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  • यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे पर पेच, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर नहीं बन रही सहमति

    यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे पर पेच, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर नहीं बन रही सहमति


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत तेज हो गई है, लेकिन दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या को लेकर अभी सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस 100 से ज्यादा सीटों पर दावा कर रही है, जबकि सपा का जोर सीटों की संख्या के बजाय उम्मीदवार की मजबूती और संबंधित सीट पर जीत की संभावनाओं पर है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सपा करीब 60 से 70 सीटों के विकल्प पर विचार कर रही है, जबकि कांग्रेस करीब 105 सीटों की मांग कर रही है।

    2017 के फॉर्मूले को आधार बना रही कांग्रेस

    कांग्रेस की दलील है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन के तहत उसने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसी आधार पर पार्टी इस बार भी 100 से अधिक सीटों की हिस्सेदारी चाह रही है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी जुलाई में गठबंधन में ‘बराबरी और सम्मान’ की बात कही थी।

    हालांकि, 2017 के मुकाबले मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं। 2022 में सपा ने 111 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर सिमट गई थी। यही वजह है कि सीटों के बंटवारे में पिछली बार के आंकड़े के बजाय मौजूदा संगठन और उम्मीदवारों की स्थिति को भी महत्व दिया जा रहा है।

    सपा का फोकस ‘कितनी सीटें’ नहीं, ‘कौन जीत सकता है’

    अखिलेश यादव पहले ही कह चुके हैं कि गठबंधन में मुद्दा सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीतने की क्षमता है। सपा के भीतर सीटवार राजनीतिक स्थिति और संभावित उम्मीदवारों के आधार पर हिस्सेदारी तय करने की बात कही जा रही है।

    ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस से उन सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की जानकारी भी मांगी जा रही है, जिन पर वह दावा कर रही है। इसके बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरण, संगठन की स्थिति और उम्मीदवार की जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर सीटों पर फैसला किए जाने की बात सामने आई है।

    रायबरेली-अमेठी समेत कई सीटों पर खींचतान

    सीटों की कुल संख्या के अलावा कुछ खास विधानसभा क्षेत्रों को लेकर भी दोनों दलों के बीच मतभेद की खबरें हैं। रिपोर्टों में रायबरेली और अमेठी का नाम प्रमुखता से सामने आया है। अंतिम फॉर्मूला तय होने से पहले सीटवार दावों पर बातचीत जारी है।

    कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की छह सीटें जीती थीं, जबकि सपा ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। दोनों दलों ने मिलकर राज्य की 80 लोकसभा सीटों में 43 सीटें जीती थीं।

    2022 में अलग-अलग लड़े थे दोनों दल

    2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस अलग-अलग चुनाव मैदान में उतरे थे। सपा ने 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें मिली थीं। सपा के साथ तब राष्ट्रीय लोक दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी जैसे दल भी गठबंधन में थे। बाद में दोनों दल सपा से अलग हो गए।

    अब 2027 के चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस फिर साथ आने की दिशा में बातचीत कर रहे हैं। ऐसे में दोनों दलों के सामने सीटों की संख्या के साथ-साथ यह सवाल भी है कि किन क्षेत्रों में किस पार्टी का संगठन और उम्मीदवार गठबंधन के लिए ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

    राजभर-निषाद को लेकर भी सपा ने रुख स्पष्ट किया

    इसी बीच सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद को लेकर भी राजनीतिक अटकलें चलती रही हैं। दोनों नेता उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में मंत्री हैं और उनके दल एनडीए का हिस्सा हैं।

    आपकी मूल कॉपी में सपा के एक रणनीतिकार के हवाले से दावा किया गया है कि पार्टी ने पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सुभासपा या निषाद पार्टी से गठजोड़ का प्रस्ताव लाने पर संगठनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं होती, इसलिए इसे सपा सूत्र/रणनीतिकार के दावे के रूप में ही प्रकाशित करना सुरक्षित होगा।

    फिलहाल सपा-कांग्रेस के बीच बातचीत का अंतिम नतीजा सामने नहीं आया है। सीटों की संख्या के साथ-साथ विधानसभा क्षेत्रवार दावों और संभावित उम्मीदवारों पर सहमति बनने के बाद ही गठबंधन का वास्तविक फॉर्मूला स्पष्ट होगा।

  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की 45 सीट की मांग, DMK केवल 25 सीट देने को तैयार

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की 45 सीट की मांग, DMK केवल 25 सीट देने को तैयार


    नई दिल्ली। आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम DMK से 45 सीटों की मांग की है जबकि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी इस बार भी पिछले चुनाव की तरह केवल 25 सीट देने को तैयार है। इस साल अप्रैल मई में राज्य में चुनाव होने की संभावना है।

    कांग्रेस ने बढ़ाई मांग
    कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और अन्य नेताओं ने सीट बंटवारे को लेकर स्टालिन से चर्चा की लेकिन अभी तक कोई सहमति नहीं बनी है। कांग्रेस का तर्क है कि 2021 के चुनाव परिणामों की समीक्षा के आधार पर उन्हें अधिक सीटें मिलनी चाहिए।

    स्रोतों के अनुसार पिछले चुनाव में DMK ने कुल 234 सीटों में से 173 पर चुनाव लड़ा जिसमें 133 जीत और 40 हार मिली। अधिकांश हार AIADMK और बीजेपी से हुई थी।

    कांग्रेस का मानना है कि अगर उन्हें अधिक सीटें दी जाएं तो पिछली बार हारी हुई कम से कम 20 सीटें जीती जा सकती हैं। पार्टी के सूत्रों ने कहा कि 45 सीट की मांग का उद्देश्य जीत की संभावनाओं में सुधार गठबंधन को मजबूत करना और 2026 से पहले संतुलित सीट-बंटवारे का फॉर्मूला सुनिश्चित करना है।

    बातचीत का दौर जारी

    रविवार को चेन्नई में स्टालिन और वेणुगोपाल के बीच बैठक हुई जिसमें दोनों दलों के वरिष्ठ नेता भी शामिल थे। इसके अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग IUML के कादर मोहिदीन ने प्रतिनिधिमंडल के साथ DMK नेताओं से मुलाकात की।
  • BMC चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर आमने-सामने शिंदे गुट और BJP, आज की बैठक में तय होगी रणनीति

    BMC चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर आमने-सामने शिंदे गुट और BJP, आज की बैठक में तय होगी रणनीति


    मुंबई /महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों का ऐलान होते ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। खासतौर पर मुंबई महानगरपालिका BMC चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक दल पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। देश की सबसे अमीर नगर निगम मानी जाने वाली बीएमसी पर कब्जे की जंग इस बार और भी दिलचस्प होने वाली है। इसी कड़ी में आज शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट और भारतीय जनता पार्टी BJP के बीच सीट बंटवारे को लेकर पहली औपचारिक बैठक होने जा रही है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।मुंबई में होने वाली यह बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि यह तय करेगी कि महायुति के सहयोगी दल चुनावी मैदान में किस रणनीति के साथ उतरेंगे। बैठक में उप मुख्यमंत्री शिवसेना शिंदे गुट की ओर से मंत्री उदय सामंत, पूर्व सांसद राहुल शेवाळे और राज्यमंत्री योगेश कदम शामिल होंगे। वहीं बीजेपी की तरफ से मंत्री आशिष शेलार, मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम, विधायक प्रविण दरेकर और अतुल भातखळकर बैठक में मौजूद रहेंगे।

    सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना शिंदे गुट इस बातचीत की शुरुआत 50-50 सीट बंटवारे के फार्मूले के साथ करेगी। पार्टी का तर्क है कि 2012 और 2017 के बीएमसी चुनावों को मिलाकर शिवसेना के कुल 125 पार्षद रह चुके हैं, जबकि बीजेपी ने 2017 के चुनाव में अपने दम पर 82 सीटें जीती थीं। दूसरी ओर बीजेपी इस बार और आक्रामक रुख में है और उसने 100 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। यही वजह है कि दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर कड़ा मंथन तय माना जा रहा है। इस सियासी समीकरण के बीच यह भी साफ हो गया है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का गठबंधन आगामी चुनावों में एकजुट रहेगा, जिससे मुकाबला और ज्यादा त्रिकोणीय और रोचक बन सकता है।

    ठाणे में भी चुनावी हलचल तेज
    मुंबई के साथ-साथ ठाणे महानगरपालिका चुनाव को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे आज ठाणे में पार्टी पदाधिकारियों के साथ एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में सभी पुराने हेड्स, डिपार्टमेंट हेड्स, ब्रांच हेड्स, विधायक, सांसद और पूर्व कॉर्पोरेटर्स शामिल होंगे। इस बैठक को ठाणे चुनाव के लिए शुरुआती रोडमैप माना जा रहा है। यहां सीट बंटवारे, प्रचार रणनीति, बड़ी जनसभाओं और इच्छुक उम्मीदवारों को लेकर अहम दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। चूंकि ठाणे में भी बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा जाना है, इसलिए दोनों दलों के बीच तालमेल और रणनीति पर विशेष जोर रहेगा। यह बैठक आज शाम ठाणे के टिप टॉप प्लाजा में आयोजित की गई है।

    कांग्रेस और अन्य दल भी सक्रिय
    महायुति की बैठकों के बाद अब कांग्रेस ने भी महानगरपालिका चुनावों को लेकर कमर कस ली है। नगर निगम क्षेत्रों के जिला कांग्रेस अध्यक्षों और विधानसभा प्रभारियों की बैठक आज 16 दिसंबर को दोपहर 1 बजे प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की अध्यक्षता में होगी। इस बैठक में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

    वहीं बीजेपी ने भी बीएमसी चुनाव के लिए अपने घटक दलों के साथ बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। पार्टी आज आरपीआई आठवले गुट और शिवसेना के साथ अलग-अलग बैठकें करेगी। ये सभी बैठकें दादर स्थित वसंत स्मृति कार्यालय में होंगी, जहां से महायुति की चुनावी दिशा और दशा तय होने की उम्मीद है।कुल मिलाकर, बीएमसी और ठाणे चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल अपने चरम पर है। आज होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि आने वाले दिनों में सियासी समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।