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  • रवींद्र जडेजा ने चीफ सेलेक्टर पद पर पूछा आवेदन का तरीका, लेकिन मौजूदा नियमों के चलते नहीं बन सकते चयनकर्ता

    रवींद्र जडेजा ने चीफ सेलेक्टर पद पर पूछा आवेदन का तरीका, लेकिन मौजूदा नियमों के चलते नहीं बन सकते चयनकर्ता


    नई दिल्ली:
    अजीत अगरकर का भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ सेलेक्टर के तौर पर कार्यकाल खत्म होने के बाद नए चयनकर्ता की तलाश शुरू हो गई है। बीसीसीआई ने चीफ सेलेक्टर के पद के लिए आवेदन मंगाए हैं और इसी बीच रवींद्र जडेजा की एक टिप्पणी ने इस नियुक्ति को लेकर चर्चा को और दिलचस्प बना दिया। बोर्ड की ओर से आवेदन प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी साझा किए जाने के बाद जडेजा ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि आवेदन करने की प्रक्रिया क्या है। उनके इस कमेंट के बाद उनके चीफ सेलेक्टर बनने की चर्चा शुरू हो गई।

    जडेजा की टिप्पणी सामने आने के बाद यह सवाल भी उठा कि क्या वह वास्तव में चीफ सेलेक्टर के पद के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि मौजूदा नियमों के मुताबिक ऐसा संभव नहीं है। बीसीसीआई के नियमों के अनुसार कोई सक्रिय क्रिकेटर चयन समिति या किसी प्रशासनिक पद पर नियुक्त नहीं हो सकता। चीफ सेलेक्टर पद के लिए उम्मीदवार का सभी तरह के क्रिकेट से कम से कम पांच साल पहले संन्यास लेना भी जरूरी है। ऐसे में जडेजा की मौजूदा स्थिति उन्हें इस पद के लिए योग्य नहीं बनाती।

    रवींद्र जडेजा ने टी20 वर्ल्ड कप 2024 के बाद टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया था, लेकिन वह अभी टेस्ट और वनडे क्रिकेट में सक्रिय हैं। इसके अलावा वह इंडियन प्रीमियर लीग में भी खेल रहे हैं। इसलिए सभी तरह के क्रिकेट से संन्यास लेने की निर्धारित शर्त को वह पूरा नहीं करते हैं। जडेजा का आवेदन प्रक्रिया को लेकर किया गया कमेंट ऐसे समय में आया, जब नए चीफ सेलेक्टर की नियुक्ति को लेकर चर्चा चल रही है। इसी वजह से उनकी मजाकिया टिप्पणी ने क्रिकेट प्रशंसकों का ध्यान खींचा।

    अजीत अगरकर ने 2023 में चीफ सेलेक्टर का पद संभाला था। उनके कार्यकाल के दौरान चयन समिति ने भारतीय टीम के साथ कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। भारत ने उनके कार्यकाल में टी20 वर्ल्ड कप 2024, चैम्पियंस ट्रॉफी 2025 और टी20 वर्ल्ड कप 2026 जीते। भारतीय टीम 2023 के क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल तक भी पहुंची। इसके अलावा टीम ने इस दौरान दो एशिया कप खिताब और दो एशियन गेम्स गोल्ड मेडल भी जीते। अगरकर के कार्यकाल को भारतीय क्रिकेट के लिए सफल माना गया।

    कार्यकाल खत्म होने के बाद अगरकर के योगदान को भी याद किया गया। उनके कार्यकाल में भारतीय टीम की उपलब्धियों का जिक्र किया गया और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं। टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर ने भी अगरकर के लिए संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि अगरकर के तीन आईसीसी खिताब उनकी सोच और टीम को हमेशा प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। गंभीर ने यह भी कहा कि इतिहास अगरकर के साथ और ज्यादा न्याय करेगा। अब अगरकर के बाद नए चीफ सेलेक्टर की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जबकि जडेजा की टिप्पणी को मौजूदा नियमों के कारण सिर्फ मजाक के तौर पर देखा जा रहा है।

  • अजीत अगरकर की जगह प्रज्ञान ओझा को मिली अंतरिम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी, स्थायी नियुक्ति पर भी बन सकती है सहमति

    अजीत अगरकर की जगह प्रज्ञान ओझा को मिली अंतरिम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी, स्थायी नियुक्ति पर भी बन सकती है सहमति

    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम की सिलेक्शन कमिटी में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अजीत अगरकर का कार्यकाल अभी 4 अक्टूबर तक है, लेकिन उससे पहले ही उन्हें सिलेक्शन कमिटी की मौजूदा बैठक से अलग कर दिया गया है। उनकी जगह कमिटी के सदस्य और पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को फिलहाल अंतरिम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    मंगलवार 29 सितंबर को गुवाहाटी में हुई सिलेक्शन कमिटी की बैठक की अध्यक्षता प्रज्ञान ओझा ने की। इस बैठक में अजीत अगरकर शामिल नहीं हुए। आने वाले न्यूजीलैंड दौरे को लेकर टीम की रूपरेखा तैयार करने के लिए 30 सितंबर को होने वाले दूसरे वनडे के दौरान भी सभी चयनकर्ताओं के स्टेडियम में मौजूद रहने की बात कही गई है।

    प्रज्ञान ओझा को फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तहत कमिटी का प्रमुख बनाया गया है। हालांकि, आगे चलकर उन्हें स्थायी रूप से चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी मिलने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। नए सिलेक्टर की नियुक्ति और चयन समिति की संरचना स्पष्ट होने के बाद ही यह तय होगा कि मौजूदा व्यवस्था कितने समय तक जारी रहती है।

    प्रज्ञान ओझा चयन समिति के मौजूदा सदस्यों में टेस्ट क्रिकेट के अनुभव के लिहाज से सबसे वरिष्ठ हैं। उन्होंने भारतीय टीम के लिए 24 टेस्ट मैच खेले हैं। मौजूदा चयन समिति में शिव सुंदर दास ने 23 टेस्ट, आरपी सिंह ने 14 टेस्ट और अजय रात्रा ने 6 टेस्ट मैच खेले हैं। इसी अनुभव के कारण चयन समिति की अध्यक्षता के लिए ओझा का नाम सामने आया है।

    ओझा ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी। अब वह चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें समिति के सदस्यों के बीच स्वीकार्य विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

    सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि प्रज्ञान ओझा की यह जिम्मेदारी केवल अस्थायी रहेगी या उन्हें आगे भी चयन समिति का प्रमुख बनाए रखा जाएगा। इसका जवाब नए चयनकर्ता के चयन के बाद सामने आएगा। यदि पार्थिव पटेल अजीत अगरकर की जगह चयन समिति में शामिल होते हैं, तो ऐसी स्थिति में उनके चेयरमैन बनने की संभावना भी बताई जा रही है।

    वहीं, अगर परिस्थितियां अलग रहती हैं तो प्रज्ञान ओझा चयन समिति के प्रमुख के पद पर बने रह सकते हैं। इस समय चयन समिति में नेतृत्व को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है और आगे होने वाले फैसलों के बाद तस्वीर साफ होगी।

    अजीत अगरकर के कार्यकाल की अवधि पूरी होने से पहले ही उन्हें चयन समिति की बैठक से अलग किए जाने के बाद क्रिकेट प्रशासन में बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, वर्तमान में प्रज्ञान ओझा की भूमिका अंतरिम है और स्थायी नियुक्ति को लेकर अंतिम फैसला अभी सामने नहीं आया है।

    न्यूजीलैंड के आगामी दौरे को देखते हुए चयन समिति के लिए आने वाले फैसले महत्वपूर्ण होंगे। टीम संयोजन, खिलाड़ियों के चयन और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा के बीच प्रज्ञान ओझा फिलहाल चयन समिति की कमान संभाल रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नई चयन समिति बनने के बाद चेयरमैन पद की जिम्मेदारी किसे मिलती है।