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  • लिस्टिंग के दूसरे ही दिन दबाव में आया SBI Funds Management का शेयर, 600 रुपये से नीचे फिसलने से निवेशकों की बढ़ी चिंता

    लिस्टिंग के दूसरे ही दिन दबाव में आया SBI Funds Management का शेयर, 600 रुपये से नीचे फिसलने से निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के दूसरे ही कारोबारी दिन एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में मजबूत स्तर पर खुलने के बावजूद पूरे सत्र के दौरान बिकवाली का दबाव बना रहा और अंततः शेयर 600 रुपये के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ। इस गिरावट ने बाजार सहभागियों और निवेशकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया, क्योंकि कंपनी ने एक दिन पहले ही प्रीमियम पर बाजार में प्रवेश किया था।

    कारोबार की शुरुआत में शेयर सकारात्मक स्तर पर खुला, लेकिन दिन बढ़ने के साथ इसमें लगातार कमजोरी देखने को मिली। सत्र के दौरान शेयर निचले स्तर तक पहुंच गया और अंत में लगभग उसी दायरे में बंद हुआ, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार बंद होने तक निवेशकों की ओर से बिकवाली का दबाव बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि नई सूचीबद्ध कंपनियों में शुरुआती दिनों में मुनाफावसूली के कारण इस तरह की अस्थिरता सामान्य मानी जाती है।

    कंपनी के शेयरों ने सूचीबद्ध होने के पहले दिन निर्गम मूल्य के मुकाबले प्रीमियम के साथ शुरुआत की थी। सकारात्मक लिस्टिंग के बाद निवेशकों में उत्साह देखा गया, लेकिन दूसरे दिन कुछ निवेशकों ने मुनाफा वसूलना उचित समझा, जिसका असर शेयर की कीमत पर दिखाई दिया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि किसी भी नई सूचीबद्ध कंपनी के शेयर में शुरुआती कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान मांग और आपूर्ति के आधार पर तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    इस बीच कंपनी के प्रमोटर भारतीय स्टेट बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कंपनी में अपनी हिस्सेदारी कम करने की कोई योजना नहीं है। बैंक का कहना है कि सार्वजनिक निर्गम का उद्देश्य केवल कंपनी की विकास यात्रा में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना था, न कि अपनी हिस्सेदारी में कमी करना। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि प्रमोटर कंपनी लंबे समय तक अपने निवेश और रणनीतिक भागीदारी को बनाए रखने के पक्ष में है।

    बैंक प्रबंधन ने यह भी कहा कि कंपनी की सूचीबद्धता उसकी दीर्घकालिक विकास रणनीति का हिस्सा है। उनका मानना है कि सार्वजनिक बाजार में आने से कंपनी की पारदर्शिता, जवाबदेही और निवेशकों की भागीदारी में वृद्धि होगी। इसके साथ ही मजबूत कॉरपोरेट गवर्नेंस और पेशेवर प्रबंधन के आधार पर भविष्य में कंपनी के विस्तार की संभावनाएं भी मजबूत मानी जा रही हैं।

    प्रबंधन के अनुसार कंपनी ने सूचीबद्ध होने से पहले ही कॉरपोरेट गवर्नेंस के उच्च मानकों को अपनाया था। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभवी साझेदार के साथ लंबे समय से चल रहा सहयोग कंपनी की कार्यप्रणाली और संचालन व्यवस्था को और मजबूत बनाता है। यही कारण है कि कंपनी भविष्य में अपने कारोबार के विस्तार और निवेशकों के विश्वास को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई सूचीबद्ध कंपनी के प्रदर्शन का आकलन केवल शुरुआती एक-दो कारोबारी सत्रों के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। लंबी अवधि में कंपनी की वित्तीय स्थिति, प्रबंधन की रणनीति, उद्योग की संभावनाएं और समग्र बाजार परिस्थितियां शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव की बजाय कंपनी के मूलभूत पक्षों और दीर्घकालिक विकास क्षमता पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

  • जबरदस्त सब्सक्रिप्शन के बावजूद SBI फंड्स मैनेजमेंट IPO की फीकी शुरुआत, निवेशकों को प्रति शेयर 39.30 रुपये का लिस्टिंग लाभ

    जबरदस्त सब्सक्रिप्शन के बावजूद SBI फंड्स मैनेजमेंट IPO की फीकी शुरुआत, निवेशकों को प्रति शेयर 39.30 रुपये का लिस्टिंग लाभ


    नई दिल्ली ।
    एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड के शेयर मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में 6.85 प्रतिशत प्रीमियम के साथ सूचीबद्ध हुए। कंपनी का शेयर 574 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 613.30 रुपये पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार के लिए खुला। लिस्टिंग के साथ निवेशकों को प्रति शेयर 39.30 रुपये का लाभ मिला। हालांकि, बाजार में पहले से चल रहे ग्रे मार्केट प्रीमियम के अनुमान की तुलना में यह शुरुआत अपेक्षाकृत कमजोर मानी गई।

    आईपीओ में जिन निवेशकों को शेयर आवंटित हुए थे, उन्हें पहले ही दिन सकारात्मक रिटर्न मिला। प्रति शेयर 39.30 रुपये के लिस्टिंग लाभ के आधार पर एक लॉट पर निवेशकों को लगभग 1,021.80 रुपये का फायदा हुआ। हालांकि, बाजार के कई जानकारों को इससे अधिक प्रीमियम की उम्मीद थी, क्योंकि ग्रे मार्केट में शेयर का प्रीमियम काफी ऊंचे स्तर पर चल रहा था।

    एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ 14 जुलाई से 16 जुलाई के बीच निवेशकों के लिए खुला था। इस सार्वजनिक निर्गम को सभी श्रेणियों के निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली और कुल मिलाकर यह 41.62 गुना सब्सक्राइब हुआ। सबसे अधिक रुचि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स ने दिखाई, जिनका हिस्सा 140.11 गुना भरा। इसके अलावा नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का कोटा 22.50 गुना, रिटेल निवेशकों का हिस्सा 3.52 गुना, कर्मचारियों का कोटा 4.62 गुना तथा शेयरधारकों का आरक्षित हिस्सा 9.45 गुना सब्सक्राइब हुआ।

    कंपनी ने इस आईपीओ के लिए 545 रुपये से 574 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। कुल 9,812.91 करोड़ रुपये का यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल के रूप में लाया गया। इसका मतलब है कि इस निर्गम के तहत कोई नया शेयर जारी नहीं किया गया। मौजूदा प्रमोटर और शेयरधारकों ने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा निवेशकों को बेचा। इसलिए इस आईपीओ से प्राप्त राशि कंपनी के विस्तार या परिचालन में नहीं जाएगी, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी।

    लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों का प्रीमियम लगभग 104 रुपये तक पहुंच गया था। इसके आधार पर बाजार में अनुमान लगाया जा रहा था कि शेयर करीब 678 रुपये के स्तर पर सूचीबद्ध हो सकता है, जो इश्यू प्राइस से लगभग 18 प्रतिशत अधिक होता। हालांकि वास्तविक लिस्टिंग 613.30 रुपये पर हुई, जिससे स्पष्ट हुआ कि ग्रे मार्केट के संकेत इस बार वास्तविक बाजार प्रदर्शन से मेल नहीं खा सके।

    बाजार विशेषज्ञ लंबे समय से यह सलाह देते रहे हैं कि ग्रे मार्केट प्रीमियम को केवल संभावित संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह किसी भी शेयर की वास्तविक लिस्टिंग का निश्चित पैमाना नहीं होता। शेयर की सूचीबद्धता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और लिस्टिंग के दिन का समग्र निवेश माहौल शामिल होता है।

    एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की लिस्टिंग ने यह जरूर दिखाया कि मजबूत सब्सक्रिप्शन के बावजूद हर आईपीओ ग्रे मार्केट के अनुमान के अनुरूप प्रदर्शन नहीं करता। फिर भी निवेशकों को पहले दिन सकारात्मक रिटर्न मिला और अब बाजार की नजर कंपनी के आगामी कारोबारी प्रदर्शन तथा शेयर की आगे की चाल पर बनी रहेगी।