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  • रेपो रेट पर RBI के फैसले के बाद बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 200 अंक टूटा, बैंकिंग शेयर दबाव में

    रेपो रेट पर RBI के फैसले के बाद बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 200 अंक टूटा, बैंकिंग शेयर दबाव में


    नई दिल्ली ।
    घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई और प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति संबंधी घोषणा के बाद बाजार का रुख बदल गया। रेपो रेट को यथावत रखने के फैसले और आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कमी के संकेतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके चलते बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया।

    कारोबार के शुरुआती चरण में निवेशकों का रुझान सकारात्मक था और सेंसेक्स के अधिकांश शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, जैसे ही RBI की नीति से जुड़े प्रमुख संकेत सामने आए, बाजार ने अपनी शुरुआती बढ़त खो दी और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में पहुंच गए।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की प्रतिक्रिया केवल रेपो रेट को स्थिर रखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि केंद्रीय बैंक द्वारा आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम करने और महंगाई के अनुमान को बढ़ाने का असर भी बाजार पर दिखाई दिया। इससे निवेशकों के बीच आगामी आर्थिक गतिविधियों और कॉर्पोरेट आय को लेकर सतर्कता बढ़ी, जिसका सीधा असर शेयरों की खरीदारी पर पड़ा।

    बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान 200 अंकों से अधिक फिसल गया और बाद में भी गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी दबाव में दिखाई दिया। बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में सबसे अधिक असर देखने को मिला, क्योंकि शुरुआती तेजी के बाद इनमें मुनाफावसूली बढ़ गई। निवेशकों को उम्मीद थी कि केंद्रीय बैंक की ओर से नीतिगत दरों में किसी प्रकार की राहत मिल सकती है, लेकिन ऐसा नहीं होने से बैंकिंग शेयरों की रफ्तार थम गई।

    दूसरी ओर, तकनीकी और आईटी क्षेत्र के कुछ शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रही। इसके अलावा कुछ निजी वित्तीय और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों ने भी शुरुआती सत्र में मजबूती दिखाई। हालांकि व्यापक बाजार में दबाव बढ़ने के कारण इन शेयरों की तेजी भी सीमित रही।

    गिरावट वाले शेयरों में धातु, ऊर्जा और कुछ बैंकिंग कंपनियों के शेयर प्रमुख रहे। टाटा स्टील, पावरग्रिड, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। इन शेयरों में बिकवाली का असर सूचकांकों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

    इस बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अपेक्षाकृत स्थिर रहा। डॉलर के मुकाबले रुपये में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया और यह लगभग पिछले कारोबारी सत्र के स्तर के आसपास कारोबार करता रहा। इससे संकेत मिला कि मुद्रा बाजार ने केंद्रीय बैंक की घोषणा पर सीमित प्रतिक्रिया दी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर बनी रहेगी। यदि आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में फिर से खरीदारी लौट सकती है। फिलहाल RBI के ताजा संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिसके कारण बाजार में अल्पकालिक दबाव देखने को मिल रहा है।

  • निवेशकों में डर, निफ्टी 24,900 के आसपास, रियल्टी और ऑटो शेयरों में भारी गिरावट


    नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। आज के कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक गिरकर लगभग 80,000 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं निफ्टी 50 में लगभग 300 अंकों की गिरावट के साथ यह 24,900 के आसपास पहुंच गया। व्यापक बिकवाली का दबाव मुख्य रूप से रियल्टी और ऑटोमोबाइल सेक्टर के शेयरों पर देखा गया।

    विश्लेषकों के अनुसार इस गिरावट का प्रमुख कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 10 प्रतिशत उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है, तो तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर ऊर्जा आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं पर सीधे पड़ेगा और कंपनियों की परिचालन लागत में वृद्धि होगी।

    ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर निवेशकों की गतिविधियों पर भी नजर आया। सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से वायदा बाजार में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक जोखिम लंबे समय तक बने रहने पर निवेशकों का रुख कीमती धातुओं की ओर बढ़ सकता है।

    वैश्विक संकेत भी कमजोर बने रहे। एशियाई बाजारों में उतार-चढ़ाव देखा गया, जबकि अमेरिकी बाजारों ने पिछले सत्र में मिश्रित रुख अपनाया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता उभरते बाजारों पर भी प्रभाव डालती है, जिससे विदेशी निवेश प्रवाह प्रभावित होता है। हाल के आंकड़े भी इस दबाव की पुष्टि करते हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी कर गिरावट को सीमित करने का प्रयास किया।

    क्षेत्रीय स्तर पर ऑटो, ऊर्जा और बैंकिंग शेयरों में गिरावट से व्यापक बाजार भावना प्रभावित हुई। उच्च ईंधन लागत से कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ने की आशंका निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में बाजार की दिशा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, तेल की कीमतों और निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी।

    यदि वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। निवेशक वर्तमान में सतर्क हैं और बाजार के हर संकेत को ध्यान से देख रहे हैं। रियल्टी और ऑटो शेयरों में बिकवाली, वैश्विक अनिश्चितता और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है।

    इसलिए इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए ध्यान देने वाली मुख्य बातें वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेश प्रवाह में बदलाव रहेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तेल कीमतों में स्थिरता आती है और क्षेत्रीय तनाव कम होता है, तो बाजार में आंशिक सुधार की उम्मीद की जा सकती है।