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  • इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    इंदौर में 23 अक्टूबर से सेमीकंडक्टर समिट, 50 से अधिक कंपनियां दिखाएंगी तकनीक; 6,200 करोड़ के निवेश पर नजर

    मध्य प्रदेश: में सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार और निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने के लिए इंदौर में 23 और 24 अक्टूबर को मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय यह कार्यक्रम ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में होगा। इसमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों, निवेशकों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और स्टार्टअप प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे।

    समिट में सेमीकंडक्टर उद्योग की विभिन्न तकनीकों, विनिर्माण की संभावनाओं और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में नए अवसरों पर चर्चा होगी। चिप डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और आधुनिक तकनीकी समाधानों को लेकर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे। आयोजन का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में इस क्षेत्र के लिए निवेश आकर्षित करना और उद्योग से जुड़े लोगों के बीच सहयोग बढ़ाना है।

    समिट के दौरान 50 से अधिक कंपनियां अपनी तकनीक, उत्पादों और समाधानों का प्रदर्शन करेंगी। प्रदर्शनी में चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग, तकनीकी उपकरण, विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन से जुड़ी कंपनियां शामिल होंगी। कार्यक्रम में आठ पैनल चर्चाएं, पांच राउंडटेबल बैठकें और दो मुख्य व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इनके माध्यम से उद्योग की जरूरतों, तकनीकी विकास और निवेश से संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

    पहले दिन की चर्चाओं में मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा फैबलेस इकोसिस्टम, सेमीकंडक्टर विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने जैसे विषय भी एजेंडे में शामिल हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए जरूरी अधोसंरचना, बौद्धिक संपदा और इस क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर भी चर्चा होगी।

    दूसरे दिन का कार्यक्रम चिप टेक्नोलॉजी, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्माण पर केंद्रित रहेगा। डिजाइन सेवाओं, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं को तैयार करने की जरूरत पर भी विचार किया जाएगा। इसके साथ ही फोटोनिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से जुड़े विषयों पर बैठकें होंगी। इन चर्चाओं में तकनीकी नवाचार और उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास के अवसरों पर ध्यान दिया जाएगा।

    कार्यक्रम के समापन समारोह में मध्य प्रदेश सेमीकॉन स्टार्टअप प्रतियोगिता के अंतिम चरण में चयनित विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप और नए तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करना है। इससे इस क्षेत्र में नए उद्यमों को सामने लाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी।

    सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025 को मंजूरी दी है। इस नीति के तहत पात्र निवेश परियोजनाओं के लिए 25 प्रतिशत सब्सिडी और 10 साल तक दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इन प्रोत्साहनों के जरिए प्रदेश में सेमीकंडक्टर से संबंधित औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाने की योजना है।

    इसी क्षेत्र में पारस सेमीकंडक्टर्स ने 6,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश से उन्नत सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग (OSAT) सुविधा स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित परियोजना से प्रदेश में सेमीकंडक्टर विनिर्माण और उससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं हैं। समिट में निवेश के अवसरों और नीतिगत प्रोत्साहनों पर चर्चा के साथ उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर रहेगा। तकनीकी अधोसंरचना, अनुसंधान, नवाचार और कुशल मानव संसाधन का विकास इस क्षेत्र के विस्तार से जुड़े प्रमुख विषय होंगे।

  • पीयूष गोयल बोले- PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 20 ट्रिलियन डॉलर, 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

    पीयूष गोयल बोले- PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 20 ट्रिलियन डॉलर, 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

    नई दिल्ली ।वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि क्रय शक्ति समता यानी PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार करीब 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मंत्री ने यह बात राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 13वें पीएएफआई एनुअल फोरम 2026 में कही।

    गोयल ने कहा कि भारत अब 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, जैसे-जैसे देश इस लक्ष्य की ओर बढ़ेगा, अलग-अलग आर्थिक मापदंडों के बीच मौजूद अंतर भी कम होता जाएगा। उन्होंने भारत की बदलती आर्थिक स्थिति और वैश्विक बाजारों के साथ बढ़ते जुड़ाव को व्यापार वार्ताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

    क्रय शक्ति समता ऐसी विनिमय दरों को दर्शाती है, जिनका उद्देश्य अलग-अलग देशों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के स्तर में अंतर को ध्यान में रखते हुए मुद्राओं की वास्तविक खरीद क्षमता की तुलना करना है। इसी आधार पर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार की तुलना की जाती है।

    गोयल ने कहा कि भारत व्यापार और आर्थिक साझेदारी को लेकर ऐसी अर्थव्यवस्था के रूप में बातचीत कर रहा है, जिसके 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। उन्होंने व्यापक आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं पर भी जोर दिया। इसमें सामान, सेवाओं, पर्यटकों, शिक्षण संस्थानों और खेलों से जुड़े लोगों के आसान आवागमन को बढ़ावा देने की बात शामिल है।

    उन्होंने बताया कि भारत की कई देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार वार्ताएं चल रही हैं। इनमें कनाडा, चिली, पेरू, सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन, मेक्सिको, मालदीव, यूरेशिया, मध्य एशिया, रूस, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल और इजरायल शामिल हैं।

    इन वार्ताओं का प्रमुख उद्देश्य भारत के लिए वैश्विक वैल्यू चेन और सप्लाई चेन में भागीदारी के अवसर बढ़ाना है। इसके साथ ही सामान और सेवाओं के आवागमन को आसान बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजारों से जुड़ाव बढ़ाने के लिए आर्थिक साझेदारी महत्वपूर्ण है।

    सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर की सालाना खपत की मांग 150 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है। उन्होंने इस क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों के अनुरूप क्षमताओं के विकास पर जोर दिया।

    मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बड़े लैंग्वेज मॉडल और एजेंटिक मॉडल सहित एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही भारतीय स्टार्टअप्स के लिए इनोवेशन और डीप-टेक इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने की बात कही।

    गोयल ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत निजी क्षेत्र द्वारा अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाला तीसरा देश बन गया है। इसके अलावा उन्होंने भारत की युवा आबादी के वैश्विक घटनाक्रमों और अवसरों को लेकर बढ़ती जागरूकता का जिक्र किया। उन्होंने युवाओं की अपने भविष्य से जुड़े फैसले लेने की क्षमता पर भरोसा जताया और देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की वृद्धि का भी उल्लेख किया।

  • भारत-अमेरिका ने सेमीकंडक्टर, एआई और क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ाया रणनीतिक फोकस, उभरती तकनीकों में गहरे सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    भारत-अमेरिका ने सेमीकंडक्टर, एआई और क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ाया रणनीतिक फोकस, उभरती तकनीकों में गहरे सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

    नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच उभरती प्रौद्योगिकियों तथा रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की गई। इस चर्चा में सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती और क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने बदलते वैश्विक आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य के बीच साझेदारी को और गहरा करने की आवश्यकता पर बल दिया।

    वाशिंगटन में आयोजित इस बैठक के दौरान भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों ने तकनीकी सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। बातचीत का प्रमुख केंद्र उन क्षेत्रों पर रहा जिन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर निर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों की संभावनाओं का मूल्यांकन किया गया।

    वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग को आधुनिक तकनीकी विकास की रीढ़ माना जाता है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के निर्माण में इसकी केंद्रीय भूमिका है। हाल के वर्षों में दुनिया ने चिप आपूर्ति संकट का सामना किया है, जिसके बाद कई देशों ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत विकसित करने पर जोर बढ़ाया है। भारत और अमेरिका की यह पहल भी इसी व्यापक रणनीतिक सोच का हिस्सा मानी जा रही है।

    वार्ता के दौरान दोनों देशों ने भरोसेमंद और विविधीकृत सप्लाई चेन विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया। वैश्विक व्यापार में भू-राजनीतिक चुनौतियों और आपूर्ति व्यवधानों को देखते हुए मजबूत सप्लाई नेटवर्क की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उत्पादों और औद्योगिक विनिर्माण के लिए स्थिर आपूर्ति श्रृंखला भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी इस चर्चा का एक प्रमुख विषय रहा। एआई वर्तमान समय में स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त, विनिर्माण और प्रशासन जैसे अनेक क्षेत्रों को तेजी से प्रभावित कर रहा है। भारत और अमेरिका दोनों ही इस तकनीक को आर्थिक विकास, नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने के प्रभावी माध्यम के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में एआई अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायिक उपयोग के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

    इसके साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, क्लीन एनर्जी सिस्टम, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं। वैश्विक स्तर पर इन संसाधनों की बढ़ती मांग को देखते हुए कई देश इनके सुरक्षित और स्थायी स्रोत विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। भारत और अमेरिका ने भी इस क्षेत्र में सहयोग को रणनीतिक महत्व का विषय माना है।

    यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच तकनीकी और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में डिजिटल प्रौद्योगिकी, नवाचार, अनुसंधान और विनिर्माण के क्षेत्रों में सहयोग का दायरा तेजी से बढ़ा है। दोनों देश उभरती तकनीकों के क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग आने वाले वर्षों में तेज विस्तार के दौर में प्रवेश करने वाला है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। भारत के पास विशाल तकनीकी प्रतिभा और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे वह वैश्विक सेमीकंडक्टर और उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कौशल केंद्र के रूप में उभर सकता है।

    कुल मिलाकर यह वार्ता केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था, औद्योगिक सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। आने वाले वर्षों में इस सहयोग का प्रभाव तकनीक, निवेश, रोजगार और नवाचार के क्षेत्र में व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है।

  • PM मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री से की बात… ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर जोर

    PM मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री से की बात… ग्रीन हाइड्रोजन और सेमीकंडक्टर पर जोर


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को नीदरलैंड (Netherlands) के अपने समकक्ष रॉब जेटेन (PM Rob Jetten) से फोन पर बात की, जिसमें सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, व्यापार और रक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें पीएम मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता को शीघ्र बहाल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मोदी ने कहा कि उन्होंने और जेटेन ने भारत-नीदरलैंड संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमने सेमीकंडक्टर, वृहद जल परियोजनाएं, ग्रीन हाइड्रोजन समेत विभिन्न क्षेत्रों में हमारी साझेदारी की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। मोदी ने कहा कि हमने पश्चिम एशिया के हालात पर भी विचार-विमर्श किया और क्षेत्र में शांति और स्थिरता शीघ्र बहाल किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वहीं, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा कि भारत के साथ हमारे संबंध और भी मजबूत हो रहे हैं। इस साल की शुरुआत में यूरोपीय संघ और भारत ने एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, तथा नीदरलैंड और भारत रक्षा, जल प्रबंधन, नवाचार और व्यापार सहित एक रणनीतिक साझेदारी विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया में जो कुछ भी हो रहा है, उसे देखते हुए, अब हमारे सहयोग को मजबूत करने का समय है।

    जेटेन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मैंने आज फोन पर बातचीत में इस विषय पर चर्चा की। मैं जल्द ही नीदरलैंड में उनका स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं, ताकि हम इन मुद्दों पर आगे और चर्चा कर सकें। जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय संघ के नेतृत्व के बीच हुई शिखर वार्ता के बाद भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया।

  • मलेशिया में पीएम मोदी का संबोधन: भारत मलेशिया संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता

    मलेशिया में पीएम मोदी का संबोधन: भारत मलेशिया संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाना हमारी प्राथमिकता


    नई दिल्ली । मलेशिया की राजधानी में प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में दोनों देशों के बीच गहरे और गतिशील संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने अनवर इब्राहिम के स्वागत के लिए हृदय से आभार जताया और कहा कि मलेशिया ने अपनी परंपराओं और जीवन शैली को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किया जो उन्हें हमेशा याद रहेगा। उन्होंने मित्रता की ऊँचाई और गहराई का अनुभव करने की बात कही और इस विशेष स्वागत के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद दिया।

    पीएम मोदी ने कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री के रूप में उन्हें तीसरी बार मलेशिया आने का अवसर मिला है और अनवर इब्राहिम के कार्यकाल में उन्हें चौथी बार मिलने का मौका मिल रहा है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ती सक्रियता और सहयोग की गति का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों ने जो गति और गहराई हासिल की है वह प्रेरणादायक है और इसके लिए उन्होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री के योगदान को सराहा।

    संबोधन में उन्होंने कहा कि आज भारत और मलेशिया का सहयोग कृषि विनिर्माण क्लीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में गहरा हुआ है। इसके साथ ही स्किल डेवलपमेंट और क्षमता निर्माण कैपेसिटी बिल्डिंग में भी दोनों देश अहम साझेदार बन चुके हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है जो क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

    पीएम मोदी ने मलेशिया को आसियान की सफल अध्यक्षता के लिए बधाई दी और कहा कि मलेशिया के सहयोग से भारत आसियान संबंध और अधिक गहरे होंगे और विस्तार पाएंगे। उन्होंने दोनों देशों के बीच संबंधों की असली ताकत पीपल टू पीपल टाई को बताया। भारतीय मूल के लगभग 30 लाख मलेशियाई नागरिक दोनों देशों के बीच एक जीवंत पुल लिविंग ब्रिज हैं। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें मलेशिया में डाइस्पोरा से मिलने का अवसर मिला जहां उन्होंने देखा कि लोगों का प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और प्रेम कितना गहरा है जो उनके लिए गर्व का विषय था।

    सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मित्र देशों का साथ महत्वपूर्ण है यह भी उन्होंने कहा। वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत और मलेशिया दोनों मेरिटाइम नेबर्स हैं और उन्हें अपने संबंधों की पूरी क्षमता का उपयोग करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का मूल संदेश यही है कि भारत मलेशिया के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाना चाहता है और हर क्षेत्र में सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाना चाहता है। अंत में उन्होंने एक बार फिर स्वागत के लिए मलेशियाई प्रधानमंत्री और उनकी टीम का आभार व्यक्त किया।