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  • भीषण गर्मी के बीच जल्द दस्तक दे सकती है मॉनसून….. इस साल समय से पहले होगी एंट्री

    भीषण गर्मी के बीच जल्द दस्तक दे सकती है मॉनसून….. इस साल समय से पहले होगी एंट्री


    नई दिल्ली।
    केरल (Keral) में भारी बारिश (Heavy Rain) का दौर शुरू हो गया है। इससे संकेत मिलने लगे हैं कि भीषण गर्मी के बीच मॉनसून (Monsoon) की एंट्री जल्द ही हो सकती है। हालांकि, इसे लेकर IMD यानी भारत मौसम विज्ञान ने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है। अनुमान लगाया जा रहा था कि केरल में मॉनसून (Monsoon) 26 मई तक दस्तक दे सकता है। इधर, राजधानी दिल्ली (Delhi) अभी तीन दिन तपने के लिए तैयार है।


    कहां पहुंचा मॉनसन

    IMD ने रविवार रात जानकारी दी है कि अगले 2 से 3 दिनों के दौरान दक्षिण पश्चिम मॉनसून के अरब सागर के दक्षिण पश्चिम और दक्षिण पूर्व, कोमोरिन इलाके, दक्षिण पूर्व और पूर्व मध्य बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के बचे हुए हिस्सों में बढ़ने के लिए स्थिति अनुकूल है। हालांकि, केरल में मॉनसून पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है।


    केरल में येलो अलर्ट

    25 मई को पतनमतिट्टा, आलाप्पुझा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, मलप्पुरम, कोझिकोड और वायनाड में येलो अलर्ट जारी किया गया है। जबकि, इसके अगले दिन यानी 26 मई को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, आलाप्पुझा और एर्नाकुलम में अलर्ट है। 27 मई को केवल तीन जिलों तिरुवनंतपुरम, कोल्लम और आलाप्पुझा का नाम दिया गया है।

    अंत में 28 मई को तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पतनमतिट्टा, आलाप्पुझा, कोट्टायम, एर्नाकुलम और इडुक्की को इस सूची में शामिल किया गया है। मौसम विभाग ने मानसून के 26 मई को राज्य में दस्तक देने का अनुमान जताया है। विभाग ने 28 मई से तीन जून के बीच केरल के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश होने का भी अनुमान जताया है।


    देश की सबसे गर्म जगह

    कई राज्यों में रविवार को भीषण गर्मी पड़ी जिनमें से महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र का ब्रह्मपुरी 47.2 डिग्री सेल्सियस के साथ देश का सबसे गर्म स्थान रहा। हालांकि, मौसम विभाग ने 29 मई से गर्मी से धीरे-धीरे राहत मिलने का अनुमान लगाया है। आईएमडी ने अपने पूर्वानुमान में कहा, ‘अगले सात दिनों तक मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में तथा अगले 3-5 दिनों तक पूर्वी और उससे सटे प्रायद्वीपीय भारत में लू से लेकर भीषण लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है।’


    भयंकर गर्मी के आसार

    जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र ने लू की चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अगले तीन से चार दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम शुष्क रहने की संभावना है। यह भी अनुमान है कि 26 और 27 मई को पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में पारा 46-47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    हालांकि, आंध्र प्रदेश में मौसम की स्थिति इसके विपरीत है। कई जिलों में भीषण गर्मी पड़ रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में आने वाले दिनों में बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार को चेतावनी जारी की कि अगले तीन दिनों तक भीषण लू चलने की आशंका है।

  • उत्तर भारत भीषण गर्मी की चपेट में, आंधी-बारिश के बाद भी राहत नहीं…. तापमान 45 डिग्री के पार

    उत्तर भारत भीषण गर्मी की चपेट में, आंधी-बारिश के बाद भी राहत नहीं…. तापमान 45 डिग्री के पार


    नई दिल्ली।
    उत्तर-पश्चिम (North-West) और उसके आसपास के इलाकों में बारिश (Rain), अंधड़ और ओलावृष्टि (Thunderstorms) के बावजूद भीषण गर्मी (Extreme heat) से राहत नहीं मिली है। कई राज्यों के कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान 40-44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश के बांदा में यह 45.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पश्चिम से लेकर पूर्व, मध्य और दक्षिण भारत को तपती गर्मी से राहत मिलने की संभावना भी नजर नहीं आ रही है, क्योंकि आने वाले दिनों में इन राज्यों में आसमान से आग बरसने और लू चलने के आसार हैं। हालांकि, जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) से लेकर पूर्वी हिमालयी क्षेत्र अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) तक 12 राज्यों में अगले दो दिनों के दौरान गरज और चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, विदर्भ के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान 40-44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों, राजस्थान, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर भी यही स्थिति है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उत्तरपूर्वी भारत को छोड़कर देश के शेष हिस्सों में अधिकतम तापमान 36-40 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। सबसे अधिक तापमान बांदा में 44.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गयाा। विभाग के अनुसार, इस सप्ताह भारत के पूर्वी तट पर गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी व पश्चिमी राजस्थान, ओडिशा, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और विदर्भ के अलग-अलग क्षेत्रों में 21 अप्रैल तक लू चलने की पूरी संभावना है।

    दिल्ली में शुक्रवार को हुई बारिश ने चढ़ते तापमान पर ब्रेक लगा दिया था। वहीं, शनिवार को फिर सूर्यदेव ने अपने तेवर दिखाए। दिनभर तेज धूप के चलते लोगों को गर्मी का अहसास हुआ। इस दौरान अधिकतम तापमान 39.5 और न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री दर्ज हुआ। हालांकि, फरवरी और मार्च में दिन का तापमान 36 डिग्री सेल्सियस के पास जरूर पहुंचा था।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 19 से 24 अप्रैल के बीच तापमान में लगातार गर्मी बनी रहने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान लगभग 38 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच और न्यूनतम तापमान 20 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। शुरुआती दिनों यानी 19 से 21 अप्रैल तक आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है, जबकि हवा मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम दिशा से हल्की से मध्यम गति में चलेगी। इसके बाद 22 से 24 अप्रैल तक मौसम अधिकतर साफ रहने का अनुमान है।

    हिमाचल के ऊना में पारा 35 के पार
    हिमाचल प्रदेश के ऊना में शनिवार को अधिकतम तापमान 35.7 डिग्री दर्ज किया गया, जो प्रदेश में इस मौसम का सबसे अधिक तापमान है। ऊना के अलावा प्रदेश के छह जिलों बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर और कुल्लू में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहा। रविवार को भी प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में बारिश होने का पूर्वानुमान है। 20 अप्रैल से पूरे प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है। कुल्लू जिले के मणिकरण-बरशैनी मार्ग पर घटिगढ़ में बारिश के कारण हुए भीषण भूस्खलन से शनिवार सुबह कई वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

    राजस्थान के चूरू में पारा 42.8 डिग्री
    राजस्थान के कई हिस्सों में शनिवार को दिन का तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। चूरू राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.1 डिग्री अधिक था।

    ओडिशा में 15 जिलों में पारा 40 के पार…ओडिशा में भी प्रचंड गर्मी पड़ रही है और 15 जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है। बोलंगीर जिले का तितलागढ़ 42.7 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे गर्म स्थान रहा, इसके बाद झारसुगुड़ा में 42.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इनके अलावा,40 डिग्री से ऊपर तापमान वाले जिलों में भवानीपटना, संबलपुर, नुआपड़ा, तालच, सुंदरगढ़, अंगुल, क्योंझार और मलकानगिरी भी शामिल थे।

  • फागुन में सिमटती गंगा से बढ़ी चिंता, बिहार में भीषण गर्मी और जल संकट के संकेत

    फागुन में सिमटती गंगा से बढ़ी चिंता, बिहार में भीषण गर्मी और जल संकट के संकेत


    नई दिल्ली ।बिहार में इस बार गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। फागुन के महीने में ही गंगा का जलस्तर घटने लगा है जिससे आने वाले महीनों में भीषण गर्मी और संभावित जल संकट की आशंका गहरा गई है। आमतौर पर वैशाख और जेठ में गंगा की धारा सिमटती है लेकिन इस वर्ष फरवरी में ही शहरी इलाकों से नदी काफी दूर चली गई है। यह बदलाव सामान्य मौसमी चक्र से अलग माना जा रहा है और विशेषज्ञ इसे गंभीर संकेत के रूप में देख रहे हैं।

    भागलपुर के बरारी स्थित इंटकवेल की स्थिति हालात की गवाही दे रही है। वर्ष 2025 की फरवरी में जिस स्थान से गंगा की धारा से पानी मिल रहा था इस बार वहां से करीब 100 फीट आगे तक अतिरिक्त पाइप लगाकर पानी लेना पड़ रहा है। यानी नदी की धारा पीछे हट चुकी है। इंटकवेल प्रबंधन ने आगे और जलस्तर गिरने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त पाइप मंगाने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि शहर की पेयजल आपूर्ति बाधित न हो।

    गर्मी के प्रारंभिक संकेत केवल नदी तक सीमित नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मवेशियों को सामान्य से अधिक प्यास लगना और भूख कम होना भी तापमान में संभावित वृद्धि का संकेत माना जा रहा है। यदि मार्च और अप्रैल में वर्षा सामान्य से कम रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं। ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

    संभावित पानी संकट को लेकर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग पीएचईडी विशेष सतर्कता बरत रहा है। विभागीय अभियंताओं से सभी क्षेत्रों के ग्राउंड वाटर लेवल की रिपोर्ट मांगी गई है। कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार ने जूनियर इंजीनियरों को साप्ताहिक अवलोकन के निर्देश दिए हैं ताकि भूजल स्तर में गिरावट की नियमित निगरानी की जा सके और जरूरत पड़ने पर सरकार से समय रहते मदद ली जा सके।

    इधर केंद्रीय भूमि जल बोर्ड सीजीडब्ल्यूबी की प्री मानसून बुलेटिन ने भी चिंता बढ़ा दी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार जनवरी फरवरी में की गई ग्राउंड सुपरविजन के दौरान भागलपुर समेत गंगा किनारे बसे शहरों और गांवों में भूजल स्तर गिरने की पुष्टि हुई है। सीजीडब्ल्यूबी ने सभी प्रखंडों का जलस्तर रिकॉर्ड किया है और विस्तृत रिपोर्ट मई जून में प्रकाशित की जाएगी। प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि भूजल भंडार पर दबाव बढ़ रहा है।

    गंगा से सटे जिलों के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। बक्सर में भूजल स्तर 56138.3 से घटकर 30318.55 हेक्टेयर मीटर हो गया है। पटना में यह 98219.10 से घटकर 37595.63 लखीसराय में 37503.18 से 26462.36 और बेगूसराय में 50675.69 से घटकर 15692.38 हेक्टेयर मीटर रह गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वर्षा जल संचयन भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण के ठोस उपाय नहीं किए गए तो आने वाले महीनों में पेयजल संकट गहरा सकता है। फिलहाल प्रशासन सतर्क है लेकिन फागुन में ही सिमटती गंगा यह संकेत दे रही है कि इस बार की गर्मी सामान्य नहीं रहने वाली।