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  • पाकिस्तान के पेशावर में निजी स्कूल की छत गिरने से 20 बच्चों की मौत, 40 से अधिक लोग घायल

    पाकिस्तान के पेशावर में निजी स्कूल की छत गिरने से 20 बच्चों की मौत, 40 से अधिक लोग घायल

    नई दिल्ली ।पाकिस्तान के पेशावर में एक निजी स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में 20 बच्चों की मौत होने की खबर है, जबकि 40 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। कई बच्चे और स्कूल के कर्मचारी छत के मलबे के नीचे दब गए। सूचना मिलते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया।

    दुर्घटना के बाद बचावकर्मियों ने मलबे में फंसे बच्चों और स्कूल के कर्मचारियों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। टीमों ने घटनास्थल पर तलाश अभियान चलाया, ताकि मलबे के नीचे दबे लोगों तक पहुंचा जा सके। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। हादसे में घायल 20 बच्चों को लेडी रीडिंग अस्पताल ले जाया गया।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार, शुरुआती जानकारी में 17 शव अस्पताल लाए जाने की पुष्टि हुई थी। इसके बाद एक महिला शिक्षक का शव भी अस्पताल पहुंचाया गया। घटना में हताहत हुए लोगों की संख्या और घायलों की स्थिति को लेकर राहत अभियान के दौरान जानकारी सामने आती रही। हादसे की गंभीरता को देखते हुए बचाव दल लगातार मलबे में फंसे लोगों को तलाशने में लगा रहा।

    पेशावर में हुए इस हादसे के बाद घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। संबंधित अधिकारियों ने अस्पतालों में भर्ती लोगों के उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राहत टीमों को भी तेजी से काम करने और मलबे के नीचे फंसे लोगों को जल्द बाहर निकालने के लिए कहा गया।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने जान गंवाने वाले बच्चों और अन्य लोगों के लिए प्रार्थना की तथा घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हादसे में घायल लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने बचाव दल को अभियान तेज करने के निर्देश भी दिए, ताकि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।

    खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर के सूचना एवं जनसंपर्क सलाहकार समर हारून बिलौर ने भी घटना पर दुख जताया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से घायल बच्चों को हर संभव सहायता देने को कहा। इस बीच, पेशावर के पुलिस अधिकारी डॉ. मियां सईद ने बताया कि हादसे में 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

    स्कूल की छत गिरने के कारणों को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य का मुख्य उद्देश्य मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को उपचार उपलब्ध कराना है। हादसे में बच्चों की मौत से इलाके में दुख का माहौल है।

  • मध्य प्रदेश के रतलाम में सरकारी स्कूल सुधारने वाले शिक्षक को मिला नोटिस, ग्रामीणों की मदद से बदली थी रूपनगर स्कूल की तस्वीर

    मध्य प्रदेश के रतलाम में सरकारी स्कूल सुधारने वाले शिक्षक को मिला नोटिस, ग्रामीणों की मदद से बदली थी रूपनगर स्कूल की तस्वीर

    मध्य प्रदेश। के रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक स्थित रूपनगर सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयास अब चर्चा में हैं। स्कूल को आदर्श बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने ग्रामीणों की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्कूल में साफ-सफाई, हरियाली, बेहतर फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को सरकारी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना था। हालांकि, स्कूल में हुए निर्माण और सुविधाओं को लेकर शिक्षक को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

    रूपनगर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और शिक्षक-पालक संघ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से संसाधन जुटाए थे। स्कूल में रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सुविधाओं से संबंधित काम कराए गए। फर्नीचर तथा अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था भी जनभागीदारी और शिक्षक के निजी खर्च से की गई थी। स्कूल का वातावरण बेहतर होने से गांव के बच्चों को सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने के लिए सुविधाजनक माहौल मिला। इस पहल के बाद स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में देखा जाने लगा था।

    मामले में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को निर्माण कार्य और सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर कारण बताओ नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई। नोटिस में पूछा गया कि स्कूल में रंग-रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य किसकी अनुमति से कराए गए। बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सामग्री की व्यवस्था के लिए किस प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया, इस पर भी सवाल किए गए। इसके अलावा, स्कूल में निशुल्क सेवाएं दे रहे तीन शिक्षकों की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई। इन सवालों के बीच यह मुद्दा उठ रहा है कि ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल में किए गए सुधारों की प्रक्रिया को लेकर विभाग की क्या आपत्ति थी।

    राठौड़ का करीब दो महीने पहले जावरा क्षेत्र के रूपनगर स्कूल से सेमलिया के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तबादला कर दिया गया था। अपने पसंदीदा शिक्षक का स्थानांतरण रुकवाने के लिए बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक का तबादला रोकने की मांग को लेकर विरोध भी किया, लेकिन स्थानांतरण नहीं रुका। इसके बाद रूपनगर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आई। बताया गया है कि स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा और पहले जैसी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां सामने आने लगीं।

    रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव भी रूपनगर स्कूल में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे। उनके अनुसार, शिक्षक को सम्मानित करने के बजाय नोटिस दिया जाना निराशाजनक है। उन्होंने स्कूल में शिक्षक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, बद्रीलाल राठौड़ ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब निर्धारित समय के भीतर दे दिया था। उनका कहना है कि स्कूल में कराए गए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक-पालक संघ की मदद से हुए थे।

    राठौड़ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-पालक संघ को स्कूल के विकास के लिए कई अधिकार प्राप्त हैं। उनके अनुसार, संघ नए प्रयोग करने, विकास की योजना बनाने और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री तथा पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यक चीजें जुटाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में अब केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं और विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज होने की बात कही गई है।
    नई दिल्ली ।

    मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के जावरा ब्लॉक स्थित रूपनगर सरकारी स्कूल में बच्चों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए किए गए प्रयास अब चर्चा में हैं। स्कूल को आदर्श बनाने में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ और शिक्षक-पालक संघ ने ग्रामीणों की मदद से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्कूल में साफ-सफाई, हरियाली, बेहतर फर्नीचर, पानी का फिल्टर और कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य बच्चों को सरकारी स्कूल में ही अच्छी शिक्षा और सुविधाएं देना था। हालांकि, स्कूल में हुए निर्माण और सुविधाओं को लेकर शिक्षक को कारण बताओ नोटिस मिलने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

    रूपनगर स्कूल को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक और शिक्षक-पालक संघ ने स्थानीय लोगों के सहयोग से संसाधन जुटाए थे। स्कूल में रंग-रोगन, बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सुविधाओं से संबंधित काम कराए गए। फर्नीचर तथा अन्य जरूरी सामग्री की व्यवस्था भी जनभागीदारी और शिक्षक के निजी खर्च से की गई थी। स्कूल का वातावरण बेहतर होने से गांव के बच्चों को सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने के लिए सुविधाजनक माहौल मिला। इस पहल के बाद स्कूल को आदर्श विद्यालय के रूप में देखा जाने लगा था।

    मामले में शिक्षक बद्रीलाल राठौड़ को निर्माण कार्य और सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर कारण बताओ नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई। नोटिस में पूछा गया कि स्कूल में रंग-रोगन, फर्नीचर, वाटर कूलर और अन्य कार्य किसकी अनुमति से कराए गए। बाउंड्री वॉल, चित्रकारी और दूसरी सामग्री की व्यवस्था के लिए किस प्रशासनिक आदेश का सहारा लिया गया, इस पर भी सवाल किए गए। इसके अलावा, स्कूल में निशुल्क सेवाएं दे रहे तीन शिक्षकों की अनुमति से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात कही गई। इन सवालों के बीच यह मुद्दा उठ रहा है कि ग्रामीणों के सहयोग से स्कूल में किए गए सुधारों की प्रक्रिया को लेकर विभाग की क्या आपत्ति थी।

    राठौड़ का करीब दो महीने पहले जावरा क्षेत्र के रूपनगर स्कूल से सेमलिया के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में तबादला कर दिया गया था। अपने पसंदीदा शिक्षक का स्थानांतरण रुकवाने के लिए बच्चे और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उन्होंने शिक्षक का तबादला रोकने की मांग को लेकर विरोध भी किया, लेकिन स्थानांतरण नहीं रुका। इसके बाद रूपनगर स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आई। बताया गया है कि स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा और पहले जैसी स्थिति बनाए रखने में कठिनाइयां सामने आने लगीं।

    रिटायर्ड नारकोटिक्स इंस्पेक्टर जगदीश यादव भी रूपनगर स्कूल में बच्चों को निशुल्क पढ़ाते थे। उनके अनुसार, शिक्षक को सम्मानित करने के बजाय नोटिस दिया जाना निराशाजनक है। उन्होंने स्कूल में शिक्षक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके काम को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए था। दूसरी ओर, बद्रीलाल राठौड़ ने बताया कि उन्होंने नोटिस का जवाब निर्धारित समय के भीतर दे दिया था। उनका कहना है कि स्कूल में कराए गए सभी काम ग्रामीणों और शिक्षक-पालक संघ की मदद से हुए थे।

    राठौड़ ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक-पालक संघ को स्कूल के विकास के लिए कई अधिकार प्राप्त हैं। उनके अनुसार, संघ नए प्रयोग करने, विकास की योजना बनाने और लोगों की मदद से फर्नीचर, खेल सामग्री तथा पढ़ाई से जुड़ी दूसरी आवश्यक चीजें जुटाने में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, जिला शिक्षा अधिकारी सिमरन सूर्यवंशी ने कहा कि शिक्षक को स्कूल का रिनोवेशन कराने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कार्यालय से जानकारी लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कही थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, स्कूल में अब केवल दो शिक्षक पदस्थ हैं और विद्यार्थियों की संख्या में कमी दर्ज होने की बात कही गई है।

  • इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर लगेगा प्रतिबंध… PM मेलोनी ने किया ऐलान

    इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर लगेगा प्रतिबंध… PM मेलोनी ने किया ऐलान


    रोम।
    इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Italian Prime Minister Giorgia Meloni) ने एक बड़ा नीतिगत बदलाव प्रस्तावित किया है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी सरकार जल्द ही एक उपाय पेश करेगी। इस उपाय के तहत इतालवी स्कूलों (Italian schools) में बुर्का और नकाब (Burqa and Niqab) पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। साथ ही, कक्षाओं में विदेशी छात्रों (Foreign Students) की संख्या भी सीमित की जाएगी। यह घोषणा प्रवासन और सांस्कृतिक एकीकरण को लेकर उनकी सरकार के सख्त रुख को दर्शाती है।

    इटली आने वाले लोगों को हमारी भाषा सीखनी चाहिए
    मेलोनी ने अपनी राष्ट्रवादी रूढ़िवादी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा विंग को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित उपाय में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान होगा। इसके तहत उन विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इतालवी भाषा के पाठ अनिवार्य किए जाएंगे। ये वे माता-पिता होंगे जिन्हें ‘स्कूल प्रणाली में एकीकृत होने में गंभीर कठिनाइयां’ आ रही हैं। मेलोनी ने रोम में जियोवेंटु नाज़ियोनेल राष्ट्रीय उत्सव में एक जोरदार तालियों के बीच कहा। उन्होंने स्पष्ट किया, ‘हमारे लिए, जो कोई भी इटली आता है और यहां अपना भविष्य बनाना चाहता है, उसे हमारी भाषा सीखनी चाहिए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘उन्हें हमारी संस्कृति को समझना चाहिए और हमारे नियमों का सम्मान करना चाहिए।’ मेलोनी ने इस बात पर जोर दिया कि ‘यह उनका स्वागत करने का एकमात्र गंभीर तरीका है।’


    क्या है बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध का प्रस्ताव?

    मेलोनी ने विशेष रूप से बुर्का पर प्रतिबंध का उल्लेख किया है। बुर्का एक ऐसा पहनावा है जो कुछ मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं और पूरे शरीर को ढकता है। उन्होंने नकाब पर भी प्रतिबंध की बात की। नकाब सबसे रूढ़िवादी मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं, जिसमें केवल आंखें ही दिखती हैं। हालांकि, मेलोनी ने रविवार को (20 सितंबर) अपने संबोधन में हिजाब का कोई जिक्र नहीं किया। हिजाब एक सिर पर पहना जाने वाला स्कार्फ है जो कुछ मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं। सरकार द्वारा इस उपाय को मंजूरी मिलने के बाद, इसे कानून बनने के लिए संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता होगी। यह अनुमोदन 60 दिनों के भीतर प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

    प्रवासन पर मेलोनी का क्या रुख है?
    मेलोनी की राजनीतिक जड़ें धुर-दक्षिणपंथी विचारधारा में गहराई से जमी हुई हैं। वह प्रवासन के मुद्दे पर लगातार सख्त और आक्रामक रुख अपनाती रही हैं। प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने अपनी राजनीतिक स्थिति में बदलाव देखा है। वह एक राष्ट्रवादी बाहरी व्यक्ति से यूरोपीय संघ के राजनेताओं के बीच एक स्थापित और प्रभावशाली व्यक्ति बन गई हैं। उनकी नीतियां अक्सर इटली की राष्ट्रीय पहचान और सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं। यह उनके राजनीतिक एजेंडे का एक केंद्रीय बिंदु रहा है।


    क्यों उठाए जा रहे हैं ये नए नीतिगत कदम?

    मेलोनी अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले अपनी लोकप्रियता को और बढ़ाना चाहती हैं। इसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वह कई नई नीतियां पेश कर रही हैं। इन नीतियों में छोटे और मध्यम आकार की कारों और स्कूटरों पर लगने वाले संपत्ति कर से छूट देना भी शामिल है। यह एक ऐसा कर है जिससे लोग काफी नाखुश थे। इस महीने की शुरुआत में, मेलोनी का रूढ़िवादी प्रशासन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इटली का सबसे लंबे समय तक निर्बाध रूप से सेवा करने वाला सरकार बन गया। यह उपलब्धि उनकी राजनीतिक स्थिरता और देश में उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाती है। ये कदम मतदाताओं को आकर्षित करने और उनकी सरकार की छवि को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाए जा रहे हैं।

  • उन्नाव के स्कूल में हेड मास्टर पर बच्चों की पिटाई और निजी काम कराने के गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    उन्नाव के स्कूल में हेड मास्टर पर बच्चों की पिटाई और निजी काम कराने के गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. पुरवा तहसील के मदारपुर जूनियर स्कूल के हेड मास्टर पर स्कूली बच्चों को बेरहमी से पीटने का आरोप लगा है. साथ ही, उनका मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न करने का भी गंभीर आरोप लगा है. इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा विभाग की कार्यशैली और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

    छोटी-छोटी बातों पर बर्बरता के आरोप

    पीड़ित बच्चों के परिजनों के अनुसार, स्कूल के हेड मास्टर मासूम बच्चों से अपने व्यक्तिगत और गैर-शैक्षणिक काम करवाते थे. आरोप है कि अगर कोई स्टूडेंट उन्हें ‘गुड मॉर्निंग’ बोलना भूल जाता था, तो उसकी बेरहमी से पिटाई की जाती थी. इसके अलावा, हेड मास्टर बच्चों से अपनी निजी गाड़ी धुलवाता और टॉयलेट में पानी डालने जैसे काम भी जबरन करवाते थे. इन कामों को करने में जरा सी भी चूक होने पर बच्चों को बेरहमी से प्रताड़ित किया जाता था.

    परिजनों ने एसडीएम से की शिकायत

    जब बच्चों ने अपने साथ हो रही इस बर्बरता की जानकारी घर पर दी, तो परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. घटना से आक्रोशित परिजनों ने एसडीएम पुरवा से मुलाकात कर आरोपी हेड मास्टर के खिलाफ शिकायत की. परिजनों ने वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोपी हेड मास्टर के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाने की मांग की है. एसडीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के बाद सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

    शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल देने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन मदारपुर जूनियर स्कूल की इस घटना ने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है. स्कूल में शिक्षा लेने जाने वाले मासूमों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न केवल उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है, बल्कि उनके मन में शिक्षा के प्रति खौफ भी पैदा करता है. फिलहाल, इस वायरल वीडियो और परिजनों की शिकायत के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) स्तर पर क्या कार्रवाई होती है ये देखने वाली बात होगी.

  • शहडोल सरकारी स्कूल में बारिश के बीच बच्चों से छज्जे की सफाई, वायरल वीडियो के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    शहडोल सरकारी स्कूल में बारिश के बीच बच्चों से छज्जे की सफाई, वायरल वीडियो के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    मध्य प्रदेश: के शहडोल जिले में सरकारी प्राथमिक विद्यालय से सामने आए एक वीडियो ने बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों में जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोरतरा ग्राम पंचायत स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में बारिश के दौरान बच्चों से स्कूल की छत और छज्जे की सफाई कराए जाने का मामला सामने आया है। वायरल वीडियो में कुछ बच्चे ऊंचाई वाले हिस्से पर चढ़कर सफाई करते दिखाई दे रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि स्कूल की छत की दीवार और छज्जे पर गंदगी जमा होने के बाद उसे साफ करने की जरूरत महसूस हुई थी। इसी दौरान बच्चों से सफाई का काम कराया गया। वीडियो में बच्चे ऊंचाई पर मौजूद दिखाई देते हैं, जिससे उनके फिसलने या नीचे गिरने का खतरा बना हुआ था। खास तौर पर बारिश के दौरान छत और छज्जे की सतह पर फिसलन बढ़ जाने से जोखिम और अधिक गंभीर हो जाता है।

    स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र को देखते हुए इस तरह का कार्य कराना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। जिस समय विद्यार्थियों को पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों में शामिल होना चाहिए, उस समय उनसे ऊंचाई पर चढ़कर सफाई कराने की घटना सामने आई है। यदि सफाई आवश्यक थी तो इसे सुरक्षित तरीके से कराया जा सकता था, ताकि विद्यार्थियों को किसी संभावित दुर्घटना का सामना न करना पड़े।

    मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बच्चों को छत और छज्जे जैसे जोखिम वाले स्थान पर जाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई। स्कूल परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी शिक्षकों और संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था की होती है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि घटना के समय बच्चों की निगरानी और सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था मौजूद थी।

    शहडोल जिले में बारिश के कारण पहले से ही कई स्थानों पर जनजीवन प्रभावित बताया जा रहा है। ऐसे मौसम में स्कूल भवनों की सुरक्षा और विद्यार्थियों की आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। बारिश के बीच ऊंचाई पर सफाई का काम बच्चों से कराया जाना इसी वजह से और अधिक चिंता का विषय बन गया है।

    वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों के बीच भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को किसी भी ऐसे काम में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें उनकी शारीरिक सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका हो। खासकर छत, छज्जे या ऊंचाई वाले स्थानों पर काम करते समय प्रशिक्षित और जिम्मेदार व्यक्ति की मौजूदगी जरूरी मानी जाती है।

    घटना के बाद यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि सरकारी स्कूलों में सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की निगरानी किस तरह की जा रही है। स्कूल भवन की नियमित सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी तय व्यवस्था के तहत पूरी की जानी चाहिए, लेकिन इसके लिए विद्यार्थियों को जोखिम में डालना उचित नहीं माना जा सकता।

    फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर सामने आई इस घटना ने स्कूल प्रबंधन और संबंधित शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पूरे मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि बच्चों से सफाई का काम क्यों कराया गया, उन्हें ऊंचाई पर जाने की अनुमति किसने दी और बारिश के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए क्या सावधानियां बरती गई थीं। मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

  • सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए कॉजपा संस्थापक का सुझाव, जनप्रतिनिधि सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं अपने बच्चे

    सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए कॉजपा संस्थापक का सुझाव, जनप्रतिनिधि सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं अपने बच्चे

    नई दिल्ली । देश में सरकारी शिक्षा प्रणाली की स्थिति और उसमें आवश्यक सुधारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बयान जारी कर मांग की है कि शिक्षा विभाग से जुड़े सभी मंत्रियों, प्रशासनिक अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों को अपने बच्चों का दाखिला अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में ही कराना चाहिए। उनका मानना है कि यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने बच्चों को इन संस्थानों में भेजेंगे, तो सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में बहुत जल्द सकारात्मक और व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।

    अभिजीत दीपके ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक सरकारी नीतियों को लागू करने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधि स्वयं इन सेवाओं का उपयोग नहीं करेंगे, तब तक वास्तविक सुधार संभव नहीं है। उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों अधिकारी और मंत्री अपने बच्चों को निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाना पसंद करते हैं। क्या उन्हें अपने ही विभाग और सरकारी नीतियों की कार्यप्रणाली पर भरोसा नहीं है। उनका यह बयान देश भर में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों के संदर्भ में आया है।

    इस विचार को धरातल पर उतारने और व्यवस्था की कमियों को उजागर करने के उद्देश्य से उन्होंने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी का दौरा किया था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला परिषद द्वारा संचालित स्थानीय स्कूल में पहुंचे दीपके ने वहां की बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि कक्षाओं में खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे, सीसीटीवी कैमरे निष्क्रिय थे और स्वच्छता से जुड़ी कई मूलभूत सुविधाएं बदहाल स्थिति में थीं।

    उनके द्वारा उजागर की गई कमियों के बाद स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत तुरंत हरकत में आई। संतुक पिंपरी के स्थानीय सरपंच विजय पुरी ने जानकारी दी है कि अभिजीत दीपके द्वारा चिन्हित की गई सभी समस्याओं को दूर करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दिया गया है। स्कूल में क्षतिग्रस्त खिड़कियों और उनके फ्रेम को बदला जा रहा है, नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, तथा शौचालयों में पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

    शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधन को मरम्मत कार्य जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर स्कूल की ढांचागत स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है।

    मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और सुविधाओं को लेकर समय-समय पर इस तरह की मांगें उठती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्वजनिक सेवाओं के उपयोग को अनिवार्य या प्रोत्साहित किया जाए, तो इससे प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ती है। अभिजीत दीपके की इस पहल और उनके सुझाव ने एक बार फिर शिक्षा के अधिकार और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में गंभीर मंथन शुरू कर दिया है।

  • भारत के खिलाफ जहर उगलते लश्कर आतंकी, स्कूल में दिया विवादित भाषण, पाकिस्तान में आलोचना

    भारत के खिलाफ जहर उगलते लश्कर आतंकी, स्कूल में दिया विवादित भाषण, पाकिस्तान में आलोचना

    नई दिल्ली| लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख और पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह पाकिस्तानी सेना के साथ अपने संगठन के गहरे संबंधों को खुलासा कर रहा है। कसूरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना उसे अपने सैनिकों की अंतिम यात्रा में जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए आमंत्रित करती है। यह वीडियो किस समय का है, तारीख अभी मालूम नहीं चली। इसमें वह स्कूल के बच्चों को भाषण देता नजर आ रहा है। हालांकि, खुफिया स्रोतों ने इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि कर दी है।
    सैफुल्लाह कसूरी ने दावा किया, ‘पाकिस्तान की सेना मुझे जनाजे की नमाज पढ़ाने के लिए बुलाती है। क्या तुम्हें पता है कि भारत भी मुझसे डरता है?’ यह खुलासा पाकिस्तान की ओर से राज्य प्रायोजित आतंकवाद के भारत के लंबे समय से चले आ रहे आरोपों को मजबूती देता है। यह घटना किसी सभ्य समाज में अकल्पनीय है कि एक आतंकी संगठन का दूसरा सबसे बड़ा नेता बच्चों के स्कूल में जाकर युवा दिमागों को प्रभावित करे। पहलगाम हमले में 26 पर्यटकों की हत्या के लिए जिम्मेदार लश्कर ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर काम किया, जैसा कि 1999 के कारगिल युद्ध में भी देखा गया था।

    आतंक का निर्यात करने में जुटा पाकिस्तान
    ऑपरेशन सिंदूर के छह महीने बाद पाकिस्तान समर्थित लश्कर और जैश-ए-मोहम्मद ने जम्मू-कश्मीर में नए हमलों की तैयारी की थी, जिसे नई दिल्ली ने गंभीर चेतावनी करार दिया। एनडीटीवी की रिपोर्ट में यह बताया गया है। ऑपरेशन सिंदूर अप्रैल 2025 के पहलगाम हमले के जवाब में शुरू हुआ था, जो आतंकी ढांचे को नष्ट करने का भारतीय अभियान था। अगर इसी तरह पाकिस्तान की ओर से आतंक का निर्यात जारी रहा तो इसकी नई फेज शुरू हो सकती है। यह भारत ही नहीं, दुनिया भर के लिए चिंता की बात है। ताजा वीडियो से पाकिस्तान की थू-थू हो रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर उसके खिलाफ सख्त ऐक्शन लेना होगा।

  • होमवर्क न करने पर 6 साल की बच्ची को टीचर ने ऐसा मारा थप्पड़ कि गिरने से टूटा हाथ

    होमवर्क न करने पर 6 साल की बच्ची को टीचर ने ऐसा मारा थप्पड़ कि गिरने से टूटा हाथ

    सतना। मध्यप्रदेश के सतना जिले के एक प्राइवेट स्कूल में 6 साल की मासूम बच्ची को होमवर्क पूरा न करने की ऐसी सजा मिली कि उसका हाथ टूट गया। इंग्लिश टीचर ने बच्ची को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि वह जमीन पर गिरी और उसका हाथ फ्रैक्चर हो गया। अब बच्ची के हाथ पर प्लास्टर चढ़ा है। हैरानी की बात यह है कि जब पिता स्कूल पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज मांगा, तो प्रबंधन ने रटा-रटाया जवाब दे दिया कि “कैमरे खराब हैं”।
    फिलहाल पिता की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने सम्बंधित टीचर के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

    बर्थडे, होमवर्क और टीचर की सजा
    दरअसल पूरा मामला शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले अमौधा स्थित सीएमए विद्यालय का है। यहां पतेरी के चौहान नगर निवासी पीड़ित बच्ची के पिता ने बताया की बच्ची मंगलवार को स्कूल गई थी। घर पर छोटी बहन का जन्मदिन होने के कारण वह अपना इंग्लिश का होमवर्क पूरा नहीं कर पाई थी। क्लास में जब इंग्लिश टीचर सपना खरे ने होमवर्क चेक किया और अधूरा पाया, तो वे गुस्से में तमतमा गईं।

    उन्होंने बच्ची को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। थप्पड़ लगते ही मासूम का संतुलन बिगड़ा और वह जमीन पर गिर पड़ी, जिससे उसके हाथ की हड्डी टूट गई।
    डरी सहमी बच्ची घर पहुंची और…

    स्कूल से लौटने के बाद डरी-सहमी बच्ची ने शाम को हाथ में दर्द की शिकायत की। मां को लगा मामूली चोट होगी, इसलिए बाम लगा दिया और बच्ची सो गई। बुधवार सुबह जब स्कूल जाने के लिए बच्ची को उठाया गया, तो उसका हाथ बुरी तरह सूजा हुआ था। परिजन घबराकर उसे जिला अस्पताल ले गए। वहां एक्स-रे करने पर फ्रैक्चर की पुष्टि हुई और डॉक्टरों ने तुरंत प्लास्टर चढ़ाया है।
    सीसीटीवी फुटेज की मांग पर क्या बोला स्कूल

    बेटी की हालत देख पिता का गुस्सा फूट पड़ा है। वे पहले सिविल लाइन थाने गए और फिर स्कूल पहुंचे।

    पिता ने प्रिंसिपल से घटना की शिकायत की और क्लासरूम का सीसीटीवी फुटेज दिखाने को कहा। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने अपनी लापरवाही छिपाते हुए कह दिया कि कैमरे कई दिनों से खराब हैं। परिजनों का यह भी आरोप है की कभी कभार फीस लेट हो जाने पर बच्ची को परीक्षा में न बैठने की धमकी भी दी जा चुकी है। स्कूल में अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ शारीरिक हिंसा की जा रही है, जो कानूनन अपराध है। प्रबंधन आरोपी टीचर को बचाने की कोशिश कर रहा है।

    वही, सिविल लाइन पुलिस ने पिता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सम्बंधित शिक्षिका के खिलाफ बीएनएस की धाराओं के तहत मामला दर्ज लिया है और मामले पर आंगे जांच कर रही है।

  • वडोदरा का वेमार प्राइमरी स्कूल बना प्रेरणा का स्रोत, बच्चों को शिक्षा से बढ़कर भविष्य की दिशा दे रहा है

    वडोदरा का वेमार प्राइमरी स्कूल बना प्रेरणा का स्रोत, बच्चों को शिक्षा से बढ़कर भविष्य की दिशा दे रहा है


    अहमदाबाद । वडोदरा जिले के सावली तालुका स्थित वेमार प्राइमरी स्कूल आज गुजरात के सरकारी स्कूलों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह स्कूल बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखता बल्कि उन्हें व्यावहारिक शिक्षा के जरिए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।गुजरात सरकार की ज्ञान ही शक्ति है पहल के तहत स्कूल में रचनात्मकता आत्मनिर्भरता और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    स्कूल में नियमित पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को विभिन्न सह-पाठ्यक्रम और कौशल-आधारित गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनकी छिपी प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। यहां रोबोट निर्माण हस्तशिल्प मार्बल आर्ट मार्शल आर्ट और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां शुरू की गई हैं जिन्हें लेकर छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।वेमार प्राइमरी स्कूल के शिक्षक बच्चों के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। वे न केवल पढ़ाई पर ध्यान देते हैं बल्कि बच्चों को प्रयोगात्मक सीख के लिए भी प्रेरित करते हैं। कक्षा में पढ़ाई और हाथों से सीखने के इस संतुलन ने प्राथमिक स्तर पर शिक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बना दिया है।

    शिक्षकों का मानना है कि बच्चों के शुरुआती वर्ष उनके बौद्धिक विकास और जीवन कौशल को मजबूत करने के लिए बेहद अहम होते हैं। इसी सोच के साथ यह स्कूल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में लागू मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस और समग्र शिक्षा अभियान की नीतियों को जमीन पर उतार रहा है। अकादमिक पढ़ाई के साथ कौशल विकास पर जोर देकर वेमार प्राइमरी स्कूल ने गुजरात के सरकारी स्कूल तंत्र में समग्र और व्यावहारिक शिक्षा का एक नया मानक स्थापित किया है।गुजरात ने शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत और लगातार बढ़ता हुआ बुनियादी ढांचा तैयार किया है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक राज्य में सार्वजनिक निवेश और नीतिगत फोकस के चलते हजारों सरकारी और अनुदानित स्कूलों को उन्नत कक्षाओं डिजिटल लर्निंग टूल्स विज्ञान प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों से लैस किया गया है।

    उच्च शिक्षा के स्तर पर गुजरात में विश्वविद्यालयों इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों का व्यापक नेटवर्क है। आईआईटी गांधीनगर आईआईएम अहमदाबाद और एम्स राजकोट जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान राज्य की शैक्षणिक पहचान को मजबूत करते हैं। अहमदाबाद गांधीनगर वडोदरा सूरत और राजकोट जैसे शिक्षा केंद्रों में मजबूत ढांचा छात्रावास शोध सुविधाएं और इनक्यूबेशन सेंटर उपलब्ध हैं। वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट क्लासरूम ग्रामीण इलाकों तक शिक्षा की पहुंच को मजबूत कर रहे हैं जिससे गुजरात देश के अग्रणी शिक्षा राज्यों में अपनी जगह बना रहा है।