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  • बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार लाल निशान में खुला, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बढ़ा, आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट से शेयर बाजार लाल निशान में खुला, निवेशकों की बढ़ी चिंता

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांच कारोबारी सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला शुक्रवार को थम गया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में पहुंच गए। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया और निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स सैकड़ों अंकों की गिरावट के साथ खुला, जबकि एनएसई निफ्टी भी महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया। शुरुआती घंटे में गिरावट और गहरी होती गई तथा सेंसेक्स में 700 अंकों से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं निफ्टी भी लगभग एक प्रतिशत तक टूटकर कारोबार करता दिखाई दिया। हाल के दिनों में बाजार में बनी मजबूत तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किए जाने को भी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी सेक्टर पर देखने को मिला। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों में व्यापक बिकवाली के कारण संबंधित सूचकांक में तेज गिरावट दर्ज की गई। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में कमजोर रहे और कई दिग्गज कंपनियां टॉप लूजर्स की सूची में शामिल हो गईं। वैश्विक आईटी उद्योग से जुड़े संकेतों और भविष्य के कारोबारी अनुमानों में नरमी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जिसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया।

    आईटी क्षेत्र के अलावा रियल एस्टेट, वित्तीय सेवाएं, निजी बैंक, धातु और ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी कमजोरी देखने को मिली। हालांकि फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान बना रहा। इसके बावजूद व्यापक बाजार पर बिकवाली का दबाव हावी रहा और अधिकांश सेक्टर नकारात्मक दायरे में कारोबार करते दिखाई दिए।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, हालांकि इनकी कमजोरी बड़े सूचकांकों की तुलना में सीमित रही। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफा वसूलना एक सामान्य प्रक्रिया है। उनके अनुसार बाजार की दीर्घकालिक तस्वीर अभी भी सकारात्मक बनी हुई है और मौजूदा गिरावट को बड़े रुझान में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े कई बुनियादी संकेतक अभी भी मजबूत बने हुए हैं। महंगाई पर नियंत्रण, आर्थिक गतिविधियों में सुधार और ऊर्जा कीमतों में नरमी जैसे कारक बाजार को समर्थन प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

    वैश्विक स्तर पर भी मिले-जुले संकेत देखने को मिले। अधिकांश एशियाई बाजार दबाव में कारोबार करते रहे, जबकि अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रहने से भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को राहत मिलने की संभावना बनी हुई है। इससे भविष्य में महंगाई और लागत दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है। हालांकि वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की रणनीति और सेक्टर आधारित प्रदर्शन आने वाले दिनों में बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को संतुलित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी जा रही है।

  • वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    वैश्विक तनाव और कमजोर संकेतों से शेयर बाजार पर दबाव, सेंसेक्स 227 अंक टूटा; आईटी, रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में दिखाई दिए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

    कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर से 400 अंकों से अधिक टूटकर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी में भी शुरुआती कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि शुरुआती झटके के बाद बाजार ने कुछ रिकवरी दिखाई, लेकिन दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में ही कारोबार करते रहे। सुबह के सत्र में सेंसेक्स करीब 227 अंक और निफ्टी लगभग 80 अंक की गिरावट के साथ ट्रेड करता नजर आया।

    बाजार में सबसे अधिक दबाव आईटी, रियल्टी, मेटल और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दिखाई दिया। प्रमुख आईटी कंपनियों और निजी बैंकों में बिकवाली का माहौल रहा, जबकि कुछ चुनिंदा उपभोक्ता वस्तु, तेल एवं गैस तथा एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सीमित बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि व्यापक बाजार में निवेशकों की रुचि पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

    विश्लेषकों के अनुसार, बाजार की मौजूदा कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता है। हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय बाजार पर दबाव बना रही है। विदेशी निवेशक हाल के सत्रों में भारतीय इक्विटी बाजार से पूंजी निकालते दिखाई दिए हैं, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।

    घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के नतीजों पर टिकी हुई है। शुक्रवार को आने वाले फैसले से ब्याज दरों और आर्थिक गतिविधियों को लेकर नई दिशा मिल सकती है। ऐसे में बड़े निवेशक फिलहाल आक्रामक दांव लगाने से बचते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेत नहीं मिलते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। विदेशी निवेशकों की डेरिवेटिव बाजार में बढ़ती शॉर्ट पोजिशन भी निकट भविष्य में कमजोरी की आशंका को मजबूत करती है। हालांकि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात में सुधार होता है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो बाजार की धारणा तेजी से बदल सकती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा अस्थिरता के दौर में अल्पकालिक ट्रेडिंग जोखिमपूर्ण साबित हो सकती है। वहीं लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय गुणवत्ता वाले शेयरों में निवेश के अवसर भी प्रदान कर सकता है। बैंकिंग, फार्मा, ऑटो और ऑटो एंसिलरी सेक्टर के कई मजबूत शेयर हालिया गिरावट के कारण आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हैं, जो भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।