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  • शेयर बाजार में गिरावट के बाद अब क्या होगा, 13 अक्टूबर को इन बड़े संकेतों से तय होगी सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा

    शेयर बाजार में गिरावट के बाद अब क्या होगा, 13 अक्टूबर को इन बड़े संकेतों से तय होगी सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा

    नई दिल्ली । निवेशकों के लिए अहम रहेगा मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार 13 अक्टूबर 2026 को निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर रहेगी। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार में शुरुआती मजबूती के बावजूद बिकवाली का दबाव देखने को मिला। इससे निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ गई है। अब बाजार की दिशा घरेलू आर्थिक संकेतों के साथ वैश्विक बाजारों के रुख पर भी निर्भर करेगी।

    ऐसे में कारोबारियों को मंगलवार के सत्र में जल्दबाजी के बजाय सोच समझकर फैसले लेने की जरूरत होगी। सोमवार को भारतीय बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स करीब 0.76 प्रतिशत गिरकर 71 हजार 924 अंक के आसपास बंद हुआ जबकि निफ्टी 50 में भी लगभग 0.7 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और यह 22 हजार 400 के स्तर से नीचे चला गया। बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ी अनिश्चितता प्रमुख कारण रहे। निवेशक महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर भी सतर्क हैं।

    मंगलवार को बाजार की चाल तय करने वाले प्रमुख कारकों में कच्चे तेल की कीमतें शामिल रहेंगी। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है इसलिए तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और महंगाई पर दबाव आ सकता है। इसके उलट कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बाजार के लिए राहत का संकेत बन सकती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी खबरों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। हाल के सत्रों में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाया है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से कुछ सहारा मिल रहा है। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो तेजी टिकने में मुश्किल हो सकती है। इसके विपरीत खरीदारी बढ़ने पर बाजार को समर्थन मिल सकता है।

    इस सप्ताह निवेशकों की निगाह महंगाई के आंकड़ों और कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों पर भी रहेगी। इन आंकड़ों से अर्थव्यवस्था की स्थिति और कंपनियों के प्रदर्शन को समझने में मदद मिलेगी। मजबूत नतीजे चुनिंदा शेयरों में खरीदारी बढ़ा सकते हैं जबकि कमजोर प्रदर्शन वाले शेयरों पर दबाव आ सकता है। अमेरिकी बाजारों की दिशा डॉलर और रुपये की चाल तथा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बदलाव भी भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।

    निवेशकों के लिए मंगलवार को सबसे जरूरी बात बाजार के शुरुआती रुख को देखकर तुरंत फैसला नहीं करना है। शुरुआती तेजी के बाद बिकवाली या गिरावट के बाद खरीदारी दोनों स्थितियों में बाजार की मजबूती की पुष्टि देखना जरूरी होगा। केवल अफवाह या सोशल मीडिया पर चल रही किसी खबर के आधार पर शेयर खरीदने से बचना चाहिए। किसी शेयर में निवेश से पहले कंपनी के नतीजे कारोबार की स्थिति और जोखिम का आकलन करना बेहतर होगा।

    कुल मिलाकर 13 अक्टूबर को शेयर बाजार में सतर्क कारोबार रहने की संभावना है। कच्चे तेल में राहत विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और महंगाई से जुड़े संकेत बाजार को दिशा दे सकते हैं। हालांकि बाजार की वास्तविक चाल कारोबारी सत्र के दौरान सामने आने वाले आंकड़ों और खबरों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि बाजार का अनुमान निश्चित परिणाम नहीं होता इसलिए अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि के अनुसार ही फैसला लें।

  • 11 सितंबर को शेयर बाजार में फिर मचेगा घमासान! कच्चे तेल की तेजी के बीच Sensex-Nifty पर क्या रहेगा दबाव

    11 सितंबर को शेयर बाजार में फिर मचेगा घमासान! कच्चे तेल की तेजी के बीच Sensex-Nifty पर क्या रहेगा दबाव


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए 11 सितंबर का कारोबारी सत्र काफी अहम रहने वाला है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है और निवेशकों की नजर अब वैश्विक संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। 10 सितंबर को कारोबार के दौरान बाजार में काफी हलचल रही और दिन के अंत में सेंसेक्स करीब 0.19 फीसदी की बढ़त के साथ 74902.59 अंक पर बंद हुआ जबकि निफ्टी में करीब 0.2 फीसदी की तेजी दर्ज हुई। हालांकि बाजार की यह मामूली रिकवरी निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं करती है।

    बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता इस समय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर देश के आयात बिल महंगाई रुपये और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। यही वजह है कि शुक्रवार के कारोबार में तेल की कीमतों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।

    विदेशी निवेशकों का रुख भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के कारोबार में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशक इस कमजोरी के बीच बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है तो बाजार में उतार चढ़ाव और बढ़ सकता है।

    ग्लोबल मार्केट के संकेत भी शुक्रवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। अमेरिकी बाजारों में महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निवेशकों की नजर है। अमेरिका में महंगाई से जुड़े आंकड़े फेडरल रिजर्व की अगली नीति को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।

    घरेलू बाजार में निवेशकों को खासतौर पर बैंकिंग आईटी ऑटो एफएमसीजी और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों पर नजर रखनी चाहिए। कच्चे तेल की तेजी से तेल आयात पर निर्भर कंपनियों की लागत प्रभावित हो सकती है जबकि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कुछ शेयरों को इसका अलग असर मिल सकता है। दूसरी तरफ महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण ब्याज दरों और उपभोक्ता मांग से जुड़े क्षेत्रों पर भी बाजार की नजर रह सकती है।

    तकनीकी स्तर पर भी शुक्रवार का कारोबार महत्वपूर्ण होगा। हाल के सत्रों में निफ्टी में कमजोरी देखी गई है और बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय बाजार की दिशा और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना ज्यादा जरूरी हो सकता है।

    कुल मिलाकर 11 सितंबर को शेयर बाजार की चाल कई बड़े संकेतों पर निर्भर करेगी। कच्चे तेल की कीमतें मध्य पूर्व का तनाव विदेशी निवेशकों की गतिविधियां अमेरिकी बाजार और रुपये की चाल बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में शुक्रवार को बाजार में तेज उतार चढ़ाव से इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशकों को किसी भी शेयर में फैसला लेने से पहले कंपनी की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। यह खबर निवेश की सलाह नहीं है।

  • शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ग्लोबल संकेत, तेल-रुपया और मिडिल ईस्ट हालात पर फोकस

    शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे ग्लोबल संकेत, तेल-रुपया और मिडिल ईस्ट हालात पर फोकस


    नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी अहम रहने वाला है। वैश्विक और घरेलू उत्पाद के बीच दोस्ती की नज़र मध्य पूर्व में जारी तनाव, डॉलर के डॉलर के डॉलर की चाल और कच्चे तेल की दुकान पर रहेगा। ये तीन बड़े फैक्टर बाजार की दिशा तय करने में अंतिम भूमिका निभाएंगे।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का कारण
    अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच रिलीज मॅथेल में अब चौथे हफ्ते में एंट्री कर दी गई है। सामान्य स्थिति के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं, जिससे वैश्विक उद्योगों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

    इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को होर्मुज स्ट्रीट पर चेतावनी देते हुए तनाव को और बढ़ाया है। यह वैश्वीकरण तेल शोषित का प्रमुख मार्ग है, ऐसे में यहां किसी भी क्षेत्र में सीधे कच्चे तेल के प्रवेश को प्रभावित किया जा सकता है।

    कच्चे तेल की दुकान में तेज़ उछाल
    मध्य पूर्व के तनाव का असर कच्चे तेल की झील पर साफ नजर आ रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम में एक सप्ताह में 8.77 प्रतिशत और पिछले एक महीने में 57.35 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है।

    तेल की टंकी में यह उछाल भारत जैसे तीर्थ-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इससे हिस्सेदारी में बढ़ोतरी हो सकती है और कंपनी की लागत पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव शेयर बाजार पर भी देखा जा सकता है।

    रुपयों की मंदी से बढ़ा दबाव
    डॉलर के थोक भारतीय मुद्रा की गिरावट के लिए भी बाजार में नकारात्मक संकेत दे रही है। पिछला सप्ताह पोर्टफोलियो 93.71 के रिकॉर्ड पर पहुंच गया। इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा (FII) की लगातार बिकवाली रही। विदेशी निवेशकों के विश्वास को बाजार में प्रभावित किया जाता है और शेयर बाजार में जमा किया जाता है।

    एफओआई और डीओआई का संतुलन
    डेज वीक एफओआई ने लगभग 29,718.9 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जिससे बाजार पर दबाव बना। हालाँकि, डोमेस्टिक एंटरप्राइज़ एंटरप्राइज़ (डीआईआई) ने 30,642 करोड़ रुपये का निवेश किया, जो कुछ हद तक समर्थित है।

    यह बैलेंस बाज़ार में बड़े पैमाने पर गिरावट से बचा हुआ है, लेकिन अगर फ़ोई की बिकवाली जारी रहती है तो बाज़ार पर दबाव बढ़ सकता है।

    पिछली शनिवार की रिलीज़- रिलीज़
    16 से 20 मार्च के बीच शेयर बाजार में भारी उछाल- देखने को मिला। अंत में बीएसई सेंसेक्स 74,523.96 और निफ्टी 50 23,114.50 के स्तर पर बंद हुआ।

    सेक्टोरल स्टॉक्स में डिफेन्स, फ़्यूसीजी और रियल्टी स्टॉक में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है। इन सेक्टरों में क्रमश: 2.41%, 1.91% और 1.89% की गिरावट जारी है। वहीं, ऑटो और मेटल सेक्टर में क्रमश: 2.15% और 1.06% की बढ़त दर्ज की गई।

    किशोरी के लिए क्या संकेत?
    आने वाले सप्ताह में सहकर्मियों को रहने की आवश्यकता है। वैश्विक घटना, विशेष रूप से मध्य पूर्व की स्थिति, रुपये की चाल और कच्चे तेल के वैश्विक बाजार को प्रभावित करती है। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक इन तीनों में स्थिरता नहीं आएगी, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।