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  • सीहोर पुलिस की बड़ी कामयाबी, वाहन चोर गिरफ्तार; दो घरों की चोरी का खुलासा, लाखों के गहने बरामद

    सीहोर पुलिस की बड़ी कामयाबी, वाहन चोर गिरफ्तार; दो घरों की चोरी का खुलासा, लाखों के गहने बरामद


    सीहोर । सीहोर जिले की भैरूंदा थाना पुलिस को अपराध नियंत्रण अभियान के तहत बड़ी सफलता हाथ लगी है। वाहन चोरी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दो घरों में हुई नकबजनी और दो मोटरसाइकिल चोरी की वारदातों का भी खुलासा कर दिया। आरोपी की निशानदेही पर करीब एक लाख रुपए कीमत के चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई से थाना क्षेत्र में दर्ज कुल चार मामलों की गुत्थी सुलझ गई है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद उपजेल भेज दिया है, जबकि उससे जुड़े अन्य मामलों की भी जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार, 21 और 24 मार्च को भैरूंदा निवासी अंकित तिवारी और कामिल खान ने अपने घरों में चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों मामलों में अज्ञात बदमाश रात के समय मकानों के ताले तोड़कर अंदर घुसे और अलमारियों में रखी नकदी तथा कीमती गहने लेकर फरार हो गए थे। लगातार हो रही चोरी की घटनाओं को देखते हुए पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू की और आरोपियों तक पहुंचने के लिए विशेष टीम का गठन किया।

    एसडीओपी रोशन कुमार जैन के मार्गदर्शन और थाना प्रभारी निरीक्षक घनश्याम दांगी के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम लगातार संदिग्धों पर नजर बनाए हुए थी। इसी दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर भैरूंदा निवासी मुहास उर्फ मुहाज खान को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पहले वाहन चोरी और बाद में घरों में चोरी की वारदातों को अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली।

    आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने करीब एक लाख रुपए मूल्य के चांदी के आभूषण बरामद किए। जब्त सामान में चांदी का हार, बच्चों के दो कड़े, दो पायजेब, दो चांदी की पट्टियां और चार बिछिया शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि चोरी गया अन्य सामान और आरोपी के संभावित साथियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

    पूछताछ के दौरान आरोपी ने यह भी कबूल किया कि उसने गुड़ बाजार और कॉलोनी क्षेत्र से दो मोटरसाइकिलें भी चोरी की थीं। इस खुलासे के बाद पुलिस ने वाहन चोरी के दोनों मामलों को भी सुलझा लिया। एक ही आरोपी की गिरफ्तारी से चोरी और वाहन चोरी से जुड़े कुल चार मामलों का पर्दाफाश होना पुलिस के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

    पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे चारों मामलों में न्यायिक अभिरक्षा में उपजेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि उसने अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं। पुलिस का मानना है कि आगे की पूछताछ में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

  • सीहोर में थाने के बाहर बच्चे के साथ बैठी महिला का मामला, पुलिस पर FIR दर्ज न करने के गंभीर आरोप

    सीहोर में थाने के बाहर बच्चे के साथ बैठी महिला का मामला, पुलिस पर FIR दर्ज न करने के गंभीर आरोप

     मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में एक महिला द्वारा न्याय की मांग को लेकर थाने के सामने अपने छोटे बच्चे के साथ सड़क पर बैठने का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित महिला अपनी बेटी के साथ हुई कथित मारपीट की शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने पहुंची थी, लेकिन आरोप है कि उसकी FIR दर्ज करने के बजाय उसे अलग-अलग थानों के बीच भटकाया जाता रहा। इस पूरी प्रक्रिया में महिला घंटों तक थाने के बाहर बैठी रही और अंततः वह थक-हारकर सड़क पर ही बैठ गई, जबकि उसके साथ छोटा बच्चा भी मौजूद था। यह स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब शाम से लेकर देर रात तक पीड़िता न्याय की उम्मीद में वहीं मौजूद रही।

    बताया जा रहा है कि घटना उस समय की है जब पीड़िता की बेटी जंगल में बकरी चराने गई थी और किसी विवाद के दौरान कुछ लोगों द्वारा उसके साथ मारपीट किए जाने का आरोप सामने आया। परिजनों का कहना है कि इस घटना में युवती गंभीर रूप से घायल हुई और उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने मामले को अपने क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए तत्काल कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता को एक थाने से दूसरे थाने भेजना शुरू कर दिया। इस व्यवहार से आहत होकर महिला थाने के बाहर बैठने को मजबूर हो गई।

    महिला का कहना है कि वह लगातार पुलिस से गुहार लगाती रही कि उसकी शिकायत दर्ज कर उचित जांच की जाए, लेकिन उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि कई बार उसे यह कहकर टाल दिया गया कि संबंधित थाना जाकर शिकायत दर्ज कराएं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पीड़िता अपने छोटे बच्चे के साथ असहाय स्थिति में रही, जिससे उसकी परेशानी और बढ़ गई।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदेश में महिला सुरक्षा और त्वरित न्याय व्यवस्था को लेकर लगातार बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर सामने आई यह घटना पुलिस की संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई की क्षमता पर सवाल खड़े करती है। कानून व्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पुलिस को क्षेत्राधिकार के तकनीकी पहलू में उलझने के बजाय तुरंत प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए Zero FIR दर्ज करनी चाहिए, ताकि पीड़ित को राहत मिल सके और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

    घटना का एक वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर चर्चा और तेज हो गई है। अब यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर रहा है और लोगों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है। फिलहाल देखना यह होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए किस तरह की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाती है।