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  • पंधाना एसडीएम दीक्षा भगोरे हटाई गई, 1400 जाति प्रमाण-पत्र रिजेक्ट और सरकारी जमीनों पर कब्जे के आरोप

    पंधाना एसडीएम दीक्षा भगोरे हटाई गई, 1400 जाति प्रमाण-पत्र रिजेक्ट और सरकारी जमीनों पर कब्जे के आरोप


    खंडवा। कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने बुधवार को डिप्टी कलेक्टर दीक्षा भगोरे को पंधाना एसडीएम पद से हटा दिया है। उन्हें अब कलेक्ट्रेट कार्यालय में निर्वाचन शाखा सहित अन्य जिम्मेदारियां दी गई हैं। प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, भगोरे के खिलाफ शिकायतों की लंबी फेहरिस्त है, जिसमें सरकारी जमीनों पर कब्जा कराना, जाति प्रमाण-पत्र आवेदन रिजेक्ट करना और प्रशासनिक लापरवाही शामिल हैं।

    स्थानीय नेताओं ने कहा कि दीक्षा भगोरे के एसडीएम कार्यकाल की पूरी जांच होना चाहिए। इसके लिए वे भोपाल जाकर मुख्य सचिव से मिलकर औपचारिक जांच की मांग करेंगे।

    जानकारी के अनुसार, भगोरे के रहते हुए बोरगांव बुजुर्ग और आसपास की बेशकीमती सरकारी जमीनों पर कब्जे हुए। आरोप है कि इसमें पूर्व विधायक के करीबी शामिल थे। शिकायतों के बावजूद एसडीएम ने कोई कार्रवाई नहीं की।

    साथ ही, जाति प्रमाण-पत्र के लगभग 1400 आवेदन बिना किसी वजह रिजेक्ट किए गए। जिन्होंने इसके खिलाफ अपील की, उनके प्रमाण-पत्र जारी किए गए। कई आवेदकों से कहा गया कि विधायक की अनुशंसा लेकर आएं, तभी प्रमाण-पत्र बनेगा। यह प्रक्रिया प्रशासनिक अनियमितता और लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है।

    स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि दीक्षा भगोरे ने धारा 151 के अपराधियों को जमानत देने में धांधली की। स्टाफ ने कथित रूप से अपराधियों से पैसे लेकर जमानत दी और कहा कि यह एसडीएम के निर्देशानुसार किया गया।

    पंधाना विधायक छाया मोरे की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई। उनकी जगह अब पूर्व डिप्टी कलेक्टर दिनेश सांवले को एसडीएम का चार्ज दिया गया है।

    इस पूरे कार्यकाल के दौरान दीक्षा भगोरे की प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी जमीनों की सुरक्षा पर सवाल उठते रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका प्रशासनिक दृष्टिकोण कमजोर रहा और जनहित के मामलों में उन्होंने पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।

    सूत्रों के अनुसार, जब मीडिया ने एसडीएम दीक्षा भगोरे से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। अब इस मामले की जांच के लिए मुख्य सचिव से शिकायत कर औपचारिक जांच की मांग की जाएगी।

    यह कदम प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित

    जबलपुर में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा फैसला: एलपीजी संचालित वाहनों में स्कूल बच्चों का सफर प्रतिबंधित



    नई दिल्ली। जबलपुर प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2026 से जिले में किसी भी एलपीजी से संचालित वाहन में स्कूली बच्चे सफर नहीं कर सकेंगे। इस आदेश का उद्देश्य स्कूल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।

    कलेक्टर ने स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिकों को निर्देश दिए हैं कि वे 1 अप्रैल से पहले अपने वाहनों की व्यवस्था वैकल्पिक और कानूनी रूप से मान्य वाहनों के माध्यम से करें। यदि तय समय के बाद भी कोई एलपीजी वाहन बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए इस्तेमाल किया गया, तो प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत वाहन मालिक, स्कूल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

    जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निगरानी और पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (RTO) को आदेशित किया गया है कि वे स्कूल वाहनों का सत्यापन करें और एलपीजी वाहन संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें। इसके साथ ही सभी एसडीएमों को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि जिले में कोई भी एलपीजी वाहन बच्चों को ले जाने के लिए इस्तेमाल न हो।

    पुलिस अधिकारियों को स्कूल समय के दौरान आकस्मिक निरीक्षण करने और किसी भी उल्लंघन की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रशासन इसकी अनदेखी नहीं करेगा।

    जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के माध्यम से सभी स्कूल प्रबंधन को इस आदेश की जानकारी दी जाएगी। स्कूल संचालकों से कहा गया है कि वे इस आदेश का पालन सुनिश्चित करें और अपने वाहन संचालन की व्यवस्था तुरंत बदलें। डीईओ को यह भी निर्देशित किया गया है कि वे स्कूलों में इस नियम के पालन की निगरानी करें और किसी भी तरह की लापरवाही की स्थिति में कड़ी कार्रवाई करें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि गैस लीक, आग और तकनीकी खामियों के कारण हादसों की संभावना बढ़ जाती है। इस आदेश के माध्यम से प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय किए जाएं।

    कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। सभी स्कूल प्रबंधन और वाहन मालिक 1 अप्रैल तक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।”

    इस आदेश से जबलपुर जिले के स्कूल परिवहन में एक बड़ा बदलाव आएगा और यह बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए राहत का संदेश लेकर आएगा। जिले में सभी अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एलपीजी वाहन में बच्चों का सफर पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।

  • भोपाल में पराली जलाने पर सख्ती: कलेक्टर ने बैरसिया दौरे में किसानों को दी समझाइश

    भोपाल में पराली जलाने पर सख्ती: कलेक्टर ने बैरसिया दौरे में किसानों को दी समझाइश


    भोपाल। प्रदेश में पराली जलाने वालों पर प्रशासन की सख्ती बढ़ने वाली है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने यह संकेत शुक्रवार को बैरसिया के दौरे के दौरान दिए। उन्होंने एसडीएम आशुतोष शर्मा को निर्देश दिए कि गेहूं और चने की कटाई के बाद कृषि विभाग के साथ गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करें। किसानों को बताया जाए कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण फैलता है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कम होती है।

    कलेक्टर ने बैरसिया तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालय का निरीक्षण किया और कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति पर असंतोष जताया और तहसीलदार को निर्देश दिए कि ग्रामवार कार्यक्रम बनाकर पटवारियों को सक्रिय किया जाए ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके।

    कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के समय पर निराकरण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन से जुड़े प्रकरणों का समय सीमा में शत-प्रतिशत निपटारा किया जाए और बैरसिया तहसील का प्रदर्शन राज्य औसत से कम न हो।

    दौरे के दौरान कलेक्टर ने नगर पालिका बैरसिया के विकास कार्यों की भी समीक्षा की। प्रभारी सीएमओ ने जानकारी दी कि नगर में अमृत 2.0 और कायाकल्प योजना के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्य जारी हैं। कलेक्टर ने बसई तालाब के पास माड़ा इमली क्षेत्र और तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तालाब की जल ग्रहण क्षमता बढ़ाने के प्रयास किए जाएं और जलग्रहण क्षेत्र में अतिक्रमण हटाया जाए, ताकि वर्षा ऋतु में तालाब अपनी पूरी क्षमता के अनुसार जल संचय कर सके।

    इस अवसर पर एसडीएम शर्मा ने अपने कार्यालय परिसर में विकसित पार्क का भी निरीक्षण कराया, जिसमें फूल, फल और छायादार पौधे लगाए गए हैं। इसे देखकर कलेक्टर ने प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इस तरह के पहल से स्थानीय पर्यावरण और हरियाली बढ़ेगी।

    कलेक्टर का यह दौरा यह संदेश देता है कि कृषि और नगर विकास दोनों क्षेत्रों में सरकारी सक्रियता जारी रहेगी। किसानों को पर्यावरणीय दृष्टि से जागरूक करना, तालाबों और जल स्रोतों का संरक्षण, और स्थानीय विकास परियोजनाओं का समय पर निरीक्षण प्रशासन की प्राथमिकता बनेगा।

  • मुख्यमंत्री से कराया जनपद भवन का भूमिपूजन, भवन निर्माण के लिए जमीन की तलाश जारी, SDM ने किया विवाद खारिज

    मुख्यमंत्री से कराया जनपद भवन का भूमिपूजन, भवन निर्माण के लिए जमीन की तलाश जारी, SDM ने किया विवाद खारिज


    उज्जैन। उज्जैन के खाचरौद में नए बनने वाले जनपद भवन का भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2 जनवरी 2026 को किया। इस दौरान अधिकारियों ने 5.25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भवन का भूमि पूजन मुख्यमंत्री के हाथों करवा दिया। लेकिन इस महत्वपूर्ण खबर में एक चौंकाने वाली बात सामने आई कि भवन के लिए आवश्यक जमीन पूरी तरह से उपलब्ध नहीं थी, जिससे निर्माण प्रक्रिया और योजना को लेकर सवाल उठने लगे।

    जनपद अध्यक्ष पृथ्वीराज सिंह ने मामले की शिकायत कलेक्टर और कमिश्नर से की। अध्यक्ष का आरोप था कि नए भवन निर्माण के लिए 2 एकड़ भूमि की जरूरत है, लेकिन जिस जमीन (सर्वे क्रमांक 984) पर तहसील और एसडीएम कार्यालय बन रहे हैं, वहां पर्याप्त जगह नहीं बची।

    इसके कारण अब नए जनपद भवन के निर्माण के लिए पांच किलोमीटर दूर अतिरिक्त जमीन तलाशने की स्थिति बन गई।

    इस मुद्दे पर SDM खाचरौद, नेहा साहू ने बयान दिया कि अधिकारियों को पर्याप्त जमीन उपलब्ध है और विवादित जानकारी गलत तरीके से फैल रही है। उन्होंने जनपद अध्यक्ष को ऑनलाइन आवेदन कर सही भूमि निर्धारित करने का विकल्प भी दिया।

    जानकारी के मुताबिक, जनपद भवन और तहसील कार्यालय दोनों के निर्माण का उद्देश्य स्थानीय प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक और सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करना है।

    अधिकारियों की योजना के अनुसार नई इमारत में जनपद स्तर की सभी सुविधाएं मौजूद होंगी, लेकिन जमीन की सही व्यवस्था को लेकर अभी स्पष्टता जरूरी है।

    यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जनपद के विकास और सरकारी सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए भवन निर्माण और भूमि का सही प्रबंधन अहम है। वहीं, अधिकारियों ने भी कहा है कि परियोजना की समीक्षा के दौरान सभी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है और जल्द ही निर्माण कार्य सुचारू रूप से शुरू किया जाएगा।

    इस घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन और अधिकारियों के बीच जमीन आवंटन और योजना कार्यान्वयन में पारदर्शिता की
    आवश्यकता को उजागर किया है। जनता की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस समस्या का स्थायी और शीघ्र समाधान कैसे करेगा।

  • MP: सतना में हो रहा था खून का काला कारोबार, SDM ने फिल्मी अंदाज में स्टिंग कर 3 को दबोचा

    MP: सतना में हो रहा था खून का काला कारोबार, SDM ने फिल्मी अंदाज में स्टिंग कर 3 को दबोचा


    सतना।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना जिला अस्पताल (Satna District Hospital) की साख तार-तार हो चुकी है। एक तरफ अस्पताल के भीतर दिल्ली और भोपाल की टीमें थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों (Thalassemia Children) को HIV संक्रमित खून चढ़ाए जाने के मामले की फाइलें खंगाल रही हैं, तो दूसरी तरफ अस्पताल के गेट पर ही खून के सौदागर इंसानी मजबूरी का फायदा उठाकर 5000 रुपए में खून बेच रहे हैं। गुरुवार को प्रशासन ने इस ‘काले खेल’ का पर्दाफाश करने के लिए बिल्कुल फिल्मी अंदाज में जाल बिछाया। एसडीएम सिटी राहुल सिलाड़िया (SDM City Rahul Siladia) और कोतवाली टीआई रावेंद्र द्विवेदी (TI Ravindra Dwivedi) ने एक सुनियोजित स्टिंग ऑपरेशन कर खून की दलाली करने वाले 3 लोगों को रंगे हाथों दबोच लिया।


    नोटों के नंबर नोट किए, वीडियो बनाया और भेजा ‘नकली ग्राहक’

    दलालों को रंगे हाथ पकड़ने के लिए एसडीएम ने पुख्ता सबूत तैयार किए थे। इसके लिए उन्होंने 500, 200 और 100 के नोटों से 4500 रुपए की एक गड्डी तैयार की और इन सभी नोटों के सीरियल नंबर पहले से एक रजिस्टर में दर्ज कर लिए। सबूत के तौर पर नोटों का टाइम स्टैम्प वाला एक वीडियो भी बनाया गया, फिर एक व्यक्ति को ‘नकली ग्राहक’ बनाकर खून खरीदने भेजा गया।

    ग्राहक के रूप में पहुंचे शख्स ने जैसे ही दलाल को पैसे दिए और दलाल ने उससे कहा कि डोनर आ रहा है, वैसे ही इशारा मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम ने धावा बोल दिया। दलाल की जेब की तलाशी लेने पर वही चिन्हित नोट बरामद हुए, जिनका नंबर प्रशासन ने पहले से नोट कर रखा था।


    ऐसे चल रहा था नेटवर्क

    इस कार्रवाई ने अस्पताल परिसर के बाहर चल रहे खून के अवैध धंधे की पोल खोल दी है। जांच में सामने आया कि अस्पताल के ठीक सामने मौजूद चाय की टपरियों और फलों के ठेलों पर ये दलाल बैठे रहते थे। मरीज के परेशान परिजनों को देखते ही ये उन्हें घेर लेते थे और ब्लड दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे। पुलिस ने मौके से तीन दलालों को गिरफ्तार किया है, इसमें रजनीश साहू (निवासी करसरा), मोहम्मद कैफ (निवासी कामता टोला), अनिल गुप्ता (निवासी टिकुरिया टोला) शामिल हैं।


    एसडीएम ने किया पर्दाफाश

    इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए एसडीएम राहुल सिलाड़िया ने बताया कि हमें ब्लड की दलाली की सूचना मिली थी। इस पर हमने योजना बनाकर कुछ नोटों को चिन्हित किया और उनका वीडियो रिकॉर्ड कर एक व्यक्ति को ग्राहक बनाकर भेज दिया। अस्पताल के सामने खड़े फल के ठेले पर मिले एक दलाल ने बदले में 4500 रुपए की मांग की। जैसे ही दलाल ने पैसे लिए, हमने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी के पास से वही चिन्हित नोट बरामद हुए हैं। इससे साफ है कि दुकानों की आड़ में खून का अवैध कारोबार चल रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।


    अंदर से कौन कर रहा है मदद?

    सूत्रों के मुताबिक अस्पताल के भीतर की मिलीभगत के बिना यह रैकेट चलना नामुमकिन है। बड़ा सवाल यह है कि दलाल बाहर पैसा ले रहा है, तो अंदर से ब्लड या डोनर कौन मैनेज कर रहा है? क्या ब्लड बैंक का कोई कर्मचारी इस सिंडिकेट का हिस्सा है? फिलहाल पुलिस आरोपियों से कड़ी पूछताछ करते हुए इन सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश कर रही है।