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  • भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने के लिए कुशल इंजीनियरों और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर डॉ. प्रीति अदाणी ने दिया जोर

    भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति देने के लिए कुशल इंजीनियरों और उद्योग-अकादमिक सहयोग पर डॉ. प्रीति अदाणी ने दिया जोर

    नई दिल्ली । भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और विनिर्माण संयंत्रों के साथ कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी जरूरी है। अदाणी विश्वविद्यालय की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर देते हुए कहा कि देश के सेमीकंडक्टर मिशन की सफलता के लिए ऐसी प्रतिभाओं की आवश्यकता है, जो जटिल तकनीकों को डिजाइन करने, विकसित करने और उनमें सुधार करने की क्षमता रखती हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी प्रगति का वास्तविक महत्व केवल मशीनों की बढ़ती क्षमता में नहीं, बल्कि मानव बुद्धिमत्ता का विवेकपूर्ण उपयोग करके बेहतर भविष्य तैयार करने में है।

    अहमदाबाद में आयोजित कॉन्क्लेव ऑन हार्डवेयर, इनोवेशन, प्रोसेसिंग एंड सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजीज (चिप्स) 2026 को संबोधित करते हुए डॉ. अदाणी ने भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं के लिए शिक्षा, शोध और उद्योग के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। सम्मेलन का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उभरते अवसरों, तकनीकी चुनौतियों और आवश्यक कौशल पर चर्चा करना था। इसमें विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर इस क्षेत्र के भविष्य से जुड़े विषयों पर विचार साझा किए।

    सम्मेलन में क्वालकॉम, एनएक्सपी सेमीकंडक्टर्स, माइक्रोन टेक्नोलॉजी, सिनोप्सिस और इनफिनियन टेक्नोलॉजीज सहित कई कंपनियों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कानूनी क्षेत्र से भी विशेषज्ञों ने चर्चा में भाग लिया। विचार-विमर्श के दौरान वायरलेस तकनीक, सेमीकंडक्टर डिजाइन, मेमोरी एवं स्टोरेज, पावर सिस्टम और कानूनी ढांचे से जुड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इन क्षेत्रों को सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य शृंखला के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    कार्यक्रम में तीन प्रमुख परिचर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन की संभावनाओं और देश की डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करने के उपायों पर केंद्रित रही। दूसरी परिचर्चा में सेमीकंडक्टर विनिर्माण की भूमिका और भारत के तकनीकी भविष्य पर उसके संभावित प्रभावों पर विचार किया गया। तीसरे सत्र में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रोजगार के अवसरों, जरूरी कौशल और भविष्य में करियर बनाने के रास्तों पर चर्चा हुई। इन सत्रों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा और उद्योग की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर को कम करने पर जोर दिया गया।

    इस सम्मेलन का आयोजन आईआईटी मंडी, वीएलएसआई सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिरिल अमरचंद मंगलदास के सहयोग से किया गया। इसमें गुजरात स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स मिशन, सेमीकंडक्टर कंपनियों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। चर्चाओं में शोध को प्रोत्साहित करने, तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की आवश्यकता सामने आई।

    भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र केवल चिप बनाने वाले संयंत्रों तक सीमित नहीं है। चिप डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग में विशेषज्ञता विकसित करना भी देश की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन ने इस दिशा में प्रयासों को गति दी है। गुजरात के धोलेरा और साणंद में चल रही परियोजनाएं भी राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास से जुड़ी हैं।

    कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के तेजी से विस्तार ने उन्नत चिप्स, डेटा सेंटर और भरोसेमंद ऊर्जा अवसंरचना की मांग बढ़ा दी है। ऐसे में सेमीकंडक्टर तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इस क्षेत्र में विकास के लिए तकनीकी विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और प्रशिक्षित इंजीनियरों की जरूरत भी बढ़ सकती है।

    अदाणी विश्वविद्यालय ने अहमदाबाद में प्रस्तावित अपने बहुविषयक वैश्विक परिसर में सेमीकंडक्टर डिजाइन, विनिर्माण और पैकेजिंग के क्षेत्र में विशेष विशेषज्ञता विकसित करने की योजना घोषित की है। इसके तहत युवा इंजीनियरों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, उद्योग में कार्यरत पेशेवरों के लिए कार्यकारी शिक्षा और शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य शिक्षा और शोध को उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ना तथा भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए भविष्य की कुशल प्रतिभाएं तैयार करना है।

  • भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने के लिए जरूरी मटेरियल इकोसिस्टम विकसित करना होगा, अश्विनी वैष्णव ने बताई चुनौती

    भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने के लिए जरूरी मटेरियल इकोसिस्टम विकसित करना होगा, अश्विनी वैष्णव ने बताई चुनौती

    नई दिल्ली ।केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत के लिए तकनीकी संप्रभुता हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण सामग्रियों का मजबूत घरेलू इकोसिस्टम विकसित करना बड़ी चुनौती है। सेमीकंडक्टर और अन्य उन्नत तकनीकों के लिए आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति कुछ सीमित देशों में केंद्रित होने के कारण भारत को अपनी विनिर्माण क्षमता और विशेषज्ञता तेजी से बढ़ाने की जरूरत है।

    ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में अपने विचार रखते हुए वैष्णव ने कहा कि भारत को सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी केमिकल्स, गैसों, सब्सट्रेट्स और अन्य इनपुट्स के उत्पादन में घरेलू क्षमताएं मजबूत करनी होंगी। उनके मुताबिक, इन सामग्रियों की वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर कुछ देशों का अधिक नियंत्रण भारत की एक प्रमुख प्रौद्योगिकी और विनिर्माण केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा के सामने चुनौती है।
    मंत्री ने बताया कि जिन देशों ने महत्वपूर्ण सामग्रियों के क्षेत्र में मजबूत स्थिति बनाई है, उन्होंने इसके लिए कई दशकों तक काम किया है। हालांकि, भारत के पास इतनी लंबी अवधि तक इंतजार करने का विकल्प नहीं है। इसलिए देश को महत्वपूर्ण सामग्रियों के विनिर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण और प्रबंधन से जुड़ी विशेषज्ञता विकसित करने की गति बढ़ानी होगी।
    उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब केवल चिप बनाने और उनकी असेंबली तक सीमित नहीं है। इसका दायरा बढ़ाकर उन सामग्रियों और औद्योगिक क्षमताओं को भी शामिल किया जा रहा है, जिनकी जरूरत चिप निर्माण के विभिन्न चरणों में होती है। इस व्यापक दृष्टिकोण में केमिकल्स, गैसों, सब्सट्रेट्स और अन्य आवश्यक इनपुट्स का इकोसिस्टम तैयार करना शामिल है।
    वैष्णव के अनुसार, देश के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण में इन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। सरकार की रणनीति तैयार उत्पादों की असेंबली से आगे बढ़कर मॉड्यूल और कंपोनेंट्स के निर्माण तक पहुंचने की है। इसके बाद मटेरियल्स और अंततः पूंजीगत उपकरणों के उत्पादन की क्षमता विकसित करना भी इस दिशा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास के लिए केवल अंतिम उत्पाद तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उससे जुड़े पूरे औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करना आवश्यक है।
    तकनीकी संप्रभुता के अर्थ को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत का उद्देश्य दूसरे देशों पर हर तरह की निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करना नहीं है। इसके बजाय रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी कमजोरियों को दूर करना और जरूरत के समय देश की क्षमता तथा लचीलेपन को मजबूत बनाना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह तय करना जरूरी है कि किन उत्पादों और क्षेत्रों में भारत के भीतर डिजाइन, विनिर्माण और संपूर्ण उत्पाद विकास की क्षमताएं होनी चाहिए और किन क्षेत्रों में दूसरे देशों के साथ सहयोग जारी रखा जा सकता है। प्रौद्योगिकी को उन्होंने वैश्विक वैल्यू चेन का हिस्सा बताया।
    उन्होंने कहा कि भारत जिन क्षेत्रों में प्रवेश करना चाहता है, वहां एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने 28 नैनोमीटर से 90 नैनोमीटर के लेगेसी नोड्स का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इस श्रेणी में एक मिलियन डॉलर की मशीन का उत्पादन केवल एक डॉलर की चिप की कमी के कारण भी रुक सकता है। ऐसे में डिजाइन, विनिर्माण और अंतिम उत्पाद के संपूर्ण मूल्यांकन की क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण है। इसी सोच के आधार पर भारत अपनी तकनीकी और औद्योगिक रणनीति को आगे बढ़ा रहा है।
  • सेमीकॉन इंडिया 2026 में पीएम मोदी ने विकसित भारत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा पर विस्तार से बात रखी

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में पीएम मोदी ने विकसित भारत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा पर विस्तार से बात रखी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन किया। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े इस आयोजन का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ रखी गई है। आयोजन में प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी और कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को संबोधित किया।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में भारत के साथ 52 अन्य देशों की कंपनियां भी भाग ले रही हैं। आयोजन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े कंपनियों के प्रतिनिधियों के अलावा निवेशक, वैज्ञानिक, स्टार्टअप, छात्र और सरकारी अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े काम और कारोबार को आगे बढ़ाने से संबंधित विषयों पर चर्चा के लिए विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाना है।

    इस आयोजन में 600 से ज्यादा प्रदर्शक शामिल हुए हैं। इनमें करीब 300 विदेशी कंपनियां हैं। प्रदर्शकों के लिए 15 हजार वर्ग मीटर का प्रदर्शनी क्षेत्र तैयार किया गया है। कार्यक्रम में 150 से ज्यादा विशेषज्ञ और वक्ता भी हिस्सा ले रहे हैं। वे सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े नए काम, उपलब्ध अवसर और क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में छह देशों के विशेष पवेलियन भी बनाए गए हैं। इनमें जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन शामिल हैं। इनके अलावा 12 राज्य सरकारों के पवेलियन भी प्रदर्शनी में मौजूद हैं। इससे विभिन्न देशों और राज्यों की ओर से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े प्रयासों तथा गतिविधियों को सामने रखने का अवसर मिल रहा है।

    कार्यक्रम में स्टार्टअप और छात्रों के लिए भी विशेष स्थान रखा गया है। करीब 40 स्टार्टअप अपने प्रोजेक्ट और नए विचारों को प्रदर्शित कर रहे हैं। इस तरह आयोजन में उद्योग से जुड़े बड़े संस्थानों के साथ नई तकनीक और नए विचारों पर काम कर रहे स्टार्टअप और छात्रों को भी भागीदारी का अवसर मिला है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेमीकॉन इंडिया में मौजूद सभी लोगों का स्वागत किया और विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और सृजन की शक्ति के प्रतीक के रूप में बताते हुए कहा कि संयोग है कि इसी दिन से सेमीकॉन इंडिया की शुरुआत हो रही है।

    प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश का प्रत्येक नागरिक एक प्रतिबद्धता के साथ विकसित भारत के निर्माण में जुटा है। उन्होंने बीते 15 दिनों के दौरान भारत में हुए विभिन्न घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए देश की विकास यात्रा की दिशा और गति पर बात रखी।

    प्रधानमंत्री ने सितंबर में मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का उल्लेख किया, जहां एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के माध्यम से समावेशी वित्त पर चर्चा हुई। उन्होंने इसी अवधि में करीब 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने का भी उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने सितंबर में जारी भारत की तिमाही जीडीपी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए विकास से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी सामने रखी।

  • सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की तेज बढ़त, वैश्विक चुनौतियों के बीच पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत विकास दर

    सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की तेज बढ़त, वैश्विक चुनौतियों के बीच पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत विकास दर

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के बाद कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश में तैयार होने वाली चिप्स आने वाले समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचेंगी। उन्होंने वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत विकास दर और तकनीकी क्षेत्र में हो रही प्रगति का भी उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। उनके अनुसार, वैश्विक माहौल चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। उन्होंने पिछले कुछ समय में देश में हुए कई महत्वपूर्ण आयोजनों और विकास से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया।

    इस दौरान उन्होंने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का जिक्र किया। यहां एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के जरिए वित्तीय सेवाओं को अधिक व्यापक स्तर तक पहुंचाने पर चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री ने इन तकनीकी क्षेत्रों को देश के डिजिटल और वित्तीय ढांचे से जोड़ते हुए भारत में हो रहे बदलावों का उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने देश में करीब 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि इन कॉरिडोर से देशभर में माल की आवाजाही तेज होगी, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बेहतर होगी और विनिर्माण क्षेत्र को गति मिलेगी। इससे उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई।

    सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर प्रधानमंत्री ने भारत की बढ़ती क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की चिप इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है और भारत में तैयार होने वाली चिप्स दुनिया भर में जाएंगी। सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन इसी व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रेटिंग में सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत है। भारत की मेजबानी में हाल ही में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने आम सहमति से नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाए जाने को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रति भरोसे का एक संकेत बताया।

    केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 के तहत भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने की योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके छह प्रमुख स्तंभों में चिप डिजाइन, मशीन और मटेरियल, फैब्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टैलेंट शामिल हैं।

    उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के पहले चरण में 105 से अधिक स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। इनमें करीब 20 स्टार्टअप्स ने लगभग 800 करोड़ रुपये की वेंचर कैपिटल फंडिंग हासिल की। सेमीकॉन 2.0 के तहत कम से कम 200 चिप डिजाइन स्टार्टअप और कंपनियों को सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है।

    अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत ने 10 वर्षों में 85,000 डिजाइन इंजीनियर तैयार करने का शुरुआती लक्ष्य रखा था, लेकिन चार वर्षों में ही 70,000 इंजीनियर तैयार किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि देशभर की 400 से अधिक यूनिवर्सिटीज में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध हैं। सेमीकॉन इंडिया 2026 के जरिए भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, शोध और प्रतिभा विकास से जुड़े प्रयासों को एक व्यापक ढांचे में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • पीएम मोदी 17 सितंबर को सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे, 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

    पीएम मोदी 17 सितंबर को सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे, 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियां लेंगी भाग

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को सुबह करीब 10 बजे राष्ट्रीय राजधानी स्थित यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगे। तीन दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन और प्रदर्शनी 17 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी। आयोजन में 52 देशों की 600 से अधिक कंपनियों और प्रतिनिधियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 की इस वर्ष की थीम ‘सिलिकॉन से सिस्टम तक: इको सिस्टम का निर्माण’ रखी गई है। सम्मेलन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला से जुड़े भारतीय और वैश्विक उद्योगों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसके अलावा नीति निर्माता, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थान और छात्र भी आयोजन में शामिल होंगे।

    सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में सहयोग, निवेश, नवाचार और प्रतिभा विकास को बढ़ावा देना है। आयोजन के दौरान विभिन्न विषयों पर समानांतर सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें डिस्प्ले उद्योग की प्रगति से जुड़े सत्र, सहयोग और संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए छह कंट्री राउंडटेबल तथा महिला नेतृत्व पर केंद्रित एक मंच भी शामिल है।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में सेमीकंडक्टर की पूरी मूल्य श्रृंखला को एक साथ प्रदर्शित करने पर जोर दिया गया है। इसमें सेमीकंडक्टर सामग्री और उपकरणों से लेकर चिप डिजाइन, निर्माण, उन्नत पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिस्टम तक की पूरी प्रक्रिया को प्रस्तुत किया जाएगा।

    आयोजन में ‘रेत से सिलिकॉन से सिस्टम तक’ नाम से एक नया मूल्य श्रृंखला अनुभव भी शामिल होगा। इसके माध्यम से सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में कच्चे स्तर से तैयार सिस्टम तक की पूरी यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा।

    आयोजकों के अनुसार, सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक कंपनियों की भागीदारी होगी और करीब 50,000 आगंतुकों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन में 52 देशों के प्रतिनिधियों के साथ 400 से अधिक अधिकारी और 150 से अधिक वक्ता शामिल होंगे।

    प्रदर्शनी में कई देशों के लिए अलग पवेलियन भी बनाए जाएंगे। जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन की भागीदारी वाले छह कंट्री पवेलियन इसमें शामिल होंगे। इसके अलावा 12 स्टेट बूथ भी लगाए जाएंगे।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में स्टार्टअप पवेलियन और इनोवेशन शोकेस भी आयोजित किया जाएगा। इसके साथ स्टूडेंट हैकाथॉन और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन भी कार्यक्रम का हिस्सा होंगे। इससे सम्मेलन में उद्योग, नवाचार, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।

    17 सितंबर से शुरू होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े वैश्विक तथा भारतीय हितधारक एक साथ जुटेंगे। सम्मेलन के जरिए सहयोग, निवेश और नवाचार से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी तथा सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों को प्रदर्शनी के माध्यम से सामने रखा जाएगा।

  • सेमीकॉन इंडिया 2026 का 17 सितंबर को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, 600 से अधिक कंपनियां लेंगी आयोजन में हिस्सा

    सेमीकॉन इंडिया 2026 का 17 सितंबर को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, 600 से अधिक कंपनियां लेंगी आयोजन में हिस्सा

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। तीन दिवसीय यह आयोजन 17 से 19 सितंबर तक चलेगा। इसमें दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ नीति निर्माता, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप और शिक्षाविद एक मंच पर जुटेंगे।

    इस वर्ष सम्मेलन की थीम “सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम” रखी गई है। आयोजन में भारत की सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य शृंखला में विकसित हो रही क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाएगा। यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    आयोजन में सरकार की नीतिगत सहायता, बढ़ते निवेश और विविध एवं लचीली वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की मांग से भारत के लिए पैदा हुए अवसरों को भी सामने रखा जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और वैश्विक उद्योग संगठन एसईएमआई संयुक्त रूप से कर रहे हैं।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा लेंगे। इनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां होंगी। प्रदर्शनी के लिए 15,000 वर्ग मीटर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। आयोजन के दौरान 150 से अधिक विशेषज्ञ और उद्योग जगत के नेता तकनीकी तथा रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

    कार्यक्रम में छह देशों के पवेलियन और 12 राज्य सरकारों के पवेलियन भी स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा स्टार्टअप, नवाचार, छात्रों, कौशल विकास और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विशेष मंच तैयार किए जाएंगे।

    स्टार्टअप पवेलियन में करीब 40 स्टार्टअप अपनी तकनीक और नवाचार प्रस्तुत करेंगे। वहीं वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन में माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में कौशल विकास, रोजगार और करियर से जुड़े अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

    आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण “सैंड टू सिलिकॉन टू सिस्टम्स वैल्यू चेन एक्सपीरियंस” होगा। इसके जरिए आगंतुकों को सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य शृंखला को समझने का अवसर मिलेगा। इसमें कच्चे माल से लेकर विनिर्माण, एडवांस्ड पैकेजिंग, चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतिम सिस्टम निर्माण तक की प्रक्रिया प्रदर्शित की जाएगी।

    कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप पिच प्रतियोगिता, स्टूडेंट हैकाथॉन और इनोवेशन शोकेस भी आयोजित होंगे। इनमें युवा उद्यमी, शोधकर्ता और छात्र अपने विचारों और तकनीकों को प्रस्तुत करेंगे।

    सम्मेलन में सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सप्लाई चेन रेजिलिएंस, एडवांस्ड पैकेजिंग, सामग्री एवं उपकरण, चिप डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, स्टार्टअप, नवाचार और प्रतिभा विकास जैसे विषयों पर मुख्य भाषण, पैनल चर्चा और विशेष सत्र होंगे।

    इसके अलावा छह अंतरराष्ट्रीय देशों के साथ विशेष राउंडटेबल बैठकें आयोजित की जाएंगी। महिलाओं के नेतृत्व और सशक्तिकरण, कार्यबल विकास तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। इस आयोजन के जरिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाने के साथ भारत की क्षमताओं और उद्योग से जुड़े अवसरों को प्रदर्शित किया जाएगा।

  • लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    लाल किले से पीएम मोदी का बड़ा ऐलान, एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए युवाओं, तकनीक और आत्मनिर्भरता को भारत की विकास यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले एक साल में देश के एक करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं में AI के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता विकसित करना है।

    प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि इस लक्ष्य को देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से हासिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बड़े सपनों को पूरा करने के लिए ऊंचे संकल्प और उसी स्तर के सामर्थ्य व प्रयास जरूरी हैं। उनके संबोधन में युवाओं को विकसित भारत की यात्रा की प्रमुख शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में डेटा सेंटर, AI और क्वांटम तकनीक का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उभरती तकनीकें भारत के सामने नई चुनौतियां और अवसर दोनों लेकर आ रही हैं। ऐसे में देश को इनोवेशन का केंद्र बनाने के साथ डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास बढ़ाने की जरूरत है।

    तकनीकी विकास के साथ सेमीकंडक्टर निर्माण को भी प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि आज इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल तकनीक में चिप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं और तीन प्लांट शुरू होने की जानकारी दी गई। आने वाले सात से आठ वर्षों में और संयंत्र शुरू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि AI, चिप निर्माण और डेटा सेंटर के विस्तार के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी। ऐसे में पर्याप्त और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्धता भारत की विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। उन्होंने परमाणु ऊर्जा को ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के प्रमुख माध्यमों में शामिल किया।

    प्रधानमंत्री ने देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 गीगावाट तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया। उन्होंने कहा कि इस दशक में पांच परमाणु रिएक्टरों के काम शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में तकनीक और ऊर्जा दोनों की जरूरत बढ़ेगी, इसलिए दोनों क्षेत्रों में क्षमता निर्माण जरूरी है।

    संबोधन में ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत के पास लंबी समुद्री तटरेखा, मत्स्य संसाधन, तटीय पर्यटन और तटीय तकनीक के जरिए ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं।

    प्रधानमंत्री के भाषण में AI प्रशिक्षण से लेकर सेमीकंडक्टर निर्माण, परमाणु ऊर्जा और हरित अर्थव्यवस्था तक कई क्षेत्रों को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया। एक करोड़ युवाओं को AI स्किल देने की घोषणा से तकनीकी रूप से सक्षम कार्यबल तैयार करने पर विशेष ध्यान का संकेत मिला है। इसके साथ ही ऊर्जा और विनिर्माण क्षमता बढ़ाने को भी भविष्य की आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

  • जापान में शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी का कुमामोटो प्लांट बंद, उत्पादन पर असर का आकलन जारी

    जापान में शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी का कुमामोटो प्लांट बंद, उत्पादन पर असर का आकलन जारी

    नई दिल्ली । जापान के कुमामोटो क्षेत्र में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद सोनी सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपने कुमामोटो टेक्नोलॉजी सेंटर का परिचालन अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। कंपनी ने बताया कि प्लांट की इमारतों, उत्पादन उपकरणों और विनिर्माण लाइनों पर भूकंप के प्रभाव का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उत्पादन दोबारा कब शुरू होगा।

    कंपनी के अनुसार, मंगलवार को स्थानीय समयानुसार शाम 4:27 बजे भूकंप आने के तुरंत बाद किकुयो कस्बे स्थित सोनी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन के संयंत्र में उत्पादन रोक दिया गया था। यह निर्णय कर्मचारियों की सुरक्षा और संभावित तकनीकी नुकसान का निरीक्षण करने के उद्देश्य से लिया गया। विशेषज्ञों की टीम पूरे परिसर का निरीक्षण कर रही है ताकि परिचालन फिर से शुरू करने से पहले सभी सुरक्षा मानकों की पुष्टि की जा सके।

    सोनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके नागासाकी, ओइता और कागोशिमा स्थित अन्य टेक्नोलॉजी सेंटर सामान्य स्थिति में हैं। इन केंद्रों में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है और भूकंप के समय वहां मौजूद किसी भी कर्मचारी के घायल होने की खबर भी सामने नहीं आई है। कंपनी लगातार सभी इकाइयों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

    भूकंप की तीव्रता 7.1 मापी गई, जिसके कारण कुमामोटो और आसपास के इलाकों में व्यापक असर देखने को मिला। कई इमारतों को नुकसान पहुंचा और राहत एवं बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिए गए। अधिकारियों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन जारी है, जबकि बचाव दल मलबे में फंसे लोगों की तलाश और सुरक्षित निकासी में जुटे हुए हैं।

    जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने बताया कि भूकंप में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है और कई अन्य लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए राहत एवं बचाव कार्य तेज गति से चला रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द सहायता पहुंचाने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं।

    सोनी सेमीकंडक्टर सॉल्यूशंस वैश्विक स्तर पर इमेज सेंसर और अन्य सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की प्रमुख निर्माता कंपनियों में शामिल है। कंपनी के उत्पादों का उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, औद्योगिक उपकरणों और कई उन्नत तकनीकी क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे में कुमामोटो प्लांट का अस्थायी रूप से बंद होना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि कंपनी ने अभी उत्पादन पर संभावित प्रभाव को लेकर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।

    इस घटना पर भारत ने भी संवेदना व्यक्त की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जापान में आए भूकंप पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत इस कठिन समय में जापान की सरकार और वहां के लोगों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने प्रभावित लोगों की सुरक्षा, शीघ्र राहत और जल्द सामान्य स्थिति बहाल होने की कामना की। फिलहाल सभी की नजरें राहत कार्यों की प्रगति और सोनी के कुमामोटो प्लांट में परिचालन दोबारा शुरू होने के निर्णय पर टिकी हुई हैं।

  • 'सेमिकॉन 2.0' से भारत के टेक सेक्टर को नई रफ्तार, अगले पांच वर्षों में 2 लाख तक रोजगार और वैश्विक चिप हब बनने की मजबूत उम्मीद

    'सेमिकॉन 2.0' से भारत के टेक सेक्टर को नई रफ्तार, अगले पांच वर्षों में 2 लाख तक रोजगार और वैश्विक चिप हब बनने की मजबूत उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू की गई ‘सेमिकॉन 2.0’ योजना को उद्योग जगत ने रोजगार, निवेश और तकनीकी विकास के लिहाज से एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस योजना के प्रभाव से अगले पांच वर्षों में देश में 1.5 लाख से 2 लाख तक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इसके साथ ही भारत केवल इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली तक सीमित न रहकर वैश्विक चिप डिजाइन, इंजीनियरिंग और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

    उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि सेमिकॉन 2.0 का दायरा केवल सेमीकंडक्टर निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर वेरिफिकेशन, एम्बेडेड सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उत्पादन, एडवांस्ड पैकेजिंग और आधुनिक सप्लाई चेन जैसी उच्च तकनीक वाली गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे देश में एक व्यापक और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

    हाल ही में केंद्र सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ सेमिकॉन 2.0 योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन, निर्माण, अनुसंधान और प्रतिभा विकास को नई गति देना है, ताकि देश वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके। सरकार का मानना है कि इस पहल से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में भी सहायता मिलेगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2030 तक सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़े अधिकांश पदों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग के कारण चिप डिजाइन, रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और इंजीनियरिंग से जुड़े उच्च कौशल वाले पेशेवरों की मांग तेजी से बढ़ेगी। इससे तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे और उद्योग को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध होगा।

    उद्योग जगत का यह भी मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे देश को इंजीनियरिंग, अनुसंधान और नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित होने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही घरेलू कंपनियों को भी उच्च मूल्य वाले उत्पादों और बौद्धिक संपदा के विकास का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग मुख्य रूप से असेंबली आधारित उत्पादन पर केंद्रित रहा है, लेकिन सेमिकॉन 2.0 के माध्यम से देश चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और एडवांस्ड पैकेजिंग जैसे उच्च मूल्य वाले क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति मजबूत कर सकेगा। इससे न केवल नई तकनीकों का विकास होगा, बल्कि दीर्घकाल में भारतीय उद्योग को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी मिलेगी।

    सरकार ने इस योजना के तहत चिप डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग उपकरण एवं सामग्री, फैब्रिकेशन सुविधाएं, एटीएमपी और ओसैट यूनिट्स, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास जैसे छह प्रमुख स्तंभों पर आधारित सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अब तक 12 सेमीकंडक्टर विनिर्माण परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उद्योग जगत का मानना है कि इन पहलों से भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में भरोसेमंद भागीदार के रूप में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत कर सकेगा।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषित किए कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हजारों रोजगार देने वाली परियोजनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषित किए कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हजारों रोजगार देने वाली परियोजनाएं

    मध्य प्रदेश ने तकनीकी और डिजिटल उद्योगों के क्षेत्र में अपनी विकास रणनीति को नई गति देते हुए एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आईटी अवसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का भरोसा जताया। कॉन्क्लेव में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे राज्य में 34 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 51 प्रमुख गतिविधियों का आयोजन किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य की तकनीकों को अपनाने और उद्योगों के लिए आधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में प्रदेश में सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा, जो कौशल विकास, अनुसंधान, उद्योगों के साथ सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना भी की जाएगी, जिससे एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिलेगा।

    राज्य सरकार ने आईटी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कई नई परियोजनाओं की भी घोषणा की है। भोपाल आईटी पार्क में नया आईटी टॉवर विकसित किया जाएगा, जहां जीसीसी, आईटी और डिजिटल सेवा कंपनियों के लिए आधुनिक प्लग-एंड-प्ले कार्यालय उपलब्ध होंगे। भोपाल के कोलार क्षेत्र में भी इसी सुविधा से युक्त नया आईटी पार्क बनाया जाएगा, ताकि नई तकनीकी कंपनियां कम समय में अपना संचालन शुरू कर सकें। वहीं इंदौर के सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में लगभग तीन लाख वर्ग फीट निर्मित क्षेत्र वाला अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा, जहां विश्वस्तरीय डिजिटल और आईटी कंपनियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार के सहयोग से मंथन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ग्लोबल स्किल्स पार्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों के माध्यम से नवाचार, अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग और आधुनिक तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश साइंस सिटी, डीप टेक पार्क, डेटा सेंटर और एआई आधारित परियोजनाओं के माध्यम से नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    सरकार के अनुसार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के बाद तकनीकी क्षेत्र में 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर काम शुरू हो चुका है। वहीं पिछले दो टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव के माध्यम से राज्य को 46 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आठ देशों की दस प्रमुख कंपनियों की 28 हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं वर्तमान में ग्राउंडब्रेकिंग चरण में हैं। इनमें एआई-रेडी डेटा सेंटर, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्यूटिकल्स और स्पेशियलिटी फिल्म्स जैसे क्षेत्रों की परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें स्पेन की कंपनी द्वारा भोपाल में बड़े एआई-रेडी डेटा सेंटर की स्थापना भी प्रस्तावित है।

    कॉन्क्लेव के दौरान आठ कंपनियों को भूमि आवंटन के आशय-पत्र भी सौंपे गए। इन परियोजनाओं में 203.58 करोड़ रुपये का निवेश और 1,242 नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है। यह निवेश इंदौर के सिंहासा आईटी पार्क और भोपाल के बड़वई आईटी पार्क में आईटी, आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आईटी अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। कार्यक्रम के दौरान गूगल प्ले के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्षमता विकास के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता भी किया गया। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से मध्य प्रदेश तकनीकी निवेश, नवाचार और डिजिटल उद्योगों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।