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  • तेल कंपनी में नौकरी का मौका, IOCL ने टेक्नीशियन, ग्रेजुएट और ट्रेड अप्रेंटिस के 433 पदों पर निकाली भर्ती

    तेल कंपनी में नौकरी का मौका, IOCL ने टेक्नीशियन, ग्रेजुएट और ट्रेड अप्रेंटिस के 433 पदों पर निकाली भर्ती

    नई दिल्ली । इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड में अप्रेंटिस के तौर पर काम करने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। कंपनी ने टेक्नीशियन, ग्रेजुएट और ट्रेड अप्रेंटिस के कुल 433 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन पदों के लिए योग्य उम्मीदवार 7 अगस्त 2026 से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख 6 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को अंतिम समय का इंतजार किए बिना निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करने की सलाह दी गई है।

    आईओसीएल की ओर से जारी भर्ती में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में स्थित केंद्रों के लिए रिक्तियां शामिल हैं। कुल 433 पदों में सबसे अधिक 121 पद उत्तर प्रदेश के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके बाद राजस्थान में 76, पंजाब में 57, दिल्ली में 50, हरियाणा में 37, चंडीगढ़ में 30, हिमाचल प्रदेश में 22, जम्मू-कश्मीर में 20 और उत्तराखंड में भी 20 पद शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों में पदों का वितरण उम्मीदवारों के लिए अपने क्षेत्र के अनुसार आवेदन का अवसर उपलब्ध कराता है।

    इन रिक्तियों में टेक्नीशियन अप्रेंटिस के लिए मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंस्ट्रूमेंटेशन, सिविल, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषय शामिल हैं। ट्रेड अप्रेंटिस के तहत फिटर, इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक और मशीनिस्ट जैसे ट्रेड में अवसर दिए गए हैं। इसके अलावा ग्रेजुएट अप्रेंटिस और डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद भी भर्ती में शामिल हैं। इस तरह अलग-अलग शैक्षणिक और तकनीकी योग्यता रखने वाले युवाओं के लिए आवेदन का विकल्प उपलब्ध है।

    ट्रेड अप्रेंटिस पदों के लिए उम्मीदवार के पास मैट्रिक के साथ संबंधित ट्रेड में नियमित रूप से दो वर्ष का आईटीआई होना जरूरी है। टेक्नीशियन अप्रेंटिस के लिए संबंधित इंजीनियरिंग विषय में तीन वर्ष का नियमित फुल टाइम डिप्लोमा और न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किए गए हैं। ग्रेजुएट अप्रेंटिस पदों के लिए बीबीए, बीए, बीकॉम, बीएससी या किसी अन्य विषय में नियमित फुल टाइम स्नातक डिग्री के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंक आवश्यक हैं। डेटा एंट्री ऑपरेटर पद के लिए उम्मीदवार का 12वीं या इंटरमीडिएट पास होना जरूरी है।

    आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 24 वर्ष निर्धारित है। आयु की गणना 31 अगस्त 2026 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। चयन प्रक्रिया में आवेदन की जांच, मेरिट सूची, दस्तावेज सत्यापन और मेडिकल फिटनेस टेस्ट शामिल होंगे। चयनित उम्मीदवारों को अप्रेंटिस प्रशिक्षण के दौरान लागू नियमों के अनुसार स्टाइपेंड दिया जाएगा।

    आवेदन प्रक्रिया 7 अगस्त को सुबह 10 बजे से शुरू हो चुकी है और 6 सितंबर को शाम 5 बजे तक चलेगी। उम्मीदवारों को संबंधित पद के लिए निर्धारित एनएटीएस या एनएपीएस पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्रेशन और आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अप्रेंटिस प्रशिक्षण के दौरान निर्धारित स्टाइपेंड के अलावा इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से अन्य खर्चों के लिए 2,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाने का भी प्रावधान बताया गया है। ऐसे में आईटीआई, डिप्लोमा और ग्रेजुएशन कर चुके युवाओं के लिए यह भर्ती व्यावहारिक प्रशिक्षण और करियर की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।

  • चलते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानिए कहीं जोड़ों की चिकनाई तो नहीं हो रही कम

    चलते समय घुटनों से आती है कट-कट की आवाज? जानिए कहीं जोड़ों की चिकनाई तो नहीं हो रही कम


    नई दिल्ली । घुटनों में दर्द चलने में तकलीफ सुबह उठते समय अकड़न या चलते समय कट कट की आवाज आना आजकल केवल बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली बढ़ता वजन लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कम उम्र के लोग भी जोड़ों की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यदि आपको भी लंबे समय से घुटनों में दर्द या जकड़न महसूस हो रही है तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें क्योंकि यह जोड़ों की चिकनाई कम होने का संकेत हो सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार हमारे शरीर के प्रत्येक जोड़ के बीच एक विशेष प्रकार का द्रव मौजूद होता है जिसे सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यह द्रव जोड़ों को आसानी से हिलने डुलने में मदद करता है और हड्डियों को आपस में रगड़ खाने से बचाता है। जब किसी कारण से इस द्रव की मात्रा कम होने लगती है या जोड़ों की कार्टिलेज घिसने लगती है तब घुटनों में दर्द अकड़न और सूजन जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। यही स्थिति आम भाषा में घुटनों की ग्रीस कम होना कहलाती है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि बढ़ती उम्र मोटापा ऑस्टियोआर्थराइटिस पुरानी चोट शारीरिक निष्क्रियता और लंबे समय तक भारी वजन उठाने की आदत इस समस्या के प्रमुख कारण हो सकते हैं। इसके अलावा महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव के कारण भी जोड़ों की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज विटामिन डी की कमी और गठिया जैसी बीमारियां भी घुटनों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।

    यदि सुबह उठते समय घुटनों में जकड़न महसूस हो बैठने के बाद उठने में दर्द हो सीढ़ियां चढ़ने उतरने में कठिनाई आए या चलते समय घुटनों से आवाज आने लगे तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने से समस्या बढ़ सकती है और चलने फिरने में भी परेशानी होने लगती है।

    जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है। ओमेगा थ्री फैटी एसिड से भरपूर अखरोट अलसी के बीज और फैटी फिश का सेवन लाभदायक माना जाता है। हरी पत्तेदार सब्जियां दूध दही और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेने से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। विटामिन डी और कैल्शियम भी जोड़ों और हड्डियों की मजबूती के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं। ऑलिव ऑयल का सीमित उपयोग शरीर में सूजन कम करने में मदद कर सकता है।

    इसके साथ ही कुछ आदतों में बदलाव भी जरूरी है। तला भुना भोजन जंक फूड और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थ शरीर में सूजन बढ़ा सकते हैं इसलिए इनका सेवन कम करना चाहिए। यदि वजन अधिक है तो उसे नियंत्रित करना जरूरी है क्योंकि अतिरिक्त वजन का सीधा दबाव घुटनों पर पड़ता है। रोजाना तेज चाल से चलना तैराकी साइकिल चलाना और योग जैसी लो इम्पैक्ट एक्सरसाइज जोड़ों को सक्रिय और मजबूत बनाए रखने में मदद करती हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि घुटनों की ग्रीस कम होने की समस्या का समय रहते पता चल जाए तो दवाओं फिजियोथेरेपी सही खानपान और नियमित व्यायाम की मदद से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए यदि लंबे समय से घुटनों में दर्द या अकड़न बनी हुई है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर सही जांच और उपचार जरूर कराएं।

  • सुबह की ये आसान आदत स्किन को दे सकती है इंस्टेंट फ्रेशनेस, जानें आइस वॉटर थेरेपी के फायदे

    सुबह की ये आसान आदत स्किन को दे सकती है इंस्टेंट फ्रेशनेस, जानें आइस वॉटर थेरेपी के फायदे


    नई दिल्ली। हर कोई चाहता है कि उसकी त्वचा लंबे समय तक चमकदार, स्वस्थ और जवां दिखाई दे। इसके लिए लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स और कई तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट अपनाते हैं। हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपाय भी त्वचा को ताजगी देने में मदद कर सकते हैं। इन्हीं में से एक है आइस वॉटर थेरेपी या ठंडे पानी से चेहरे की सफाई। हालांकि यह समझना जरूरी है कि आइस वॉटर थेरेपी झुर्रियों को स्थायी रूप से खत्म नहीं करती, लेकिन इससे चेहरे पर अस्थायी कसाव, सूजन में कमी और फ्रेशनेस महसूस हो सकती है।

    क्या है आइस वॉटर थेरेपी?
    सुबह उठने के बाद एक बाउल में ठंडा पानी लें और उसमें कुछ आइस क्यूब्स डालें। इसके बाद कुछ सेकंड के लिए चेहरे को ठंडे पानी में डुबोएं या ठंडे पानी से चेहरा धो लें। कई लोग इसे अपनी मॉर्निंग स्किनकेयर रूटीन का हिस्सा बनाते हैं।

    चेहरे की सूजन कम हो सकती है

    सुबह उठने के बाद कई लोगों के चेहरे पर हल्की सूजन दिखाई देती है। ठंडा पानी रक्त वाहिकाओं को अस्थायी रूप से संकुचित करता है, जिससे सूजन कुछ समय के लिए कम दिखाई दे सकती है।

    त्वचा को मिलती है ताजगी
    ठंडे पानी से चेहरा धोने पर त्वचा फ्रेश महसूस होती है और कई लोगों को इंस्टेंट ग्लो का एहसास होता है।

    अतिरिक्त ऑयल कम महसूस हो सकता है
    ऑयली स्किन वाले लोगों को ठंडा पानी चेहरे पर ताजगी और अतिरिक्त तेल कम होने का एहसास दे सकता है, हालांकि यह ऑयल प्रोडक्शन को स्थायी रूप से नियंत्रित नहीं करता।

    पोर्स छोटे दिखाई दे सकते हैं
    ठंडे तापमान के कारण त्वचा पर अस्थायी कसाव आता है, जिससे पोर्स कुछ समय के लिए छोटे नजर आ सकते हैं।

    क्या इससे झुर्रियां खत्म हो जाती हैं?
    यह दावा वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है कि आइस वॉटर थेरेपी झुर्रियों या फाइन लाइंस को स्थायी रूप से खत्म कर देती है। हालांकि ठंडक के कारण त्वचा कुछ समय के लिए टाइट और स्मूद दिखाई दे सकती है। उम्र बढ़ने के साथ आने वाली झुर्रियों को कम करने के लिए सनस्क्रीन, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और सही स्किनकेयर ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    कैसे करें सही तरीके से?
    एक बाउल में ठंडा पानी और कुछ बर्फ के टुकड़े डालें।

    चेहरे को 5–10 सेकंड के लिए पानी में डुबोएं।

    इस प्रक्रिया को 3–5 बार दोहरा सकते हैं।

    इसके बाद साफ तौलिए से चेहरा हल्के हाथों से सुखाएं।

    फिर मॉइस्चराइज़र और दिन में बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन जरूर लगाएं।

    किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

    यदि आपकी त्वचा बहुत संवेदनशील है, आपको रोजेशिया, एक्जिमा या ठंड से एलर्जी की समस्या है, तो बर्फ को सीधे चेहरे पर लगाने से बचें। बहुत अधिक देर तक चेहरे को बर्फ वाले पानी में रखने से त्वचा में जलन या असहजता हो सकती है।

    ग्लोइंग स्किन के लिए सिर्फ इतना काफी नहीं
    स्वस्थ और चमकदार त्वचा के लिए इन आदतों को भी अपनाएं—

    पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

    संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।

    रोज 7–8 घंटे की नींद लें।

    धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें।

    धूम्रपान और अत्यधिक जंक फूड से बचें।

  • दिल्ली के झुग्गी पुनर्वास पर बड़ा फैसला, 4 लाख परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ; यमुना जल परियोजना पर राज्यों में बनी सहमति

    दिल्ली के झुग्गी पुनर्वास पर बड़ा फैसला, 4 लाख परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ; यमुना जल परियोजना पर राज्यों में बनी सहमति


    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास और शहरी विकास को लेकर केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राजधानी के करीब 4 लाख परिवारों को लाभ पहुंचाने वाली व्यापक पुनर्वास योजना को मंजूरी देने की दिशा में सहमति बनी है। इस बैठक में दिल्ली के शहरी ढांचे को मजबूत करने और झुग्गी क्षेत्रों को व्यवस्थित आवासीय कॉलोनियों में बदलने पर विशेष जोर दिया गया।

    बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि नई पुनर्वास कॉलोनियों का विकास केवल आवास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें आंगनवाड़ी केंद्र, विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्र, खेल मैदान और अन्य आवश्यक सामुदायिक सुविधाएं भी शामिल होंगी। इसका उद्देश्य पुनर्वासित परिवारों को बेहतर और संतुलित शहरी जीवन उपलब्ध कराना है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि झुग्गी पुनर्वास नीति-2026 को जल्द अधिसूचित किया जाए ताकि प्रक्रिया को कानूनी और प्रशासनिक आधार मिल सके।

    इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री Manohar Lal Khattar, दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta तथा उपराज्यपाल T. S. Singh Sandhu भी मौजूद रहे। सभी पक्षों ने मिलकर पुनर्वास परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने और PPP मॉडल के तहत विकास कार्यों को लागू करने पर सहमति जताई।

    योजना के तहत DDA और DUSIB को निर्देश दिया गया है कि पांच झुग्गी क्लस्टरों के लिए 45 दिनों के भीतर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाए और 50 अतिरिक्त क्लस्टरों के लिए परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाए। सरकार का लक्ष्य है कि पुनर्वास कार्यों में पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित की जाए, ताकि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जा सके।

    बैठक में यमुना नदी के जल प्रबंधन और किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर भी अहम निर्णय लिया गया। छह राज्यों ने मिलकर इस परियोजना के क्रियान्वयन पर सहमति जताई है, जिससे दिल्ली सहित पूरे यमुना बेसिन क्षेत्र में जल आपूर्ति को मजबूत करने की उम्मीद है। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से में से कुछ भाग दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है, जिससे राजधानी में जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी।

    सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह समग्र योजना दिल्ली के शहरी विकास और जल संसाधन प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव ला सकती है। आने वाले समय में इससे न केवल झुग्गी क्षेत्रों का पुनर्गठन होगा, बल्कि राजधानी के बुनियादी ढांचे में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

  • POK में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड, हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या

    POK में मारा गया पुलवामा हमले का मास्टरमाइंड, हमजा बुरहान की गोली मारकर हत्या



    नई दिल्ली। 2019 के चर्चित पुलवामा आतंकी हमला के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल आतंकी हमजा बुरहान की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में हत्या कर दी गई है। ‘डॉक्टर’ के नाम से पहचाने जाने वाले हमजा को मुजफ्फराबाद के पास अज्ञात बंदूकधारियों ने गोलियों से भून डाला। हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमजा बुरहान का असली नाम अर्जुमंद गुलजार डार था और वह जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रत्नीपोरा का रहने वाला था। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई वर्षों से POK में एक स्कूल टीचर की फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। इसी आड़ में वह आतंकी नेटवर्क, ट्रेनिंग कैंप और घुसपैठ गतिविधियों को संचालित कर रहा था।

    सूत्रों के अनुसार, मुजफ्फराबाद के घने जंगल वाले इलाके में अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाया। हमलावरों ने उस पर अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे कई गोलियां लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। फिलहाल हमलावरों की पहचान नहीं हो सकी है।

    हमजा आतंकी संगठन अल-बद्र का प्रमुख कमांडर था और वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी नेटवर्क के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था। भारत सरकार ने वर्ष 2022 में उसे UAPA के तहत आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की पुलवामा हमले से जुड़ी चार्जशीट में भी उसका नाम प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल था।

    बताया जाता है कि हमजा पाकिस्तान जाकर आतंकी संगठन अल-बद्र में शामिल हुआ था और बाद में उसका कमांडर बन गया। वह पाकिस्तान से ही जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, युवाओं को संगठन में भर्ती करने और फंडिंग जुटाने का काम करता था।

    गृह मंत्रालय के अनुसार, हमजा युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों के लिए उकसाने और आतंकी संगठनों के लिए आर्थिक मदद जुटाने में भी सक्रिय था। पुलवामा हमले के अलावा उसे कई अन्य आतंकी घटनाओं का भी मास्टरमाइंड माना जाता था।

    14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। उस दिन जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर जा रहा था, तभी पुलवामा के लेथपोरा इलाके में विस्फोटकों से भरी एक कार जवानों की बस से टकरा गई थी। धमाका इतना भीषण था कि बस के परखच्चे उड़ गए थे। इस आत्मघाती हमले को स्थानीय आतंकी आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया था, जबकि इसकी जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।

    एनआईए की विस्तृत जांच में मसूद अजहर, अब्दुल रऊफ असगर, उमर फारूक और हमजा बुरहान समेत कई आतंकियों को इस हमले की साजिश में शामिल पाया गया था। अब हमजा की मौत को आतंकी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

    हालांकि, उसकी हत्या किसने और किन कारणों से की, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

  • त्रिविध ताप: जीवन के तीन बड़े दुख और उनसे मुक्ति का आध्यात्मिक मार्ग

    त्रिविध ताप: जीवन के तीन बड़े दुख और उनसे मुक्ति का आध्यात्मिक मार्ग

    नई दिल्ली। मानव जीवन में सुख और दुख दोनों का अनुभव स्वाभाविक रूप से होता है, लेकिन शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य को लगातार तीन प्रकार के दुखों का सामना करना पड़ता है, जिन्हें त्रिविध ताप कहा जाता है। ये हैं आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक दुःख। इनका प्रभाव व्यक्ति के शरीर, मन, बाहरी संसार और भाग्य तक पर पड़ता है।

    आध्यात्मिक दुःख क्या है?
    आध्यात्मिक दुःख वे होते हैं जो व्यक्ति के अपने शरीर और मन से उत्पन्न होते हैं। इसमें बीमारी, बुढ़ापा, मानसिक तनाव, चिंता, क्रोध, लोभ और इच्छाओं की असंतुष्टि शामिल हैं। यह दुःख भीतर से उत्पन्न होकर व्यक्ति की शांति को भंग करता है।

    आधिभौतिक दुःख क्या है?
    आधिभौतिक दुःख बाहरी जीवों और भौतिक संसार से प्राप्त होता है। जैसे—चोरी, हिंसा, पशुओं का आक्रमण, या अन्य लोगों से होने वाला नुकसान। यह वह कष्ट है जो समाज और बाहरी परिस्थितियों के कारण व्यक्ति को झेलना पड़ता है।

    आधिदैविक दुःख क्या है?
    आधिदैविक दुःख उन कष्टों को कहा जाता है जो प्राकृतिक शक्तियों या भाग्य से उत्पन्न होते हैं। जैसेबाढ़, सूखा, भूकंप, बिजली गिरना, या अचानक आने वाली आपदाएं। यह ऐसे कष्ट होते हैं जिन्हें मनुष्य सीधे नियंत्रित नहीं कर सकता।

    त्रिविध ताप से मुक्ति का मार्ग
    धर्मग्रंथों के अनुसार इन तीनों दुखों से स्थायी मुक्ति केवल ज्ञान, भक्ति, सत्संग और ईश्वर की शरण में जाने से संभव है। जब मनुष्य आत्मज्ञान प्राप्त करता है और निष्काम कर्म के मार्ग पर चलता है, तो वह बाहरी परिस्थितियों से प्रभावित हुए बिना भीतर से शांत रहने लगता है।

    आध्यात्मिक परंपराओं में यह माना गया है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मिक शांति में है। जब व्यक्ति अपने भीतर ईश्वर के प्रति समर्पण और सही जीवन दृष्टि विकसित करता है, तब त्रिविध ताप का प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।

    त्रिविध ताप जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन इनसे घबराने के बजाय इनके वास्तविक स्वरूप को समझना आवश्यक है। ज्ञान और भक्ति का मार्ग अपनाकर मनुष्य न केवल इन दुखों से मुक्त हो सकता है, बल्कि जीवन में स्थायी शांति और संतुलन भी प्राप्त कर सकता है।

  • बीजिंग में भारत की नई कूटनीतिक शुरुआत, विक्रम दुरईस्वामी ने संभाली जिम्मेदारी; चीन को सौंपे साख पत्र

    बीजिंग में भारत की नई कूटनीतिक शुरुआत, विक्रम दुरईस्वामी ने संभाली जिम्मेदारी; चीन को सौंपे साख पत्र


    नई दिल्ली। भारत और चीन के रिश्तों के बीच नए दौर की शुरुआत के संकेत देते हुए वरिष्ठ राजनयिक विक्रम दुरईस्वामी ने चीन में भारत के नए राजदूत के रूप में औपचारिक जिम्मेदारी संभाल ली है। उन्होंने बीजिंग में चीन के सहायक विदेश मंत्री और प्रोटोकॉल विभाग के महानिदेशक होंग लेई को अपने साख पत्रों (क्रेडेंशियल्स) की प्रति सौंपी।

    इस दौरान दोनों देशों के अधिकारियों की मौजूदगी में राजनयिक परंपराओं के तहत औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। माना जा रहा है कि दुरईस्वामी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारत और चीन कई संवेदनशील मुद्दों के बीच संबंधों को संतुलित करने की कोशिश कर रहे हैं।

    भारतीय दूतावास में आयोजित हुआ विशेष समारोह
    गुरुवार को बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें राजदूत विक्रम दुरईस्वामी ने भी हिस्सा लिया।

    भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, सटीक कार्रवाई और दृढ़ संकल्प को याद किया गया। साथ ही पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प दोहराया गया।

    अनुभवी राजनयिक हैं विक्रम दुरईस्वामी
    विक्रम दुरईस्वामी 1992 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं और उन्हें विदेश नीति व अंतरराष्ट्रीय संबंधों का लंबा अनुभव है। चीन में नियुक्ति से पहले वह ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।

    बीजिंग पहुंचने पर उनका चीनी अधिकारियों और भारतीय दूतावास के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने स्वागत किया। विशेषज्ञों का मानना है कि दुरईस्वामी की कूटनीतिक समझ आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों को नई दिशा दे सकती है।
  • बांग्लादेश पर चीन का बड़ा दांव! वांग यी ने भारत-अमेरिका को दिया साफ संदेश

    बांग्लादेश पर चीन का बड़ा दांव! वांग यी ने भारत-अमेरिका को दिया साफ संदेश


    नई दिल्ली। चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकियों ने दक्षिण एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। बीजिंग दौरे पर पहुंचे बांग्लादेश के विदेश मंत्री Khalilur Rahman ने चीनी विदेश मंत्री Wang Yi से मुलाकात की, जिसके बाद चीन ने ऐसा बयान दिया जिसे भारत और अमेरिका के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है। वांग यी ने साफ कहा कि दक्षिण एशियाई देशों के साथ चीन के संबंध किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए नहीं हैं और न ही इन रिश्तों पर किसी बाहरी देश का असर होना चाहिए। माना जा रहा है कि यह इशारा India और United States की ओर था।

    बांग्लादेश की नई सरकार और चीन की सक्रियता
    फरवरी में नई बीएनपी सरकार बनने के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्री की यह पहली चीन यात्रा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले महीने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री Tarique Rahman भी चीन दौरे पर जा सकते हैं।

    बैठक के दौरान दोनों देशों ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। चीन ने बांग्लादेश को हरसंभव समर्थन देने की बात कही।

    बेल्ट एंड रोड परियोजना पर जोर
    वांग यी ने कहा कि चीन बांग्लादेश के विकास में सबसे भरोसेमंद साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने चीन की महत्वाकांक्षी Belt and Road Initiative परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    ताइवान मुद्दे पर चीन को मिला समर्थन
    बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने “वन चाइना पॉलिसी” का समर्थन करते हुए कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है और बीजिंग ही पूरे चीन की वैध सरकार है। इसे चीन के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।

    दक्षिण एशिया में बदल रहे समीकरण
    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन लगातार दक्षिण एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश के साथ बढ़ती नजदीकियां भारत और अमेरिका दोनों के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती हैं।

  • भोपाल में कृषि वर्ष पर मंत्रियों-विधायकों का महामंथन:खेती को 'फायदे का धंधा' बनाने पर जोर

    भोपाल में कृषि वर्ष पर मंत्रियों-विधायकों का महामंथन:खेती को 'फायदे का धंधा' बनाने पर जोर


    भोपाल । भोपाल में सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में कृषि वर्ष 2026 को लेकर बड़ा वैचारिक मंथन आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा के मध्य प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, एदल सिंह कंसाना, करन सिंह वर्मा, विश्वास सारंग सहित कई मंत्री और विधायक मंच पर उपस्थित थे।

    खेती को लाभ का धंधा बनाने पर चर्चा
    कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारकर किसानों की आय बढ़ाना। दिनभर चलने वाले इस मंथन में विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के सामने विभागवार प्रेजेंटेशन दे रहे हैं।

    कृषि विभाग: उन्नत बीज, खाद और नई तकनीकों पर आधारित योजनाएं।

    उद्यानिकी एवं मत्स्य पालन: नकदी फसलों और मछली पालन से आय दोगुनी करने के रोडमैप।

    सहकारिता एवं पशुपालन: डेयरी और सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा।

    कार्यक्रम की रूपरेखा
    सवालों का निराकरण: विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं और सुझाव अधिकारियों के सामने रखेंगे।

    मंत्रीगणों का संबोधन: विभागों की प्राथमिकताएं साझा।

    मुख्यमंत्री का मुख्य संबोधन: किसानों के हित में सरकार के विजन और आगामी रणनीतियों पर प्रकाश।

    किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के इस कार्यक्रम का उद्देश्य हर जिले के जनप्रतिनिधि को किसानों से जोड़ना और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाना है।

  • जबलपुर में टाटा सूमो में लगी आग, सोता व्यक्ति जिंदा जल गया; पास की दुकान भी राख

    जबलपुर में टाटा सूमो में लगी आग, सोता व्यक्ति जिंदा जल गया; पास की दुकान भी राख


    जबलपुर। सिहोरा में शनिवार सुबह एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। स्थानीय वार्ड नंबर-3 में खड़ी पुरानी टाटा सूमो में सो रहे एक व्यक्ति की मच्छर भगाने के लिए जलाई गई अगरबत्ती (Mosquito Coil) से आग लग गई। देखते ही देखते आग ने सूमो को पूरी तरह घेर लिया और पास की एक दुकान को भी अपनी चपेट में ले लिया। दुकान जलकर खाक हो गई।

    स्थानीय लोगों के अनुसार मृतक कई सालों से इस पुरानी सूमो में ही रह रहा था। वह मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया और अक्सर गाड़ी के पास ही खाना बनाता तथा रात में उसी में सोता था।स्थानीय लोगों के अनुसार मृतक कई सालों से इस पुरानी सूमो में ही रह रहा था। वह मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया और अक्सर गाड़ी के पास ही खाना बनाता तथा रात में उसी में सोता था। सूमो के अंदर बड़ी मात्रा में पन्नियां और ज्वलनशील कचरा भरा हुआ था, जिसने आग को तेजी से फैलाने में मदद की। जब व्यक्ति बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, तब तक आग ने पूरी गाड़ी को घेर लिया और शख्स अंदर ही फंस गया। दम घुटने और बुरी तरह झुलसने के कारण उसकी मौत हो गई।

    आसपास के लोग धुआं और आग की लपटें देखकर तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी और खुद भी आग बुझाने का प्रयास किया। सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। पुलिस ने मृतक का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल मृतक की पहचान नहीं हो सकी है।

    घटना के समय सूमो पुरानी और ज्वलनशील कचरे से भरी होने के कारण आग की लपटें तेजी से फैल गईं। आसपास के लोग बताते हैं कि व्यक्ति अकेला रहता था और उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। घटना ने इलाके में खौफ और सहानुभूति दोनों पैदा कर दी है।

    पुलिस ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आग कैसे भड़की और क्यों व्यक्ति समय रहते बाहर नहीं निकल पाया। स्थानीय लोग भी इस घटना को मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों की सुरक्षा और ज्वलनशील वस्तुओं की अनदेखी का नतीजा बता रहे हैं।