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  • जनगणना 2027 : दूसरे चरण में होगी जनसंख्या की गणना… जानिए कब से शुरू होगी प्रक्रिया?

    जनगणना 2027 : दूसरे चरण में होगी जनसंख्या की गणना… जानिए कब से शुरू होगी प्रक्रिया?


    नई दिल्ली।
    आपके घर भी कुछ महीने पहले जनगणना (Census 2027) के अधिकारी आए होंगे और मकान (House) से लेकर पानी, बिजली और इंटरनेट (Internet) तक के बारे में सवाल पूछे होंगे। अब सरकार ने जनगणना 2027 (Census 2027) के अगले चरण (Second Phase) की तारीखों का एलान कर दिया है।


    जनगणना 2027 का पूरा शेड्यूल क्या है?

    जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास जनगणना का काम अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच पूरा किया गया। अब दूसरे चरण यानी जनसंख्या गणना की प्रक्रिया होगी।

    गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, ज्यादातर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में जनसंख्या गणना 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक होगी। इसके बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक पुनरीक्षण का दौर चलेगा। इससे पहले 10 से 24 जनवरी 2027 तक लोगों को ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प मिलेगा। हालांकि, कुछ राज्यों और क्षेत्रों में जनगणना का कार्यक्रम अलग रखा गया है।


    अगर आप इन राज्यों में रहते हैं तो जनवरी-फरवरी में नहीं होगी जनगणना

    मणिपुर, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड के साथ ही लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के बर्फीले क्षेत्रों में सामान्य कार्यक्रम के अनुसार जनगणना नहीं होगी। मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण हालात सामान्य नहीं होने की वजह से जनगणना अगली अधिसूचना तक टाल दी गई है। वहीं, गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने होने है, इसे देखते हुए इन राज्यों में अलग कार्यक्रम रखा गया है।

    इसके अलावा लद्दाख, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बर्फीले इलाकों में भी अलग समय पर जनगणना होगी। इनमें लाहौल-स्पीति और किन्नौर के ऊंचाई वाले इलाके शामिल हैं। यहां सर्दियों में बर्फबारी के कारण रास्ते बंद हो जाते हैं, जिससे कर्मचारियों को घर-घर पहुंचने में परेशानी होती है। इनमें से उत्तर प्रदेश के लिए जनगणना का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। बाकी राज्यों और क्षेत्रों की तारीखों के लिए अलग अधिसूचना का इंतजार है।


    उत्तर प्रदेश में कब आएंगे जनगणना अधिकारी?

    अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं तो आपके यहां जनगणना का दूसरा चरण दिसंबर 2026 में शुरू होगा। प्रदेश में 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक कर्मचारी घर-घर जाकर परिवार के सदस्यों की जानकारी जुटाएंगे। इससे पहले 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक ऑनलाइन स्व-गणना का विकल्प मिलेगा। इसके बाद गणनाकर्मी घर पहुंचकर ऑनलाइन भरी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे। प्रदेश में पुनरीक्षण दौर 5 से 9 जनवरी 2027 तक चलेगा।


    क्या घर बैठे खुद भर सकते हैं जनगणना का फॉर्म?

    हां, इस बार सरकार ने लोगों को स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा दी है। इसके जरिए आप घर बैठे अपने मकान और परिवार से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए आपको गणनाकर्मी के घर आने का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।


    ऑनलाइन स्व-गणना फॉर्म कैसे भरें? समझिए पूरा तरीका
    स्टेप 1: पोर्टल खोलें

    सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउजर में Census India Self Enumeration Portal खोलें। इसके अलावा जणगणना पोर्टल पर जाकर सेल्फ एन्यूमरेशन के विकल्प पर क्लिक कर सकते हैं।


    स्टेप 2: लॉग इन करें

    पोर्टल पर अपना राज्य या केंद्रशासित प्रदेश चुनें। इसके बाद स्क्रीन पर दिया गया कैप्चा भरें। अब परिवार के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें। आपके मोबाइल पर एक ओटीपी (OTP) आएगा। इसे भरकर अपना सत्यापन पूरा करें।


    स्टेप 3: घर की लोकेशन दर्ज करें

    लॉग इन करने के बाद जिला, गांव या शहर और पिनकोड जैसी जानकारी भरें। इसके बाद स्क्रीन पर दिखाई देने वाले नक्शे यानी मैप पर अपने घर की सही लोकेशन मार्क करें।


    स्टेप 4: पूछे गए सवालों के जवाब भरें

    पहले चरण में भी आपके घर से संबंधित 33 सवाल इसमें दिए गए थे। अब फिर से नए 40 सवाल इसमें दिए जाएंगे।

    स्टेप 5: जानकारी चेक करके सबमिट करें
    फॉर्म भरने के बाद Preview विकल्प पर क्लिक करके सभी जानकारियां जांच लें। अगर कोई गलती है तो उसे ठीक करें। इसके बाद Final Submit पर क्लिक करें। फॉर्म जमा होने के बाद आपको 11 अंकों की एक विशेष पहचान संख्या मिलेगी। इसे SE ID कहा जाता है।


    SE ID मिलने के बाद क्या करना होगा?

    फॉर्म जमा करने के बाद मिली 11 अंकों की SE ID को सुरक्षित रखें। इसका स्क्रीनशॉट ले सकते हैं या प्रिंट निकालकर रख सकते हैं। जब जनगणना कर्मचारी आपके घर आएंगे तो उन्हें यह आईडी दिखानी होगी। इसके आधार पर वे ऑनलाइन भरी गई जानकारी का सत्यापन करेंगे।


    ऑनलाइन फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें ध्यान

    – एक मोबाइल नंबर से केवल एक घर का स्व-गणना फॉर्म भरा जा सकता है।
    – सभी जानकारियां सही और सच्ची भरें।
    – फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी जवाब दोबारा जांच लें।
    – स्व-गणना करना वैकल्पिक है। आप चाहें तो गणनाकर्मी के घर आने पर भी जानकारी दे सकते हैं।


    दूसरे चरण में क्या-क्या सवाल पूछे जाएंगे?

    पहले चरण में मकान और सुविधाओं से जुड़ी जानकारी ली गई थी, जबकि दूसरे चरण में परिवार के प्रत्येक सदस्य की व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जाएगी। इस बार कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे, जबकि 2011 की जनगणना में 29 सवाल पूछे गए थे। यानी इस बार 11 नए सवाल जोड़े गए हैं। इन सवालों में जाति, धर्म, माता-पिता और पति या पत्नी का नाम, घोषित राष्ट्रीयता और स्थायी पता जैसी जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा डिजिटल साक्षरता, शिक्षा का स्तर और परिवार के कुल बैंक खातों की संख्या के बारे में भी पूछा जाएगा। मोबाइल नंबर, आधार और वोटर आईडी नंबर, कोविड-19 टीकाकरण की जगह, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता से जुड़े सवाल भी इस चरण का हिस्सा होंगे।

  • जनगणना का दूसरा चरण 10 जनवरी से…. डेढ़ महीने चलेगी प्रक्रिया, पूछे जाएंगे 40 सवाल

    जनगणना का दूसरा चरण 10 जनवरी से…. डेढ़ महीने चलेगी प्रक्रिया, पूछे जाएंगे 40 सवाल


    नई दिल्ली।
    देश में होने वाली जनगणना 2027 (Census 2027) के दूसरे चरण (Second phase) यानी जनसंख्या गणना (Population Census) की प्रक्रिया इस बार पहले के मुकाबले काफी लंबी होगी। यह प्रक्रिया करीब डेढ़ महीने तक चलेगी। इसमें 15 दिनों का स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का समय भी शामिल है। इस चरण में लोगों से जाति समेत कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे, जबकि 2011 की जनगणना में सवालों की संख्या 29 थी। यानी इस बार 11 नए सवाल जोड़े गए हैं।

    जनसंख्या गणना का यह चरण 10 जनवरी से 28 फरवरी तक चलेगा। वहीं, पहले की जनगणनाओं में यह प्रक्रिया आमतौर पर 9 से 28 फरवरी के बीच महज 20 दिनों में पूरी की जाती थी। भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर (अगली घोषणा तक), गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख, तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के हिमपात प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर शेष सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना का कार्य किया जाएगा।


    यूपी समेत चार राज्यों में 35 दिन चलेगी घर-घर जनगणना

    अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले राज्यों में जनगणना का कार्यक्रम पहले रखा गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब में घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना का कार्यक्रम 35 दिनों का होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, देशभर में जनगणना 25 जनवरी से 27 फरवरी 2027 के बीच कराई जाएगी। हालांकि, कुछ राज्यों और क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। मणिपुर में फिलहाल जनगणना की घोषणा नहीं की गई है। राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया पहले कराने की मांग के बाद जनगणना का काम रोक दिया गया था।


    कब होगी स्व-गणना और घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया?

    जनगणना 2027 के लिए लोगों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का भी मौका मिलेगा। इसके लिए 10 से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना की अवधि निर्धारित की गई है। इसके बाद घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना की जाएगी। जनगणना की संदर्भ तिथि (रेफरेंस डेट) पहले ही 1 मार्च 2027 घोषित की जा चुकी है। इसके बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक संशोधन का चरण भी आयोजित किया जाएगा।


    जनगणना में पूछे जाएंगे ये 40 सवाल

    इस बार दूसरे चरण में सवालों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है। इनमें जाति से जुड़ी जानकारी के अलावा परिवार और व्यक्तिगत पहचान से संबंधित कई जानकारियां भी शामिल होंगी। रिपोर्ट के मुताबिक, जनगणना के दौरान ये जानकारियां जुटाई जाएंगी:
    – जाति से संबंधित जानकारी
    – पति या पत्नी का नाम
    – माता और पिता से जुड़ी जानकारी
    – व्यक्ति की घोषित राष्ट्रीयता
    – स्थायी पता
    – कोविड-19 टीकाकरण की जगह
    – कुल बैंक खातों की संख्या
    – मोबाइल नंबर
    – आधार नंबर
    – मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) नंबर
    – पासपोर्ट नंबर
    – ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता
    – मोबाइल नंबर, आधार और वोटर आईडी की जानकारी उपलब्ध होने पर शेयर की जा सकती है। वहीं, पासपोर्ट नंबर केवल भारतीय पासपोर्ट धारकों से मांगा जाएगा। देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसमें 62.32 करोड़ पुरुषों और 58.75 करोड़ महिलाओं सहित 1.21 अरब आबादी होने की बात कही गई थी। देश में उस समय 24.95 करोड़ परिवार थे।


    मणिपुर में फिलहाल जनगणना नहीं

    मणिपुर को जनगणना के मौजूदा कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। राज्य में विभिन्न वर्गों की ओर से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया कराने की मांग उठाई गई थी। इसके बाद वहां जनगणना की प्रक्रिया रोक दी गई। केंद्र सरकार की अधिसूचना में भी मणिपुर को फिलहाल बाहर रखा गया है। इसके अलावा लद्दाख और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनगणना का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है।

  • MP: फसलें बचाने के लिए कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण शुरू… पहले दिन पकड़े 97 कृष्ण मृग

    MP: फसलें बचाने के लिए कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण शुरू… पहले दिन पकड़े 97 कृष्ण मृग


    शाजापुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शाजापुर जिले (Shajapur district) में फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए वन विभाग ने अनोखा तरीका अपनाया है. शुजालपुर, कालापीपल और उज्जैन जिले के सीमावर्ती इलाकों में कृष्णमृग और नीलगाय (Blackbuck and Nilgai) को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operation) चलाया जा रहा है. अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी गांव में बोमा पद्धति से 97 कृष्णमृगों को पकड़ा गया.

    शाजापुर–शुजालपुर क्षेत्र में कृष्ण-मृगों (ब्लैकबक) को पकड़ने और स्थानांतरित करने के अभियान का दूसरे चरण का शनिवार को प्रारंभ किया गया। अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी में 97 कृष्णमृगों को सफलतापूर्वक पकड़ा गया। इन्हें अनुकूल वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान रवाना किया गया। इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में लंबे समय से फसलों को नुकसान पहुंचा रहे वन्य प्राणियों के कारण किसानों और ग्रामीणों को होने वाली परेशानियों को कम करना है।

    कृष्ण-मृगों को उनके अनुकूल वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने से मानव–वन्य प्राणी संघर्ष और फसल क्षति कम करने के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। दूसरे चरण में कुल 2 हजार कृष्ण-मृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल वन्य प्राणियों के संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान में मध्य प्रदेश वन विभाग दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशन टीम का सहयोग ले रहा है. अभियान का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से निर्धारित क्षेत्रों में भेजना है, ताकि किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।


    हेलीकॉप्टर से हांका, बोमा तकनीक से पकड़े कृष्णमृग

    रेस्क्यू ऑपरेशन के पहले चरण में हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को हांका देकर एक निर्धारित घेरे की ओर पहुंचाया गया. इसके बाद बोमा तकनीक से उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया. अभियान के दौरान दोपहर में तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर विशेषज्ञों की सलाह के बाद रेस्क्यू रोक दिया गया. अगले चरण को शनिवार देर शाम या रविवार सुबह शुरू करने की योजना बताई गई।

    आयोजकों के अनुसार, हेलीकॉप्टर की मदद से हांका लगाकर बोमा पद्धति के जरिए वन्यजीवों को रेस्क्यू करने की शुरुआत लगातार दूसरे वर्ष शुजालपुर क्षेत्र से की गई है. पिछले साल भी इसी इलाके में इस पद्धति का इस्तेमाल किया गया था।


    दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञ, करीब 200 कर्मचारी तैनात

    इस विशेष अभियान में दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशन टीम के 14 विशेषज्ञ शामिल हैं. इनके अलावा वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी भी तैनात हैं. भोपाल सहित दूसरे जिलों से पहुंचे कर्मचारियों को मिलाकर करीब 200 लोगों की टीम अभियान में जुटी है।

    इससे पहले ग्राम हन्नूखेड़ी में अभियान की तैयारियों का निरीक्षण वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभांजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा, कलेक्टर ऋजु बाफना और अभियान की नोडल अधिकारी डॉ. किरण बिसेन समेत अन्य अधिकारियों ने किया. अधिकारियों ने दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम से चर्चा कर तैयारियों और अभियान की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।


    ग्रामीणों के लिए जारी किए गए सुरक्षा निर्देश

    वन विभाग और जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अभियान के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. अधिकारियों के मुताबिक, वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी प्राथमिकता है। ग्रामीणों से कहा गया है कि अभियान की सूचना वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और ऑपरेशन समाप्त होने की सूचना मिलने तक खेतों में कृषि कार्य, सिंचाई या अन्य गतिविधियां न करें. बच्चों को खेतों, सड़कों और बोमा स्थल से दूर रखने तथा गाय, भैंस, बकरी और कुत्तों सहित पालतू पशुओं को खुले में नहीं छोड़ने की सलाह दी गई है।

    वन विभाग ने लोगों से यह भी अपील की है कि वे वन्यजीवों का पीछा न करें, उन्हें घेरने या भगाने की कोशिश न करें और हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर बाहर निकलकर भीड़ न लगाएं. निर्धारित सुरक्षा क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश से बचने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।


    पहले चरण में 913 वन्यप्राणियों का हुआ था स्थानांतरण

    कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का पहला चरण पिछले वर्ष संचालित किया गया था। इस दौरान 846 कृष्ण-मृग और 67 नीलगाय सहित कुल 913 वन्य प्राणियों को पकड़ा गया था। पहले चरण से प्राप्त अनुभवों के आधार पर दूसरे चरण को बेहतर समन्वय के साथ संचालित किया जा रहा है।

    किसानों की फसलों की सुरक्षा के लिए जनसहयोग की अपील

    अभियान में जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। वन विभाग ने वन्य प्राणी संरक्षण और किसानों की फसलों की सुरक्षा के इस प्रयास को सफल बनाने के लिए आमजन से निरंतर सहयोग की अपील की है।

  • जनगणना 2027 का दूसरा चरण 17 अगस्त से….. जाति के साथ देनी होगी ये जानकारियां

    जनगणना 2027 का दूसरा चरण 17 अगस्त से….. जाति के साथ देनी होगी ये जानकारियां


    नई दिल्ली।
    साल 2027 की जनगणना (Census) का दूसरा चरण (Second phase) 17 अगस्त (August 17) से शुरू होगा। इस जनगणना (Census) में 1931 के बाद पहली बार लोगों की जाति भी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा, इसकी भी संभावना है कि लोगों के माता-पिता की जन्म तिथि (Parents’ date of birth) और जन्म स्थान की जानकारी भी दर्ज की जाए। जनगणना के दौरान जिन लोगों के पास पासपोर्ट होगा, उनका पासपोर्ट नंबर भी लिया जा सकता है। आधार नंबर केवल स्वेच्छा से दिया जा जा सकेगा।


    कहां और कब से शुरू होगा दूसरा चरण?

    गृह मंत्रालय ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी की। इसमें मंत्रालय ने बताया कि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाके में जनगणना का दूसरा चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा। इससे पहले 17 अगस्त से 30 अगस्त तक लोग खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे। इसका मतलब है कि जनगणना के दूसरे चरण की प्रश्नावली भी जल्द जारी की जाएगी।


    जाति कैसे दर्ज की जाएगी?

    सूत्रों के अनुसार, जाति वही दर्ज की जाएगी जो व्यक्ति खुद बताएगा। अनुसूचित जाति (एसटी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सूची (ड्रॉप-डाउन मेन्यू) होगी, जबकि ‘जाति’ वाला अलग कॉलम केवल उन लोगों के लिए होगा जो एससी या एसटी श्रेणी में नहीं आते।


    क्या जाति का प्रमाण पत्र दिखाना होगा?

    ड्रॉप-डाउन मेन्यू में केवल उसी राज्य की एससी और एसटी की सूची दिखाई जाएगी, जहां व्यक्ति को जनगणना हो रही होगी। व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, उसे उसी तरह लिखा जाएगा। अपनी एससी, एसटी या अन्य जाति साबित करने के लिए किसी भी तरह का दस्तावेज या जाति प्रमाण पत्र दिखाने की जरूरत नहीं होगी।


    45 हजार जातियों का डाटा कैसे संभाला जाएगा?

    एक अधिकारी ने बताया कि 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना में लोगों ने खुद अपनी जाति बताई थी। इससे 45 हजार से अधिक अलग-अलग जातियों के नाम सामने आए थे। इतने बड़े आंकड़ों का सही उपयोग करना मुश्किल हो गया था। लेकिन इस बार डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से इन आंकड़ों को व्यवस्थित करना और अलग-अलग श्रेणियों में बांटना आसान होगा।


    माता-पिता के जन्म की जानकारी क्यों ली जाएगी?

    दूसरे चरण में पहली बार लोगों के माता-पिता की जन्म तिथि और जन्म स्थान की जानकारी भी ली जाएगी। ये दोनों बातें नागरिकता तय करने में अहम मानी जाती हैं। 2011 की जनगणना के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का काम भी किया गया था। इसे 2021 की जनगणना के साथ फिर से किया जाना था, लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया। अब इसे 2027 की जनगणना से अलग कर दिया गया है। वर्ष 2010 में एनपीआर के दौरान लोगों से उनकी राष्ट्रीयता के बारे में भी जानकारी ली गई थी। लेकिन यह भी साफ कहा गया था कि इससे किसी को नागरिकता का अधिकार नहीं मिलेगा।


    क्या कोई दस्तावेज देना होगा?

    सूत्रों के अनुसार, लोगों से उनके माता-पिता की जन्म तिथि या जन्म स्थान का कोई प्रमाण नहीं मांगा जाएगा। जो जानकारी व्यक्ति को जितनी सही पता होगी, उसी के आधार पर दर्ज की जाएगी। अगर किसी को अपने माता-पिता की पूरी जन्म तिथि नहीं पता है और केवल जन्म का साल पता है, तो उस साल की 1 जनवरी को जन्म तिथि मानकर दर्ज किया जाएगा।

  • पश्चिम बंगाल में गरजे मोदी, घुसपैठियों को दी चेतावनी…… बोले- दूसरे फेज से पहले देश छोड़ दो वरना….

    पश्चिम बंगाल में गरजे मोदी, घुसपैठियों को दी चेतावनी…… बोले- दूसरे फेज से पहले देश छोड़ दो वरना….


    कोलकाता।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने रविवार को पश्चिम बंगाल (West Bengal) के दूसरे चरण के मतदान से पहले घुसपैठियों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि मैं घुसपैठियों को चेतावनी देता हूं कि वे बंगाल चुनाव के दूसरे चरण से पहले देश को छोड़ दें, वरना परिणाम आने के बाद उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बंगाल चुनाव के पहले चरण में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) का अहंकार चकनाचूर हो गया, दूसरे चरण में भाजपा की जीत सुनिश्चित होगी।

    पीएम मोदी ने चुनावी रैली में कहा, ”तृणमूल कांग्रेस के शासन में छोटे से छोटा नेता और गुंडे भी खुद को सरकार समझते हैं। भाजपा को वोट दीजिए, मैं आपको तृणमूल कांग्रेस के ‘महा जंगलराज’ से मुक्ति दिलाऊंगा। तृणमूल कांग्रेस की ‘निर्मम सरकार’ बंगाल की महिलाओं पर अत्याचार करने वाले गुंडों के साथ खड़ी है। अब यह कहने का समय आ गया है कि इसे और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”संदेशखलि के पीड़ित एवं आर जी कर अस्पताल की पीड़िता की मां को चुनाव में टिकट देने के फैसले में बंगाल की महिलाओं के प्रति भाजपा की प्रतिबद्धता झलकती है। बंगाल की नई भाजपा सरकार महिलाओं के साथ बलात्कार और उन्हें प्रताड़ित करने वाले बदमाशों को चार मई के बाद न्याय के कठघरे में लाएगी।” वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि मैं मतुआ नामशुद्र समुदाय के सदस्यों के समक्ष यह प्रतिज्ञा करता हूं कि उन्हें सीएए के माध्यम से नागरिकता प्राप्त होगी।

    इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार राज्य सचिवालय से नहीं बल्कि पार्टी द्वारा संरक्षित गुंडों और अपराधियों द्वारा चलाई जा रही है। चुनाव प्रचार समाप्त होने से एक दिन पहले, हुगली जिले के आरामबाग में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार चलाने के लिए टीएमसी की ”असामाजिक तत्वों पर निर्भरता” के कारण अक्सर कलकत्ता उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ा है। मोदी ने कहा, ”टीएमसी की ‘निर्मम सरकार’ नबान्न (राज्य सचिवालय) से नहीं चलती। इसे गुंडे और अपराधी चलाते हैं, और सरकार को पटरी पर लाने के लिए उच्च न्यायालय और देश की शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता पड़ी है।”

    उन्होंने वादा किया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने पर पहली कैबिनेट बैठक में केंद्र की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के कार्यान्वयन को मंजूरी दी जाएगी। ममता बनर्जी प्रशासन की विश्वसनीयता ”पूरी तरह से खत्म” होने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री ने दावा किया कि केवल भाजपा ही ऐसी सरकार बना सकती है जो राज्य के लोगों को न्याय और सुरक्षा प्रदान करेगी। राज्य के आलू किसानों की ”दुर्दशा” के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि टीएमसी सरकार से जुड़ा ‘सिंडिकेट राज’ उपज को कम दाम पर खरीदकर कहीं और ऊंचे दाम पर बेचता है। पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि टीएमसी के शासनकाल में राज्य भर में महिलाओं के खिलाफ हिंसक अपराध अपने चरम पर पहुंच गए। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर ”अपराधियों को संरक्षण देने” का आरोप लगाया, जिसके चलते अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।