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  • भोपाल के पनिया गांव में स्वतंत्रता दिवस पर कीचड़ भरे रास्ते से तिरंगा लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जर्जर भवन से गिरा प्लास्टर

    भोपाल के पनिया गांव में स्वतंत्रता दिवस पर कीचड़ भरे रास्ते से तिरंगा लेकर स्कूल पहुंचे बच्चे, जर्जर भवन से गिरा प्लास्टर

    भोपाल। देश भर में स्वतंत्रता दिवस का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। इस राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर शैक्षणिक संस्थानों में ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। हालांकि, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे एक ग्रामीण क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों ने प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था और तटीय व ग्रामीण बुनियादी ढांचे की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोपाल जिले की बैरसिया तहसील के पनिया गांव में स्कूली छात्र हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे अत्यंत कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए विद्यालय पहुंचे। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण स्कूल तक पहुंचने वाला मार्ग पूरी तरह से कीचड़ और जलभराव में तब्दील हो चुका था। छोटे-छोटे बच्चों को इसी दुर्गम रास्ते से गुजरकर ध्वजारोहण समारोह में भाग लेने के लिए जाना पड़ा।

    परेशानियों का सिलसिला केवल खराब रास्ते तक ही सीमित नहीं रहा। जब छात्र विद्यालय परिसर में पहुंचे, तो वहां जर्जर भवन की खतरनाक स्थिति सामने आई। विद्यालय के एक कमरे की छत का प्लास्टर टूटकर जमीन पर गिर गया, जिससे वहां उपस्थित लोगों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। इस प्रकार की स्थिति में दैनिक रूप से पठन-पाठन कार्य संचालित होना बच्चों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम माना जा रहा है।

    तमाम विपरीत परिस्थितियों और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के बावजूद विद्यार्थियों के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिली। छात्रों ने अनुशासित रूप से पंक्तिबद्ध होकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पूरे सम्मान के साथ राष्ट्रगान का गायन किया। बच्चों के चेहरे पर देशभक्ति का भाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था, जबकि पृष्ठभूमि में जर्जर इमारत और कीचड़युक्त परिसर व्यवस्थागत कमियों को उजागर कर रहा था।

    मध्य प्रदेश के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में मानसून के मौसम के दौरान इस प्रकार की समस्याएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ग्रामीण इलाकों में पक्के संपर्कों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय पहुंचने में भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पनिया गांव की यह घटना यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर मूलभूत सुविधाओं का विकास अभी भी एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बना हुआ है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला स्तरीय वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनाक्रम पर संज्ञान लेने की बात कही है। जिला कलेक्टर ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और आश्वस्त किया है कि संबंधित विभाग के माध्यम से विद्यालय भवन की मरम्मत तथा पहुंच मार्ग को दुरुस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। स्थानीय निवासियों ने भी प्रशासन से शीघ्र अति शीघ्र नए भवन और पक्की सड़क की मांग की है।

    स्थानीय समुदाय का मानना है कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और सुरक्षा के लिए सुरक्षित कक्षाएं, पेयजल और पक्के पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जर्जर इमारतों की समय पर मरम्मत न होने से कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी।

    फिलहाल, इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। देखना होगा कि प्रशासनिक आश्वासन के बाद पनिया गांव के इस प्राथमिक विद्यालय का जीर्णोद्धार कब तक पूरा हो पाता है और छात्रों को एक सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण कब उपलब्ध कराया जाता है।

  • जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट

    जबलपुर में स्कूल-कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ के मामलों पर मानवाधिकार आयोग सख्त, एसपी से मांगी रिपोर्ट


    जबलपुर।
    शहर के स्कूलों और कॉलेजों के बाहर छात्राओं से छेड़छाड़ और उत्पीड़न की लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जबलपुर पुलिस अधीक्षक से मामले की जांच कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    छात्राओं को बनाया जा रहा निशाना

    जानकारी के अनुसार, कई शिक्षण संस्थानों के बाहर छुट्टी के समय असामाजिक तत्व और मनचले छात्राओं का पीछा करते हैं, उन पर फब्तियां कसते हैं, मोबाइल नंबर मांगते हैं और उनकी बिना अनुमति तस्वीरें भी खींचते हैं। इन घटनाओं से छात्राएं मानसिक रूप से परेशान हो रही हैं और खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

    बताया जा रहा है कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के कारण कुछ छात्राओं ने स्कूल-कॉलेज जाना भी छोड़ दिया है। वहीं, विरोध करने पर अभिभावकों को भी धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।

    मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वत: संज्ञान

    मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, आयोग की मुख्य पीठ भोपाल में अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह की एकल पीठ ने मामले को प्रथम दृष्टया मानवाधिकार हनन का मामला माना है।

    आयोग ने जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें।

    सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्कूल और कॉलेज परिसरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित पुलिस गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और मनचलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

  • तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश

    तमिलनाडुः CM विजय का एक और बड़ा एक्शन.. मंदिरों और स्कूलों के आसपास के शराब ठेके तत्काल बंद करने के आदेश


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में मुख्यमंत्री (Chief Minister) पद की शपथ लेते ही सी जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) ऐक्शन मोड में हैं। उन्होंने बड़ा आदेश देते हुए कहा है कि पूजा के स्थलों, स्कूलों और बस अड्डों के आसपास 500 मीटर के दायरे में सभी शराब की सरकारी दुकानें तत्काल बंद कर दी जाएं। सख्त आदेश जारी करते हुए विजय ने कहा है कि यह फैसला दो हफ्ते के अंदर ही लागू होगा।

    बता दें कि मुख्यमंत्री बनते ही मंच पर ही उन्होंने अपने वादों को पूरा करने के लिए तीन फैसलों पर साइन कर दिए थे। पहला आदेश 200 यूनिट फ्री बिजली देने को लेकर था। दूसरा आदेश महिलाओं की सुरक्षा के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करने और तीसरा नशे की सस्या से निपटने के लिए हर जिले में विशेष फोर्स का गठन करना था।

    सोमवार को ही सीएम विजय समेत सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने विधानसभा में शपथ ली है। सबसे पहले मुख्यमंत्री विजय ने विधायक के रूप में शपथ ली और मंत्रियों में एन आनंद, आधव अर्जुन, केजी अरुणराज, केए सेनगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन और टीके प्रभु ने भी शपथ ली। इसके बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक दल के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन, पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और ओ. पनीरसेल्वम तथा अन्य विधायकों ने पद की शपथ ली।

    विजय, उदयनिधि और पनीरसेल्वम उन विधायकों में शामिल थे जिन्होंने “पूर्ण निष्ठा” के नाम पर शपथ ली। पलानीस्वामी और पीएमके की सौम्या अंबुमणि उन विधायकों में शामिल थीं, जिन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ ली। महिला मंत्री कीर्तना शुरुआत में अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं और उन्हें इसे लाने के लिए वापस जाना पड़ा।

    जब विधानसभा के प्रधान सचिव के. श्रीनिवासन ने माइक पर कीर्तना का नाम शपथ लेने के लिए पुकारा, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी के सामने बने मंच की ओर बढ़ीं। विधानसभा की परंपरा के अनुसार, शपथ लेने वाले विधायक कार्यवाहक अध्यक्ष की ओर मुख करके खड़े होते हैं। जैसे ही कीर्तना मंच के पास पहुंचीं, सचिव श्रीनिवासन ने हाथ उठाकर उनसे निर्वाचन प्रमाण-पत्र मांगा। हालांकि, वह प्रमाण-पत्र पेश नहीं कर सकीं। श्रीनिवासन को उन्होंने क्या जवाब दिया, यह स्पष्ट रूप से पता नहीं चल सका है।

    बाद में, कीर्तना प्रमाण-पत्र सदन में लेकर आईं और अधिकारी को सौंप दिया तथा ईश्वर के नाम पर शपथ ली। वेलाचेरी से ‘तमिलगा वेत्री कषगम’ (टीवीके) के विधायक आर. कुमार जब अपना निर्वाचन प्रमाण-पत्र जमा करने के बाद शपथ लेने ही वाले थे, तभी अधिकारी श्रीनिवासन ने उन्हें रोक दिया। श्रीनिवासन ने कुमार का ध्यान इस ओर दिलाया कि उनके द्वारा जमा किए गए प्रमाण-पत्र पर किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज है।

  • स्कूलों, HC, सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार… 1100 ईमेल भेजे, फैलाई दशहत

    स्कूलों, HC, सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार… 1100 ईमेल भेजे, फैलाई दशहत


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) समेत देश के कई राज्यों में स्कूलों (Schools), हाईकोर्ट (High Court) और सरकारी दफ्तरों (Government offices.) में बम की धमकी (Bomb threat) देकर दहशत फैलाने वाला शातिर श्रीनिवास लुईस (47) मैसूर से पकड़ा गया। आरोपी ने धमकी के 1,100 से ज्यादा ई-मेल किए थे। दिल्ली पुलिस ने उसे कर्नाटक पुलिस के सहयोग से दबोचा। ट्रांजिट रिमांड पर पुलिस उसे दिल्ली लेकर आ रही है। उसके पास से एक लैपटॉप और कई सिम कार्ड जब्त किए गए हैं।

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, श्रीनिवास को बृहस्पतिवार को मैसूर के वृंदावन लेआउट में मकान से दबोचा गया। वह पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग जगहों से धमकी भरे ईमेल और मैसेज भेजता था। दिल्ली हाईकोर्ट के जज को भी धमकी भरा ई-मेल भेजा गया था। उनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने बताया, कई हफ्तों तक चली तकनीकी पड़ताल के बाद संदिग्ध की पहचान हो पाई। आरोपी ने धमकी भरे मैसेज भेजने की बात कबूली है।


    पोस्टग्रेजुएट, लेकिन बेरोजगार है आरोपी

    बंगलूरू का रहने वाला श्रीनिवास पोस्टग्रेजुएट है। फिलहाल बेरोजगार है और अपनी मां के साथ रहता है। उसकी मां रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं।
    शुरुआती जांच से लगता है कि वह शायद मानसिक तनाव से जूझ रहा था। अधिकारियों ने कहा कि उसने जान-बूझकर अदालतों और स्कूलों, कॉलेजों को निशाना बनाया, ताकि ज्यादा दहशत फैलाई जा सके।
    श्रीनिवास की इन झूठी धमकियों की वजह से सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े, कई जगहों से लोगों को बाहर निकालना पड़ा और कई संस्थानों का कामकाज भी ठप हो गया।

  • ईरान युद्ध का असर पाकिस्तान पर, स्कूल-कॉलेज बंद

    ईरान युद्ध का असर पाकिस्तान पर, स्कूल-कॉलेज बंद

    लाहौर। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने के बाद पाकिस्तान सरकार ने ईंधन बचाने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने घोषणा की है कि देश में स्कूल दो सप्ताह के लिए बंद रहेंगे, जबकि सरकारी दफ्तर अब सप्ताह में सिर्फ चार दिन ही खुलेंगे।

    समाचार एजेंसी Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा है कि ईंधन की खपत कम करने के लिए बैंकों को छोड़कर अधिकतर सरकारी कार्यालय सीमित दिनों में काम करेंगे। साथ ही उच्च शिक्षा संस्थानों की कक्षाएं फिलहाल ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएंगी।

    सरकारी दफ्तरों में आधा स्टाफ करेगा वर्क फ्रॉम होम

    सरकार के फैसले के अनुसार जरूरी सेवाओं को छोड़कर कई सरकारी विभागों में 50 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम करेंगे। इसके अलावा अगले दो महीनों के दौरान सरकारी विभागों को मिलने वाले ईंधन में भी 50 फीसदी कटौती करने का फैसला किया गया है।
    क्यों लेना पड़ा यह फैसला
    पाकिस्तान में ईंधन संकट का मुख्य कारण मध्य-पूर्व में बढ़ता युद्ध और Strait of Hormuz में बढ़ा तनाव बताया जा रहा है।

    इस समुद्री मार्ग से पाकिस्तान को तेल की बड़ी आपूर्ति मिलती है। क्षेत्रीय हालात बिगड़ने के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है और कीमतों में तेज उछाल आया है।

    सरकार ने शनिवार देर रात पेट्रोल की कीमतों में 55 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की, जिसे देश के इतिहास में सबसे बड़ी बढ़ोतरी माना जा रहा है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेट्रोलियम मंत्री Ali Pervaiz Malik, उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री Ishaq Dar और वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb भी मौजूद थे।

    डीज़ल भी हुआ महंगा
    सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, बल्कि हाई-स्पीड डीज़ल की कीमत में भी करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।

    डीज़ल की कीमत 280.86 पाकिस्तानी रुपये से बढ़ाकर 335.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।

    मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा कि पड़ोसी क्षेत्र में शुरू हुआ संघर्ष अब पूरे इलाके को प्रभावित कर रहा है और फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह संकट कब तक जारी रहेगा।

    सरकार का मानना है कि अगर ईंधन की खपत पर अभी नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले समय में आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है, इसलिए अस्थायी तौर पर ये कड़े कदम उठाए गए हैं।