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  • सीमा कालीरमन का बड़ा खुलासा, बोलीं- खेल का आनंद लिया, मेडल अपने आप मिल गया

    सीमा कालीरमन का बड़ा खुलासा, बोलीं- खेल का आनंद लिया, मेडल अपने आप मिल गया


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाने वाली सीमा कालीरमन ने अपनी सफलता के पीछे का राज साझा किया है। ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन के बाद सीमा ने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उनका पूरा ध्यान केवल अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर था। उन्होंने बताया कि उन्होंने मेडल के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा, बल्कि खेल का आनंद लेते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की और यही सोच उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।

    समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सीमा ने कहा कि पदक जीतने की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने परिणाम की चिंता छोड़कर खेल का आनंद लेना शुरू किया है, तभी से उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया है। उनके अनुसार यदि खिलाड़ी केवल अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान दे तो सफलता अपने आप उसके कदम चूमती है।

    सीमा ने यह भी बताया कि इस बार वह अपने चार साल के बेटे से दूर रहकर कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने आई थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि बेटे की याद उन्हें लगातार आती रही और उसका जिक्र होते ही वह भावुक हो जाती हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए पूरे फोकस के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और देश के लिए पदक जीतने में सफल रहीं।

    उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का बड़ा श्रेय अपने पति और निजी कोच रविंदर कालीरमन को दिया। सीमा ने कहा कि पिछले वर्ष एशियन चैंपियनशिप में उनके पति साथ नहीं थे, जिसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा था। लेकिन इस बार ग्लासगो में रविंदर की मौजूदगी ने उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति ने कभी उन पर पदक जीतने का दबाव नहीं बनाया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि खेल का आनंद लो और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करो। यही सलाह उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी।

    सीमा ने कहा कि एक खिलाड़ी की सफलता केवल मैदान पर दिखाई देने वाले प्रदर्शन तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे वर्षों का संघर्ष, त्याग और कठिन मेहनत छिपी होती है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को मानसिक दबाव, आर्थिक चुनौतियों और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि सही समय पर सहयोग और सुविधाएं मिलें तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम और ऊंचा कर सकते हैं।

    उन्होंने सरकार से भी अपील की कि जिन युवाओं में खेलों के प्रति जुनून और प्रतिभा है, उन्हें शुरुआती स्तर से बेहतर प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उनका मानना है कि समय पर मिला समर्थन कई खिलाड़ियों के सपनों को साकार कर सकता है और भारत को भविष्य में और अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक दिला सकता है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के महिला डिस्कस थ्रो फाइनल में सीमा कालीरमन ने 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर कांस्य पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर की बड़ी सफलता है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उनके संघर्ष, समर्पण और सकारात्मक सोच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है।

  • राष्ट्रपति मुर्मु ने बढ़ाया भारतीय खिलाड़ियों का हौसला, लवप्रीत और सीमा को दी शानदार जीत की बधाई

    राष्ट्रपति मुर्मु ने बढ़ाया भारतीय खिलाड़ियों का हौसला, लवप्रीत और सीमा को दी शानदार जीत की बधाई


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का सिलसिला लगातार जारी है। आठवें दिन भारत के खाते में दो अहम पदक जुड़े, जब वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने पुरुषों के 110 प्लस किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता और सीमा कालीरमन ने महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर देशभर में खुशी की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु समेत कई शीर्ष नेताओं ने उन्हें बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन को देश के लिए गर्व का क्षण बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लवप्रीत सिंह को बधाई देते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतना उनकी मेहनत, दृढ़ संकल्प और शानदार प्रदर्शन का परिणाम है। उन्होंने लिखा कि लवप्रीत की इस सफलता पर हर भारतीय को गर्व है और उन्हें उम्मीद है कि वह आने वाले वर्षों में भी देश के लिए नई उपलब्धियां हासिल करेंगे।

    राष्ट्रपति ने सीमा कालीरमन की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतना सीमा की कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि सीमा की उपलब्धि देश की युवा महिलाओं को खेलों में आगे बढ़ने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेगी।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन को भारतीय खेलों के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने लवप्रीत सिंह की ताकत, मेहनत और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि यह पदक उनकी निरंतर मेहनत का परिणाम है। वहीं सीमा कालीरमन के लिए उन्होंने कहा कि महिलाओं के डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने साहस, दृढ़ निश्चय और संघर्ष की शानदार मिसाल पेश की है।

    केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने लवप्रीत को 388 किलोग्राम कुल भार उठाकर रजत पदक जीतने पर बधाई दी और कहा कि उनका प्रदर्शन भारतीय वेटलिफ्टिंग के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। वहीं सीमा कालीरमन के लिए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) पटियाला की इस एथलीट ने कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सीमा कालीरमन को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनकी मेहनत, अनुशासन और मजबूत इरादों का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीमा भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करती रहेंगी और देश को कई यादगार पल देंगी।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लवप्रीत सिंह और सीमा कालीरमन की सफलता केवल दो पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं। दोनों खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार प्रयास से अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।

  • चोट, मातृत्व और पढ़ाई के बीच नहीं टूटा हौसला, सीमा कालीरमन ने भारत को दिलाया ब्रॉन्ज

    चोट, मातृत्व और पढ़ाई के बीच नहीं टूटा हौसला, सीमा कालीरमन ने भारत को दिलाया ब्रॉन्ज


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाली सीमा कालीरमन की कहानी इसी जज्बे की मिसाल है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि परिवार की जिम्मेदारियां, पढ़ाई और खेल तीनों को एक साथ निभाकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।

    27 वर्षीय सीमा कालीरमन ने ग्लासगो में हुए महिला डिस्कस थ्रो फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के नाम कांस्य पदक दर्ज कराया। यह उनके करियर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक है, जिसने उन्हें देश की नई प्रेरणादायक खिलाड़ियों की सूची में शामिल कर दिया है।

    सीमा का सफर आसान नहीं रहा। घुटने की गंभीर चोट के कारण उन्हें तीन साल से अधिक समय तक प्रतियोगिताओं से दूर रहना पड़ा। इसके बाद मातृत्व की जिम्मेदारी आई और चार साल के बेटे रुद्र की परवरिश के साथ खेल में वापसी करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत के दम पर फिर से खुद को साबित किया।

    सीमा सिर्फ एक एथलीट ही नहीं बल्कि चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय, भिवानी से फिजिकल एजुकेशन में पीएचडी भी कर रही हैं। खेल और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाते हुए उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। उनके इस सफर में सबसे बड़ा साथ उनके पति और कोच रविंदर कालीरमन ने दिया। रविंदर स्वयं राष्ट्रीय स्तर के डिस्कस थ्रो खिलाड़ी रह चुके हैं और उनकी ट्रेनिंग ने सीमा की वापसी को नई दिशा दी।

    2022 में बेटे रुद्र के जन्म के बाद लगभग 11 महीने के ब्रेक के बावजूद सीमा ने जब मैदान पर वापसी की तो पहले से अधिक मजबूत नजर आईं। जहां पहले उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 48.08 मीटर था, वहीं वापसी के बाद उन्होंने इसे लगातार बेहतर करते हुए 57.19 मीटर तक पहुंचाया। इसके बाद भुवनेश्वर में आयोजित इंडियन चैंपियनशिप 2026 में उन्होंने 59.73 मीटर का शानदार थ्रो कर अपना नया व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड बनाया।

    कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में सीमा के छह प्रयासों में से केवल दो थ्रो ही वैध रहे, क्योंकि कई बार डिस्कस साइड नेटिंग में फंस गया। इसके बावजूद उन्होंने धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखा और शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।

    पिछले दो वर्षों में सीमा ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने 2025 के नेशनल गेम्स में स्वर्ण पदक जीता, राष्ट्रीय चैंपियन बनीं और 2026 दक्षिण एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी गोल्ड मेडल हासिल किया। इन्हीं उपलब्धियों के दम पर उन्होंने एशियाई खेल 2026 और कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारतीय टीम में जगह बनाई।

    सीमा कालीरमन की कहानी सिर्फ एक मेडल जीतने की नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास की कहानी है। उन्होंने दिखा दिया कि अगर जुनून सच्चा हो तो चोट, जिम्मेदारियां और कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। उनका कांस्य पदक भारतीय खेल जगत के लिए प्रेरणा का नया अध्याय है और आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए यह संदेश भी कि सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत और धैर्य सबसे बड़ी ताकत होते हैं।