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  • पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सराहा मछुआरों का महत्व, बंदरगाह और नवाचार से बढ़े आत्मनिर्भर प्रयास

    पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सराहा मछुआरों का महत्व, बंदरगाह और नवाचार से बढ़े आत्मनिर्भर प्रयास


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 132वीं कड़ी में देश के मछुआरों के योगदान को सराहा और उन्हें केवल समुद्र के योद्धा नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव बताया। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे मछुआरे भाई-बहन हर दिन सुबह होने से पहले समुद्र की लहरों से जूझते हैं और अपने परिवार के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में जुट जाते हैं। उन्होंने बताया कि आज उनके जीवन को आसान बनाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। बंदरगाहों का विकास, मछुआरों के लिए बीमा और तकनीक के उपयोग से उनकी मेहनत का फल अब अधिक सुरक्षित और बेहतर ढंग से मिल रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समुद्र में मछुआरों की गतिविधियों पर मौसम का बड़ा प्रभाव पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए तकनीक का इस्तेमाल करके उन्हें पूरी मदद दी जा रही है। इससे मत्स्य पालन क्षेत्र में न केवल समृद्धि आई है बल्कि नवाचार के नए द्वार भी खुले हैं। समुद्री शैवाल और मछली पालन के क्षेत्र में नए तरीके अपनाकर मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।

    पीएम मोदी ने ओडिशा की सुजाता भूयान की कहानी साझा की। सुजाता जी एक गृहणी थीं लेकिन उन्होंने कुछ नया करके अपने परिवार की मदद करना चाहा। उन्होंने हीराकुंड जलाशय में मछली पालन शुरू किया। शुरुआती दिनों में मौसम, मछलियों का खाना और घर की जिम्मेदारियों के संतुलन जैसी कई चुनौतियां थीं, लेकिन उनका हौसला अडिग था। केवल दो-तीन वर्षों में उनका प्रयास फलता-फूलता उद्योग बन गया। उनकी सफलता अब समुदाय की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

    लक्षद्वीप के मिनीकॉय की हाव्वा गुलजार ने भी मछली उद्योग में अपनी अद्भुत संकल्प-शक्ति दिखाई। वह पहले एक फिश प्रोसेसिंग यूनिट चलाती थीं, लेकिन उन्होंने बेहतर प्रबंधन और बिक्री के लिए कोल्ड स्टोरेज यूनिट लगाने का निर्णय लिया। आज इसी योजना से उनका कारोबार और मजबूत हुआ और वे बेहतर प्लानिंग के साथ मछली उद्योग चला पा रही हैं।

    पीएम मोदी ने बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार के प्रयास का भी उल्लेख किया। उन्होंने पारंपरिक खेती से अलग तालाब-खेत का निर्माण किया और प्रशिक्षण प्राप्त कर मछलियों की बिक्री से अच्छा लाभ कमाया। वहीं समुद्री शैवाल की खेती करने वाले कई लोग इस क्षेत्र में अच्छा व्यवसाय कर रहे हैं और इससे लाभ कमा रहे हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश में इस तरह के कई प्रेरक प्रयास हो रहे हैं। मछुआरों के इन प्रयासों से न केवल उनके जीवन में बदलाव आया है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत हुई है। उन्होंने मत्स्य पालन क्षेत्र में कार्यरत सभी लोगों की सराहना की और कहा कि उनका योगदान आत्मनिर्भर भारत की नींव को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।

  • मोदी सरकार का बड़ा फैसला: 2027 जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर, किसानों को भी राहत

    मोदी सरकार का बड़ा फैसला: 2027 जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर, किसानों को भी राहत


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में तीन अहम फैसले लिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों का ऐलान करते हुए कहा कि सरकार ने 2027 की जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसके साथ ही कोल (कोयला) सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक बड़ा रिफॉर्म किया गया और किसानों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले का भी ऐलान किया गया।

    डिजिटल जनगणना का ऐतिहासिक फैसला

    अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 2027 की जनगणना पहली बार डिजिटल रूप में आयोजित की जाएगी, जिसमें डेटा सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह जनगणना दो चरणों में की जाएगी। पहले चरण में 1 अप्रैल से सितंबर 2026 तक हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस होगा, और दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी। इस बार डिजिटल जनगणना में डेटा कलेक्शन के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा, जो हिंदी, इंग्लिश और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। इस कदम से जनगणना प्रक्रिया में तेजी आएगी और डेटा संग्रहण को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा।

    कोल सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

    मंत्री ने बताया कि कोल सेतु नामक योजना के तहत भारत अब कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर है। इससे भारत की कोयला आयात पर निर्भरता खत्म हो रही है, जिससे 60 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी। 2024-25 में भारत ने 1 बिलियन टन कोल प्रोडक्शन का लक्ष्य हासिल किया है, जो देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।

    किसानों के लिए राहत: एक और बड़ा फैसला

    सरकार ने किसानों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले का भी ऐलान किया है, हालांकि इसके विवरण का अभी खुलासा नहीं किया गया है। इससे किसानों को फसल उगाने और उनकी आय को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों की बेहतरी के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने 2027 की डिजिटल जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है, जो जनगणना प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाएगा। साथ ही कोल सेक्टर में आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए कदम से देश की ऊर्जा सुरक्षा को नया आयाम मिलेगा। किसानों से जुड़े फैसले ने भी उनकी स्थिति में सुधार की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाया है।