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  • वजन घटाने का शॉर्टकट पड़ सकता है भारी सस्ता हुआ सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन बिना डॉक्टर सलाह इस्तेमाल से बढ़ीं स्वास्थ्य समस्याएं

    वजन घटाने का शॉर्टकट पड़ सकता है भारी सस्ता हुआ सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन बिना डॉक्टर सलाह इस्तेमाल से बढ़ीं स्वास्थ्य समस्याएं


    नई दिल्ली । वजन कम करने की बढ़ती होड़ और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे फिटनेस ट्रेंड के बीच डायबिटीज और मोटापे के इलाज में इस्तेमाल होने वाला सेमाग्लूटाइड आधारित इंजेक्शन अब नई चिंता का कारण बन गया है। पहले यह इंजेक्शन केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में गंभीर मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को दिया जाता था लेकिन इसकी कीमत कम होने के बाद अब बड़ी संख्या में लोग केवल पतला दिखने की चाह में बिना चिकित्सकीय सलाह इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रवृत्ति भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है।

    मार्च 2026 में सेमाग्लूटाइड का पेटेंट समाप्त होने के बाद इसके जेनेरिक संस्करण बाजार में उपलब्ध होने लगे। पहले जहां इसका प्री फिल्ड पेन लगभग 20 हजार रुपए में मिलता था वहीं अब इसकी कीमत घटकर करीब 1500 रुपए रह गई है। कीमत में आई इस बड़ी गिरावट के बाद इसकी मांग में अचानक कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। एमपी फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अनुसार पहले जहां हर महीने लगभग 4 हजार इंजेक्शन की मांग रहती थी वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 19 हजार प्रति माह तक पहुंच गई है।

    चिकित्सकों का कहना है कि सेमाग्लूटाइड मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में प्रभावी दवा है लेकिन इसका उपयोग केवल विशेषज्ञ की सलाह और नियमित चिकित्सकीय निगरानी में ही किया जाना चाहिए। एंडोक्राइन विशेषज्ञ डॉ. मनुज शर्मा के अनुसार यह दवा मरीज की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए धीरे धीरे निर्धारित खुराक में शुरू की जाती है। बिना जांच और सही डोज के इसका उपयोग गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस इंजेक्शन के शुरुआती दुष्प्रभावों में मतली उल्टी पेट भरा भरा महसूस होना कब्ज दस्त और कमजोरी जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। कुछ मामलों में शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन पित्ताशय में पथरी पित्ताशय की सूजन और अग्न्याशय में सूजन जैसी गंभीर जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर लगातार लोगों से बिना चिकित्सकीय सलाह इस दवा का उपयोग नहीं करने की अपील कर रहे हैं।

    भोपाल के अस्पतालों में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोग केवल जल्दी वजन कम करने की इच्छा से यह इंजेक्शन लेने लगे। एक 27 वर्षीय युवती ने शादी से पहले तेजी से वजन घटाने के लिए इसका उपयोग शुरू किया लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद तेज पेट दर्द उल्टी और गंभीर डिहाइड्रेशन के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। जांच में पित्ताशय में पथरी और शरीर में पानी की गंभीर कमी पाई गई जिसके बाद लंबे इलाज से उसकी स्थिति सामान्य हो सकी।

    इसी तरह 34 वर्षीय एक महिला ने सोशल मीडिया से प्रभावित होकर बिना डॉक्टर की सलाह तीन महीने तक यह इंजेक्शन लिया। इस दौरान उसका वजन लगभग 14 किलो कम हो गया लेकिन लगातार कमजोरी और उल्टी की शिकायत शुरू हो गई। चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टरों ने तुरंत इंजेक्शन बंद कराया और उपचार शुरू किया।

    सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव रघुवंशी का कहना है कि सेमाग्लूटाइड हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त दवा नहीं है। इसे शुरू करने से पहले मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री मोटापे की गंभीरता अन्य बीमारियों और संभावित जोखिमों का विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक होता है। केवल वजन घटाने या आकर्षक दिखने के उद्देश्य से इसका उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ जीवनशैली संतुलित आहार नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह के साथ किया गया उपचार ही सुरक्षित और स्थायी तरीके से वजन नियंत्रित करने का सबसे बेहतर विकल्प है। किसी भी दवा को सोशल मीडिया के ट्रेंड या दूसरों की सलाह पर लेने के बजाय हमेशा योग्य चिकित्सक से परामर्श करना जरूरी है।

  • भारत में लॉन्च हुई डायबिटीज की दवा ओज़ेम्पिक: जानें कीमत और फायदे

    भारत में लॉन्च हुई डायबिटीज की दवा ओज़ेम्पिक: जानें कीमत और फायदे


    नई दिल्ली। डेनमार्क की प्रमुख दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में अपनी बहुप्रतीक्षित दवा ओज़ेम्पिक (Ozempic) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह दवा टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प बन सकती है। ओज़ेम्पिक को 2017 में अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा अनुमोदित किया गया था और तब से यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाओं में से एक बन गई है। भारत में इसकी कीमत 0.25 मिलीग्राम की खुराक के लिए ₹2,200 प्रति सप्ताह रखी गई है। वहीं, 0.5 मिलीग्राम और 1 मिलीग्राम की खुराक के लिए कीमत ₹10,170 और ₹11,175 प्रति माह होगी।

    यह दवा सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) नामक सक्रिय घटक से बनती है, जो शरीर में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले GLP-1 हार्मोन की तरह काम करता है। यह हार्मोन शरीर को यह संकेत भेजता है कि पेट भरा हुआ है, जिससे भूख कम लगती है और व्यक्ति कम कैलोरी का सेवन करता है। इसके अतिरिक्त, ओज़ेम्पिक का असर पेट की पाचन क्रिया को धीमा करने पर भी पड़ता है, जिससे व्यक्ति लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है और बार-बार खाने से बचता है। इसके कारण यह दवा वजन घटाने में भी प्रभावी साबित हो रही है, जिससे यह डायबिटीज के मरीजों के अलावा अन्य लोगों के बीच भी लोकप्रिय हो रही है।

    भारत में सीडीएससीओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) ने अक्टूबर 2023 में ओज़ेम्पिक को टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए मंजूरी दी थी। यह दवा अब ग्लाइसेमिक नियंत्रण में सुधार करने के साथ-साथ उन मरीजों में हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को भी कम करने में मदद करती है, जिन्हें पहले से हृदय रोग है। यह दवा खासतौर पर डाइट और एक्सरसाइज के साथ मिलकर काम करती है और मरीजों के रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करती है।

    हालांकि ओज़ेम्पिक की कीमतें कुछ उच्च हैं, लेकिन यह एक कारगर उपचार विकल्प हो सकती है। फिर भी, किसी भी नई दवा का उपयोग करने से पहले, मरीजों को अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह उनके लिए सही है और उन्हें इसके किसी साइड इफेक्ट का सामना नहीं करना पड़ेगा।