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  • 21 दिन की पैरोल पर बाहर आया डेरा प्रमुख, सिरसा पहुंचने के साथ ही बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां

    21 दिन की पैरोल पर बाहर आया डेरा प्रमुख, सिरसा पहुंचने के साथ ही बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां

    नई दिल्ली। डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह एक बार फिर पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद सुर्खियों में है। मंगलवार सुबह वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर निकला और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय पहुंच गया। उसके सिरसा पहुंचते ही पूरे इलाके में हलचल बढ़ गई और प्रशासनिक एजेंसियां पूरी तरह सतर्क नजर आईं। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पहले से ही डेरे के आसपास विशेष बंदोबस्त किए गए थे और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त निगरानी रखी गई थी।

    जानकारी के अनुसार, डेरा प्रमुख को 21 दिन की पैरोल मिली है। सुबह तड़के ही उसके जेल से बाहर आने की प्रक्रिया शुरू हुई और कुछ समय बाद वह सुरक्षा घेरे में सिरसा के लिए रवाना हुआ। उसके साथ करीबी लोग भी मौजूद थे और वाहनों का काफिला विशेष सुरक्षा व्यवस्था के साथ आगे बढ़ा। सिरसा पहुंचने से पहले ही डेरे के आसपास बड़ी संख्या में अनुयायियों की मौजूदगी देखने को मिली। कई लोग उसके आगमन का इंतजार कर रहे थे, जिसके चलते प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी थी।

    गुरमीत सिंह पहले भी कई बार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आ चुका है। इस बार की रिहाई को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं क्योंकि बीते वर्षों में उसकी पैरोल को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। हर बार उसके बाहर आने पर समर्थकों और विरोधियों के बीच अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो जाती हैं। यही कारण है कि प्रशासन भी इस पूरे मामले को संवेदनशील मानते हुए अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है।

    डेरा प्रमुख फिलहाल साध्वी यौन शोषण मामले में सजा काट रहा है। हालांकि उससे जुड़े कई अन्य मामलों में समय-समय पर कानूनी स्थिति में बदलाव देखने को मिला है। इसी वजह से उसके नाम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी लगातार बनी रहती हैं। उसके सिरसा आने के बाद एक बार फिर पूरे इलाके में गतिविधियां बढ़ गई हैं।

    बताया जा रहा है कि पिछली पैरोल के दौरान भी उसने डेरे से जुड़े कई कामों की समीक्षा की थी। उस समय पुराने परिसर के पुनर्निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर गतिविधियां तेज हुई थीं। इस बार भी माना जा रहा है कि वह डेरे से जुड़े विभिन्न कार्यों पर ध्यान दे सकता है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर उसके कार्यक्रमों को लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

    पैरोल पर उसकी यह रिहाई एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। लगातार मिल रही पैरोल और उससे जुड़े घटनाक्रमों को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच बहस का दौर शुरू हो गया है। फिलहाल प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार निगरानी रख रही हैं। आने वाले दिनों में उसकी गतिविधियों और मुलाकातों पर भी सभी की नजर बनी रह सकती है।

  • यूपी में बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया और विदेशी नेटवर्क के जरिए युवाओं के ब्रेनवॉश का खतरनाक मॉडल सामने आया

    यूपी में बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया और विदेशी नेटवर्क के जरिए युवाओं के ब्रेनवॉश का खतरनाक मॉडल सामने आया



    नई दिल्ली। यूपी में पिछले कुछ वर्षों में एटीएस और पुलिस की जांचों के दौरान एक ऐसा गंभीर और जटिल पैटर्न सामने आया है, जिसमें सोशल मीडिया, हनीट्रैप, आर्थिक लालच और विदेशी फंडिंग के जरिए युवाओं को पहले प्रभावित किया गया और फिर कथित रूप से उन्हें अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क एक संगठित तरीके से काम करता है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके ब्रेनवॉश और संपर्क स्थापित किए जाते हैं।

    रिपोर्ट्स और जांचों के मुताबिक कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में ऐसे युवाओं को शामिल किया गया जिनकी पहचान बदलकर या फर्जी नामों के जरिए उन्हें आगे इस्तेमाल किया गया। एटीएस की कार्रवाई में कुछ ऐसे मॉड्यूल पकड़े गए हैं जिनमें धर्मांतरण से जुड़े मामलों के साथ-साथ संदिग्ध विदेशी संपर्क और फंडिंग के संकेत मिले हैं।

    वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश में एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी की गिरफ्तारी हुई थी। आरोप था कि ये लोग विदेशी फंडिंग के जरिए ट्रस्ट और संस्थानों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विभिन्न प्रलोभन देकर कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल कर रहे थे। इसी तरह मौलाना कलीम सिद्दीकी का नाम भी एक अलग मामले में सामने आया था, जिसमें जांच एजेंसियों ने अवैध नेटवर्क से जुड़े आरोप लगाए थे।

    हाल के वर्षों में बलरामपुर और आगरा जैसे जिलों में भी इसी तरह के अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जहां सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए संपर्क बनाकर लोगों को प्रभावित करने और कट्टरपंथी सामग्री तक पहुंचाने की बात जांच में सामने आई है। कुछ मामलों में विदेश से फंडिंग और संपर्क के संकेत भी जांच एजेंसियों द्वारा बताए गए हैं, हालांकि हर केस की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार ऐसे नेटवर्क आमतौर पर तीन चरणों में काम करते हैं—पहला भावनात्मक या डिजिटल संपर्क, दूसरा आर्थिक या सामाजिक प्रलोभन, और तीसरा विचारधारा आधारित प्रभाव। इसके लिए टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

    एटीएस का कहना है कि यह एक गंभीर सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है, जिसकी जांच लगातार जारी है और कई मामलों में गिरफ्तारियां और पूछताछ की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, हर मामले में निष्कर्ष अदालत और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।