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  • शेयर बाजार जून अपडेट: ग्लोबल संकेतों के बीच उतार-चढ़ाव, निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी

    शेयर बाजार जून अपडेट: ग्लोबल संकेतों के बीच उतार-चढ़ाव, निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी


    नई दिल्ली । 5 जून को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मिलाजुली और अस्थिर (Volatile) रहने की संभावना जताई जा रही है। ग्लोबल मार्केट के संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों के चलते बाजार में दिनभर हलचल देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही सीमित दायरे में रह सकते हैं, जहां तेजी और गिरावट दोनों ही स्थितियां देखने को मिलेंगी। शुरुआती ट्रेडिंग में निवेशकों की नजरें वैश्विक बाजारों और घरेलू आर्थिक संकेतकों पर टिकी रहेंगी।

    ग्लोबल संकेत तय करेंगे बाजार की दिशा
    अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हो रहे बदलाव भारतीय बाजार पर सीधा असर डाल सकते हैं। अमेरिकी और एशियाई बाजारों के रुख के आधार पर आज सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय होगी। अगर वैश्विक बाजार सकारात्मक रहते हैं तो भारतीय बाजार को समर्थन मिल सकता है, वहीं कमजोरी की स्थिति में दबाव देखने को मिल सकता है। क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी या गिरावट भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगा। तेल महंगा होने पर महंगाई की आशंका बढ़ती है, जिसका असर ऑटो और पेंट जैसे सेक्टरों पर पड़ सकता है।

    FII-DII की चाल से तय होगा मू
    विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीद-बिक्री भी आज के बाजार की दिशा को प्रभावित करेगी। हाल के दिनों में FII की गतिविधियां अस्थिर रही हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अगर FII की ओर से खरीदारी बढ़ती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है, जबकि बिकवाली दबाव बना सकती है। DII की स्थिर खरीदारी बाजार को सपोर्ट देने का काम कर सकती है।

    सेक्टोरल मूवमेंट में दिख सकती है तेजी और कमजोरी
    आज के सत्र में सेक्टोरल मूवमेंट महत्वपूर्ण रहेगा। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में अलग-अलग रुझान देखने को मिल सकते हैं। बैंकिंग सेक्टर में हल्की मजबूती की उम्मीद है, जबकि आईटी सेक्टर ग्लोबल संकेतों पर अधिक निर्भर रहेगा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, इसलिए निवेशकों को सावधानी के साथ ट्रेडिंग करने की सलाह दी जा रही है।

    निवेशकों के लिए सलाह
    विशेषज्ञों का कहना है कि आज का दिन शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और स्टॉप लॉस का उपयोग करने की सलाह दी गई है। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह उतार-चढ़ाव अवसर भी प्रदान कर सकता है, लेकिन चयन सोच-समझकर करना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर 5 जून को शेयर बाजार में मिश्रित रुझान और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ग्लोबल संकेतों और निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की पूरी दिशा निर्भर करेगी। सतर्क रणनीति ही आज के दिन सफलता की कुंजी होगी।

  • वैश्विक अनिश्चितता का असर: भारतीय शेयर बाजार की टॉप कंपनियों की संपत्ति में तेज गिरावट..

    वैश्विक अनिश्चितता का असर: भारतीय शेयर बाजार की टॉप कंपनियों की संपत्ति में तेज गिरावट..

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह निवेशकों के लिए काफी उतार-चढ़ाव भरा माहौल देखने को मिला, जहां लगातार बिकवाली के दबाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण देश की शीर्ष कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, देश की टॉप 10 कंपनियों में से नौ के मार्केटकैप में कमी आने के चलते कुल मिलाकर 3.12 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति बाजार से कम हो गई, जो निवेशकों की धारणा में आए बदलाव और वैश्विक संकेतों के कमजोर होने का परिणाम माना जा रहा है। इस दौरान सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे बाजार में नकारात्मक रुझान और गहरा गया। 11 से 15 मई के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स में लगभग 2,090 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी 532 अंकों की कमजोरी के साथ नीचे आ गया, जिससे पूरे इक्विटी बाजार पर दबाव स्पष्ट दिखाई दिया।

    इस दौरान केवल एक ही कंपनी ऐसी रही जिसने बाजार में सकारात्मक प्रदर्शन दर्ज किया, जबकि बाकी सभी प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में गिरावट देखने को मिली। भारती एयरटेल ने इस कठिन माहौल में भी मजबूती दिखाई और इसके मार्केटकैप में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे यह निवेशकों के बीच एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरी। दूसरी ओर, बैंकिंग और आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस के बाजार मूल्यांकन में भारी गिरावट देखी गई, जिसने पूरे बाजार की दिशा को प्रभावित किया। वित्तीय क्षेत्र में आई कमजोरी का मुख्य कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये पर बने दबाव को माना जा रहा है, जिससे जोखिम लेने की क्षमता में कमी आई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार से पूंजी निकालनी शुरू कर दी, जिसका सीधा असर बड़े और मिडकैप शेयरों पर पड़ा है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक संकेतकों में कमजोरी ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है।

    आने वाला सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कई बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होने वाले हैं, जो बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही वैश्विक स्तर पर ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार पर असर डाल सकती हैं। निवेशकों की नजर अब आर्थिक आंकड़ों और कॉर्पोरेट नतीजों पर टिकी है, जो यह तय करेंगे कि बाजार में स्थिरता लौटेगी या उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहेगा।

  • बाजार में उछाल से बड़ी कंपनियों को फायदा, चार दिग्गजों की वैल्यू में भारी बढ़ोतरी

    बाजार में उछाल से बड़ी कंपनियों को फायदा, चार दिग्गजों की वैल्यू में भारी बढ़ोतरी

    नई दिल्ली
    शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सप्ताह के दौरान आई तेजी का सीधा असर देश की बड़ी कंपनियों के बाजार मूल्यांकन पर देखने को मिला। बाजार में सकारात्मक रुझान के चलते निवेशकों की धारणा मजबूत हुई, जिससे शीर्ष कंपनियों के मार्केटकैप में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    इस अवधि में बाजार लगातार हरे निशान में बंद हुआ, जिससे प्रमुख सूचकांकों में भी हल्की लेकिन स्थिर बढ़त देखने को मिली। इसका असर यह हुआ कि देश की टॉप कंपनियों में शामिल चार कंपनियों के कुल मूल्यांकन में बड़ा उछाल दर्ज किया गया, जबकि कुछ अन्य कंपनियों के बाजार मूल्य में गिरावट भी देखी गई।

    बढ़ोतरी दर्ज करने वाली कंपनियों में टेलीकॉम, आईटी और वित्तीय क्षेत्र की कंपनियां प्रमुख रहीं। इन कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी, जिससे इनके मार्केटकैप में हजारों करोड़ रुपए की वृद्धि हुई। यह संकेत देता है कि बाजार में इन सेक्टरों को लेकर भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।

    दूसरी ओर, कुछ बड़ी बैंकिंग और कंज्यूमर कंपनियों के मार्केटकैप में गिरावट देखने को मिली। इसका कारण बाजार में मुनाफावसूली और कुछ सेक्टरों में दबाव माना जा रहा है। हालांकि, कुल मिलाकर बाजार में स्थिरता और सकारात्मक रुझान बना रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में निवेशकों का रुझान चुनिंदा सेक्टरों की ओर अधिक है, जिससे कुछ कंपनियों को फायदा मिल रहा है जबकि कुछ दबाव में हैं। आने वाले समय में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर निर्भर करेगी।

  • वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी 1.6% उछले

    वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स-निफ्टी 1.6% उछले


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के चलते भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को शानदार तेजी दिखाई। कारोबारी सत्र के अंत में BSE Sensex और Nifty 50 दोनों करीब 1.6% की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होता दिखा।

    दिनभर ऐसा रहा बाजार का हाल
    30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,263.67 अंक (1.63%) चढ़कर 78,111.24 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 388.65 अंक (1.63%) की तेजी के साथ 24,231.30 के स्तर पर पहुंच गया।
    दिन के दौरान सेंसेक्स 77,981.10 पर खुला और 78,270.42 का हाई छुआ, जबकि निफ्टी ने 24,163.80 से शुरुआत कर 24,280.90 का इंट्रा-डे उच्च स्तर हासिल किया। यह पूरे सत्र में मजबूत खरीदारी का संकेत देता है।

    मिडकैप-स्मॉलकैप में और ज्यादा तेजी
    मुख्य इंडेक्स के साथ-साथ ब्रॉडर मार्केट में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 2.20% और स्मॉलकैप 100 में 2.35% की बढ़त दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि निवेशक बड़े शेयरों के साथ-साथ मिड और स्मॉल कंपनियों में भी भरोसा जता रहे हैं।

     हर सेक्टर में खरीदारी, आईटी-रियल्टी में जोरदार उछाल
    बुधवार को लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान में रहे। आईटी, मेटल, पीएसयू बैंक, मीडिया और रियल्टी सेक्टर में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। वहीं ऑटो, एफएमसीजी, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में भी 1% से अधिक की बढ़त देखने को मिली।

     किन शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा तेजी
    निफ्टी 50 के ज्यादातर शेयरों में खरीदारी रही। खासतौर पर Wipro, Tata Consultancy Services, Tech Mahindra, Larsen & Toubro और Hindalco Industries जैसे दिग्गज शेयरों में 3% से 4% तक की तेजी दर्ज की गई।
    हालांकि Bharti Airtel, ICICI Bank, Axis Bank और ONGC जैसे कुछ शेयरों में हल्की गिरावट भी देखने को मिली।

    क्यों आई बाजार में तेजी?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, United States और Iran के बीच तनाव कम होने और शांति वार्ता दोबारा शुरू होने की उम्मीदों ने बाजार का मूड पॉजिटिव किया। Donald Trump के बयान ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जिससे बाजार में खरीदारी तेज हुई।

    कच्चे तेल में नरमी, रुपये को मिला सहारा
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट (94-95 डॉलर के आसपास) से भारत के आयात बिल पर दबाव कम हुआ है। इससे रुपये को मजबूती मिली और यह करीब 93.50 के स्तर तक पहुंच गया। यह भी बाजार की तेजी का एक बड़ा कारण रहा।