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  • भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार को मिलेगा सहारा, सन फार्मा की मेगा डील में SBI की एंट्री के संकेत

    भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार को मिलेगा सहारा, सन फार्मा की मेगा डील में SBI की एंट्री के संकेत

    नई दिल्ली । भारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहण सौदों में शामिल एक महत्वपूर्ण डील में देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक अहम भूमिका निभा सकता है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अमेरिकी हेल्थकेयर कंपनी के अधिग्रहण के लिए सन फार्मा को करीब 1 अरब डॉलर तक की फंडिंग उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है। यदि बैंक के निदेशक मंडल से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण बाजार दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है।

    यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर अधिग्रहण और विस्तार योजनाओं पर काम कर रही हैं। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की अग्रणी कंपनी सन फार्मा ने अप्रैल में अमेरिका स्थित हेल्थकेयर कंपनी ऑर्गेनॉन एंड कंपनी के अधिग्रहण की घोषणा की थी। लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का यह सौदा भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए गए सबसे बड़े अधिग्रहणों में गिना जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, SBI की ओर से प्रस्तावित 1 अरब डॉलर की फंडिंग फिलहाल बैंक के बोर्ड के समक्ष विचाराधीन है। अंतिम निर्णय बोर्ड की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। यदि प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो SBI उन प्रमुख वित्तीय संस्थानों में शामिल हो जाएगा जो इस बहु-अरब डॉलर सौदे के लिए ऋण उपलब्ध करा रहे हैं।

    इस डील की विशेषता केवल इसका आकार नहीं है, बल्कि इसमें भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की बदलती भूमिका भी दिखाई देती है। लंबे समय तक भारतीय बैंकों की विदेशी अधिग्रहण सौदों में भागीदारी सीमित रही थी। इसके पीछे नियामकीय प्रतिबंध और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी चिंताएं प्रमुख कारण थीं। परिणामस्वरूप भारतीय कंपनियां ऐसे बड़े सौदों के लिए प्रायः विदेशी बैंकों, निवेश फंडों और पूंजी बाजारों पर निर्भर रहती थीं।

    हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में नियमों में किए गए बदलावों के बाद परिस्थितियां बदलती दिखाई दे रही हैं। केंद्रीय बैंक ने घरेलू बैंकों को कॉरपोरेट अधिग्रहणों के लिए वित्तपोषण की अनुमति दी है। इसके बाद भारतीय बैंक बड़े अंतरराष्ट्रीय सौदों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार को अतिरिक्त वित्तीय समर्थन प्रदान कर सकता है।

    प्रस्तावित फंडिंग व्यवस्था में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय बैंक पहले से शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें वैश्विक वित्तीय क्षेत्र की प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं, जो इस अधिग्रहण के लिए ऋण संरचना तैयार कर रही हैं। ऐसे में SBI की संभावित भागीदारी न केवल इस डील की वित्तीय मजबूती बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की वैश्विक उपस्थिति को भी मजबूत करेगी।

    हाल के वर्षों में भारतीय कंपनियों ने तकनीक, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों में कई बड़े विदेशी अधिग्रहण किए हैं। इन सौदों का उद्देश्य नए बाजारों तक पहुंच, उन्नत तकनीक हासिल करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करना रहा है। अब घरेलू बैंकों की बढ़ती भागीदारी से ऐसी डील्स के लिए वित्त जुटाना और अधिक आसान हो सकता है।

    इस दिशा में SBI पहले ही अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों पर काम कर रहा है। बैंक ने जापान के प्रमुख वित्तीय समूह MUFG के साथ सहयोग बढ़ाने की पहल की है, जिसका उद्देश्य विलय और अधिग्रहण से जुड़े अवसरों का आकलन करना है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय बैंक अब केवल पारंपरिक ऋणदाता की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वैश्विक कॉरपोरेट वित्तपोषण के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो भविष्य में भारतीय कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय विस्तार अभियानों में घरेलू बैंकों की भागीदारी और बढ़ सकती है। साथ ही यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ते आत्मविश्वास का भी संकेत माना जाएगा।

  • शेयर बाजार में लौटी रौनक, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के सहारे सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद

    शेयर बाजार में लौटी रौनक, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के सहारे सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद

    नई दिल्ली । लगातार दो सत्रों तक दबाव में रहने के बाद भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को शानदार वापसी की। कारोबार के अंत में BSE Sensex 394.50 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,918.76 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 119.10 अंक यानी 0.52 प्रतिशत मजबूत होकर 23,424.10 के स्तर पर पहुंच गया।

    बाजार में तेजी की अगुवाई बैंकिंग सेक्टर ने की। Nifty Bank 2.09 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। इसके अलावा डिफेंस, रियल्टी, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, मैन्युफैक्चरिंग, एफएमसीजी और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं आईटी और मीडिया इंडेक्स दबाव में रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60,715.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.69 प्रतिशत उछलकर 18,063.60 के स्तर पर पहुंच गया।

    सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में State Bank of India, ICICI Bank, Axis Bank, Bajaj Finance, Maruti Suzuki, Asian Paints और Adani Ports and Special Economic Zone शामिल रहे।

    दूसरी ओर Infosys, Tech Mahindra, HCL Technologies, NTPC और Power Grid Corporation of India के शेयरों में कमजोरी रही।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी की। साथ ही ईरान-इजरायल तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

    हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और ऊंची बॉन्ड यील्ड अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों, Federal Reserve System की मौद्रिक नीति और वैश्विक लिक्विडिटी संकेतों पर रहेगी।

    मंगलवार को बाजार की शुरुआत भी सकारात्मक रही थी और शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स तथा निफ्टी में करीब आधा प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी, जो पूरे सत्र के दौरान कायम रही।

  • RBI MPC बैठक के बीच SBI चेयरमैन का बड़ा बयान, कहा- फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव न होना अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर

    RBI MPC बैठक के बीच SBI चेयरमैन का बड़ा बयान, कहा- फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव न होना अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर

    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने ब्याज दरों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ब्याज दरों में किसी प्रकार का बदलाव न होना अर्थव्यवस्था के लिए अधिक लाभदायक रहेगा। उनके अनुसार इस समय नीतिगत दरों में स्थिरता बनाए रखने से आर्थिक गतिविधियों को संतुलित समर्थन मिलेगा और विकास की रफ्तार भी बनी रहेगी। बाजार की सामान्य धारणा भी यही संकेत देती है कि आरबीआई फिलहाल रेपो रेट में किसी बड़े बदलाव से बच सकता है।

    एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएस शेट्टी ने कहा कि महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना केंद्रीय बैंक की प्रमुख जिम्मेदारी होती है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में ब्याज दरों को स्थिर रखना एक व्यावहारिक कदम माना जा सकता है। उनका मानना है कि स्थिर ब्याज दरें उद्योग, कारोबार और उपभोक्ताओं को स्पष्ट संकेत देती हैं, जिससे निवेश और ऋण गतिविधियों को निरंतरता मिलती है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था इस समय सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और इसे स्थिर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता है।

    एसबीआई चेयरमैन ने निवेशकों को सलाह देते हुए कहा कि शेयर बाजार में होने वाले रोजाना उतार-चढ़ाव को लेकर अधिक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक ताकत उसकी दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता में निहित है। बैंकिंग क्षेत्र में सुधार, डिजिटल क्रांति, वित्तीय समावेशन और तेजी से विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की क्षमता रखता है। उनका कहना है कि निवेशकों को अल्पकालिक बाजार गतिविधियों के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

    सीएस शेट्टी ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याएं और तकनीकी परिवर्तन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत एक स्थिर और भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक सुधारों और निवेश के अनुकूल वातावरण ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

    डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने भारत की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) आज देश की सबसे बड़ी तकनीकी सफलताओं में शामिल है। हर महीने अरबों डिजिटल लेनदेन यूपीआई के माध्यम से किए जा रहे हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है और भुगतान प्रणाली अधिक तेज, सुरक्षित तथा पारदर्शी बनी है। उन्होंने बताया कि एसबीआई की डिजिटल सेवाओं की सफलता उसकी मजबूत तकनीकी संरचना और ग्राहकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है।

    उन्होंने वित्तीय समावेशन में जनधन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार ‘जेएएम ट्रिनिटी’ ने करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में अहम योगदान दिया है। इसके साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली ने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में मदद की है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और विभिन्न योजनाओं में होने वाली संभावित अनियमितताओं में कमी आई है।

    भारत की भविष्य की विकास यात्रा पर बात करते हुए सीएस शेट्टी ने कहा कि आने वाले वर्षों में देश को बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, ऊर्जा परिवर्तन, शहरी विकास, एमएसएमई और नवाचार जैसे क्षेत्रों में विशाल निवेश अवसर मौजूद हैं। उनके अनुसार ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षेत्र भारत की आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार बनेंगे।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर भी उन्होंने सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उनका मानना है कि भारत एआई तकनीक के उपयोग और विस्तार के मामले में दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक बन सकता है। उन्होंने बताया कि एसबीआई पहले से कई बैंकिंग सेवाओं में एआई आधारित प्रणालियों का उपयोग कर रहा है और इसके लिए जिम्मेदार तथा सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने हेतु विशेष ढांचा भी विकसित किया गया है।

    कर्ज की मांग के संबंध में उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम उद्योगों सहित विभिन्न क्षेत्रों में ऋण की मांग मजबूत बनी हुई है। बैंक लगातार उद्यमियों और व्यवसायों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही बैंक विलय एवं अधिग्रहण से जुड़े वित्तपोषण के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की मजबूत आर्थिक नींव, डिजिटल प्रगति और निवेश क्षमता देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में मदद करेगी।

  • शेयर बाजार का सकारात्मक सप्ताह: टॉप कंपनियों में 63 हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी

    शेयर बाजार का सकारात्मक सप्ताह: टॉप कंपनियों में 63 हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी


    नई दिल्ली/ मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह सकारात्मक रुख देखने को मिला, जिसके चलते देश की टॉप-10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से छह के संयुक्त बाजार पूंजीकरण में 63,478.46 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग सेक्टर की कंपनियां सबसे ज्यादा फायदे में रहीं।

    सप्ताह के दौरान व्यापक बाजार भी मजबूती के साथ बंद हुआ। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 187.95 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ।

    सबसे ज्यादा लाभ लार्सन एंड टुब्रो को हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 28,523.31 करोड़ रुपए बढ़कर 6,02,552.24 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोजेक्ट ऑर्डर्स में मजबूती ने कंपनी के शेयरों को सहारा दिया।

    इसके बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। बैंक का बाजार पूंजीकरण 16,015.12 करोड़ रुपए बढ़कर 11,22,581.56 करोड़ रुपए हो गया। बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से एसबीआई को खास लाभ मिला।

    एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप 9,617.56 करोड़ रुपए बढ़कर 14,03,239.48 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। वहीं भारतीय जीवन बीमा निगम का मूल्यांकन 5,977.12 करोड़ रुपए बढ़कर 5,52,203.92 करोड़ रुपए हो गया।

    वित्तीय सेवा क्षेत्र की कंपनी बजाज फाइनेंस का बाजार पूंजीकरण भी 3,142.36 करोड़ रुपए बढ़कर 6,40,387 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

    हालांकि सभी कंपनियों के लिए सप्ताह सकारात्मक नहीं रहा। टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी भारती एयरटेल का मार्केट कैप 15,338.66 करोड़ रुपए घटकर 11,27,705.37 करोड़ रुपए रह गया।

    इसी तरह आईसीआईसीआई बैंक का मूल्यांकन 14,632.10 करोड़ रुपए घटकर 9,97,346.67 करोड़ रुपए पर आ गया। आईटी सेक्टर की कंपनियों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। इंफोसिस का मार्केट कैप 6,791.58 करोड़ रुपए घटकर 5,48,496.14 करोड़ रुपए रह गया, जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज का बाजार पूंजीकरण 1,989.95 करोड़ रुपए घटकर 9,72,053.48 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

    देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों की सूची में एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, भारतीय जीवन बीमा निगम और इंफोसिस शामिल हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी के लिए 25,800 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस है। इसके बाद 26,000 और 26,200 के स्तर अहम माने जा रहे हैं। वहीं नीचे की ओर 25,300 और 25,100 प्रमुख सपोर्ट स्तर हैं। यदि सूचकांक 25,000 के नीचे मजबूती से टूटता है तो बाजार में गिरावट का दबाव बढ़ सकता है।

  • बाजार में बिकवाली का असर: टीसीएस का मार्केट कैप घटा, रिलायंस इंडस्ट्रीज कायम शीर्ष पर

    बाजार में बिकवाली का असर: टीसीएस का मार्केट कैप घटा, रिलायंस इंडस्ट्रीज कायम शीर्ष पर


    नई दिल्‍ली ।
    मुंबई में इस हफ्ते शेयर बाजार में व्यापक गिरावट देखने को मिली और देश की प्रमुख आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) इस गिरावट का सबसे बड़ा शिकार बनी। टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 90,198.92 करोड़ रुपए घटकर 9,74,043.43 करोड़ रुपए पर आ गया। इस गिरावट के साथ ही टीसीएस देश की टॉप कंपनियों में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाली कंपनी बनकर उभरी।

    विस्तृत बिकवाली के माहौल में टॉप-10 कंपनियों में शामिल छह कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप तीन लाख करोड़ रुपए से अधिक घट गया। बीएसई का प्रमुख सूचकांक 953.64 अंक यानी 1.14 प्रतिशत गिरा, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर नजर आया। आईटी सेक्टर में टीसीएस और इंफोसिस सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। इंफोसिस का बाजार पूंजीकरण 70,780.23 करोड़ रुपए घटकर 5,55,287.72 करोड़ रुपए पर आ गया। आईटी शेयरों में आई यह गिरावट पूरे बाजार पर असर डाल रही है।

    निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप भी प्रभावित हुआ और इसमें 54,627.71 करोड़ रुपए की कमी आई, जिससे इसका कुल मार्केट कैप 13,93,621.92 करोड़ रुपए रह गया। वहीं देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप भी घटकर 19,21,475.79 करोड़ रुपए रह गया, हालांकि यह अब भी शीर्ष पर कायम है।

    बीमा क्षेत्र में भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का मार्केट कैप 23,971.74 करोड़ रुपए घटकर 5,46,226.80 करोड़ और भारती एयरटेल का मार्केट कैप 19,244.61 करोड़ रुपए घटकर 11,43,044.03 करोड़ रुपए रह गया।

    हालांकि सभी कंपनियों के लिए यह हफ्ता नुकसान भरा नहीं रहा। देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एसबीआई का मार्केट कैप 1,22,213.38 करोड़ रुपए बढ़कर 11,06,566.44 करोड़ रुपए पर पहुंच गया और यह इस हफ्ते सबसे अधिक लाभ कमाने वाली कंपनी बनी। इसके साथ ही बजाज फाइनेंस का मूल्यांकन 26,414.44 करोड़ रुपए बढ़कर 6,37,244.64 करोड़ और इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुर्बो (एलएंडटी) का मार्केट कैप 14,483.9 करोड़ रुपए बढ़कर 5,74,028.93 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

    निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप भी 5,719.95 करोड़ रुपए बढ़कर 10,11,978.77 करोड़ रुपए पर पहुंचा। इस गिरावट के बावजूद रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी रही और टॉप-10 कंपनियों की रैंकिंग में एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, इंफोसिस और एलआईसी का स्थान रहा।

    कुल मिलाकर यह हफ्ता बाजार के लिए मिलाजुला रहा। आईटी कंपनियों के मार्केट कैप में भारी गिरावट हुई, लेकिन बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में कुछ कंपनियों ने लाभ दिखाया। निवेशकों के लिए यह हफ्ता सीख और सतर्कता का संकेत भी लेकर आया।

  • एसबीआई का मुनाफा तीसरी तिमाही में 13 फीसदी बढ़कर 21,317 करोड़ रुपये

    एसबीआई का मुनाफा तीसरी तिमाही में 13 फीसदी बढ़कर 21,317 करोड़ रुपये


    नई दिल्‍ली।
    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) (State Bank of India (SBI) ने चालू वित्‍त वर्ष 2025-26 (Current Financial Year 2025-26) की दिसंबर तिमाही के नतीजे का ऐलान कर दिया है। एसबीआई ने शनिवार को कहा कि 31 दिसंबर को समाप्‍त अक्‍टूबर-दिसंबर तिमाही में उसका मुनाफा 13.06 फीसदी बढ़कर 21,317 करोड़ रुपये रहा। बैंक को पिछले वित्‍त वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में 18,853 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था।

    एसबीआई ने बयान में बताया कि वित्‍त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में बैंक ने 21,137 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। एकल आधार पर अक्‍टूबर-दिसंबर तिमाही में शुद्ध लाभ 24.48 फीसदी बढ़कर 21,028 करोड़ रुपये रहा है। पिछले वित्‍त वर्ष की समान अवधि में यह 16,891 करोड़ रुपये रहा था।

    देश के सबसे बड़े ऋणदाता बैंक का वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में एकल आधार पर कुल आय बढ़कर 1,40,915 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्‍त वर्ष 2024-25 की इसी तिमाही में 1,28,467 करोड़ रुपये थी। इस दौरान बैंक का कुल खर्च 1,04,917 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,08,052 करोड़ रुपये हो गया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की सकल गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) का अनुपात 31 दिसंबर 2025 तक बेहतर होकर 1.57 फीसदी रहा, जो सितंबर 2025 में 1.73 फीसदी था। वहीं, बैंक का कुल प्रावधान 4,507 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्‍त वर्ष की समान अवधि में 911 करोड़ रुपये रहा था। इसके अलावा बैंक का कुल पूंजी पर्याप्तता अनुपात 31 दिसंबर 2025 तक 14.04 फीसदी रहा।

  • SBI के ग्राहकों के लिए लोन लेना हुआ सस्ता, 15 दिसंबर से लागू होंगी नई दरें

    SBI के ग्राहकों के लिए लोन लेना हुआ सस्ता, 15 दिसंबर से लागू होंगी नई दरें


    नई दिल्ली।
    देश के सबसे बड़े लेंडर स्टेट (India’s largest lender) बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India- SBI) ने अपने ग्राहकों को बड़ा तोहफा दिया है। एसबीआई ने रिजर्व बैंक की पॉलिसी रेट (Reserve Bank’s policy rate) में कटौती के बाद अपनी लेंडिंग रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कमी की है, जिससे मौजूदा और नए कर्जदारों के लिए लोन सस्ता हो गया है। इस लेटेस्ट कटौती के साथ SBI का एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड रेट (EBLR) 25 बेसिस पॉइंट्स कम होकर 7.90% हो जाएगा। संशोधित दरें 15 दिसंबर, 2025 से लागू होंगी।


    MCLR में भी 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती

    बैंक ने सभी टेन्योर के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में भी 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। इस संशोधन के साथ, एक साल की मैच्योरिटी वाला MCLR मौजूदा 8.75% से घटकर 8.70% हो जाएगा। इसी तरह, एक साल की मैच्योरिटी दर क्रमशः 5 प्रतिशत सस्ती होकर 8.75% और 8.80% हो जाएगी। बैंक ने कहा कि उसने बेस रेट/BPLR को मौजूदा 10% से घटाकर 9.90% कर दिया है, जो 15 दिसंबर से प्रभावी होगा। इसके अलावा, बैंक ने 15 दिसंबर से प्रभावी दो साल से कम तीन साल की मैच्योरिटी के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट दर में भी 5 बेसिस पॉइंट्स की कटौती करके 6.40% करने का फैसला किया है। हालांकि, बैंक ने दूसरी मैच्योरिटी बकेट पर ब्याज दरें बरकरार रखी हैं। एसबीआई ने ‘444 दिन’ की खास स्कीम अमृत वृष्टि की ब्याज दर में भी कटौती की है। अब ब्याज दर 15 दिसंबर से 6.60 प्रतिशत से घटाकर 6.45 प्रतिशत कर दी गई है।


    इंडियन ओवरसीज बैंक का भी ऐलान

    एक और सरकारी बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने भी 15 दिसंबर, 2025 से अपनी लेंडिंग रेट में कमी की घोषणा की है। IOB ने एक बयान में कहा कि बैंक ने अपने एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) – खासकर रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) को 25 बेसिस पॉइंट्स घटाकर 8.35% से 8.10% कर दिया है, जिससे पॉलिसी रेट में कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को मिलेगा। इसके अलावा, बैंक की एसेट लायबिलिटी मैनेजमेंट कमेटी (ALCO) ने तीन महीने से लेकर तीन साल तक की सभी टेन्योर के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 5 बेसिस पॉइंट की कमी को मंजूरी दी है। बैंक ने कहा कि इन बदलावों से मौजूदा और नए दोनों तरह के कर्जदारों की इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट (EMI) कम हो जाएगी, जिनके लोन इन बेंचमार्क से जुड़े हुए हैं।