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  • CM के इंतजार में थमी भाजपा की पदयात्रा, नेता सीढ़ियों पर करते रहे प्रतीक्षा; बच्चों को थमाए गए पार्टी के झंडे

    CM के इंतजार में थमी भाजपा की पदयात्रा, नेता सीढ़ियों पर करते रहे प्रतीक्षा; बच्चों को थमाए गए पार्टी के झंडे


    इंदौर । इंदौर में भाजपा की ओर से निकाली गई लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ पदयात्रा के दौरान शुक्रवार को कई ऐसे नजारे देखने को मिले जिन्होंने कार्यक्रम को चर्चा में ला दिया। सुभाष नगर चौराहे से पाटनीपुरा चौराहे तक निकाली गई इस पदयात्रा के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इंतजार में यात्रा कुछ देर तक रुकी रही। मंच से लेकर सीढ़ियों तक केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री के पहुंचने की प्रतीक्षा करते नजर आए। वहीं कार्यक्रम में स्कूली बच्चों के हाथों में भाजपा के झंडे और गले में पार्टी के गमछे दिखाई दिए। जब बच्चों से पूछा गया कि वे लोकतंत्र बचाने के लिए क्यों आए हैं तो उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। शिक्षकों ने उन्हें कार्यक्रम में लाया था।

    पदयात्रा की शुरुआत सुभाष नगर चौराहे से हुई थी। यात्रा परदेशीपुरा चौराहे पहुंची तो वहां मंच से नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने माइक संभाला और नारेबाजी करवाकर कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और सांसद शंकर लालवानी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। नेताओं के भाषण पूरे होने के बाद भी मुख्यमंत्री मोहन यादव कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचे थे।

    इसके बाद मुख्यमंत्री के आने का इंतजार शुरू हो गया। इस दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से ये देश है वीर जवानों का गीत सुनाया और लोगों से आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री से पदयात्रा शुरू करने की अनुमति ले ली गई है। विजयवर्गीय ने आगे बढ़ने की बात भी कही लेकिन मुख्यमंत्री के आने की सूचना मिलने पर कार्यक्रम में मौजूद नेता रुक गए।

    मंत्री विजयवर्गीय के आग्रह पर जनप्रतिनिधि मंच से उतरकर सीढ़ियों की ओर बढ़े। हालांकि मुख्यमंत्री के कुछ देर में पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री और अन्य नेता वहीं रुककर उनका इंतजार करने लगे। इस दौरान विजयवर्गीय दोबारा मंच से नारे लगवाते रहे। कुछ समय बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव का काफिला परदेशीपुरा चौराहे पहुंचा। उनके आगमन की घोषणा की गई और फिर मुख्यमंत्री कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। उन्होंने हवा में गुब्बारे छोड़े और इसके बाद पदयात्रा में शामिल हो गए।

    कार्यक्रम के दौरान एक और घटनाक्रम चर्चा में रहा। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा पाटनीपुरा स्थित मंच की ओर जाने के लिए सड़क की दूसरी लेन में पहुंचे। वहां उन्हें दो युवकों के साथ एक दोपहिया वाहन दिखाई दिया। उन्होंने वाहन रुकवाया और पीछे बैठे युवक को उतारकर खुद बैठ गए। उन्होंने चालक से उन्हें तुरंत मंच तक पहुंचाने को कहा। जैसे ही चालक ने वाहन मोड़ा उसका अगला पहिया फिसल गया। इससे सुमित मिश्रा और चालक दोनों गिरते-गिरते बच गए।

    पदयात्रा में स्कूली बच्चों की मौजूदगी ने भी सवाल खड़े किए। कुछ बच्चे हाथों में भाजपा के झंडे और गले में पार्टी के गमछे डालकर पहुंचे थे। ये बच्चे मां कनकेश्वरी देवी स्कूल के बताए गए। जब उनसे पूछा गया कि लोकतंत्र खतरे में क्यों है तो बच्चों ने कहा कि उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि स्कूल के शिक्षक उन्हें कार्यक्रम में लेकर आए थे और पहले से यह नहीं बताया गया था कि उन्हें किस उद्देश्य से यहां लाया जा रहा है।

    इस पदयात्रा को लेकर शहर में यातायात व्यवस्था पर भी सवाल उठे। रिपोर्ट के मुताबिक करीब डेढ़ किलोमीटर की यात्रा के लिए लगभग 50 रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई थी। सुबह आठ बजे से शुरू हुई व्यवस्था के कारण कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा और लोगों को करीब छह घंटे तक जाम तथा रास्तों की परेशानी का सामना करना पड़ा। इस तरह भाजपा की पदयात्रा राजनीतिक संदेश के साथ-साथ मुख्यमंत्री के इंतजार स्कूली बच्चों की मौजूदगी और शहर में हुई यातायात व्यवस्था को लेकर भी चर्चा में आ गई।

  • लातूर में सूखे की मार: पशुओं के चारे का संकट, स्कूली बच्चों ने गुल्लक तोड़कर जुटाए 2 लाख रुपये

    लातूर में सूखे की मार: पशुओं के चारे का संकट, स्कूली बच्चों ने गुल्लक तोड़कर जुटाए 2 लाख रुपये


    लातूर।
    महाराष्ट्र के लातूर जिले में सूखे ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में फसल बचाना चुनौती बन गया है, वहीं पशुओं के लिए हरे चारे की कमी भी गंभीर संकट का रूप ले रही है। ऐसे मुश्किल समय में अहमदपुर के स्कूली बच्चों ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। डॉ. हरिवंशराय बच्चन विद्यालय के प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों ने अपनी गुल्लक तोड़कर दो लाख रुपये जुटाए और मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए। बच्चों की इस पहल ने सूखा प्रभावित किसानों के लिए उम्मीद की किरण जगाई है।

    गुल्लक तोड़कर जुटाई रकम, मुख्यमंत्री को सौंपा चेक

    अहमदपुर के स्कूली बच्चों ने अपनी छोटी-छोटी बचत को सूखा पीड़ितों की मदद के लिए समर्पित कर दिया। बच्चों ने गुल्लकों में जमा रकम इकट्ठा कर कुल दो लाख रुपये जुटाए। इसके बाद मुंबई में चेक के माध्यम से यह राशि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई।

    बच्चों की इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि सूखे से जूझ रहे किसान अब अपनी फसलों को अनाज के लिए बचाने के बजाय पशुओं का पेट भरने के लिए काटने को मजबूर हैं।

    पशुओं को बचाने के लिए गन्ने की फसल काट रहे किसान

    लातूर के काव्हा गांव के किसान नारायण गुडे के पास सात भैंसें, दो गायें और बछड़े हैं। बारिश नहीं होने के कारण खेतों में हरा चारा खत्म हो गया है। पशुओं को भूख से बचाने के लिए उन्हें अब गन्ने की खड़ी फसल काटनी पड़ रही है।

    यह स्थिति बताती है कि सूखे का असर केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन पर निर्भर किसानों की आजीविका भी संकट में है। चारे की कमी के कारण किसानों के सामने अपने पशुओं को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

    लोअर तेरणा परियोजना में महज 21 प्रतिशत पानी बचा

    लातूर जिले में जल संकट की गंभीरता का अंदाजा लोअर तेरणा परियोजना में घटते जलस्तर से लगाया जा सकता है। परियोजना में पानी घटकर कुल क्षमता का महज 21 प्रतिशत रह गया है। प्रशासन ने जलाशय के पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है। खेती के लिए अवैध रूप से पानी उठाने पर निगरानी भी बढ़ाई गई है।

    लातूर के जिलाधिकारी ने स्थिति की समीक्षा की है। पानी की सीमित उपलब्धता के बीच प्रशासन के सामने पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के साथ सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की चुनौती है।

    महाराष्ट्र के 265 तालुके सूखा प्रभावित घोषित

    महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर के अंत में राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित किया था। यह संख्या राज्य के लगभग 74 प्रतिशत तालुकों के बराबर है। ये तालुके 32 जिलों में फैले हुए हैं।

    सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन और राहत संबंधी कदम शुरू किए गए हैं। इनमें फसल ऋण के पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली स्थगित करने, भूमि राजस्व में रियायत देने और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत जैसे उपाय शामिल हैं।

    सूखे की इस व्यापक मार के बीच अहमदपुर के बच्चों का दो लाख रुपये का योगदान केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि संकट से जूझ रहे किसानों और पशुपालकों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी है।

  • बिहार में मिड-डे मील खाने से 60 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मची अफरा-तफरी

    बिहार में मिड-डे मील खाने से 60 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मची अफरा-तफरी



    नालंदा । Bihar के नालंदा जिले में मिड-डे मील खाने के बाद 60 से ज्यादा स्कूली बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। यह मामला नगरनौसा प्रखंड के मध्य विद्यालय कैला का है, जहां बुधवार को बच्चों को दोपहर के भोजन में चावल और छोले परोसे गए थे। खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों को तेज पेट दर्द, उल्टी, दस्त और चक्कर आने लगे। कई बच्चे स्कूल परिसर में ही बेहोश होकर गिर पड़े, जिससे स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    स्थिति गंभीर होते ही स्कूल प्रशासन ने आनन-फानन में सभी बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरनौसा और चंडी रेफरल अस्पताल पहुंचाया। एक छात्रा की हालत ज्यादा खराब होने पर उसे बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर किया गया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक अस्पताल पहुंच गए। बच्चों की हालत देखकर कई परिजन रोते-बिलखते नजर आए।

    बीमार बच्चों में अमृता कुमारी, अंकुश कुमार, अनुराधा कुमारी, तमन्ना, निशु, मुस्कान, कृति, ऋषि, आरती, सिमरन, खुशी, आदित्य, प्रियांशु, प्रिय, दीपक, प्रीति, डॉली, सौरभ और किरण समेत कई छात्र-छात्राएं शामिल हैं।

    छात्राओं ने आरोप लगाया कि मिड-डे मील में परोसी गई सब्जी में दवा जैसी संदिग्ध गोली दिखाई दी थी। बच्चों का कहना है कि रोज की तरह इस बार भोजन परोसने से पहले शिक्षकों ने टेस्टिंग भी नहीं की थी। हालांकि, बच्चों की हालत बिगड़ने के बाद एक शिक्षक अमरेश ने खुद खाना चखकर जांच करने की कोशिश की, लेकिन कुछ देर बाद उनकी भी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें भी अस्पताल ले जाना पड़ा।

    घटना के बाद मिड-डे मील सप्लाई करने वाली संस्था Ekta Foundation पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और अभिभावकों ने संस्था पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया गया है।

    स्कूल की प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी ने बताया कि भोजन शुरू होने के कुछ मिनट बाद ही बच्चों की तबीयत खराब होने लगी थी। हालात बिगड़ते देख तुरंत स्वास्थ्य विभाग और अधिकारियों को सूचना दी गई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • MP: ग्वालियर में लगेगा पुस्तक मेला, स्कूली बच्चों को सस्ते दर पर मिलेंगी किताबें, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म

    MP: ग्वालियर में लगेगा पुस्तक मेला, स्कूली बच्चों को सस्ते दर पर मिलेंगी किताबें, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म

    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्कूली बच्चों को सस्ती दर पर किताबें, यू

    Gwalior

    नीफॉर्म व स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए सात दिवसीय पुस्तक मेला (बुक फेयर) लगने जा रहा है। सरकार की मंशा के अनुरूप यह बुक फेयर मौजूदा मार्च माह के दौरान ग्वालियर मेला में सूर्य नमस्कार तिराहा के समीप स्थित शिल्प बाजार परिसर में लगेगा।

    कलेक्टर रुचिका चौहान ने रविवार की शाम संबंधित अधिकारियों एवं पुस्तक विक्रेताओं के साथ शिल्प बाजार परिसर पहुँचकर पुस्तक मेले की तैयारियों का जायजा लिया। कलेक्टर ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि पुस्तक मेला अवधि के दौरान बाजार में किसी भी पुस्तक की दुकान से स्कूली पुस्तकें व स्टेशनरी नहीं बेची जा सकेंगीं।

    इस पर पुस्तक विक्रेताओं एवं एसोसिएशन के अधिकारियों ने सहमति जताई। साथ ही कहा कि पुस्तक विक्रेताओं ने कहा कि पुस्तक मेला को लेकर हम उत्साहित हैं। पुस्तक मेले में प्रत्येक दुकानदार द्वारा किताबों, स्टेशनरी व यूनीफॉर्म की बिक्री पर आकर्षक छूट भी प्रदान की जायेगी। पुस्तक मेला परिसर के निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर कुमार सत्यम, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सोजान सिंह रावत, जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी, डीपीसी रविन्द्र तोमर एवं मेला सचिव सुनील बाबू त्रिपाठी सहित अन्य संबंधित अधिकारी, पुस्तक विक्रेता एसोसिएशन के पदाधिकारी व पुस्तक विक्रेता मौजूद थे।

    पुस्तक विक्रेताओं को जिले के विभिन्न स्कूलों के पाठ्यक्रम उपलब्ध करा दिए गए हैं। कलेक्टर ने इस मौके पर पुस्तक विक्रेताओं से कहा कि वे निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकों के सेट बच्चों एवं उनके अभिभावकों को उपलब्ध कराएं। वेंडर्स यानी पुस्तक विक्रेताओं द्वारा पुस्तक मेला मे किताबें, स्टेशनरी व ड्रेस खरीदने वाले अभिभावकों को विशष छूट दी जायेगी। पुस्तक मेला लगने से अनाधिकृत प्रिंटिग कर पुस्तक बेचने की प्रवृत्ति पर भी प्रभावी रोक लगेगी।

    मार्च माह के द्वितीय पखवाड़े में लगने जा रहे पुस्तक मेले में सीबीएसई, आईएसई एवं एमपी बोर्ड से संबंध सभी निजी स्कूलों के पाठ्यक्रम के अनुसार पुस्तकें व यूनीफॉर्म उपलब्ध रहेंगी। जिला प्रशासन द्वारा बच्चों व उनके अभिभावकों के हित को ध्यान में रखकर लिए गए पुस्तक मेला लगाने के निर्णय का पुस्तक प्रकाशकों (पब्लिशर्स) व डीलर्स ने स्वागत किया है।

    कलेक्टर ने निरीक्षण के दौरान पुस्तक मेले की रूपरेखा के संबंध में विस्तार से चर्चा की। पुस्तक विक्रेताओं ने पिछले साल जिन दुकानदारों को जो दुकानें आवंटित की गई थीं, उन्हीं दुकानों का इस बार भी आवंटन करने का आग्रह किया। कलेक्टर ने कहा कि पुस्तक विक्रेताओं की सहमति से ही आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जायेगा। उन्होंने शिल्प बाजार परिसर की साफ-सफाई, विद्युत व्यवस्था, शौचालय व पेयजल की पुख्ता व्यवस्था करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। साथ ही कहा कि पुस्तक मेला परिसर में फूड स्टॉल भी लगवाए जाएं।

    आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क पुस्तकें उपलब्ध कराने के लिये पुस्तक मेला परिसर में बुक बैंक भी स्थापित किया जायेगा। ऐसे स्कूली विद्यार्थी जो अपनी पिछली कक्षा की किताबें दान करना चाहते हैं वे बुक बैंक में अपनी किताबें जमा कर सकेंगे। ज्ञात हो पिछली साल बनाए गए बुक बैंक से 700 जरूरतमंद बच्चों ने नि:शुल्क पुस्तकें प्राप्त की थीं।

    पुस्तक विक्रेताओं एवं स्कूली बच्चों व उनके अभिभावकों की मदद के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से हैल्पलाईन नंबर भी जारी कराया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के कॉर्डिनेटर आईटी सेल अरविंद तोमर (मोबा. 98935-87573) से संपर्क कर पुस्तक मेला के संबंध मे जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। साथ ही पुस्तक मेला के संबंधित समस्याएं भी दर्ज कराई जा सकेंगी।

    स्कूलों द्वारा निर्धारित पुस्तकों के सेट की कीमत का परीक्षण कराया जा रहा है। कलेक्टर रुचिका चौहान ने जिला शिक्षा अधिकारी व जिला परियोजना समन्वयक को जल्द से जल्द यह परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पिछली साल के पुस्तक मेले में अभिभावकों व विद्यार्थियों द्वारा दर्ज किए गए फीड बैक का अध्ययन कर इस बार के मेले को और बेहतर बनाने के निर्देश भी दिए हैं।

  • जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित

    जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित



    नई दिल्ली। जबलपुर प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2026 से जिले में किसी भी एलपीजी से संचालित वाहन में स्कूली बच्चे सफर नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का उद्देश्य स्कूल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।

    कलेक्टर ने स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिकों को निर्देश दिए हैं कि वे 1 अप्रैल से पहले अपने वाहनों की व्यवस्था वैकल्पिक और कानूनी रूप से मान्य वाहनों के माध्यम से करें। यदि तय समय के बाद भी कोई एलपीजी वाहन बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत वाहन मालिक, स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

    जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निगरानी और पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) को आदेशित किया गया है कि वे स्कूल वाहनों का सत्यापन करें और एलपीजी वाहन संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके साथ ही सभी एसडीएमों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि जिले में कोई भी एलपीजी वाहन बच्चों को ले जाने के लिए इस्तेमाल न हो।

    पुलिस अधिकारियों को स्कूल समय के दौरान आकस्मिक निरीक्षण करने और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन इसकी अनदेखी नहीं करेगा।

    जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के माध्यम से सभी स्कूल प्रबंधन को इस आदेश की जानकारी दी जाएगी। स्कूल संचालकों से कहा गया है कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और अपने वाहन संचालन की व्यवस्था तुरंत बदलें। डीईओ को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे स्कूलों में इस नियम के पालन की निगरानी करें और किसी भी तरह की लापरवाही की स्थिति में कड़ी कार्रवाई करें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि गैस लीक, आग और तकनीकी खामियों के कारण हादसों की संभावना बढ़ जाती है। इस आदेश के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय किए जाएं।

    कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। सभी स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक 1 अप्रैल तक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”

    इस आदेश से जबलपुर जिले के स्कूल परिवहन में एक बड़ा बदलाव आएगा और यह बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए राहत का संदेश लेकर आएगा। जिले में सभी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।