवान शिव की आराधना कर रहे हैं और हर वर्ष कांवड़ यात्रा में भाग लेते हैं।

    पिछले वर्ष शाकिर हरिद्वार से 101 लीटर गंगाजल लेकर आए थे और क्षेत्र के शिवालयों में जलाभिषेक किया था। इस बार उन्होंने अपनी श्रद्धा को और आगे बढ़ाते हुए 201 लीटर गंगाजल की कांवड़ उठाई। उनकी यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि समाज में भाईचारे और पारस्परिक सम्मान का संदेश भी बन गई है।

    श्रावण मास में भगवान शिव को करुणा, समरसता और लोककल्याण का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महादेव के दरबार में किसी भी प्रकार का जाति, धर्म या वर्ग का भेद नहीं होता। शाकिर की कांवड़ यात्रा इसी भावना को साकार करती नजर आती है। उनकी इस पहल की स्थानीय लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा हो रही है। कई लोग इसे गंगा-जमुनी तहजीब और भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत की खूबसूरत मिसाल बता रहे हैं।

    हरिद्वार से लौटते समय रुड़की सहित कई पड़ावों पर कांवड़ सेवा शिविरों में शाकिर का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। शिवभक्तों ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया और उनकी आस्था को सम्मान दिया। रास्ते भर उन्हें शुभकामनाएं मिलती रहीं, जिससे उनकी यात्रा और भी यादगार बन गई।

    इसी दौरान मेरठ से ही एक और भावुक तस्वीर सामने आई। मवाना तहसील के बहादुरपुर गांव निवासी अमरपाल अपनी 81 वर्षीय मां ओमवती को कांवड़ में बैठाकर यात्रा करा रहे हैं। कांवड़ के एक ओर गंगाजल और दूसरी ओर अपनी मां को बैठाकर वह सेवा और श्रद्धा का अनूठा उदाहरण पेश कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि बुजुर्ग मां की वर्षों पुरानी कांवड़ यात्रा की इच्छा को पूरा करने के लिए यह निर्णय लिया गया।

    श्रावण मास में सामने आई ये दोनों घटनाएं केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज को प्रेम, सेवा, सम्मान और सामाजिक सौहार्द का मजबूत संदेश भी देती हैं। शाकिर की शिवभक्ति और अमरपाल की मातृसेवा यह साबित करती है कि सच्ची आस्था इंसान को जोड़ने का काम करती है। ऐसे प्रेरक उदाहरण समाज में विश्वास, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को और मजबूत करने का काम करते हैं।

  • भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सरल उपाय, सावन में रोज शिवलिंग पर अर्पित करें यह पवित्र वस्तु

    भोलेनाथ को प्रसन्न करने का सरल उपाय, सावन में रोज शिवलिंग पर अर्पित करें यह पवित्र वस्तु


    नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए सबसे शुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने में श्रद्धा और नियमपूर्वक महादेव की पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो सकती हैं और सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस वर्ष सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा और इस दौरान देशभर के शिवालयों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए किया था। विष की तीव्रता को शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर जल अर्पित करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    सावन के प्रत्येक सोमवार का व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि किसी कारणवश व्रत रखना संभव न हो तो प्रतिदिन भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग पर एक लोटा स्वच्छ जल और बेलपत्र अवश्य अर्पित करना चाहिए। बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और आस्था के साथ बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यदि जल के स्थान पर दूध से अभिषेक करना चाहें तो किया जा सकता है लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार दूध चढ़ाने के लिए तांबे के पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए।

    जल या दूध अर्पित करने के बाद शिव पंचाक्षर मंत्र अथवा ओम नमः शिवाय मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे मन एकाग्र होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावा सावन में भगवान शिव का चंदन दही शहद घी और पंचामृत से अभिषेक करने की भी परंपरा है। धतूरा भांग आक के फूल और भस्म भी भगवान शिव को अर्पित किए जाते हैं जिन्हें उनकी प्रिय सामग्री माना गया है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना चातुर्मास के अंतर्गत आता है और इस अवधि में भगवान शिव की विशेष आराधना का महत्व बढ़ जाता है। जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही हो स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हों आयु को लेकर चिंता हो या कुंडली में ग्रह दोष हों उन्हें विशेष रूप से इस महीने शिव पूजा करने की सलाह दी जाती है। कई लोग इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप और रुद्राभिषेक भी कराते हैं।

    सावन में पूजा के साथ साथ सात्विक जीवनशैली अपनाने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। इस दौरान तामसिक भोजन से बचने और शुद्ध सात्विक आहार ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। पत्तेदार सब्जियों का सेवन सीमित रखने और भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाने की परंपरा भी बताई जाती है। नियमित रूप से गुनगुना पानी पीना और स्वच्छता का ध्यान रखना भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा सादगी और भक्ति के साथ की गई शिव आराधना सबसे अधिक फलदायी मानी जाती है। इसलिए सावन के इस पावन महीने में यदि नियमित रूप से भगवान शिव का स्मरण किया जाए और शिवलिंग पर जल तथा बेलपत्र अर्पित किए जाएं तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है। हालांकि यह सभी बातें धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं और इन्हें श्रद्धा के भाव से ही देखा जाना चाहिए।

  • सावन 2026 में चमकेगी इन 5 राशियों की किस्मत, भोलेनाथ की कृपा से मिलेंगे सफलता और धन के योग

    सावन 2026 में चमकेगी इन 5 राशियों की किस्मत, भोलेनाथ की कृपा से मिलेंगे सफलता और धन के योग


    नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना आध्यात्मिक ऊर्जा और शुभ संयोगों से भरपूर माना जाता है। इस वर्ष सावन 2026 केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान कई प्रमुख ग्रह अपनी विशेष स्थिति में रहेंगे जिनका प्रभाव सभी बारह राशियों पर पड़ेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनि की वक्री चाल देवगुरु बृहस्पति का शुभ प्रभाव और बुध के उदय जैसे योग कुछ राशियों के लिए विशेष लाभ लेकर आए हैं। माना जा रहा है कि इस पूरे सावन में पांच राशियों के जातकों पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहेगी और उनके जीवन में सुख समृद्धि तथा सफलता के नए द्वार खुल सकते हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह सावन नई शुरुआत का संकेत दे रहा है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना बनेगी। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और कार्यक्षेत्र में उनकी नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी। व्यवसाय करने वालों को भी नए अवसर मिल सकते हैं जिससे आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। भगवान शिव की आराधना करने से आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में भी वृद्धि होने के संकेत हैं।

    कर्क राशि के लोगों के लिए यह महीना राहत और प्रगति दोनों लेकर आ सकता है। यदि पिछले कुछ समय से आर्थिक या पारिवारिक परेशानियां चल रही थीं तो उनमें सुधार के योग बन रहे हैं। व्यापार से जुड़े लोगों को विस्तार के नए अवसर मिल सकते हैं और परिवार में सुख शांति का वातावरण बना रहेगा। धन संबंधी मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना भी दिखाई दे रही है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए सावन आत्मविश्वास और उपलब्धियों का महीना साबित हो सकता है। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। यदि कोई नया प्रोजेक्ट या व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो समय अनुकूल माना जा रहा है। मेहनत का उचित फल मिलने से सम्मान और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो सकती है।

    धनु राशि वालों के लिए यह महीना भाग्य के नए द्वार खोलने वाला माना जा रहा है। अचानक धन लाभ के अवसर बन सकते हैं और लंबे समय से रुके हुए आर्थिक कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अच्छी सफलता मिलने के संकेत हैं। परिवार में कोई शुभ समाचार मिलने से खुशी का माहौल रहेगा और मानसिक संतोष भी प्राप्त होगा।

    मीन राशि के जातकों के लिए भी सावन शुभ परिणाम देने वाला माना गया है। व्यापार में नए साझेदार मिलने से लाभ के अवसर बढ़ सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ पारिवारिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहेगा। यदि किसी नए निवेश या विस्तार की योजना है तो सोच समझकर आगे बढ़ने पर अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। भगवान शिव की पूजा और नियमित जलाभिषेक करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चना रुद्राभिषेक महामृत्युंजय मंत्र का जाप और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। हालांकि ज्योतिषीय भविष्यवाणियां सामान्य मान्यताओं पर आधारित होती हैं और इन्हें निश्चित परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। जीवन में सफलता के लिए कर्म पर विश्वास और सकारात्मक सोच सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ महादेव की आराधना की जाए तो सावन का यह पावन महीना आध्यात्मिक और मानसिक रूप से भी जीवन में नई ऊर्जा भर सकता है।

  • सावन की शुरुआत पर बाबा महाकाल का अद्भुत दर्शन, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

    सावन की शुरुआत पर बाबा महाकाल का अद्भुत दर्शन, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब


    उज्जैन। सावन मास के शुभारंभ के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरुवार तड़के तीन बजे मंदिर के पट खुलते ही भगवान महाकाल की पारंपरिक भस्म आरती का आयोजन हुआ। सावन के पहले ही दिन बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने के लिए देशभर से आए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटे। पूरा महाकाल धाम हर हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।

    नियमों के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक के बाद भगवान को भस्म अर्पित की गई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का भव्य राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग चंदन त्रिपुंड रजत चंद्र और सुगंधित गुलाब के पुष्पों से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट रजत शेषनाग मुकुट रुद्राक्ष की माला रजत मुंडमाला और आकर्षक पुष्पहार पहनाए गए। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

    भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में विराजमान सभी देवी देवताओं का भी विधि विधान से पूजन किया गया। प्रथम घंटा बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के साथ पूजा संपन्न हुई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और इस दिव्य दर्शन का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

    सावन के पहले दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए। मंदिर समिति के अनुसार पूरे सावन माह में लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए दर्शन व्यवस्था सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत किया गया है ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान महाकाल मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजन अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। सावन के पहले दिन बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और भस्म आरती ने श्रद्धालुओं की आस्था को नई ऊर्जा प्रदान की और पूरे महाकाल धाम को शिवमय बना दिया।

  • सावन में करें इन पवित्र पौधों का रोपण भगवान शिव की कृपा के साथ घर में बढ़ेगी खुशहाली और दूर होंगी परेशानियां

    सावन में करें इन पवित्र पौधों का रोपण भगवान शिव की कृपा के साथ घर में बढ़ेगी खुशहाली और दूर होंगी परेशानियां


    नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ प्रकृति के सबसे सुंदर रूप का भी प्रतीक माना जाता है। चारों ओर हरियाली और बारिश का मौसम पौधारोपण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस पवित्र महीने में कुछ विशेष पौधे लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख समृद्धि का आगमन माना जाता है। यही कारण है कि सावन के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घर आंगन और आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाने की परंपरा निभाते हैं।

    इन पौधों में सबसे पहला स्थान तुलसी का माना जाता है। भारतीय संस्कृति में तुलसी को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। मान्यता है कि घर में तुलसी का पौधा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बढ़ता है। प्रतिदिन सुबह तुलसी में जल अर्पित करना और शाम को दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है।

    केले का पौधा भी सावन में लगाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका संबंध भगवान विष्णु और गुरु ग्रह से माना जाता है। घर के खुले स्थान या पिछले हिस्से में केले का पौधा लगाने और गुरुवार के दिन उसकी पूजा करने से पारिवारिक सुख समृद्धि में वृद्धि होने की मान्यता है। ऐसा भी माना जाता है कि इससे आर्थिक स्थिरता और जीवन में शुभ अवसर बढ़ते हैं।

    अनार का पौधा केवल घर की सुंदरता ही नहीं बढ़ाता बल्कि इसे समृद्धि और शुभता का प्रतीक भी माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इसे घर के मुख्य प्रवेश द्वार से थोड़ी दूरी पर लगाना अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि यह पौधा नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करता है और परिवार की उन्नति के नए मार्ग खोलने में सहायक माना जाता है।

    शमी का पौधा भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इसका संबंध शनिदेव से जोड़ा जाता है। सावन के शनिवार को शमी का पौधा लगाने और उसके पास सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। ऐसी मान्यता है कि इससे कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक विश्वास है।

    पीपल का वृक्ष भारतीय संस्कृति में अत्यंत पूजनीय माना गया है। इसे घर के भीतर लगाने की बजाय मंदिर परिसर पार्क या सार्वजनिक स्थान पर लगाना अधिक उचित माना जाता है। पीपल का पौधा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लंबे समय तक ऑक्सीजन प्रदान करने वाले प्रमुख वृक्षों में शामिल है। इसकी देखभाल करना धार्मिक आस्था के साथ साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी संदेश देता है।

    सावन का महीना केवल पूजा और व्रत का ही नहीं बल्कि प्रकृति से जुड़ने का भी अवसर है। इस दौरान पौधारोपण करने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और हरियाली में वृद्धि होती है। यदि धार्मिक आस्था के साथ इन पौधों का रोपण किया जाए और नियमित रूप से उनकी देखभाल की जाए तो यह न केवल घर की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि पर्यावरण को भी स्वच्छ और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इस सावन पौधे लगाने की परंपरा को अपनाकर प्रकृति और संस्कृति दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई जा सकती है।

  • ममता और भक्ति का अद्भुत संगम 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहीं काजल चौधरी

    ममता और भक्ति का अद्भुत संगम 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पदयात्रा कर रहीं काजल चौधरी


    नई दिल्ली । सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और कांवड़ यात्रा के लिए विशेष माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। इस बार भी श्रद्धालुओं का सैलाब सड़कों पर दिखाई दे रहा है लेकिन इन्हीं हजारों कांवड़ियों के बीच एक ऐसी कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई है जिसने सेवा समर्पण और पारिवारिक संस्कार की नई मिसाल पेश कर दी है। दिल्ली के शाहदरा की रहने वाली काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास चंद्रिदेवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक पैदल यात्रा कर रही हैं। यह दृश्य जिसने भी देखा उसकी आंखें नम हो गईं और हर किसी ने उनकी सराहना की।

    काजल चौधरी पेशे से लोक गायिका हैं और अपने भजन तथा देहाती रागनी के कारण सोशल मीडिया पर भी काफी लोकप्रिय हैं। उन्होंने इस वर्ष अपनी सास को कंधों पर बैठाकर कांवड़ यात्रा शुरू की है। खास बात यह है कि उनके साथ 71 किलो गंगाजल भी है जिसे वह भगवान शिव को अर्पित करेंगी। पूरी यात्रा के दौरान उनका परिवार भी उनके साथ चल रहा है और सभी मिलकर सेवा और श्रद्धा का संदेश दे रहे हैं।

    यह पहली बार नहीं है जब काजल चौधरी ने ऐसा किया हो। पिछले वर्ष भी उन्होंने अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की यात्रा पूरी की थी। इसके अलावा इसी वर्ष उन्होंने अपनी सास के साथ 84 कोस की परिक्रमा भी की थी। लगातार दूसरी बार इस तरह की यात्रा कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि बुजुर्गों की सेवा केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि सबसे बड़ा धर्म भी है।

    काजल चौधरी का कहना है कि माता पिता और सास ससुर की सेवा से बड़ा कोई पुण्य नहीं होता। उनका मानना है कि जब तक बुजुर्ग हमारे साथ हैं तब तक उनकी हर इच्छा का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि अपने माता पिता और बुजुर्गों की सेवा पूरे मन से करें ताकि उनका आशीर्वाद जीवनभर साथ बना रहे।

    इस यात्रा के दौरान काजल चौधरी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि उनकी सास की इच्छा मुख्यमंत्री से मिलने की है और वे उन्हें अपने हाथों से एक भेंट देना चाहती हैं। काजल ने उम्मीद जताई कि उनकी सास की यह इच्छा भी जल्द पूरी होगी।

    मुजफ्फरनगर से गुजर रही यह अनोखी कांवड़ अब लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है। रास्ते में जहां भी यह कांवड़ पहुंचती है लोग रुककर काजल और उनकी सास का अभिवादन करते हैं। कई श्रद्धालु उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं तो कई लोग उन्हें आधुनिक समय का श्रवण कुमार कहकर सम्मान दे रहे हैं। हालांकि काजल कहती हैं कि उन्होंने केवल अपना पारिवारिक कर्तव्य निभाया है और हर बेटे बहू को अपने बुजुर्गों के प्रति यही भावना रखनी चाहिए।

    आज जब भागदौड़ भरी जिंदगी में परिवारों के बीच दूरियां बढ़ती जा रही हैं तब काजल चौधरी की यह यात्रा समाज को यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति केवल मंदिरों में पूजा करने से नहीं बल्कि अपने बुजुर्गों की सेवा और सम्मान करने से भी पूरी होती है। यही संस्कार भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान हैं और यही भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।

  • सावन के त्योहारों में साड़ी के साथ ट्रेंडिंग बिंदी डिज़ाइन अपनाकर बनाएं अपना लुक और खास

    सावन के त्योहारों में साड़ी के साथ ट्रेंडिंग बिंदी डिज़ाइन अपनाकर बनाएं अपना लुक और खास

    नई दिल्ली । सावन का महीना भारतीय संस्कृति और पारंपरिक परिधानों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दौरान महिलाएं और युवतियां पूजा, व्रत, पारिवारिक आयोजनों और त्योहारों में साड़ी पहनना पसंद करती हैं। हालांकि खूबसूरत साड़ी के साथ सही बिंदी का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। चेहरे के अनुरूप चुनी गई बिंदी न केवल पारंपरिक लुक को पूरा करती है, बल्कि पूरे व्यक्तित्व को भी अधिक आकर्षक और संतुलित बना देती है। इस सावन कई ऐसे बिंदी डिज़ाइन ट्रेंड में हैं, जिन्हें अलग-अलग तरह की साड़ियों के साथ आसानी से अपनाया जा सकता है।

    अगर आप सादगी और पारंपरिक अंदाज पसंद करती हैं तो गोल लाल बिंदी सबसे उपयुक्त विकल्प मानी जाती है। यह डिज़ाइन वर्षों से फैशन का हिस्सा रही है और लगभग हर रंग की साड़ी के साथ सहज रूप से मेल खाती है। विशेष रूप से हरे, पीले और लाल रंग की साड़ियों के साथ इसका संयोजन पारंपरिक सौंदर्य को और अधिक निखार देता है।

    सावन में हरे रंग का विशेष महत्व होने के कारण ग्रीन स्टोन बिंदी भी महिलाओं की पसंद बन रही है। यह डिज़ाइन सिल्क, कॉटन और जॉर्जेट जैसी विभिन्न प्रकार की साड़ियों के साथ आकर्षक दिखाई देता है। हल्के मेकअप और पारंपरिक आभूषणों के साथ इसका संयोजन संतुलित और सुरुचिपूर्ण लुक देता है।

    जो महिलाएं पारंपरिक पहनावे में थोड़ा अलग अंदाज चाहती हैं, उनके लिए लॉन्ग बिंदी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। यह विशेष रूप से बनारसी और प्लेन साड़ियों के साथ बेहद आकर्षक लगती है। इसके साथ हल्के आभूषण पहनने से पूरा लुक संतुलित बना रहता है और चेहरे की खूबसूरती भी उभरकर सामने आती है।

    ब्लैक बिंदी को भी अब केवल आधुनिक परिधानों तक सीमित नहीं माना जाता। हल्के रंग की साड़ियों के साथ छोटी काली बिंदी एक अलग और स्टाइलिश प्रभाव पैदा करती है। वहीं यदि किसी धार्मिक आयोजन, पूजा या पारिवारिक समारोह में शामिल होना हो तो स्टोन वर्क बिंदी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। इसकी चमक चेहरे पर अलग ही आकर्षण जोड़ती है और पारंपरिक परिधान को उत्सव के अनुरूप बनाती है।

    इन दिनों लीफ शेप बिंदी भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सावन के प्राकृतिक और हरियाली से जुड़े माहौल के कारण यह डिज़ाइन काफी पसंद किया जा रहा है। हरे या सुनहरे बॉर्डर वाली साड़ियों के साथ इसका मेल बेहद आकर्षक दिखाई देता है। इसके अलावा मल्टीकलर बिंदी भी उन महिलाओं के लिए उपयुक्त है, जिनकी साड़ी में एक से अधिक रंग शामिल हों। यह पारंपरिक लुक में आधुनिकता का हल्का स्पर्श जोड़ती है।

    फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि बिंदी का चुनाव केवल ट्रेंड देखकर नहीं, बल्कि चेहरे के आकार, साड़ी के रंग और आभूषणों के अनुसार करना चाहिए। यदि आभूषण भारी हों तो साधारण बिंदी अधिक संतुलित लगती है, जबकि हल्की ज्वेलरी के साथ स्टोन या डिजाइनर बिंदी पूरे लुक को अधिक प्रभावशाली बना सकती है। सही आकार, रंग और डिज़ाइन की बिंदी न केवल चेहरे की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि पारंपरिक पहनावे को भी संपूर्ण और आकर्षक रूप प्रदान करती है। इस सावन यदि साड़ी के साथ बिंदी का चयन सोच-समझकर किया जाए, तो बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के भी आपका उत्सवी लुक और अधिक निखर सकता है।

  • विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में धार्मिक आयोजनों की शुरुआत, 6 सितंबर को होगा भव्य छप्पन भोग महोत्सव

    विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर में धार्मिक आयोजनों की शुरुआत, 6 सितंबर को होगा भव्य छप्पन भोग महोत्सव


    मंदसौर । मंदसौर स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ महादेव मंदिर में सावन माह को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर पहुंचने लगा है। भगवान पशुपतिनाथ की पारंपरिक राजसी शाही सवारी इस वर्ष 24 अगस्त को सावन के अंतिम सोमवार के अवसर पर पूरे श्रद्धा और भव्यता के साथ निकाली जाएगी। इस ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां काली आरती मंडल और मंदिर समिति ने शुरू कर दी हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। शहर के प्रमुख मार्ग भगवान पशुपतिनाथ के जयघोष और भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान होंगे।

    भगवान पशुपतिनाथ की शाही सवारी केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मंदसौर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का भी प्रतीक मानी जाती है। वर्ष 1996 से लगातार चली आ रही इस परंपरा का श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व है। सावन के अंतिम सोमवार को भगवान का राजसी स्वरूप सुसज्जित रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करता है। रास्ते भर श्रद्धालु पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत करते हैं और विभिन्न सामाजिक तथा धार्मिक संस्थाएं जगह-जगह मंच बनाकर आरती और स्वागत कार्यक्रम आयोजित करती हैं।

    आयोजन समिति के अनुसार सावन माह के दौरान प्रतिदिन सुबह 6 बजे से 8 बजे तक भगवान पशुपतिनाथ का विधि-विधान से रुद्राभिषेक और विशेष अभिषेक किया जाएगा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन अनुष्ठानों में शामिल होकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। मंदिर परिसर में पूरे सावन माह तक भक्ति और आस्था का विशेष वातावरण बना रहेगा।

    शाही सवारी से एक दिन पहले 23 अगस्त को भव्य वाहन रैली निकाली जाएगी। इस रैली के माध्यम से श्रद्धालुओं को शाही सवारी में शामिल होने का आमंत्रण दिया जाएगा और पूरे शहर में धार्मिक उत्सव का माहौल तैयार किया जाएगा। इसके बाद 24 अगस्त को भगवान पशुपतिनाथ की राजसी शाही सवारी निर्धारित मार्गों से होकर निकलेगी। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन के लिए प्रशासन भी व्यापक तैयारियां करेगा ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सावन माह के धार्मिक आयोजनों का समापन भी विशेष तरीके से किया जाएगा। 6 सितंबर को भगवान पशुपतिनाथ को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग अर्पित कर भव्य छप्पन भोग महोत्सव आयोजित होगा। इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ प्रसादी वितरण भी किया जाएगा। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर छप्पन भोग का प्रसाद ग्रहण करेंगे।

    मंदिर समिति का कहना है कि सभी धार्मिक आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराए जाएंगे। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे अनुशासन बनाए रखते हुए आयोजनों में शामिल हों और धार्मिक गरिमा का पालन करें। सावन के इस पावन अवसर पर भगवान पशुपतिनाथ की नगरी एक बार फिर शिवभक्ति और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर होने जा रही है।

  • सावन 2026 की तारीखों को लेकर दूर हुआ भ्रम, जानिए कब शुरू होगा पवित्र महीना और कितने होंगे सोमवार

    सावन 2026 की तारीखों को लेकर दूर हुआ भ्रम, जानिए कब शुरू होगा पवित्र महीना और कितने होंगे सोमवार

    नई दिल्ली । भगवान शिव को समर्पित सावन का महीना हिंदू धर्म में विशेष आस्था और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। इस पूरे महीने शिव भक्त व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। हर वर्ष सावन शुरू होने से पहले सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर होती है कि इस बार सावन में कुल कितने सोमवार पड़ेंगे। वर्ष 2026 के पंचांग के अनुसार उत्तर भारत में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगा और इस दौरान कुल चार सावन सोमवार आएंगे।

    पंचांग के अनुसार सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को होगा। इसके बाद दूसरा सोमवार 10 अगस्त, तीसरा सोमवार 17 अगस्त और चौथा तथा अंतिम सावन सोमवार 24 अगस्त को पड़ेगा। इन चारों सोमवार को शिव भक्त बड़ी संख्या में मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे और व्रत रखकर विशेष पूजा करेंगे। सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को होने के साथ ही इस पवित्र महीने का समापन होगा।

    हर वर्ष सावन की शुरुआत और सोमवार की संख्या को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बन जाती है। इसका प्रमुख कारण देश में प्रचलित दो अलग-अलग पंचांग पद्धतियां हैं। उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग का पालन किया जाता है, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में अमांत पंचांग मान्य है। दोनों पंचांगों की गणना पद्धति अलग होने के कारण सावन की तिथियों और सोमवारों की संख्या में अंतर दिखाई देता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान कर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। कई श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर शिव मंत्रों का जाप और रुद्राभिषेक भी करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

    सावन सोमवार के व्रत का विशेष महत्व अविवाहित और विवाहित दोनों के लिए बताया गया है। धार्मिक विश्वास के अनुसार अविवाहित युवक-युवतियां मनचाहे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित दंपति परिवार की सुख-शांति, वैवाहिक जीवन की खुशहाली और समृद्धि के लिए भगवान शिव का पूजन करते हैं। कई स्थानों पर पूरे सावन महीने में शिवालयों में विशेष धार्मिक आयोजन और भजन-कीर्तन भी आयोजित किए जाते हैं।

    सावन का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि यह संयम, श्रद्धा और आध्यात्मिक साधना का भी प्रतीक है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु नियमित रूप से मंदिरों में दर्शन करते हैं और भगवान शिव की आराधना में समय बिताते हैं। वर्ष 2026 में उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार सावन के चार सोमवार शिव भक्तों को विशेष पूजा और व्रत का अवसर प्रदान करेंगे, जबकि अलग-अलग क्षेत्रों में स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथियों में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।

  • सावन 2026 की तैयारी शुरू, घर में रखी कुछ पुरानी और अनुपयोगी वस्तुएं बढ़ा सकती हैं परेशानी; जानिए क्या हटाना माना जाता है शुभ

    सावन 2026 की तैयारी शुरू, घर में रखी कुछ पुरानी और अनुपयोगी वस्तुएं बढ़ा सकती हैं परेशानी; जानिए क्या हटाना माना जाता है शुभ

    नई दिल्ली । हिंदू पंचांग में सावन का महीना अत्यंत पवित्र और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह माह भगवान शिव की आराधना, आध्यात्मिक साधना और आत्मिक शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। देशभर में श्रद्धालु सावन के दौरान व्रत, पूजा-पाठ, जलाभिषेक और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से भगवान शिव की उपासना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के आगमन से पहले घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ तथा व्यवस्थित रखना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि साफ-सुथरा और सकारात्मक वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक होता है।

    धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार सावन की शुरुआत से पहले घर में मौजूद कुछ अनुपयोगी या क्षतिग्रस्त वस्तुओं को हटाने की परंपरा रही है। इन वस्तुओं को नकारात्मक ऊर्जा, अव्यवस्था और मानसिक तनाव से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार अलग-अलग हो सकता है, लेकिन स्वच्छता और व्यवस्थित जीवनशैली के दृष्टिकोण से इन्हें उपयोगी माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार घर में रखे सूखे या मुरझाए पौधे सबसे पहले हटाने योग्य वस्तुओं में शामिल होते हैं। हरियाली को जीवन, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। यदि घर में तुलसी या अन्य पौधे पूरी तरह सूख चुके हैं तो उन्हें सम्मानपूर्वक हटाकर नए पौधे लगाने की सलाह दी जाती है। सावन प्रकृति और हरियाली से जुड़ा महीना माना जाता है, इसलिए घर के आसपास का वातावरण भी जीवंत और स्वच्छ रखने पर जोर दिया जाता है।

    इसी प्रकार टूटे हुए बर्तन, चटके हुए कांच और क्षतिग्रस्त शीशों को भी घर में लंबे समय तक रखने से बचने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं में इन्हें अव्यवस्था और नकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। साथ ही ऐसे सामान घर की सुंदरता को भी प्रभावित करते हैं और कई बार दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए सावन से पहले घर की सफाई के दौरान इन्हें हटाना उचित माना जाता है।

    पुराने और अत्यधिक खराब हो चुके झाड़ू को भी बदलने की परंपरा कई परिवारों में देखने को मिलती है। धार्मिक मान्यताओं में झाड़ू को स्वच्छता और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। ऐसे में टूटी या अनुपयोगी झाड़ू को बदलकर नई झाड़ू रखना शुभ माना जाता है। हालांकि इसका मुख्य उद्देश्य घर में स्वच्छता बनाए रखना और साफ-सफाई को प्राथमिकता देना भी है।

    घर में लंबे समय से रखे खराब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी हटाने या मरम्मत कराने की सलाह दी जाती है। बंद पड़े मिक्सर, पंखे, प्रेस, टेलीविजन या अन्य उपकरण न केवल जगह घेरते हैं बल्कि अव्यवस्था भी बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवस्थित और साफ वातावरण मानसिक शांति तथा सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। इसी कारण ऐसे अनुपयोगी सामान को हटाने पर जोर दिया जाता है।

    पूजा स्थल की स्वच्छता को भी सावन की तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा में उपयोग किए गए पुराने दीपक, राख, आधी जली अगरबत्तियां या अन्य अवशेषों को उचित तरीके से हटाकर पूजा स्थान को साफ रखने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ पूजा स्थल में आराधना अधिक एकाग्रता और श्रद्धा के साथ की जा सकती है।

    सावन का महीना केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक अनुशासन, स्वच्छता और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का भी अवसर माना जाता है। इसी कारण कई लोग इस अवधि से पहले घर की सफाई, अनुपयोगी वस्तुओं की छंटनी और वातावरण को व्यवस्थित करने का कार्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ यह प्रक्रिया मानसिक और सामाजिक दृष्टि से भी लाभकारी मानी जाती है, क्योंकि स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण व्यक्ति के दैनिक जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और बेहतर कार्यक्षमता को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है।