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  • सतना में उफनती तुर्री नदी पार करते समय चाचा-भतीजे बहे, ग्रामीणों ने भतीजे को बचाया, 50 वर्षीय चाचा लापता

    सतना में उफनती तुर्री नदी पार करते समय चाचा-भतीजे बहे, ग्रामीणों ने भतीजे को बचाया, 50 वर्षीय चाचा लापता

    मध्य प्रदेश: के सतना जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। इसी बीच जैतवारा थाना क्षेत्र में शनिवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। तुर्री नदी का उफनता पुल पार करने की कोशिश में मोटरसाइकिल सवार चाचा-भतीजे तेज बहाव में बह गए। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए भतीजे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन 50 वर्षीय रामचेरे वर्मा पानी के तेज बहाव में लापता हो गए। उनकी तलाश के लिए रविवार सुबह से बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक, सतना जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। इसके चलते क्षेत्र की नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कई स्थानों पर पानी तेज गति से बह रहा है। इसी दौरान शनिवार शाम करीब छह बजे रामचेरे वर्मा अपने भतीजे के साथ मोटरसाइकिल से नयागांव-सभापुर की ओर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें तुर्री नदी का पुल पार करना था, जहां पानी पुल के काफी ऊपर से बह रहा था।

    पुल के पास मौजूद ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों ने चाचा-भतीजे को उफनती नदी पार करने से रोकने की कोशिश की। लोगों ने उन्हें तेज बहाव और पानी के बढ़े हुए स्तर को देखते हुए आगे नहीं बढ़ने की सलाह दी। इसके बावजूद दोनों मोटरसाइकिल लेकर पुल पार करने के लिए नदी में उतर गए।

    बताया जा रहा है कि जैसे ही वे आगे बढ़े, पानी के तेज बहाव के कारण उनका संतुलन बिगड़ गया। इसके बाद मोटरसाइकिल समेत दोनों नदी के बहाव में बहने लगे। घटना को देखकर आसपास मौजूद ग्रामीण तत्काल मदद के लिए आगे आए। लोगों ने दोनों को बचाने का प्रयास किया और इस दौरान भतीजे को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता मिली। हालांकि, रामचेरे वर्मा तेज बहाव की चपेट में आकर दूर तक बह गए और लापता हो गए।

    हादसे की सूचना मिलते ही जैतवारा थाना प्रभारी पंकज शुक्ला पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस और स्थानीय लोगों ने लापता व्यक्ति की तलाश के प्रयास किए, लेकिन शनिवार रात खराब मौसम और अत्यधिक अंधेरा होने के कारण बचाव अभियान शुरू नहीं किया जा सका। नदी में पानी का बहाव तेज होने के चलते रात के समय तलाशी अभियान चलाना भी चुनौतीपूर्ण था।

    रविवार सुबह राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम ने नदी में तलाशी अभियान शुरू किया। बचाव दल बोट और गोताखोरों की मदद से रामचेरे वर्मा की तलाश कर रहा है। नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है और बहाव भी तेज है, इसलिए टीम पूरी सावधानी के साथ अभियान चला रही है।

    घटनास्थल पर एसडीएम लोकेश कुमार जांगड़े, पुलिस प्रशासन की टीम, लापता व्यक्ति के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं। सभी की नजरें बचाव अभियान पर टिकी हुई हैं। फिलहाल रामचेरे वर्मा का पता नहीं चल पाया है और उनकी तलाश जारी है।

    लगातार बारिश के कारण सतना जिले में नदियों के उफान पर होने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। तुर्री नदी की इस घटना ने तेज बहाव के बीच पुल पार करने के जोखिम को एक बार फिर सामने ला दिया है। प्रशासन और बचाव दल लापता व्यक्ति की तलाश में जुटे हैं।

  • मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश में बारिश के बीच मुख्यमंत्री ने लिया आपदा प्रबंधन का जायजा, एसडीआरएफ एनडीआरएफ की मुस्तैदी पर जताया संतोष

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश और कई क्षेत्रों में अतिवृष्टि की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को भोपाल स्थित होमगार्ड कार्यालय के एसडीआरएफ स्टेट कमांड सेंटर का दौरा किया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रदेश में बारिश से उत्पन्न परिस्थितियों, संभावित बाढ़ और राहत एवं बचाव अभियानों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और बचाव दलों की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कमांड सेंटर से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में आपदा प्रबंधन की स्थिति का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों और संबंधित टीमों से प्रभावित इलाकों की जानकारी ली तथा राहत कार्यों की लगातार निगरानी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने बचाव एवं राहत अभियान में जुटे personnel से संवाद भी किया और उनके कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

    डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल बारिश का दौर जारी है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश की आवश्यकता पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि लगातार वर्षा के कारण निचले इलाकों में पानी भरने जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं, जिससे नागरिकों के साथ-साथ पशुधन के लिए भी चुनौती उत्पन्न हो सकती है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक महीने के दौरान एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने मिलकर 2783 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। अचानक आई बाढ़ और जलभराव जैसी परिस्थितियों में इन टीमों की तत्परता से कई लोगों और मवेशियों को बचाने में मदद मिली है।

    उन्होंने कहा कि पिछले दो से चार दिनों में प्रदेश में ऐसी कोई गंभीर आपात स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन बचाव दलों को लगातार सतर्क रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की स्थिति में कुछ ही समय के भीतर पानी का स्तर बढ़ने से निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है। ऐसे में प्रशासन, पुलिस और बचाव दलों की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण हो जाती है।

    डॉ. यादव ने आपदा प्रबंधन में पुलिस और बचाव दलों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवानों ने अचानक आई बाढ़ जैसी परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए नागरिकों और पशुधन की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राज्य सरकार का प्रयास है कि संकट की स्थिति में प्रभावित लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाई जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश का मौसम अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले कुछ दिनों में भी वर्षा की संभावना बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए।

    इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से सीधा संवाद भी किया और वहां की परिस्थितियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं पर तत्काल प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए। सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा तथा किसी भी संभावित आपदा में जान-माल के नुकसान को न्यूनतम रखना है।

  • एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    एमपी में बारिश के बीच NDRF-SDRF तैनात, अचानक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

    मध्य प्रदेश: में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन और राहत व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में इन दिनों बारिश दर्ज की जा रही है। पश्चिमी मध्य प्रदेश को छोड़कर कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश हुई है। मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की टीमों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों के साथ तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में संभावित जलभराव, अचानक बाढ़ और अन्य आपदा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए राहत एवं बचाव व्यवस्था पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में प्रभावित लोगों तक राहत और सहायता तेजी से पहुंचाई जा सके।

    सरकार के अनुसार, पिछले एक महीने के दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़ी राहत और बचाव टीमों ने 2,783 से अधिक लोगों को विभिन्न परिस्थितियों में सुरक्षित बाहर निकाला है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई इलाकों में जलस्तर बढ़ने और आवागमन प्रभावित होने जैसी स्थितियां बनी हैं। ऐसे में राहत दलों को जरूरत के अनुसार तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखा गया है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अब तक बारिश के कारण प्रदेश में जान-माल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में पुलिस और संबंधित टीमों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। उनका जोर इस बात पर रहा कि मौसम की स्थिति अचानक बदलने पर प्रशासन के पास तत्काल प्रतिक्रिया देने की क्षमता बनी रहे।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो से चार दिनों के दौरान किसी बड़ी परेशानी की आशंका नहीं बताई गई है। इसके बावजूद सरकार ने एहतियाती स्तर पर तैयारियों को मजबूत रखने का फैसला किया है। खासतौर पर निचले इलाकों, जलभराव वाले क्षेत्रों और ऐसे स्थानों पर निगरानी बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है, जहां अचानक पानी बढ़ने की संभावना रहती है।

    NDRF और SDRF की टीमें जरूरत के अनुसार राहत और बचाव अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रखने का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। प्रशासन की ओर से स्थानीय स्तर पर भी संसाधनों और राहत व्यवस्थाओं को तैयार रखने पर जोर दिया गया है।

    बारिश के दौरान नदी-नालों और जलाशयों के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय है। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में लोगों को समय पर चेतावनी देने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली आकस्मिक परिस्थितियों को देखते हुए राहत दलों को सक्रिय रखा गया है। मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद प्रशासनिक मशीनरी को मौसम से जुड़े बदलावों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

    राज्य में मानसून के दौरान हर वर्ष अलग-अलग क्षेत्रों में अतिवृष्टि, जलभराव और अचानक बाढ़ जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं। ऐसे में पहले से की गई तैयारी नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य से सरकार ने राहत एवं बचाव दलों की तैनाती, अधिकारियों के समन्वय और स्थानीय स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बारिश के दौरान लोगों की सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाना है।

  • बरसात से पहले अलर्ट मोड में जबलपुर: आपदा प्रबंधन ट्रेनिंग में 51 जवानों को मिला रेस्क्यू अभ्यास

    बरसात से पहले अलर्ट मोड में जबलपुर: आपदा प्रबंधन ट्रेनिंग में 51 जवानों को मिला रेस्क्यू अभ्यास


    नई दिल्ली । बरसात के मौसम में संभावित बाढ़ और जल आपदाओं से निपटने के लिए मध्यप्रदेश होमगार्ड विभाग ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। भोपाल मुख्यालय के निर्देश पर जबलपुर संभाग में चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जवानों को आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू ऑपरेशन की बारीकियां सिखाई गईं।
    यह प्रशिक्षण जबलपुर के प्रसिद्ध गौरीघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी के किनारे आयोजित किया गया, जहां जवानों को वास्तविक परिस्थितियों में अभ्यास कराया गया। 7 मई से 9 मई तक चले इस प्रशिक्षण में कुल 51 होमगार्ड जवानों ने हिस्सा लिया, जो जबलपुर, कटनी, मंडला और नरसिंहपुर जैसे जिलों से चयनित किए गए थे।
    बाढ़ और जल आपदा से निपटने का व्यावहारिक अभ्यास
    प्रशिक्षण के दौरान जवानों को तेज बहाव वाली नदी में सुरक्षित तैरने, फंसे हुए लोगों को निकालने और आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन रक्षा तकनीकों का अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही उन्हें यह भी सिखाया गया कि आपदा के समय कैसे तेजी और सावधानी के साथ राहत कार्य किया जाए।
    जवानों को आधुनिक रेस्क्यू उपकरणों के उपयोग की भी जानकारी दी गई। इसमें बोट संचालन, चप्पू और ओअर का सही उपयोग, तथा आउटबोर्ड मोटर (OBM) हैंडलिंग जैसी महत्वपूर्ण तकनीकें शामिल थीं। इन अभ्यासों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी आपदा की स्थिति में टीम तेजी से और प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर सके।
    SDRF की टीम भी रही शामिल
    इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के जवानों ने भी हिस्सा लिया, जिससे प्रशिक्षण और अधिक प्रभावी बन गया। विशेषज्ञों की निगरानी में जवानों को वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया।
    डिवीजनल कमांडेंट और जिला सेनानी व प्रशिक्षण प्रभारी नीरज सिंह ठाकुर की देखरेख में यह पूरा प्रशिक्षण संपन्न हुआ। अधिकारियों के अनुसार इस तरह के अभ्यास से जवानों की क्षमता बढ़ती है और आपदा के समय राहत कार्यों में तेजी आती है।
    मानसून से पहले तैयारी तेज
    मौसम विभाग द्वारा मानसून के सामान्य रहने के अनुमान के बीच प्रशासन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहता है। इसी के तहत प्रदेशभर में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जा रहे हैं।