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  • विकसित भारत 2047 की ओर बड़ा कदम, भारत-नीदरलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को दी मंजूरी

    विकसित भारत 2047 की ओर बड़ा कदम, भारत-नीदरलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को दी मंजूरी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती मिली है। दोनों देशों ने आपसी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को भी साझा किया गया, जिसमें देश को दीर्घकालिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने की रूपरेखा शामिल है।

    बैठक में दोनों नेताओं ने माना कि भारत और नीदरलैंड साझा मूल्यों, विश्वास और पारस्परिक हितों के आधार पर पहले से ही मजबूत संबंध साझा करते हैं। अब इस साझेदारी को और व्यापक बनाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें जल प्रबंधन, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और नई तकनीकों जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।

    जल प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत सहयोग मौजूद है, जिसे अब और आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की विशाल आवश्यकताओं को देखते हुए इस क्षेत्र में नई परियोजनाओं और तकनीकी साझेदारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी तरह रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों पर भी चर्चा की गई।

    आर्थिक सहयोग को दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नए अवसरों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाओं पर विचार किया गया। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन, रोबोटिक्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भविष्य की दिशा के रूप में देखा जा रहा है।

    इस दौरान एक महत्वपूर्ण समझौते का भी उल्लेख किया गया, जिसमें टाटा समूह और एएसएमएल के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में साझेदारी शामिल है। इस समझौते को भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भारत में उन्नत तकनीकी इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    इसके साथ ही दोनों देशों ने पोर्ट कनेक्टिविटी, सप्लाई चेन सुधार, कृषि क्षेत्र और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। भारत के बंदरगाहों को नीदरलैंड के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, जिससे वैश्विक व्यापार को नई गति मिल सकती है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर सांस्कृतिक सहयोग और शिक्षा के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड के संबंध केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ज्ञान आधारित भी हैं, जिन्हें और गहराई देने की आवश्यकता है।

    इस दौरे के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत भारत को ऐतिहासिक कलाकृतियों की वापसी भी हुई, जिसे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है।

  • भारत-दक्षिण कोरिया के बीच ‘चिप से शिप’ तक हुए 15 समझौते, व्यापार 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य

    भारत-दक्षिण कोरिया के बीच ‘चिप से शिप’ तक हुए 15 समझौते, व्यापार 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य

    नई दिल्ली। भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों को नई दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे. म्युंग के बीच अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस दौरान दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। साथ ही तकनीक, ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और पोत निर्माण समेत 15 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए और छह अहम घोषणाएं भी हुईं।

    भरोसे से भविष्य की साझेदारी की ओर

    बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया अपने भरोसेमंद रिश्तों को भविष्य की मजबूत साझेदारी में बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि “चिप से लेकर शिप, टैलेंट से लेकर टेक्नोलॉजी और एनर्जी से लेकर एनवायरमेंट तक हर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा।” इससे दोनों देशों की प्रगति और समृद्धि को नई गति मिलेगी।

    2030 तक व्यापार दोगुना करने की योजना
    प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार करीब 27 अरब डॉलर है, जिसे 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भारत-दक्षिण कोरिया फाइनेंशियल फोरम की शुरुआत की गई है। साथ ही औद्योगिक सहयोग समिति का गठन और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए आर्थिक सुरक्षा वार्ता शुरू की जाएगी।

    निवेश और इंडस्ट्री को बढ़ावा देने पर जोर
    भारत में दक्षिण कोरिया की कंपनियों, खासकर MSME सेक्टर के लिए अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से कोरियन इंडस्ट्रियल टाउनशिप स्थापित करने का फैसला लिया गया है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अगले एक साल में अपग्रेड किया जाएगा। एआई, सेमीकंडक्टर, आईटी, पोत निर्माण, स्टील और पोर्ट सेक्टर में सहयोग को भी विस्तार मिलेगा।

    सांस्कृतिक रिश्तों में भी नई ऊर्जा

    प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और दक्षिण कोरिया के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच हजारों साल पुराना जुड़ाव है। उन्होंने अयोध्या की राजकुमारी सूरीरत्ना और कोरिया के राजा किम-सुरो की कथा का उल्लेख किया।
    उन्होंने कहा कि भारत में K-Pop और K-ड्रामा तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, वहीं दक्षिण कोरिया में भारतीय सिनेमा की पहचान भी बढ़ रही है। इस सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत करने के लिए 2028 में भारत-दक्षिण कोरिया फ्रेंडशिप फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा।

    इन क्षेत्रों में हुए प्रमुख समझौते

    दोनों देशों के बीच पोत निर्माण, औद्योगिक सहयोग, इस्पात सप्लाई चेन, MSME सहयोग, समुद्री विरासत, व्यापार समझौते का उन्नयन, वित्तीय सिस्टम, विज्ञान एवं तकनीक, अंतरराष्ट्रीय भुगतान, डिजिटल ब्रिज, जलवायु और पर्यावरण, पेरिस समझौते के तहत सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और खेल जैसे क्षेत्रों में समझौते हुए हैं।

    ये रहीं अहम घोषणाएं
    बैठक के दौरान आर्थिक सुरक्षा वार्ता की शुरुआत, डिस्टिंग्विश्ड विजिटर प्रोग्राम, दक्षिण कोरिया का इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव और सोलर एलायंस में शामिल होना, विदेश मंत्री स्तर की वार्ता शुरू करना और 2028-29 को भारत-दक्षिण कोरिया फ्रेंडशिप ईयर के रूप में मनाने जैसे फैसले लिए गए।