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  • सीहोर में 1.40 करोड़ की नल जल योजना 6 साल से अधूरी, लोग पानी को तरसे

    सीहोर में 1.40 करोड़ की नल जल योजना 6 साल से अधूरी, लोग पानी को तरसे



    मध्य प्रदेश । सीहोर जिले के मुंगावली गांव में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहरा गया है। करीब 3 हजार की आबादी वाला यह गांव आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रहा है, जबकि यहां 1.40 करोड़ रुपए की नल-जल योजना छह साल पहले शुरू की गई थी। योजना अधूरी होने से ग्रामीणों को खेतों और दूसरे गांवों से पानी लाना पड़ रहा है।

    गांव में लगे अधिकांश सरकारी हैंडपंप जनवरी महीने में ही सूख चुके थे। गर्मी बढ़ने के साथ हालात और खराब हो गए हैं। पानी के लिए ग्रामीणों को दूर-दराज के खेतों में लगे ट्यूबवेलों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। कई परिवारों ने अपने खेतों से पाइपलाइन बिछाकर गांव तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था की है।

    मुंगावली गांव में कुल 889 मकान हैं और लगभग 13 सरकारी हैंडपंप लगाए गए थे, लेकिन भूजल स्तर नीचे जाने के कारण अधिकांश हैंडपंप बंद हो चुके हैं। जिन परिवारों के पास खेत या निजी बोर नहीं हैं, वे दूसरों पर निर्भर होकर किसी तरह पानी जुटा रहे हैं।

    ग्रामीणों का आरोप है कि 1.40 करोड़ रुपए की पेयजल योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गई। योजना के तहत पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था, लेकिन घटिया निर्माण और अधूरे काम के कारण अब तक गांव में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी।

    बताया जा रहा है कि पिछले छह वर्षों में दो ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर भाग चुके हैं। गुणवत्ताहीन निर्माण और समय पर काम पूरा नहीं करने के कारण निर्माण कंपनियों अंबकेश्वर स्टील और राधिका अग्रवाल को ब्लैकलिस्ट भी किया गया था। इसके बाद लंबे समय तक योजना बंद पड़ी रही।

    फिलहाल टी एंड के कंस्ट्रक्शन देवास कंपनी को काम सौंपा गया है, लेकिन गांव वालों को अभी भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।

    पीएचई विभाग के ईई प्रदीप कुमार सक्सेना का कहना है कि पहले के ठेकेदारों की लापरवाही के कारण योजना में देरी हुई। अब नया ठेकेदार काम कर रहा है और जल्द ही योजना पूरी कर गांव में जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी।

  • नौतपा से पहले ही हाहाकार: सीहोर में पानी की किल्लत और भीषण गर्मी

    नौतपा से पहले ही हाहाकार: सीहोर में पानी की किल्लत और भीषण गर्मी

    मध्य प्रदेश । सीहोर जिले में नौतपा से पहले ही तेज गर्मी और गंभीर जल संकट ने हालात बिगाड़ दिए हैं। तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने के साथ ही शहर की जीवनरेखा मानी जाने वाली सीवन नदी पूरी तरह सूख गई है, जिससे पेयजल संकट गहरा गया है।

    स्थानीय लोगों के अनुसार, सीवन नदी का तल पूरी तरह सूखकर फट चुका है और अब वहां पानी का नामोनिशान नहीं बचा है। सूखी नदी के क्षेत्र में मवेशी तक घास चरते नजर आ रहे हैं, जो हालात की गंभीरता को दर्शाता है।

    भीषण गर्मी के चलते दोपहर के समय शहर के बाजारों और मुख्य मार्गों पर सन्नाटा पसरा रहता है। लू के थपेड़ों के कारण लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।

    नदी सूखने और भूजल स्तर गिरने से कई इलाकों में नल जल आपूर्ति प्रभावित हुई है। लोगों को अब पीने के पानी के लिए निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई और अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो संकट और बढ़ सकता है।

    स्थिति को देखते हुए कलेक्टर बालागुरू के. ने सभी संबंधित विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सीएमओ, जनपद सीईओ और पीएचई विभाग को पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने, खराब हैंडपंपों की मरम्मत करने और नल जल योजनाओं की लगातार मॉनिटरिंग करने को कहा है। साथ ही जरूरत पड़ने पर तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।