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  • लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय सम्मान से चमका पतंजलि अनुसंधान संस्थान, वैज्ञानिक शोध ने बढ़ाया देश का मान

    लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय सम्मान से चमका पतंजलि अनुसंधान संस्थान, वैज्ञानिक शोध ने बढ़ाया देश का मान

    नई दिल्ली:   वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए पतंजलि अनुसंधान संस्थान को लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ है। संस्थान को Dr. P. D. Sethi National HPTLC Awards 2025 में प्राइवेट इंडस्ट्री कैटेगरी में प्रथम स्थान से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि आंवला (Phyllanthus emblica) के बीज तेल पर किए गए गहन वैज्ञानिक शोध के लिए प्रदान की गई है, जिसमें इसके एंटी-माइक्रोबियल और बायोफिल्म-रोधी गुणों को प्रमाणित किया गया है।

    संस्थान ने पिछले वर्ष भी इसी श्रेणी में यह सम्मान प्राप्त किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अनुसंधान की गुणवत्ता और निरंतरता दोनों में स्थिरता बनी हुई है। इस बार का शोध विशेष रूप से आंवला बीज तेल के औषधीय गुणों पर केंद्रित रहा, जिसमें यह पाया गया कि यह प्राकृतिक तेल कई प्रकार के सूक्ष्मजीवों के खिलाफ प्रभावी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है और बायोफिल्म निर्माण को रोकने में भी सहायक है। इस शोध को वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह प्राकृतिक संसाधनों के औषधीय उपयोग की नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है।

    इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक सम्मान नहीं है, बल्कि संस्थान के वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत, समर्पण और शोध के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य ऐसे शोध करना है जो समाज के लिए उपयोगी, सुरक्षित और प्रभावी समाधान प्रदान कर सकें। उनके अनुसार यह सम्मान उन सभी वैज्ञानिकों के समर्पण की पहचान है जो निरंतर मानव कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं।

    संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने बताया कि यह पुरस्कार देश में विश्लेषणात्मक रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध को पहचान देने वाला एक प्रतिष्ठित मंच है। लगातार दूसरी बार इस सम्मान का मिलना संस्थान की मजबूत वैज्ञानिक आधारशिला और अनुसंधान की गुणवत्ता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आंवला बीज तेल पर किए गए शोध को पहले भी विभिन्न वैज्ञानिक मंचों पर सराहा जा चुका है।

    संस्थान के अनुसार इन शोधों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली है और इन्हें वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया है, जिससे भारतीय पारंपरिक औषधीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    इस उपलब्धि के साथ पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारत में पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक का संगम वैश्विक स्तर पर नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

  • सीएम मोहन यादव करेंगे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन, उज्जैन बनेगा ग्लोबल टाइम सेंटर

    सीएम मोहन यादव करेंगे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन, उज्जैन बनेगा ग्लोबल टाइम सेंटर


    भोपाल । मध्यप्रदेश के उज्जैन में 3 अप्रैल से एक ऐतिहासिक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर का आयोजन होने जा रहा है, जहां विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ करेंगे। यह सम्मेलन 3 से 5 अप्रैल तक उज्जैन के समीप डोंगला डिजिटल प्लेनेटेरियम परिसर में आयोजित होगा।

    इस अवसर पर उज्जैन में नव-निर्मित साइंस सेंटर का भी लोकार्पण किया जाएगा, जो आधुनिक वैज्ञानिक सोच और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत से बने इस साइंस सेंटर में साइंस गैलरी, आउटडोर साइंस पार्क, इनोवेशन हॉल और हेरिटेज आधारित प्रदर्शनी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।

    सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन सहित देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और विचारक शामिल होंगे।

    उज्जैन, जिसे बाबा महाकाल और सम्राट विक्रमादित्य की नगरी के रूप में जाना जाता है, प्राचीन काल से खगोल विज्ञान और काल गणना का प्रमुख केंद्र रहा है। यही कारण है कि इस सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक स्पेस टेक्नोलॉजी के समन्वय पर विशेष चर्चा की जाएगी।

    तीन दिवसीय इस आयोजन में वैज्ञानिक, खगोलविद, शोधार्थी और नीति-निर्माता एक मंच पर आकर अंतरिक्ष विज्ञान, एस्ट्रोफिजिक्स, कॉस्मोलॉजी और स्पेस इकोनॉमी जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करेंगे। इसके साथ ही यूएवी तकनीक, सैटेलाइट निर्माण, रिमोट कंट्रोल सिस्टम और टेलीस्कोप से आकाशीय अध्ययन जैसी गतिविधियों पर कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।

    सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण उज्जैन-डोंगला को वैश्विक मेरिडियन के रूप में स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा है। डोंगला, जहां से कर्क रेखा गुजरती है, प्राचीन काल से खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। राज्य सरकार उज्जैन को फिर से वैश्विक टाइम स्केल सेंटर के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

    इस आयोजन में ISRO, CSIR, DRDO और नीति आयोग जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ भी भाग लेंगे। इसके अलावा टेक्नोलॉजी एक्सपो, स्टार्ट-अप कॉन्फ्रेंस, प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इस आयोजन का हिस्सा होंगे।

    उज्जैन का यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण को नई दिशा देगा, बल्कि युवाओं में नवाचार और तकनीकी कौशल को भी प्रोत्साहित करेगा। साथ ही, यह आयोजन आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को भी नई गति देने में सहायक साबित होगा। इस प्रकार ‘महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम’ सम्मेलन उज्जैन को एक बार फिर वैश्विक वैज्ञानिक मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।