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  • अडानी ने SEC के खिलाफ मुकदमे को खारिज करने के लिए US फेडरल कोर्ट में दायर की याचिका

    अडानी ने SEC के खिलाफ मुकदमे को खारिज करने के लिए US फेडरल कोर्ट में दायर की याचिका


    वाशिंगटन।
    गौतम अडानी (Gautam Adani) और उनके भतीजे सागर अडानी (Sagar Adani) ने यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमिशन (US Securities and Exchange Commission-SEC) के खिलाफ चल रहे मुकदमे को खारिज करने के लिए न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट (New York Federal Court) में याचिका दायर की है। अडानी की ओर से सबसे बड़ी दलील यह है कि इस मामले में अमेरिकी अदालत का अधिकार क्षेत्र ही नहीं बनता। वकीलों के मुताबिक, कथित लेन-देन अमेरिका के बाहर हुआ, बॉन्ड किसी अमेरिकी एक्सचेंज में लिस्डेट नहीं थे और दोनों आरोपी भारत में रहते हैं, इसलिए इस मामले को अमेरिकी कानून के तहत नहीं सुना जाना चाहिए।


    750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड पर उठे सवाल

    अडानी ग्रुप की ओर से कहा गया है कि जिस 750 मिलियन डॉलर के बॉन्ड को लेकर मामला बनाया गया है, वह नियम 144A के तहत जारी किया गया था। यह बॉन्ड पहले गैर-अमेरिकी अंडरराइटर्स को बेचा गया और बाद में कुछ हिस्से को संस्थागत खरीदारों को रीसेल किया गया। रॉयटर्स के मुताबिक अडानी पक्ष का दावा है कि इस प्रक्रिया में अमेरिका की सीधी भागीदारी नहीं थी, इसलिए SEC का हस्तक्षेप उचित नहीं है।


    निवेशकों को नुकसान नहीं, केस कमजोर

    अडानी की याचिका में यह भी कहा गया है कि SEC अब तक यह साबित नहीं कर पाया है कि किसी भी निवेशक को इस सौदे से आर्थिक नुकसान हुआ हो। कंपनी के अनुसार, ये बॉन्ड 2024 में मैच्योर हो चुके हैं और निवेशकों को मूलधन के साथ ब्याज भी पूरा लौटाया जा चुका है। ऐसे में “नो लॉस” की स्थिति में मुकदमे की वैधता पर सवाल उठता है।


    रिश्वतखोरी के आरोपों को किया खारिज

    अडानी ने रिश्वतखोरी के आरोपों को भी निराधार बताया है। उनका कहना है कि SEC के पास इन आरोपों के समर्थन में कोई ठोस या विश्वसनीय सबूत नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि न तो गौतम अडानी और न ही सागर अडानी का इस बॉन्ड इश्यू से कोई प्रत्यक्ष संबंध साबित किया गया है।


    ‘भ्रामक बयान’ नहीं, सामान्य कॉर्पोरेट भाषा

    SEC ने जिन बयानों को भ्रामक बताया है, जैसे ESG प्रतिबद्धताएं और कॉर्पोरेट गवर्नेंस, उन्हें अडानी पक्ष ने “पफरी” यानी सामान्य कॉर्पोरेट बयान करार दिया है। उनका तर्क है कि ऐसे सामान्य दावे निवेशकों को गुमराह करने की श्रेणी में नहीं आते और इन्हें कानूनी आधार नहीं बनाया जा सकता।

    अडानी ग्रुप ने इस पूरे मामले को कानूनी रूप से कमजोर बताते हुए कोर्ट से इसे खारिज करने की मांग की है। अब देखना होगा कि अमेरिकी अदालत इस पर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यह मामला अंतरराष्ट्रीय निवेश और नियामक अधिकार क्षेत्र से जुड़ा बड़ा उदाहरण बन सकता है।

  • सीहोर में विकास को नई रफ्तार नवीन विद्युत उपकेंद्र से सुधरेगी बिजली व्यवस्था

    सीहोर में विकास को नई रफ्तार नवीन विद्युत उपकेंद्र से सुधरेगी बिजली व्यवस्था


    सीहोर । मध्यप्रदेश के सीहोर जिला मुख्यालय के मंडी क्षेत्र में आज बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया जब प्रदेश शासन की मंत्री एवं जिले की प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने नवीन विद्युत उपकेंद्र का लोकार्पण किया इस अवसर पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से नजर आई

    इस कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक सुदेश राय नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर और भाजपा मंडल अध्यक्ष सुशील ताम्रकार सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे सभी ने इस उपकेंद्र के निर्माण को क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया और उम्मीद जताई कि इससे मंडी क्षेत्र सहित आसपास के इलाकों में बिजली से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा

    मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इस विद्युत उपकेंद्र का निर्माण लगभग दो करोड़ 79 लाख रुपये की लागत से किया गया है लंबे समय से मंडी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं खासतौर पर वोल्टेज की समस्या और बार बार बिजली कटौती से आम नागरिकों के साथ साथ व्यापारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता था ऐसे में इस नए उपकेंद्र के शुरू होने से बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और सुचारू होने की उम्मीद है

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि हर क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाए और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं उन्होंने कहा कि यह उपकेंद्र न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि भविष्य में बढ़ती बिजली मांग को भी ध्यान में रखकर तैयार किया गया है

    स्थानीय लोगों ने भी इस पहल का स्वागत किया और इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में एक अहम कदम बताया उनका कहना है कि अब उन्हें बार बार बिजली कटौती और लो वोल्टेज जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी जिससे घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह की गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी

    यह लोकार्पण कार्यक्रम केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि क्षेत्र के विकास की एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है जहां सरकार की योजनाएं जमीनी स्तर पर आकार लेती नजर आ रही हैं आने वाले समय में इस तरह की परियोजनाएं प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी लागू होंगी जिससे समग्र विकास को गति मिलेगी